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दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए अच्छी खबर, अब प्रत्येक 11वें दिन करें मुफ्त सफर

अब दिल्ली मेट्रो में हर महीने करे 2 बार से अधिक मुफ्त यात्रा


अभी दिल्ली मेट्रो के पास अपने लाखों यात्रियों के लिए एक आकर्षक स्कीम है, जो की सालों से चल रही है. जिसके तहत कोई भी व्यक्ति दिल्ली मेट्रो में नियमित यात्रा एक महीने के दौरान अधिकतम 2 बार मुफ्त यात्रा कर सकता है. इतना ही नहीं 33 दिन यात्रा करने वाले यात्री तो 3 बार मुफ्त यात्रा के हकदार होंगे. लेकिन आपको दिल्ली मेट्रो के ये फायदे तब ही मिलेंगे जब आप मेट्रो में नियमित सफर करेंगे.  क्या आपको पता है अभी तक लाखों यात्री इस स्कीम का सालों से फायदा उठा रहे है और अभी तक वो हजारों रुपये की बचत कर चुके हैं.

जाने डीएमआरसी की ये स्कीम कैसे काम करती है।

अगर कोई व्यक्ति स्मार्ट तरीके से मेट्रो की सवारी करता है तो वह हर 10 यात्रा करने के बाद एक यात्रा यानी की 11वीं यात्रामुफ्त कर सकता है. और डीएमआरसी की इस स्कीम का फायदा हर कोई उठा सकता है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दिल्ली मेट्रो की यह स्कीम न केवल लोगों को सालों से आकर्षित कर रही है, बल्कि  इसके नियमित इस्तेमाल से यात्री हजारो रुपये बचा रहे है. अगर आप रोजाना दिल्ली मेट्रो में यात्रा करते है तो अपने शायद ध्यान दिया होगा की स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल करने से आपको 10 फीसद की छूट मिलती है. इस तरह से समझे कि रोजाना 10 फीसदी की छूट लेने से यात्रियों को 11वीं यात्रा पूरी तरह से मुफ्त हो जाती है.

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मेट्रो

जाने दिल्ली मेट्रो क्यों स्मार्ट कार्ड से सफर करने पर जोर दे रहा है

जैसा की हम सभी जानते है कि साल 2020 कोरोना वायरस के कहर में ही निकल गया..कोरोना वायरस के चलते 22 मार्च से बंद दिल्ली मेट्रो 7 सितंबर से दोबारा चलनी शुरू हुई है. कोरोना वायरस के कारण मेट्रो में भी खास हिदायत बरती जा रही है. अभी दिल्ली मेट्रो भी अपने यात्रियों से स्मार्ट कार्ड के
जरिए ही

यात्रा करने पर जोर दे रही है.  मेट्रो में टोकन सिस्टम बंद होने के चलते अब लोग स्मार्ट कार्ड का ही इस्तेमाल कर रहे है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति स्मार्ट कार्ड के जरिये 10वीं के बाद दिल्ली मेट्रो में यात्रा करता है तो उसकी 11वीं यात्रा बिल्कुल मुफ्त हो जाती है..यह कोई स्कीम नहीं है, लेकिन अगर आप देखे तो आप साल भर में 36 बर से अधिक बार मुफ्त यात्रा कर सकते है.

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दिल्ली पुलिस ने किसानों को आने की दी अनुमति, दिल्ली सरकार ने अस्थाई जेल की अनुमति को ठुकराया

तीन दिसंबर को दोबारा किसानों के साथ होगी बैठक


 

नए कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को आज दिल्ली आने की अनुमति दे दी गई है.  दो दिन से चल रहे प्रदर्शन के बीच आज दोपहर दिल्ली पुलिस ने किसानों को बुराड़ी के निरंकारी ग्रांउड में प्रदर्शन करने की इजाजत दे दी है. लेकिन इस आददेश में यह साफ कर दिया गया है कि इस दौरान किसान दिल्ली के किसी और हिस्से में नहीं जा सकते हैं. अगर जाते हैं तो पुलिस उनके साथ रहेगी.

 

दिल्ली सरकार ने अस्थाई जेल की मांग को ठुकराया.

 

आज की अनुमति से पहले हजारों की संख्या में किसान दिल्ली में घुसने की कोशिश कर रहे थे. जिसके कारण सिंधु बॉर्डर पुलिस और किसानों के बीच झड़प हुई. किसानों ने पुलिस पर पथराव किया. जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. किसान लगातार दिल्ली जाने की मांग करते हुए कह रहे थे कि उनके साथ 5 लाख किसान है और वह बिना दिल्ली गए वापस नहीं जाएंगे. कोई भी शख्स  उन्हें उनको लक्ष्य से हटा नहीं सकता है. आपको बता दें निरंकारी ग्रांउड की अनुमति से पहले किसान जंतर-मंतर या रामलीला की मांग कर रहे थे. किसानों बढ़ते प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने किसानों के लिए अस्थाई जेल बनाने की मांग की थी. जिसे दिल्ली सरकार ने ठुकरा दिया. कल किसानों को कोरोना के देखते हुए दिल्ली में प्रवेश के लिए रोका जा रहा था.  

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पहले दिन भी किसानों को रोकने की कोशिश की गई थी 

कल किसान पंजाब से हरियाणा होते हुए दिल्ली के लिए कूच कर रहे  थे. उन्हें रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने रास्ते में बैरिकेटस लगाए. सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर रखेंतारों से रास्ते के ब्लॉक कर दिया.  पुलिस की ऐसा रवैया देखते हए  किसानों ने पुलिस पर पत्थारबाजी की. उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछर की  जिद पर अड़ें किसानों को रोकने के लिए कल भी  दिल्ली बॉर्डर पर आंसू गैस भी छोड़े गए थे. बढ़ते तनाव के बीच कल दिल्ली एनसीआर में मेट्रो को भी बंद कर दिया गया था.   कुरुक्षेत्र हाइवे पर किसान फायर बिग्रेड और वाटर कैनन की गाड़ियों पर चढ़े गए थे. बिल लागू होने के बाद से ही किसानों के साथ खड़े योगेंद्र यादव को हरियाणा पुलिस ने कुछ किसानों के साथ गुरुग्राम में हिरासत में ले लिया था. आज भी किसान सुबह से ही एंट्री को लेकर अडे हुए थे.

 

कृषि मंत्री का बयान–     

कल कृषि मंत्री ने बयान देते हुए कहा है कि किसान संगठनों को तीन दिसंबर को फिर से बातचीत के लिए बुलाया गया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार देश भर के किसानों के हित में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैकिसानों की आय दोगुनी करने लिए सरकार प्रतिबद्ध है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि नए कानून भी किसानों के हित में हैं.

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आज से आम दर्शकों के लिए शुरु हो रहा है थिएटर, जाने कैसा रहा सिनेमाघर का पहला दिन

जाने कैसे रहा राजधानी दिल्ली में सिनेमाघर का पहला दिन


लम्बे समय से चल रहे कोरोना वायरस से न सिर्फ हमारा देश अपितु पूरी दुनिया परेशान थी ऐसे में सभी चीजें लम्बे समय तक बंद रही लेकिन फिर सरकार की तरफ से धीरे धीरे चीजों को खोलने की लिए छूट मिलनी शुरू हुई. अब सरकार ने देश में सिनेमाघरों को भी खोलने की छूट दे दी है. लॉकडाउन के बाद मिली छूट के बाद पहले दिन राजधानी दिल्ली में ज्यादातर सिनेमाघर बंद रहे. और अगर कुछ सिनेमाघर खुले भी तो उनमें न के बराबर ही लोग गए. इतना ही नहीं राजधानी दिल्ली में कुछ सिनेमाघरों में कोरोना योद्धाओं और उनके परिवार वालों के लिए विशेष स्क्रीनिंग रखी गई थी.

 

जाने कौन कौन सी फिल्मे लगी थी सिनेमा हॉलों में

 

लॉकडाउन के बाद जब पहली बार सिनेमा हॉल खुले तो उनमे सुशांत सिंह राजपूत की अंतिम फिल्म छिछोरे, केदारनाथ, शुभ मंगल सावधान, मलंग, युद्ध, तान्हाजी और थप्पड़ जैसी फिल्में हॉल में लगाई गयी थी. क्योंकि अभी हाल ही में तो कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है. इसलिए सिनेमा हॉल में पुरानी फिल्में ही दिखाई गईं थी. ये थिएटर सभी लोगों के लिए नहीं थे. आम लोगों के लिए शुक्रवार यानि की आज से थिएटर खोले जाएंगे.

 

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जाने कितनी टिकट बिकी पहले दिन

 

लॉकडाउन के बाद भले ही सिनेमाघर खुल गए लेकिन अभी भी लोगों के मन में कोरोना वायरस का डर देखने को मिल रहा है. अगर हम ग्रेटर कैलाश के सिनेपोलिस सिनेमा घर के 11.30 बजे के शो की बात करें तो उस शो की केवल 5 टिकट बिके. वही अगर हम निर्माण विहार का वीथ्रीएस मॉल में सिनेपॉलिस फन सिनेमा, जंगपुरा में इरोस सिनेमा, कौशांबी के ईडीएम मॉल में पीवीआर सिनेमा और सिनेपोलिस कड़कड़डूमा की बात करें तो ये सभी सिनेमाघर बृहस्पतिवार यानि की कल बंद रहे थे.

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छह सालों में पहली बार दिल्ली में सबसे कम डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले हुए दर्ज

कोरोना वायरस के कारण, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया की जांच हुई प्रभावित


इस बार पिछले छह सालों में पहली बार दिल्ली में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के सबसे कम मामले देखने को मिल रहे है. अभी पूरा देश कोरोना वायरस से परेशान है. इसी के चलते अभी लोगों में अस्पतालों के प्रति पैदा हुए खौफ भी मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के आंकड़ों को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. हालांकि इस बार कोरोना वायरस के कारण अस्पतालों में इस बीमारियों की जांच काफी ज्यादा प्रभावित हो रही है. जिसके कारण इस रोगों को लेकर नगर निगम के आंकड़ें भी सवालों के घेरे में हैं.

क्या कहना है इस पर सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों का

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को ले कर सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि हर साल इन दिनों डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के काफी केस ओपीडी और आपातकालीन वार्ड में देखने को मिलते थे. दिल्ली में लम्बे समय से ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का असर देखने को मिलता रहा है. ऐसे में हमारा यह कहना कि अचानक से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का असर कम हो गया, वह गलत होगा. क्योकि कोरोना वायरस के कारण इन दिनों मरीजों की पहचान में काफी ज्यादा दिक्कत रही है. साथ ही साथ लोग इस समय अस्पतालों में जाने से भी कतरा रहे हैं.

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क्या कहते है इस पर नगर निगम के आंकड़ें

दिल्ली नगर निगम के आकड़ो के अनुसार इस साल 19 सिंतबर तक दिल्ली में मलेरिया के 138 मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि अगर हम साल 2019 के 19 सिंतबर तक की बात करें तो इस दिन तक आंकड़ा 304 पहुंच चूका था. इसी तरह अगर हम इस साल के डेंगू केस की बात करें, तो अब तक इसके 172 मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि पिछले साल 1 जनवरी से 19 सिंतबर के बीच यह आंकड़ा 217 था. और अगर हम दिल्ली में चिकनगुनिया की स्थिति देखें तो अभी तक दिल्ली में इसके 54 मामले दर्ज किए जा चुके हैं जबकि पिछले साल तक यह आंकड़ा 74 दर्ज किया गया था.

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अब लोगों के दिलों से खत्म हो रहा है कोरोना का डर, भूल रहे है अपनी जिम्मेदारी

जाने क्यों खत्म हो रहा है लोगों के दिलों से कोरोना का डर


अभी कोरोना वायरस के कारण भारत सहित पूरी दुनिया परेशान है कोरोना वायरस के कारण 22 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है जो अभी तक पूरी तरफ हटा नहीं है. कोरोना वायरस को रोकने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. इतने लम्बे समय से चल रहे कोरोना वायरस का अब लोगों के दिलों से डर खत्म  होता हुआ दिख रहा है. जहां  एक तरफ देश की राजधानी में एक बार फिर कोरोना के बढ़ते केस सामने आ रहे हैं. वही दूसरी तरफ सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों की हालत देख कर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से बचने के लिए लोग अब खुद अपनी जिम्मेदारियों को भूल रहे हैं. अभी कोई मास्क लगाने में एतराज करता है तो कोई सोशल डिस्टैसिंग को समझने की कोशिश नहीं करता. इस समय सभी लोग सरकार से उम्मीद कर रहे है कि सरकार कोरोना की वैक्सीन जल्दी से जल्दी लॉन्च करें. दूसरी तरफ लोग अपनी खुद की जिम्मेदारियों पर ध्यान देने को तक तैयार नहीं है.

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क्या कहना है इस पर दिल्ली के डॉक्टर्स का

सोशल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर्स का कहना है कि एक बार फिर दिल्ली में कोरोना वायरस के केस बढ़ने लगे है. दूसरी तरफ जांच भी दोगुनी रफ्तार से हो रही है. उनका कहना है कि सरकार के यह प्रयास तब तक सफल नहीं होंगे जब तक आम व्यक्ति भी इसमें अपना सहयोग नहीं देगा. उन्होंने कहा अभी लोगों में धीरे धीरे कोरोना के प्रति डर खत्म हो रहा है. अभी लोग घरों से बाहर और बाजारों में जाने से पहले मास्क लगाना जरूरी नहीं समझते. कुछ लोगों के फेस पर मास्क है तो किसी की गर्दन पर, तो कुछ लोगों के हाथ पर. सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और इनकी पहचान हर महीने उजागर भी की जाएगी. इससे फायदा यह होगा कि लोग अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें.

दिल्ली में कोरोना केस बढ़ने के कई कारण

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में केस बढ़ने के पीछे कई सारे कारण हैं  दिल्ली की झुग्गी-बस्ती में छोटे-छोटे घरों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं. अगर इनमें से किसी भी एक व्यक्ति को ये वायरस होता है तो बहुत बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी. दूसरी तरफ अभी दिल्ली से बाहर गए लोग अपने काम पर वापस लौट रहे हैं. यह भी केस बढ़ने का एक कारण है. साथ ही अभी राजधानी दिल्ली के लोग कोरोना वायरस की जांच नहीं करवा रहे हैं. जिन भी लोगों में थोड़े बहुत कोरोना वायरस के लक्षण आ रहे है वो भी अब अपनी जांच कराने को तैयार नहीं है. वह बिना जांच करवाएं ही अपने नजदीकी डॉक्टर से बुखार की दवाएं लेकर खा रहे हैं.

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लॉकडाउन को हुए पांच महीने पूरे, जाने कोरोना अपडेट और देश की स्थिति

जाने कोरोना लॉकडाउन से ले कर अनलॉक तक की सारी दासता


लॉकडाउन को आज पांच महीने पूरे हो चुके है. इस महामारी से न सिर्फ भारत ब्लकि पूरी दुनिया परेशान है. अभी पूरी दुनिया पर कोरोना का संकट बरकरार है. देश में कोरोना संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू  का आह्वान किया  था. प्रधानमंत्री ने यह जनता कर्फ्यू जनता के लिए जनता द्वारा लगाया गया कर्फ्यू था. हालांकि जनता कर्फ्यू सिर्फ एक दिन के लिए ही था. उसके बाद 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की. जिसे आज पूरे पांच महीने हो चुके हैं. इस दौरान देश में संपूर्ण लॉकडाउन से लेकर अनलॉक होने तक कई तरह के बदलाव आए है. इन पांच महीनों में लोगों की जिंदगी से लेकर अर्थव्यवस्था तक सब कुछ बुरी तरह से प्रभावित हो गया है.

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जाने कोरोना लेटेस्ट अपडेट

अगर हम बात करें कोरोना की मौजूदा स्थिति की तो आज देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या करीब 31 लाख के पार हो चुकी है. जिसमें 57 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है. हमारे लिए बस थोड़ी सी राहत की बात यह है कि अब तक कोरोना को करीब 23 लाख लोगों मात दे चुके हैं. केंद्र सरकार के अनुसार अब तक देश में कोरोना के कुल 3.52 करोड़ से ज्यादा टेस्ट हो चुके है.  रिपोर्ट्स की मानें तो सब कुछ ठीक रहा तो अगले दो से तीन महीनों के अंदर भारत को पहली कोरोना वायरस की वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ भी मिल सकती है.

देश में दूसरी बार 8 दिनों में बढ़े 5 लाख कोरोना मरीज

अभी तक हमारे देश में कोरोना के मामले 31 लाख के पार हो गए है. ऐसा दूसरी बार हो रहा है जब मात्र 8 दिनों में 5 लाख कोरोना के मामले सामने आएं है. 14 अगस्त को देश में 25 लाख कोरोना मरीज थे. जबकि आज 24 अगस्त को ये आंकड़ा 31 लाख के पार  कर चुका है. वहीं 6 अगस्त तक देश में 20 लाख कोरोना मरीज थे. अभी तक देश में 22,80,567 लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके है. इस समय कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की दर बढ़कर 74.90 फीसदी हो गयी है.

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World Environment Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस, जाने इस साल की थीम

क्यों और कब मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस


हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, इस बार 47वां विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य है लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करना। क्योकि प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है। विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1972 में की गयी था। पहली बार 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में मनाया गया था। 1972 में पहली बार पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें 119 देशों ने भाग लिया था।

क्या है इस बार विश्व पर्यावरण दिवस की थीम

हर साल की तरह इस बार भी 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। इस बार की थीमजैव विविधतारखी गयी है। इस बार लॅाकडाउन की वजह से काफी मात्रा में प्रदूषण कम हो गया है। पिछले साल जहां इस समय हम पर्यावण को लेकर अधिक चिंता में थे इस साल हमारी चिंताएं थोड़ा कम है क्योकि लॅाकडाउन की कारण वातावरण शुद्ध हो गया है। इस लिए इस बार का पर्यावरण दिवस पिछले वर्षों से अलग मनाया जायेगा।

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इस साल घर पर ही मनाए पर्यावरण दिवस

लॅाकडाउन के कारण विश्व पर्यावरण दिवस घर पर ही मनाया जायेगा। इस बार मनाया जाने वाला पर्यावरण दिवस पिछले सालों से बिलकुल अलग होगा। क्योकि लॅाकडाउन की वजह से प्रदूषण बहुत कम हो गया है। पिछले वर्षों इस समय सब चिंता में थे कि वायु प्रदूषण कैसे कम किया जाये। विश्व पर्यावरण दिवस तभी सफल बनाया जा सकता है जब हम पर्यावरण का ख्याल रखेंगे। सभी लोगों को ये समझना होगा कि जब तक पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तब ही इस धरती पर जीवन संभव होगा।

घर पर रह कर कुछ इस तरह मनाएं विश्व पर्यावरण दिवस

लॅाकडाउन के कारण आप पर्यावरण दिवस मनाने बाहर नहीं जा सकते। इस लिए आपको अपने घर में पौधे या आसपास पेड़पौधे लगाने चाहिए। पेड़ से हमे छाया, ताज़ा हवा और पर्यावरण साफ़ रखने में भी मदद मिलती है। साथ ही आपको पॉलीथीन का उपयोग नहीं करना चाहिए। जो लोग इधर उधर थूकते है, आपको उनको टोकना चाहिए। नई पीढ़ी को प्रकृति, पर्यावरण, पानी पेड़पौधों का महत्व समझना चाहिए।

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