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Ratan Tata Dream Project: रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर तैयार, मुंबई में भारत के पहले छोटे पशु अस्पताल का होगा उद्घाटन

Ratan Tata Dream Project: रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट 'टाटा ट्रस्ट स्मॉल एनिमल हॉस्पिटल' जल्द खुलने वाला है। इसकी जानकारी मीडिया से मिली है। अस्पताल का उद्घाटन मार्च के पहले हफ्ते में किया जाएगा।

Ratan Tata Dream Project: 86 साल की उम्र में रतन टाटा का सपना होने जा रहा साकार, मुंबई में Animal Hospital का होगा उद्घाटन

Ratan Tata Dream Project: टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के बाद से ही रतन टाटा ने अपना पूरा ध्यान अपने पसंदीदा प्रोजेक्ट पर लगाना शुरू कर दिया था जो कि मुंबई में एक पेट हॉस्पिटल खोलना था। बता दें कि रतन टाटा का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। भारत में एक विश्व स्तरीय पेट हॉस्पिटल खोलने का उनका सपना जल्द ही टाटा ट्रस्ट्स स्मॉल एनिमल हॉस्पिटल के उद्घाटन के साथ साकार होने वाला है। वहीं सूत्रों से मिली सूचना अनुसार अस्पताल का उद्घाटन मार्च के पहले हफ्ते में किया जाएगा।

86 साल की उम्र में रतन टाटा अपने लंबे समय से चले आ रहे पसंदीदा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए तैयार हैं। लंबे समय से लटके पेट प्रोजेक्ट के रूप में मुंबई के लिए उनका पशु अस्पताल अब बनकर तैयार है। 2.2 एकड़ में फैला ये अस्पताल करीब 165 करोड़ रुपयों की लागत से बनकर तैयार हुआ है। यह हॉस्पिटल मार्च के पहले हफ्ते से काम करना शुरू कर देगा। इस अस्पताल में कुत्ते, बिल्लियों, खरगोशों और अन्य छोटे जानवरों के लिए 24×7 की सुविधा रहेगी।

पालतू जानवर परिवार के सदस्य से अलग नहीं

महालक्ष्मी में टाटा ट्रस्ट्स स्मॉल एनिमल हॉस्पिटल के उद्घाटन से पहले टीओआई के साथ एक इंटरव्यू में, रतन टाटा ने कहा कि “आज एक पालतू जानवर किसी के परिवार के सदस्य से अलग नहीं है। अपने पूरे जीवन में कई पालतू जानवरों के संरक्षक के रूप में, मैं इस अस्पताल की जरूरत को समझता हूं। उन्होंने कहा कि शहर में एक हाईटेक पशु स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए। इसे साकार होते देखकर मुझे खुशी हो रही है।”

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बीमार हो गया था रतन टाटा का डॉगी

उन्होंने एक वाकया याद करते हुए बताया कि उनका कुत्ता बीमार हो गया था। वह उसे ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए अमेरिका की मिनिसोटा यूनिवर्सिटी ले गए। हालांकि, हमें बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने रतन टाटा के प्रिय पालतू जानवर के ज्वॉइंट को एक निश्चित स्थिति में फिट कर दिया। इसके बाद उनके दिमाग में वह विचार आया कि मुंबई में भी एक वर्ल्ड क्लास जानवरों का हॉस्पिटल होना चाहिए। हालांकि, वह इस हॉस्पिटल पर काम रिटायरमेंट के बाद ही शुरू कर पाए।

मशहूर हैं टाटा ग्रुप के बनाए गए संस्थान

यह अस्पताल टाटा ग्रुप के बेहतरीन संस्थानों में शुमार किया जाएगा। इससे पहले इस कारोबारी घराने ने देश का पहला कैंसर केयर हॉस्पिटल, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंसेज- बेंगलुरु जैसे नामी गिरामी संस्थानों की शुरुआत भी की है। यह अस्पताल शुरू में नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में बनने वाला था। फिर उन्होंने यात्रा में लगने वाले समय को देखते हुए इसे मुंबई में ही बनाने का फैसला लिया गया। सही जगह की तलाश, सरकार की मंजूरी और कोविड ने इस अस्पताल को कुछ साल पीछे धकेल दिया।

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एक एनजीओ खोला गया

इस अस्पताल की जिम्मेदारी ब्रिटेन के मशहूर वेट डॉक्टर थॉमस हीथकोट को सौंपी गई है। इस अस्पताल का रॉयल वेटनरी कॉलेज, लंदन समेत 5 मशहूर ब्रिटिश अस्पतालों से टाई अप भी है। इसमें आवारा कुत्तों की देखभाल के लिए भी एक एनजीओ खोला गया है।

12 साल बाद पूरा हुआ काम

रतन टाटा जब साल 2012 में टाटा संस के चेयरमैन के पद से हटे थे, उसके बाद से ही इस अस्पताल के निर्माण के लिए काम शुरू कर दिया गया था। जिसका अब 12 साल बाद काम पूरा हुआ है। मुंबई में बना यह पशु अस्पताल देश के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल हो गया। इसका संचालन टाटा ग्रुप ही करेगा। टाटा ने इसके पहले एनसीपीए, अस्पताल टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस-बेंगलुरु और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज का निर्माण किया।

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vrinda

मैं वृंदा श्रीवास्तव One World News में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर कार्य कर रही हूं। इससे पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स न्यूज पेपर में काम कर चुकी हूं। मुझसे vrindaoneworldnews@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।
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