Categories
काम की बात करोना

दादी की छोटी सी बागवानी को एक पोते गौरव ने बनाया लाखों का बिज़नेस

जाने कौन है गौरव जक्कल और कैसे बढ़ाया उन्होंने अपनी दादी के बिज़नेस को


हम सभी लोग इस कहावत को तो बचपन से ही सुनते हुए आ रहे है शायद आपने भी सुना ही होगा “दादा लाए, पोता बरते”। यह कहावत घर, पैसा, जमीन, फर्नीचर, गहनों और पेड़-पौधों तक पर भी लागू होती है। आपने भी अपने दादा दादी से सुना होगा कि गांवों में बड़े-बुजुर्ग यह सोचकर पेड़ पौधे लगाते हैं कि जब वो पेड़ बनेंगे होंगे तो उनकी पीढ़ियों दर पीढ़ी उनके बच्चों को छांव देंगे। इस बात का आज हम आपको एक जीता-जागता उदाहरण देने जा रहे है। ये उदाहरण है महाराष्ट्र के सोलापुर में रहने वाला 28 साल के गौरव जक्कल का, जो की एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। कुछ समय पहले ही गौरव जक्कल ने अपना लिथियम आयरन बैटरी बनाने का काम शुरू किया है। इसके साथ ही साथ वह अपने पिता के साथ मिलकर अपने घर की छत पर बने गार्डन की देखभाल भी करता है। उनकी छत का ये गार्डन किसी बड़े बागान से कम नहीं हैं। उनकी छत के इस गार्डन में सैकड़ों प्रजातियों के हजारों पेड़-पौधे हैं। तो चलिए आज हम आपको इस गार्डन की एक दिलचस्प कहानी बतायेगे। कैसे, कब और किसके द्वारा शुरू हुआ था ये गार्डन।

Image Source- BetterIndia

जाने गार्डन को लेकर क्या कहना है गौरव जक्कल

एक मीडिया इंटरव्यू में गौरव जक्कल ने बताया कि इस गार्डन को मेरी दादी लीला जयंत जक्कल ने शुरू किया था। आगे वो कहते है मेरी दादी को पेड़-पौधों का बहुत ज्यादा शौक था। दादी ने ही सबसे पहले 1970 में छत पर पौधे लगाना शुरू किया था और देखते ही देखते ये गार्डन कब नर्सरी में तब्दील हो गया हमे पता ही नहीं चला। उनका कहना है कि अक्सर लोग दादी के पास आकर पेड़-पौधे और बागवानी से जुड़ी जानकारियां लेने आते थे। गौरव जक्कल आगे कहते है कि हमारे यहाँ सोलापुर में तापमान बहुत अधिक रहता है जिसके कारण हमारे वहां छत पर बागवानी करना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन मेरी दादी ने कभी हार नहीं मानी।

और पढ़ें: जानें कोरोना और लॉकडाउन के बीच प्रैक्टिकल क्लासेज कैसे कर रही स्टूडेंट्स के भविष्य को प्रभावित….

जाने सीजनल नर्सरी से गौरव ने कितने की कमाई की

गौरव जक्कल बताते है कि मेरी दादी ने कई स्थानीय किस्मों के पौधों के साथ-साथ कई विदेशी किस्म के पेड़-पौधों भी लगाएं और उनकी लगातार मेहनत से उन्हें सफलता भी मिली। आगे गौरव जक्कल बताते हैं दादी ने जो गार्डन का काम शुरू किया था उसकी जिम्मेदारी अब उन्होंने उठा ली है। क्योंकि अब मेरी दादी की उम्र लगभग 90 साल हो गई है और ऐसे में उनके लिए छत पर आना जाना मुश्किल होता है। इसलिए अब गौरव जक्कल अपने पिता के साथ मिल कर गार्डन की देखभाल करते हैं। गौरव आगे कहते है आज के समय पर पेड़-पौधों की मांग को देखकर उन्होंने अपने गार्डन को सीजनल नर्सरी का रूप दे दिया है। उन्होंने कहा वैसे तो दादी के समय से ही हम पौधे तैयार कर रहे हैं, लेकिन अब जब पौधों की मांग ज्यादा हो गयी तो ऐसे में हम बारिश के मौसम से पहले ही नर्सरी का काम शुरू कर देते है। अगर गौरव ने बताया कि सोलापुर और उनके आसपास के लोग उनके पास पौधे लेने के लिए आते है जिसे उन्हें सात महीनों में लगभग साढ़े चार लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हुई।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
वीमेन टॉक

जानें कर्नाटक की उस मसाला फैक्ट्री के बारे में जहां केवल महिलाओं को मिलता है रोजगार

Only women get employment in this spice factory

इस मसाला फैक्ट्री में सिर्फ महिलाओं को ही मिलता है रोजगार


जैसा कि हम सभी लोग जानते है कि एक समय था जब महिलाओं को घर की चार दीवारी से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी लेकिन आज समय काफी हद तक बदल गया है। और आज के समय में महिलएं अपने पैरों पर खड़ी है। वो आज के समय में पूरी तरह आत्मनिर्भर है महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में कई लोगों ने अपना योगदान दिया है आज हम आपको एक ऐसी ही मसाला फैक्ट्री के बारे में बताने जा रहे है जहां सिर्फ महिलाओं को रोजगार मिलता है ताकि महिलाओं की स्थिति सुधर सके। तो चलिए विस्तार से जानते है इस मसाला फैक्ट्री के बारे में।


कहां है ये मसाला फैक्ट्री

ये मसाला फैक्ट्री कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में स्थित है। यह एक ऐसी मसाला बनाने वाली कंपनी है जिसमें सिर्फ महिलाओं को ही रोजगार मिलता है। 1979 में महिलाओं की स्थिति को देखते हुए लक्क्षम्मा और थिप्पीस्वामी ने इस मसाला बनाने वाली फैक्ट्री की शुरू की थी। आपको जान कर थोड़ी हैरानी होगी की इस मसाला फैक्ट्री की शुरुआत महज 20 हजार रुपये से की गयी थी। इस मसाला फैक्ट्री को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य बिजनेस को बढ़ाकर महिलाओं की मदद करना था। इतना ही नहीं इस मसाला फैक्ट्री में कई महिलाओं को काम करते हुए 30 साल से भी ज्यादा समय हो चुका
है।

और पढ़ें: जानें कौन है मनदीप कौर, जो न्यूजीलैंड में बनी पहली भारतीय मूल की पुलिस सर्जेन्ट

जानें क्या मानना है मसाला फैक्ट्री के मालिक का

इस मसाला फैक्ट्री के मालिक का कहना है कि महिलाएं अपने जीवन में बहुत सारे संघर्ष करती हैं। उसके बाद भी उनको कई बार इसका फल नहीं मिल पाता। इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया कि वो सिर्फ महिलाओं को ही अपने वहां काम पर रखेंगे। जिसके बाद उन्होंने पाया कि महिलाएं एक वर्कर के रूप में काफी अच्छी काम कर रहती है। साथ ही साथ उनकी स्किल पुरुषों से ज्यादा अच्छे होते हैं। इतना ही नहीं महिलाएं सामान भी काफी कम बर्बाद करती हैं और सभी चीजों को काफी अच्छी तरह संचालित करती है।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
वीमेन टॉक

बॉडी पॉजिटिविटी की मिसाल है रिताशा राठौड़, इनसे सीखें खुद से प्यार करना

बड़ो बहू की रिताशा राठौड़ है बॉडी पॉजिटिविटी की मिसाल, इनकी पोस्ट, वीडियोज और फोटोज आपको सिखाएगी खुद से प्यार करना


जाने कौन है रिताशा राठौड़

अगर आप सोशल मीडिया और टीवी की दुनिया से वाकिफ है तो शायद रिताशा राठौड़ आपके लिए एक बेहद जाना पहचाना नाम होगा. अगर आप रिताशा राठौड़ ये नाम नहीं जानते तो बड़ो बहू के नाम से रिताशा को जरूर जानते होंगे.  &tv पर आने वाला शो ‘बड़ो बहू’ से रिताशा ने दर्शकों के दिलों में अपने लिए एक अलग जगह बना ली थी. रिताशा एक एक्टर होने के साथ-साथ  सोशल मीडिया पर बॉडी पॉजिटिविटी से जुड़ी पोस्ट्स, वीडियोज और फोटोज के लिए बहुत ज्यादा फेमस है. अभी हाल ही में रिताशा ने अपनी लेटेस्ट वेब सीरीज ‘मसाबा मसाबा’ में जिया ईरानी के रोल के लिए काफ़ी ज्यादा चर्चा में है. नेटफ्लिक्स पर चल रही वेब सीरीज में मसाबा और नीना गुप्ता मुख्य किरदारों में है इस वेब सीरीज में लोगों को रिताशा का किरदार और उनकी एक्टिंग बेहद पसंद आ रही है.

रिताशा राठौड़ की एक्टिंग की ट्रेनिंग

रिताशा राठौड़ का जन्म सिंगापुर में हुआ था लेकिन जब रिताशा 7 साल की हुई तो उनका परिवार भारत शिफ्ट हो गया. रिताशा को बचपन से ही एक्टिंग का बहुत ज्यादा शौक था. रिताशा ने हाई स्कूल में ही तय कर लिया है कि वो अपना करियर एक्टिंग में ही बनाएंगी. अपने करियर को शुरू करने के लिए रिताशा ने मुंबई के एक थिएटर ग्रुप में इंटर्नशिप की और साथ ही उन्होंने दो नाटकों का हिस्सा भी बनीं. इसके बाद रिताशा ने 2011 में सिंगापुर के एक आर्ट्स के कॉलेज में दाखिला लिया. वहा रिताशा ने एक्टिंग सीखी. और 2015 में एक्टिंग की डिग्री लेकर भारत लौटी. उसके बाद 2016 में रिताशा को &tv के डेली सोप ‘बड़ो बहू’ में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला. इस शो ने रिताशा को बड़ो बहू के नाम से घर घर में पहचान दिला दी.

और पढ़ें: कभी फीस के कारण छोड़ी थी पढ़ाई,  आज कंपनी की सीईओ  है

रिताशा सिखाती हैं खुद से प्यार करना

आज के समय में लोग अपनी बॉडी को फिट और हेल्दी रखने के लिए घटों जिम में पसीना बहाते हैं ताकि वो फिट रह सकें. लेकिन क्या आपको पता है रिताशा इतनी फैटी होते के बाद भी खुद को इतना प्यार करती है वो किसी भी तरह की ड्रेस पहने से खुद को नहीं रोकती, शायद इसी लिए आज हम सभी लोग रिताशा के फैशन सेंस और उनके बॉडी पॉजिटिव एटीट्यूड के दीवाने हैं. जब एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान रिताशा से पूछा गया था कि वो अपनी बॉडी से प्यार करने की हिम्मत कैसे जुटती है. तो इसके जवाब से रिताशा ने कहा, मैं जानती हैं कि मैं दुबली, पर्फेक्ट नहीं है. अगर मैं दुबली, पर्फेक्ट होती तो शायद समझ ही नहीं पाती कि मेरे जैसा दिखने वाले लोग कैसा महसूस करते है. अगर उन्होंने कहा, इस इंडस्ट्री में जहां लुक्स इतना मायने रखता है अगर में भी दुनिया की नजरों में बिल्कुल परफेक्ट होती तो शायद समझ नहीं पाती कि अपने काम से पहचान बनाना क्या होता है. आगे उन्होंने कहा, लोगों का मानना है कि एक्टर बनने के लिए आपको बेहद खूबसूरत और परफेक्ट होना चाहिए. लेकिन मैंने एक्टर बनने के लिए पढ़ाई की, 3 साल लगाए. शायद इसीलिए मेरा कॉन्फिडेंस वापस आया और आज में एक्टर हुं. मेरा मानना है कि आपके अंदर टैलेंट होना चाहिए, लुक या बॉडी मैटर नहीं करती.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com