विश्व एड्स दिवस- हमारा इलाज करने वाले लोगो भी हमें गलत ही समझते हैं, बाकी लोगों से क्या उम्मीद की जाए

अकेले ही इलाज करवाना पड़ता है


आज विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है. एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में बताने की बजाए लोग छुपाते हैं ताकि एक एचआईवी संक्रमित पेसेंट  समाज में जी सकें. 21वीं सदीं में टेक्नोलॉजी ने भले ही बहुत तरक्की कर ली हो लेकिन कुछ चीजों में आज भी बदलाव नहीं हुआ है. उन्हीं में से एक ही एचआईवी पेसेंट. आज भी इनकी स्वीकार्यता को लेकर लोगों में कमी है. इसी मुद्दे पर आज हमने एक एचआईवी पेसेंट की राय जानने की कोशिश की. हमने कई लोगों से संपर्क साधने के कोशिश की लेकिन कोई तैयार नहीं था. अंत में कृष्णा(बदला हुआ नाम) के शख्स ने हमसे फोन पर बात की और हमें समाज और एचआईवी पेसेंट के बीच के तालमेल के बारे में बताया. प्रस्तुत है बातचीत का हिस्सा इंटरव्यू के तौर पर …

1. प्रश्न- जब आपको पता चला कि आप एचआईवी पॉजिटिव है तो आपने क्या किया?

उत्तर– मुझे जैसे ही पता चला मैंने तुरंत ही अकेले जाकर इसका इलाज करवाना शुरु कर दिया. यह एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में किसी को बताया नहीं जा सकता है. इसलिए किसी को बिना बताएं मैंने इसके शुरुआती दौर में ही  नियमित रुप से इलाज करवाना शुरु कर दिया. ताकि यह और ज्यादा न फैले.

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world aids day

2. प्रश्न- परिवार में सबसे पहले किसको बताया उनकी कैसी प्रक्रिया थी?

उत्तर- मुझे जैसे ही पता चला सबसे पहले मैंने सोचा कि मैं किसी को नहीं बताऊंगा. मैंने धीरे-धीरे दवा खानी शुरु कर दी. लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि इसके बारे में घर में किसी को पता होना चाहिए, तो मैंने अपनी मां को बताया. मेरी मां दुःखी हुई लेकिन कुछ नहीं कहा. हां मेरे खाने पीने का पूरा ध्यान रखती है.

3. प्रश्न- अस्पताल में डॉक्टरों का व्यवहार कैसा है?

उत्तर– मैं सच बता रहा हूं जो लोग हमारा इलाज का करते हैं वहीं लोग हमारे हौसला नहीं बढ़ाते हैं. मैं पहली बार जब इलाज करवाने गया था तो मुझसे बार-बार एक ही सवाल पूछा जा रहा था कैसे हुआ? उनका कहने का मतलब था कि आपने अनियमित सेक्स किया होगा. मुझे कई बार यही बात पूछी गई. जबकि संक्रमित होने के पीछे अलग-अलग कारण होते हैं. जरुरी नहीं है सिर्फ एक ही कारण हो. लेकिन दुःख की बात है कि जो हमारा इलाज करते हैं उन्हें ही इतनी बात समझ में नहीं आ रही है. जब इलाज कर रहे लोगों का व्यवहार हमारे साथ ऐसा तो हम आम लोगों से क्या ही उम्मीद कर सकते हैं.

4. प्रश्न- आपके आस पास के लोग का जो जानते हैं कि एचआईवी संक्रमित है उनका आपके प्रति कैसा रवैया है?

उत्तर– मैं सच बता रहा हूं मैंने अपने बारे में किसी को नहीं बताया है. कुछ ही लोग मेरी बीमारी के बारे में जानते हैं. मुझे पता है किसी को बताने से कुछ होना जाना नहीं है. किसी फ्रेंड को बताऊंगा तो वह कुछ दिन दिलासा देगा उसके बाद वह भी मुझसे कटने लग जाएगा. उस वक्त हो सकता है मुझे बहुत दुःख पहुंचे. इसलिए जरुरी है कि मैं अकेला रहूं. ताकि मैं अपने आप को कहीं कमजोर न पाऊं क्योंकि यह ऐसी बीमारी है जिसके लिए सबकुछ आपको स्वयं ही करना है. कितना भी कहा जाए यह छूने से नहीं फैलती लेकिन लोगों को यह बात नहीं समझाई जा सकती है.

5. प्रश्न- फिलहाल आप क्या कर रहे हैं?

उत्तर– मैंने इस वक्त अपना सारा जीवन भगवान कृष्ण को समर्पित कर दिया है. वहीं मेरे दुःख के साथी है. जब भी बहुत ज्यादा परेशान होता हूं तो उनको ही याद करता हूं. वही मुझे जीने की हिम्मत दें रहें.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

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