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Padmini Ekadashi 2023: ब्रह्म और इंद्र योग में मनाई जाएगी पद्मिनी एकादशी, जानें पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त

ब्रह्म और इंद्र योग में मनाई जाएगी पद्मिनी एकादशी का व्रत,और जानिए इसकी पूजा की विधि एवं सही समय क्या है।

Padmini Ekadashi 2023: मलमास में  रखा जाएगा पद्मिनी एकादशी का व्रत,जानें इस व्रत में कब और कैसे करें श्री हरि की पूजा 

हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा सभी कष्टों को दूर करके मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए मनाई जाती है। श्री हरि की पूजा के लिए प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को अत्यंत ही शुभ माना जाता है।इस साल  तो पंचांग के अनुसार मलमास में पद्मिनी एकादशी का व्रत पड़ने के कारण यह बहुत ज्यादा पुण्यदायी हो गई है। हिंदू धर्म के अनुसार इस पावन संयोग में जो कोई भी साधक भगवान विष्णु के इस पावन व्रत का पूरी श्रद्धा, विश्वास और नियम के साथ करेगा  उसे जीवन से जुड़े सभी सुख और सौभाग्य प्राप्त होते हैं।

पद्मिनी एकादशी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त –

श्री हरि की कृपा बरसाने वाली पद्मिनी एकादशी की पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानते हैं। पंचांग के अनुसार इस साल अधिक मास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी का व्रत 29 जुलाई 2023 को दो बड़े शुभ योग में किया जाएगा। 29 जुलाई 2023 की सुबह 09.34 बजे तक ब्रह्म योग तथा 09.34 बजे से 30 जुलाई 2023 यानि पारण वाले दिन प्रात:काल 06.33 बजे तक इंद्र योग बना रहेगा। पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण 30 जुलाई 2023 को सुबह 05:41 से 08:24 के बीच किया जा सकेगा।

पद्मिनी एकादशी व्रत की विधि –

पद्मिनी एकादशी व्रत वाले दिन व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान सूर्यनारायण को जल देना चाहिए। उसके बाद इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने का संकल्प लेना होता है। इसके बाद वर्ती को घर के ईशान कोण में भगवान विष्णु की फोटो या मूर्ति को एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उसपर स्थापित करना  चाहिए। इसके बाद पीले पुष्प, पीले फल, धूप, दीप, चंदन, तुलसी आदि चढ़ाकर विधि-विधान से उनकी पूजा एवं एकादशी व्रत की कथा का पाठ करना चाहिए। इसके बाद आरती करें और फलाहार का सेवन करते श्री हरि के मंत्र का मन ही मन में जाप करते रहना चाहिए। पद्मिनी एकादशी व्रत पारण के बगैर अधूरा माना जाता है, इसलिए इसके अगले दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पारण जरूर करना चाहिए।

पद्मिनी एकादशी व्रत की सामग्री –

पीले पुष्प, पीले फल, धूप, दीप, चंदन, तुलसी रौली-मौली,पीले वस्त्र,गंगा जल आदि है। इसके अलावा मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी,एकादशी व्रत की कथा की किताब भी चाहिए होता है।सुपारी ,कपूर,चावल,केले का पेड़,घी,शहद और शक्कर चाहिए।

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