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अगर आप भी खुलकर पर्सनल हेल्थ के बारे में बात नहीं कर सकते हैं तो इंस्टाग्राम के इन पेज पर करें विजिट

माता पिता और शिक्षण संस्थानों पर न मिलने वाली पर्सनल हेल्थ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अब आपको इन इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर मिलेगी


आज भले हमारा देश कितना भी आगे क्यों न बढ़ गया हो लेकिन जब बात आती है पर्सनल हेल्थ की तो आज भी हमारे देश में दबी आवाज़ों और बंद दरवाज़ों के पीछे ही ये बातें होती है। आज भी हमारे देश में सभी स्कूलों में पर्सनल हेल्थ से जुडी जानकारी नहीं दी जाती है और अगर बात की जाएं माता पिता की तो वो भी इस टॉपिक पर अपने बच्चों से बात करने में कतराते हैं। यही कारण है कि आज भी हमारे देश में लोगों को पर्सनल हेल्थ और महिलाओं के शरीर और उनके मेंस्ट्रुअल हेल्थ के लेकर कई गलतफहमियां लेकर बैठे होते है। कई बार तो बच्चों को सही समय पर सही जानकारी न मिलने पर वो गलत तरीके से जानकारी जुटाने में लग जाते है जिसके बीच वो कई बार गलतियां भी कर बैठते है। कई बार बच्चे एडल्ट फिल्में देखने लगते है और उनमें दिखाई जाने वाली चीज़ों को ही वो सच मान बैठते हैं। आमतौर पर तो बच्चों जो शिक्षा माता पिता और शिक्षण संस्थानों पर मिलनी चाहिए, जो उन्होंने नहीं मिल पाती। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट्स के बारे में बताएंगे जो आपको पर्सनल हेल्थ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देंगे।

@vitaminstree: जैसे की आप पेज के नाम से ही समझ सकते है कि ये पेज औरतों के पर्सनल हेल्थ और उनकी मदद के लिए बनाया गया। यह पेज उनकी  ही समस्याओं और सवालों पर केंद्रित है। आपको बता दे कि इस पेज की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पेज महिलाओं की पर्सनल हेल्थ से जुडी और हाइजीन पर आधारित वीडियोज़ बनाता है जो की बहुत ही दिलचस्प होते हैं।

@seemaanandstorytelling: ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि हमारा देश एक पुरुष प्रधान देश है यहाँ पर हमेशा से महिलाओं को पुरुषों से कम आका जाता है। हमारे समाज में हमेशा से ही महिलाओं द्वारा पर्सनल
हेल्थ के विषय में चर्चा करना या अपनी पर्सनल हेल्थ से जुडी इच्छाओं को खुल कर व्यक्त करना महिलाओं के
चरित्र पर दाग माना जाता है। हमारे देश में ये मान लिया जाता है कि एक तय उम्र के
बाद महिलाओं की सेक्स में दिलचस्पी खत्म हो जाती है और शायद यही कारण है कि महिलाएं खुल कर इस पर बात नहीं कर पाती हैं।

 

@pratisandhi: आपको बता दे कि इस पेज ने इंस्टाग्राम पर बहुत ही कम समय में काफी ज्यादा
पॉपुलैरिटी पा ली है। कई जानी मानी मैगज़ीन और वेबसाइट्स ने इसके बारे में लिखा है। आपको बता दे ये अलग अलग विषयों पर अन्य सेक्स एडुकेटर्स के साथ सेशन्स करने के साथ ही ये पर्सनल
हेल्थ एजुकेशन पर क्वॉलिटी कंटेंट क्रिएट करते हैं। ये अपने यूजर को चीजें समझने के लिए वीडियोज़ से
लेकर इलस्ट्रेशन्स तक ये कई दिलचस्प तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

@agentsofishq: आपको बता दे कि इस पेज की  सबसे अच्छी बात यह है कि यह पेज मर्दों और औरतों की पर्सनल ज़रूरतों के बारे में जानकारी नहीं देता है बल्कि पर्सनल स्पेक्ट्रम की अन्य कम्यूनिटीज़ के बारे में भी खुल कर बात करता है। आपको बता दे कि इलस्ट्रेशन्स के ज़रिए ये यूजर को काफी अहम जानकारी शेयर करते है। इस पेज पर आपको हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में जानकारी में मिल जाएगी।

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मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं की सूची ने रचा इतिहास, त्रिपुरा की चर्चा है सबसे ज्यादा

पहली बार छह महिला मंत्री ने ली शपथ, कोई डॉक्टर, तो कोई पोस्ट ग्रेजुएट


एनडीए के दूसरे कार्यकाल के दौरान कल पहली दफा मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले कल 12 केंद्रीय मंत्रियों को सरकार ने बाहर का रास्ता दिखाया गया। जिसमें कुछ महत्वपूर्ण चेहरे भी शामिल थे, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक। इसके बाद कल शाम 6 बजे के बाद लगभग 79 मंत्रियों को नए मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। जिसमें 15 केंद्रीय मंत्री और 28 राज्य मंत्री ने कल शपथ ली। इस फेरबदल पर लोगों द्वारा तरह-तरह के कायस लगाए जा रहे हैं। एक कयास तो इस बात का भी है कि  उत्तरप्रदेश के आगामी चुनाव के देखते हुए यह फेरबदल किया गया है। जिसमें मंत्रियों की जाति को विशेष ध्यान में रखा गया है। कल हुए इस फेरबदल में यूपी से आघड़ी जाति से एक भी सांसद को मंत्रिमंडल शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा महिलाओं की उपस्थिति पर भी विशेष ध्यान देते हुए कुल 9 महिला मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया गया है।

इन 9 महिला मंत्रियों में से सात ने राज्यमंत्रियों के तौर पर शपथ ली है। जिसमें से छह पहली बार मंत्री बनी हैं। जबकि यूपी के अनुप्रिया पटेल दूसरी बार मंत्री बनी है। अनुप्रिया एनडीए की पहली सरकार के दौरान भी मंत्री रह चुकी है। इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी पहले ही मंत्रिपरिषद  में शामिल है।

 मोदी सरकार की कैबिनेट में लगातार महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के जिस वायदे के साथ भाजपा सत्ता में आई थी। उस पर वह कायम है। साल 2014 में चुनाव जीतने के बाद सत्ता भाजपा ने अपने कैबिनेट मे सात महिलाओं को मंत्री बनाया। उसके बाद हुए बदलाव में महिलाओं को संख्या को कम कर दिया गया था। लेकिन एक बार फिर हुए मंत्रिमंडल विस्तार में महिलाओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि मोदी सरकार महिलाओं को भागीदारी को बढ़ी रही है। मंत्रिमंडल में जिन सात महिला मंत्री ने शपथ ली चलिए उनके बारे में जानते हैं।

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1- अनुप्रिया पटेल– कल हुए मंत्रिमंडल विस्तार में अनुप्रिया एक युवा चेहरा है। जिन्हें मोदी सरकार की पहली कैबिनेट में राज्य मंत्री बनाया गया था। अनुप्रिया मिर्जापुर की सांसद हैं और भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। मोदी सरकार की पहले कार्यकाल के दौरान वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की राज्यमंत्री थी। इस बार उन्हें वाणिज्य और उद्योग विभाग की राज्यमंत्री बनाया गया है। अनुप्रिया को मंत्री बनाए जाने पर राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा साल 2022 में यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कुर्मी  वोट सुरक्षित करना चाहते है इसलिए इन्हें मंत्री बनाया गया है।

2- मीनाक्षी लेखी- साल 2014 में नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर वकील से सांसद बनी मीनाक्षी लेखी को कल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विदेश राज्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई है। मीनाक्षी  भाजपा की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुकी है। संसद में उन्हें कई मुद्दों पर बोलते हुए देखा गया है। मीनाक्षी लेखी ने राफेल सौदे को लेकर राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसके बाद राहुल गांधी को माफी भी मांगनी पड़ी थी। आपको बता मंत्रिमंडल विस्तार के बाद वह पहली बार मंत्री बनी है।

3– शोभा कारंदलजे– सोलहवीं लोकसभा के दौरान साल 2014 में शोभा कारंदलाजे  कर्नाटक के उदुपी चिकमंगलूरु सीट से जीतकर संसद पहुंची थी। लेकिन कल पहली बार उन्हें राज्यमंत्री को तौर पर शपथ ली है। शोभा भी राहुल गांधी के बयान से नखुश होकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग कर चुकी है।

4- दर्शना जरदोश– दर्शाना सूरत की सांसद है। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही इन्हें भी  पहली बार मंत्री बनाया गया। दर्शना जरदोश राज्यमंत्री रेलवे और टैक्सटाइल है। इससे पहले वह राष्ट्रीय महिला मोर्चा की महसचिव  और सूरत महानगरपालिका की पार्षद भी रह चुकी है। दर्शना साल 2009,2014,2019 से लगातार भाजपा की सांसद है।

5- अन्नपूर्णा देवी- अन्नपूर्णा देवी किसी जमाने में राजद  सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की करीबी रह चुकी हैं। लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन्होंने राजद का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया और मात्र दो साल के अंदर मंत्री बन गई। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद इन्हें केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री बनाया गया है। भाजपा में शामिल होने के पहले अन्नपूर्णा झारखंड में राजद की प्रदेश अध्यक्ष थी। वर्तमान में झारखंड के कोडरमा से सांसद हैं।

6- प्रतिमा भौमिक– प्रतिमा भौमिक ने कल केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ लेकर एक इतिहास रच दिया। महिला के तौर पर वह त्रिपुरा क पहली सांसद है जिन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया है।  52 साल की प्रतिमा को लोग प्यार से  प्रतिमा दीदी बुलाते हैं। वह मुख्य रुप से असम के सिलचर की रहने वाली है। सांइस में पोस्ट ग्रेजुएट प्रतिभा त्रिपुरा में भामयुमो की सदस्य भी रह चुकी है। यहां रह कर अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने लेफ्ट और कांग्रेस की सरकार को त्रिपुरा से हारकर भाजपा का अस्तित्व कायम  किया है।

7– डॉ. भारती पावर  – भारती पावर साल 2019 में डिंडोरी (महाराष्ट्र) लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर सांसद बनी थी। वह मुख्य रुप से एमबीबीएस डॉक्टर है। जिन्होंने मुख्य रुप से कुपोषण और पेयजल की समस्या पर काम किया है।

 

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माधुरी से लेकर करीना तक ये बॉलीवुड हसीनाएं निभा चुकी है ऑनस्क्रीन सेक्स वर्कर का किरदार

ये अभिनेत्रियां ऑनस्क्रीन निभाया चुकी है सेक्स वर्कर का किरदार


आज के समय पर बॉलीवुड में हर तरह की फिल्म बनाई जाती है। फिर चाहे वो रोमांटिक,  एक्शन, हॉरर, कॉमेडी या फिर मर्डर मिस्ट्री वाली हो। और हमारे बॉलीवुड सितारें हर किरदार को बखूबी निभाते है एक सफल कलाकार वही होता है जो हर किरदार को बखूबी निभाता है। हमारे बॉलीवुड में कई ऐसे सितारें है जिन्होंने समय समय पर कई चैलेंजिंग रोल को एक्सेप्ट किया और उन्हें अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सभी लोगों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ दी। आज हम आपको बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों के बारे बताएंगे जिन्होंने ऑनस्क्रीन सेक्स वर्कर का रोल निभाया है। उन्होंने बेहद संजीदगी और खूबसूरती से ऑनस्क्रीन सेक्स वर्कर की भूमिका को निभाया। तो चलिए जानते है उनके बारे में।

विद्या बालन: बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन को भला कौन नहीं जानता। आज के समय पर विद्या बालन को किसी इंट्रोडक्शन जरूरत नहीं है। बॉलीवुड में  बोल्ड किरदार करने के लिए जानी जाने वाली विद्या बालन ऑनस्क्रीन एक सेक्स वर्कर का किरदार भी निभा चुकी है। विद्या बालन ने सेक्स वर्कर का किरदार फिल्म ‘बेगम जान’ में निभाया था जो की इंडिया-पाकिस्तान के पार्टीशन टाइम पर प्रोस्टिट्यूशन में फंसी महिलाओं की कहानी को दिखती है।

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प्रीति जिंटा: बॉलीवुड में डिम्पल गर्ल के नाम से जानी जाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा अपने बबली और फन लविंग रोल के लिए बहुत ज्यादा मशहूर है। आपको बता दे कि प्रीति जिंटा ने अब्बास-मस्तान की ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ में एक प्रोस्टिट्यूट की भूमिका निभाई थी। ये फिल्म सरोगेसी जैसे सीरियस टॉपिक पर आधारित है।

करीना कपूर: आपको बता दे कि करीना कपूर ने भी बॉलीवुड फिल्मों में सेक्स वर्कर का किरदार निभाया है उन्होंने एक नहीं बल्कि दो बार फिल्म में सेक्स वर्कर का किरदार निभाया है। बॉलीवुड फिल्म ‘चमेली’ और ‘तलाश’ ऐसी दो फिल्में है जिनमें करीना ने सेक्स वर्कर का किरदार निभाया और साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमरस रोल ही नहीं बल्कि कठिन से कठिन किरदार भी बेहतरीन तरीके से निभा सकती हैं।

माधुरी दीक्षित: आपको बता दे कि बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने भी बॉलीवुड फिल्म ‘देवदास’ में सेक्स वर्कर का किरदार निभाया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ की चंद्रमुखी को भला कौन भूल सकता है। आपको बता दे कि माधुरी दीक्षित के लिए ये रोल किसी चैलेंज से कम नहीं था। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था।

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जाने गुजरात की ऊषा लोदया के बारे में, जिन्होंने 67 साल की उम्र में पूरी की पीएचडी

ऊषा लोदया ने 67 साल की उम्र में पीएचडी कर साबित किया की ‘उम्र सिर्फ एक नंबर है’


हम सभी लोगों ने अपने घरों पर अपनी माँ और दादी को देखा है कि वो 45 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते सुस्त और आलसी होने लगती है और 50 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते तो उनके मन में सिर्फ और सिर्फ रिटायरमेंट का ही ख्याल रहता है। इस उम्र में वो कुछ नया करने की सोचते भी नहीं है। इस उम्र में उनसे उनके रोज़मर्रा के काम ही नहीं हो पाते। लेकिन आज हम आपको गुजरात की ऊषा लोदया के बारे में बताने जा रहे है जिन्होंने 67 साल की उम्र में पीएचडी पूरी कर साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। तो चलिए जानते है कौन है गुजरात की ऊषा लोदया।

आज हम आपको गुजरात की ऊषा लोदया के बारे में बताने जा रहे है ऊषा लोदया ने 67 साल की उम्र में पीएचडी की है। जिस उम्र में लोग रिटायर होते हैं उस उम्र में गुजरात की ऊषा लोदया ने पीएचडी कर सबको चौका दिया है। उन्होंने अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाने का सपना पूरा किया। जिस उम्र में लोग अपने नाती- पोतों की पढ़ाई के बारे में सोच रहे होते हैं, उस उम्र में उन्होंने खुद डिग्री हासिल कर ली है।

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ऊषा लोदया ने जैन धर्म में की पीएचडी

आपको बता दे कि एक इंटरव्यू के दौरान ऊषा लोदया ने बताया कि वो हमेशा से ही पीएचडी करना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने कभी भी अपने सपने को छोड़ा नहीं। आज उन्होंने 60 साल के बाद अपना सपना पूरा किया। उन्होंने महाराष्ट्र स्थित शत्रुंजय एकेडमी से जैन धर्म में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। उन्होंने बताया कि वो आगे भी जैन धर्म पर अध्ययन के काम का जारी रखेंगी।

ऊषा लोदया का विवाह 20 साल की उम्र में हुआ था

आपको बता दे कि ऊषा लोदया जब सातवीं कक्षा में थी जब से ही वो डॉक्टर बनना चाहती थीं। ऊषा लोदया ने मुंबई के झुनझुनवाला कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई शुरू कर थी, लेकिन फर्स्ट ईयर में ही उनकी शादी हो गई थी जिसके कारण बीच में ही उनकी पढ़ाई छूट गई थी। ऊषा लोदया अपनी शादी के समय महज 20 साल की थी। जिसके बाद जिम्मेदारियों के कारण उनकी पढ़ाई नहीं हो पाई लेकिन उनके मन में अपने सपनों को जीने की ललक हमेशा जिंदा रही थी।

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अगर आप भी हैं लेदर बैग के शौकीन, तो खरीदते हुए रखें इन बातों का ध्यान

हर महिला को पसंद होता है एक क्लासी, स्टाइलिश और उनकी ड्रेस के साथ मैच करने वाला हैंडबैग


ये बात तो हम सभी लोग जानते हैं कि महिलाएं अपने सजने-सँरवने का बहुत ज्यादा ध्यान रखती है। वे अपने ड्रेस से लेकर अपने सैंडल तक सभी चीजों का काफी ज्यादा ध्यान रखती है। महिलाओं को एक और चीज बहुत ज्यादा पसंद होती है वो है उनका हैंडबैग। महिलाओं को एक अच्छा और लेदर का हैंडबैग अपने पास रखना बहुत ज्यादा पसंद होता है। हर महिला एक क्लासी, स्टाइलिश और अपनी ड्रेस के साथ मैच करने वाला हैंडबैग अपने पास रखना काफी ज्यादा पसंद करती है।

ये बात तो  हम सभी जानते हैं कि दिल्ली की मार्केट्स में ऐसे कई बैग आपको आसानी से मिल जाते हैं जो एक स्टाइल स्टेटमेंट को भी क्लासी लुक देते हैं। लेकिन अगर आप एक असली लेदर बैग खरीदना चाहते है तो वो इतना आसान नहीं होता। क्योंकि ये काफी महंगा होता है और असली लेदर बैग मिलना इतना आसान भी नहीं है। इस लिए कई दुकानदार असली की आड़ में ग्राहकों को नकली लेदर बैग बेच देते है। जो की कुछ ही समय में खराब हो जाते है और आपने जो पैसे खर्च किए वो भी बर्बाद हो जाते है। इसलिए अगर आपको भी लेदर बैग खरीदना हो तो आपको खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

रंग बदलता है असली लेदर बैग: आपको बता दे कि असली लेदर बैग रंग बदलता है। असली लेदर को जब रगड़ा जाता है तो उसका रंग हल्का लाल हो जाता है। साथ ही साथ उस पर धब्बे भी दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं असली लेदर मोड़ने पर मुड़ जाता है, लेकिन अगर आप नकली लेदर को मोड़ेगे तो उससे रेशे निकलने लगते हैं।

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चमकदार से बचें: आपने भी देखा होगा कि जब आप बाजार जाते है तो वहां आपको कुछ ऐसे बैग देखते हैं, जो काफी चमकदार होते हैं यानी की दूर से ही शाइनिंग मारते हैं जिसके कारण लोग इन्हें असली लेदर समझकर खरीद लेते हैं। जबकि ये असली लेदर के नहीं होते। क्योंकि असली लेदर जानवरों की त्वचा से बनाता है जिसके कारण उसमे चमक नहीं होती वो मैट लुक देते है।

गंध से पहचाने: अगर आप लेदर बैग के शौकीन है और आपको समझ नहीं आ रहा कि जो बैग आप खरीद रहे है वो असली लेदर बैग है या नहीं। तो आप उसकी गंध से पहचाने सकते है कि वो असली है या नहीं। अगर बैग नकली लेदर का होगा तो उसमे प्लास्टिक या अन्य तरह की गंध आएंगी। लेकिन अगर बैग असली लेदर का होगा तो उससे एक अजीब तरह की गंध आएंगी। जिसे आप किसी को बता नहीं पाएंगे।

टाइट होते हैं लेदर के बैग: आपको बता दे कि असली लेदर बैग को पहचाने का एक और आसान तरीका है वो ये कि लेदर बैग हमेशा टाइट होते हैं। आपको समझना होगा कि नकली लेदर बैग प्लास्टिक या अन्य मटेरियल की मदद से बनाए जाते हैं जिसके कारण वो मुलायम होते हैं। जबकि असली लेदर का बैग हमेशा टाइट होता है।

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जाने उन बॉलीवुड सेलेब्स के बारे में जिन पर लग चुके है यौन शोषण, छेड़छाड़ और रेप के आरोप

इन सेलेब्स पर लग चुके है यौन शोषण और रेप के आरोप


अगर हम महिलाओं की सुरक्षा की बात करें तो हमारे देश में महिलाएं कितनी सुरक्षित है ये बात हम सभी लोग जानते है। फिर चाहे वो एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की महिलाएं हो या फिर आम महिलाएं। सभी महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज़्यादातर मामलों में पीड़ित महिलाएं समाज में अपनी इज्ज़त और अपने परिवार के लिए चुप रह जाती हैं। लेकिन अगर हम एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की बात करें, तो यहाँ किसी भी बात को छुपाना थोड़ा मुश्किल होता है।

इसका एक नमूना हमें साल 2017-2018 में देखने को मिला था जब हमारे देश में ‘मी टू’ आंदोलन चला था इस आंदोलन ने कितनी तेजी से आग पकड़ी ये शायद हमें आपको बताने की जरूरत नहीं है। इस मी टू आंदोलन ने कई बड़े नाम शामिल हुए थे। आज के समय में मी टू आंदोलन भला ठंडा पड़ गया हो लेकिन सेक्शुअल हैरसमेंट की घटनाएं आज भी रुकने का नाम नहीं लेती। तो चलिए आज हम बात करेंगे उन बॉलीवुड सेलेब्स के बारे में जिन पर लग चुके है यौन शोषण, छेड़छाड़ और रेप के आरोप।

नाना पाटेकर: बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर को भला कौन नहीं जानता। आपको बता दें कि नाना पाटेकर पर भी यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे। नाना पाटेकर पर बॉलीवुड एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने आरोप लगाए थे। एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता के अनुसार बॉलीवुड फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज़’ के एक गाने की शूटिंग के दौरान उनका यौन शोषण किया था। उनके अनुसार नाना पाटेकर ने फिल्म के गाने में जानबुझ कर ऐसे स्टेप्स डलवाए थे जिन्हे करने में वो बिल्कुल भी कंफर्टेबल नहीं थी।

आदित्य पंचोली: आपको बता दे कि आदित्य पंचोली का नाम भी यौन शोषण की लिस्ट में शामिल हुआ था। आदित्य पंचोली पर यौन शोषण का आरोप बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने लगाया था। कंगना रनौत ने कहा कि उनके स्ट्रगल के दिनों में उनका यौन शोषण किया था। जबकि आदित्य पंचोली ने इस तरह के सभी  आरोपों से इंकार कर दिया था। आपको बता दे कि आदित्य पंचोली पर सिर्फ कंगना रनौत ने ही नहीं बल्कि उनकी एक्स-गर्लफ्रेंड पूजा बेदी की 15 साल की नौकरानी ने बलात्कार का भी आरोप लगाया था।

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विकास बहल: आपको बता दे कि बॉलीवुड फिल्म क्वीन के डायरेक्टर विकास बहल का नाम भी यौन शोषण की लिस्ट में शामिल हो चुका है। विकास बहल पर उनकी कंपनी फैंटम फिल्म्स की एक महिला कर्मचारी ने रेप का आरोप लगाया था। आपको बता दे कि फैंटम फिल्म्स में कई महीनों की चुप्पी साधे रहने के बाद विकास को कंपनी से बर्खास्त कर दिया। उसके बाद विकास बहल पर पीड़ित महिला ने मामला दर्ज कराने से इंकार कर दिया।

ओम पुरी: ओम पुरी भला आज हमारे बीच नहीं है लेकिन आपको बता दे कि उनकी पत्नी ने उन पर न सिर्फ घरेलू हिंसा का बल्कि एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का भी आरोप लगाया था। इतना ही नहीं उनकी पत्नी के अनुसार उन पर घर की नौकरानी पर गलत नज़र रखने के भी आरोप भी लगाया था।

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अगर आपके साथ घरेलू हिंसा हो रही है तो जाने कानून और क्या हो सकती है सजा

जाने घरेलू हिंसा को लेकर कानून क्या कहता है


जैसे की आपने देखा होगा कई घरों में छोटी छोटी बातों पर लड़ाई होने लगती है। घरों में होने वाली इस लड़ाई को ही घरेलू हिंसा कहते है। आपको बता दे कि इस घरेलू हिंसा का शिकार महिलाएं और पुरुष दोनों ही होते हैं लेकिन आमतौर पर देखा जाता है कि ज्यादातर इस घरेलू हिंसा का शिकार महिलाओं को ही होना पड़ता है। इसलिए हमारे देश में समय समय पर घरेलू हिंसा को रोकने के लिए अलग-अलग कानून बनाए गए और उन्हें पारित किया गया है। तो चलिए आज उन कानून और उसमे मिलने वाली सजा के बारे में विस्तार से जानते है।

जाने कौन कौन सी बातें घरेलू हिंसा के दायरे में आती है

तो चलिए सबसे पहले आपको बताते है कि आखिर घरेलू हिंसा क्या है और कौन कौन सी बातें घरेलू हिंसा के दायरे में आती है। घरेलू हिंसा यानी की कोई भी ऐसा काम, जो किसी महिला और 18 साल से कम उम्र के बच्चे फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन पर मुश्किल लाता हो उसे घरेलू हिंसा ही कहा जाता है। घरेलू हिंसा में मारपीट से लेकर मानसिक नुकसान और आर्थिक क्षति तक को शामिल किया गया है।

इतना ही नहीं घरेलू हिंसा में तलाकशुदा महिलाओं को भी शामिल किया गया है। उन्हें उनके पूर्व पतियों से सुरक्षा प्रदान करने के इरादे से इससे शामिल किया गया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि तलाक के बाद पूर्व पति या उसके परिवार के लोग महिला और उसके घर वालों को कई तरह की धमकियां देते हैं और परेशान करते है। या फिर महिला की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ये सारी बातें घरेलू हिंसा के दायरे में आती है।

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जाने घरेलू हिंसा की श्रेणियों के बारे में

शारीरिक हिंसा: घरेलू हिंसा की श्रेणी में शारीरिक हिंसा सबसे गंभीर समस्या है जो की सबसे ज्यादा आम भी है। किसी भी महिला  या फिर 18 साल से कम उम्र के बच्चे फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की के साथ मारपीट, धक्का, पैर या हाथों से मारना या फिर कोई ऐसा तरीका, जो महिला या फिर बच्चे को शारीरिक तकलीफ दे, उससे इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

लैंगिक हिंसा: घरेलू हिंसा की श्रेणी में लैंगिक हिंसा भी एक गंभीर समस्या है इस श्रेणी में किसी भी महिला को अश्लील साहित्य या अश्लील तस्वीरों को देखने के लिए विवश करना,बलात्कार करना, अपमानित करना या उसके साथ दुर्व्यवहार करना आदि चीजे शामिल है।

आर्थिक हिंसा: आर्थिक हिंसा भी घरेलू हिंसा की एक श्रेणी है आर्थिक हिंसा के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी महिला से उसके द्वारा कमाए जा रहे पैसे का हिसाब उसकी मर्जी के खिलाफ लेता है या फिर उससे बच्चों की पढ़ाई, खाना-कपड़ा आदि चीजों के लिए परेशान करता है तो वो सजा का पात्र होगा।

मौखिक और भावनात्मक हिंसा: मौखिक और भावनात्मक हिंसा भी घरेलू हिंसा का एक भाग है। कई बार किसी महिला को पता भी नहीं होता कि वो घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है लेकिन वो हो जाती है ऐसा तब होता जब कोई व्यक्ति किसी महिला या बच्चे को ताने दे देकर उसका आत्मसम्मान खत्म कर देता है या किसी भी वजह से उसे अपमानित करना या फिर उसके चरित्र पर दोषारोपण लगाना ये सारी चीजे मौखिक और भावनात्मक हिंसा का ही भाग होती है।

जाने कौन कर सकता है शिकायत

आपको बता दे कि घरेलू हिंसा के सभी पहलुओं को देखते हुए ये तय किया गया कि घरेलू हिंसा की शिकायत सिर्फ पीड़िता ही नहीं बल्कि महिला के जानने वाले भी कर सकते हैं। अगर पीड़ित महिला अपने साथ हो रही घरेलू हिंसा की शिकायत करने से डरती है तो उनके पड़ोसी, रिश्तेदार या फिर दोस्त हिंसा की शिकायत दर्ज करवा सकते है। यहाँ तक कि जो लोग उस हिंसा के बारे में सुन चुके हो या देख चुके हो व फिर कोई सामाजिक कार्यकर्ता भी इसकी शिकायत दर्ज करवा सकता है।

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जाने वर्क प्लेस पर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को क्यों होता है ज्यादा स्ट्रेस

जाने पुरुषों के मुताबिक महिलाओं को क्यों करना पड़ता है अधिक तनाव और डिप्रेशन का सामना


जैसा की हम सभी लोग जानते हैं कि आज के समय में ज्यादातर लोग काम के कारण स्ट्रेस से गुजर रहे होते है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि ऑफिस में लड़कों के मुकाबले लड़कियां ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं। इसका एक बड़ा कारण है कि लड़कों को तो बस आपका ऑफिस संभालना होता है लेकिन महिलाओं को ऑफिस और घर दोनों ही चीजें संभालनी होती है। जिसके कारण कई बार उनको डिप्रेशन और तनाव का सामना भी करना पड़ता है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, ऑफिस में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को अधिक स्ट्रेस झेलना पड़ता है। जिसके कारण उन्हें कई सारी मानसिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं के लिए बहुत जरूरी होता है कि वो समय रहते खुद को स्ट्रेस से दूर रखें।

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जाने महिलाओं को क्यों होता है ज्यादा स्ट्रेस

ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि अक्सर महिलाएं भावनात्मक तौर पर कमजोर और अस्थिर होती हैं। जिसके कारण उनको अक्सर वर्क प्लेस पर वर्क प्रेशर का दवाब महसूस होने लगता हैं। अक्सर महिलाओं के साथ देखा जाता है कि उनको उनके काम के अनुसार प्रमोशन और पगार नहीं मिलती जबकि हमेशा उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। वही दूसरी तरफ कुछ महिलाओं को तो अपने ऑफिस और घर के बीच संतुलन भी बिठाना पड़ता है, जिसके कारण कई बार उनको काफी पीड़ा का सामना भी करना पड़ता है। जिसके कारण कई बार महिलाएं स्ट्रेस का शिकार भी हो जाती है।

वर्क प्लेस पर कर्मचारियों का सहयोग

वर्क प्लेस पर मैनेजमेंट को अपनी महिला कर्मचारी के साथ सहयोग करना चाहिए। मैनेजमेंट को अपने महिला कर्मचारी को जरूरत पड़ने पर हमेशा उससे सहयोग करना चाहिए। जब भी उनसे घर से काम करने की जरूरत हो, उससे वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जानी चाहिए। इतना ही नहीं हर कंपनी में मैनेजमेंट को महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को भी कंट्रोल करना चाहिए। जिसे की महिलाएं फ्री माइंड होकर काम कर सके और उनको अपने वर्क प्लेस पर स्ट्रेस भी फील न हो।

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लाइफस्टाइल

जानें ब्रेस्टफीडिंग और प्रेगनेंसी के दौरान कैसे बदलती है महिलाओं के खाने की जरूरतें

जाने प्रेगनेंसी के दौरान और बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं को किस तरह के पोषण की ज़रूरत होती है


माँ बनना हर महिला के लिए एक बहुत ही खूबसूरत और खास पड़ाव होता है। ये पड़ाव महिलाओं के लिए जितना खास होता है उतना ही मुश्किल भी होता है। क्योकि ये वो बदलाव होता है जिसके बाद किसी भी महिला की ज़िंदगी पूरी तरह बदल जाती है। प्रेगनेंसी और बच्चे को जन्म देना किसी भी महिला को शारीरिक और मानसिक दोनों तरीको से काफी ज्यादा थका देता है। इसलिए कहा जाता है कि जितना ध्यान आपको अपने पेट में पल रहे बच्चे को देना जरूरी होता है, उतनी ही जरूरत आपको अपनी खुद की सेहत का भी रखना चाहिए है। प्रेगनेंसी और ब्रेस्टफीडिंग ये दोनों फेज़ किसी भी महिला के लिए काफी ज्यादा डिमांडिंग फेज़ होते है। अगर इस समय पर महिलाओं को सही से पोषण ना मिले तो उन्हें स्वास्थ्य-संबंधी परेशानियां हो सकती है इतना ही नहीं यहाँ तक की आपका बच्चा कुपोषण का शिकार भी हो सकता है। तो चलिए आज हम आपको बतायेगे प्रेगनेंसी के दौरान और बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं को किस तरह के पोषण की ज़रूरत होती है।

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ब्रेस्टफीडिंग के दौरान: क्या आपको पता है जब एक बच्चे का जन्म हो जाता है और उसके लिए जब उनकी माँ के स्तन में दूध बनने की शुरुआत होती है तो ऐसे में महिलाओं को प्रेगनेंसी के मुकाबले कहीं ज़्यादा पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। शायद आपने देखा भी होगा कि बच्चे के जन्म के बाद पहले 5, 6 महीनों में महिलाओं का वजन दुगुना हो जाता है। और बच्चे को सारा पोषण माँ के दूध से ही मिलता है। इसीलिए ब्रेस्टफीडिंग कराते समय महिलाओं को काफी ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़ती है।

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प्रेगनेंसी के दौरान: क्या आपको पता है प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे के बेहतर मेटाबॉलिज़्म के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकताएं बढ़ जाती हैं। महिलाओं में प्लेसेंटा और भ्रूण की ग्रोथ, एमनियोटिक फ्लुइड की मात्रा बढ़ाने के लिए और मैटर्नल टिशूज़ की अच्छी ग्रोथ के लिए बहुत ज्यादा पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है।  आपने देखा होगा कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का 10, 12 किलो वजन बढ़ जाता है। अगर महिलाओं का ये वजन न बढ़ें तो बच्चे को भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों नहीं मिल पाएगा जिसके कारण वो कुपोषण का शिकार हो जाएगा।

ब्रेस्टफीडिंग और प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की जरूरतें

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ये बात तो शायद हमें आपको बताने की जरुरत नहीं है कि प्रेगनेंसी के दौरान और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को कामकाजी महिलाओं के मुकाबले कहीं गुना ज़्यादा पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। बच्चा होने के बाद जब महिला उससे 6 महीने तक फीड करती है तो उस दौरान महिलाओं को एनर्जी और पोषण की दोगुनी ज़रूरत होती है। ब्रेस्टफीडिंग और प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित रूप से विटामिन और मिनरल सप्लिमेंट्स और नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करनी चाहिए ये उनके और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी है।

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दादी की छोटी सी बागवानी को एक पोते गौरव ने बनाया लाखों का बिज़नेस

जाने कौन है गौरव जक्कल और कैसे बढ़ाया उन्होंने अपनी दादी के बिज़नेस को


हम सभी लोग इस कहावत को तो बचपन से ही सुनते हुए आ रहे है शायद आपने भी सुना ही होगा “दादा लाए, पोता बरते”। यह कहावत घर, पैसा, जमीन, फर्नीचर, गहनों और पेड़-पौधों तक पर भी लागू होती है। आपने भी अपने दादा दादी से सुना होगा कि गांवों में बड़े-बुजुर्ग यह सोचकर पेड़ पौधे लगाते हैं कि जब वो पेड़ बनेंगे होंगे तो उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ी उनके बच्चों को छांव देंगे। इस बात का आज हम आपको एक जीता-जागता उदाहरण देने जा रहे है। ये उदाहरण है महाराष्ट्र के सोलापुर में रहने वाला 28 साल के गौरव जक्कल का, जो की एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। कुछ समय पहले ही गौरव जक्कल ने अपना लिथियम आयरन बैटरी बनाने का काम शुरू किया है। इसके साथ ही साथ वह अपने पिता के साथ मिलकर अपने घर की छत पर बने गार्डन की देखभाल भी करता है। उनकी छत का ये गार्डन किसी बड़े बागान से कम नहीं हैं। उनकी छत के इस गार्डन में सैकड़ों प्रजातियों के हजारों पेड़-पौधे हैं। तो चलिए आज हम आपको इस गार्डन की एक दिलचस्प कहानी बतायेगे। कैसे, कब और किसके द्वारा शुरू हुआ था ये गार्डन।

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जाने गार्डन को लेकर क्या कहना है गौरव जक्कल

एक मीडिया इंटरव्यू में गौरव जक्कल ने बताया कि इस गार्डन को मेरी दादी लीला जयंत जक्कल ने शुरू किया था। आगे वो कहते है मेरी दादी को पेड़-पौधों का बहुत ज्यादा शौक था। दादी ने ही सबसे पहले 1970 में छत पर पौधे लगाना शुरू किया था और देखते ही देखते ये गार्डन कब नर्सरी में तब्दील हो गया हमे पता ही नहीं चला। उनका कहना है कि अक्सर लोग दादी के पास आकर पेड़-पौधे और बागवानी से जुड़ी जानकारियां लेने आते थे। गौरव जक्कल आगे कहते है कि हमारे यहाँ सोलापुर में तापमान बहुत अधिक रहता है जिसके कारण हमारे वहां छत पर बागवानी करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन मेरी दादी ने कभी हार नहीं मानी।

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जाने सीजनल नर्सरी से गौरव ने कितने की कमाई की

गौरव जक्कल बताते है कि मेरी दादी ने कई स्थानीय किस्मों के पौधों के साथ-साथ कई विदेशी किस्म के पेड़-पौधों भी लगाएं और उनकी लगातार मेहनत से उन्हें सफलता भी मिली। आगे गौरव जक्कल बताते हैं दादी ने जो गार्डन का काम शुरू किया था उसकी जिम्मेदारी अब उन्होंने उठा ली है। क्योंकि अब मेरी दादी की उम्र लगभग 90 साल हो गई है और ऐसे में उनके लिए छत पर आना जाना मुश्किल होता है। इसलिए अब गौरव जक्कल अपने पिता के साथ मिल कर गार्डन की देखभाल करते हैं। गौरव आगे कहते है आज के समय पर पेड़-पौधों की मांग को देखकर उन्होंने अपने गार्डन को सीजनल नर्सरी का रूप दे दिया है। उन्होंने कहा वैसे तो दादी के समय से ही हम पौधे तैयार कर रहे हैं, लेकिन अब जब पौधों की मांग ज्यादा हो गयी तो ऐसे में हम बारिश के मौसम से पहले ही नर्सरी का काम शुरू कर देते है। अगर गौरव ने बताया कि सोलापुर और उनके आसपास के लोग उनके पास पौधे लेने के लिए आते है जिसे उन्हें सात महीनों में लगभग साढ़े चार लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हुई।

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