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Rajya Sabha Elections: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले MLA पर होगा एक्शन? क्या बर्खास्त कर देगी पार्टी… बारीकी से जानें सब कुछ

Rajya Sabha Elections: सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई विधायक दूसरी पार्टी के प्रत्याशी को वोट कर सकता है? राजनीतिक के जानकारों के अनुसार, वोटर्स अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी पार्टी को वोट करने के लिए स्वतंत्र है। अगर विधायक अपनी पार्टी की जगह पर किसी दूसरे पार्टी के उम्मीदवार को वोट करता है तो इसे क्रॉस वोटिंग कहा जाता है।

Rajya Sabha Elections: इन राज्यों में राज्य सभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर बढ़ी चिंता

Uttar Pradesh और Himachal Pradesh में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग से पहले सियासी पारा हाई हो गया है। समाजवादी पार्टी के आठ विधायक अखिलेश यादव की डिनर पार्टी में शामिल नहीं हुए। वहीं दूसरी ओर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए खेमे से भी कुछ विधायकों के नाराज होने की अटकलें हैं। जिसके बाद अब राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। इस वजह से क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों की सदस्यता को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

दरअसल, सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई विधायक दूसरी पार्टी के प्रत्याशी को वोट कर सकता है? राजनीतिक के जानकारों के अनुसार, वोटर्स अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी पार्टी को वोट करने के लिए स्वतंत्र है। अगर विधायक अपनी पार्टी की जगह पर किसी दूसरे पार्टी के उम्मीदवार को वोट करता है तो इसे क्रॉस वोटिंग कहा जाता है। अब अगर ऐसा होता है तो क्या क्रॉस वोटिंग करने वालों की सदस्यता चली जाएगी? नियम के अनुसार किसी भी विधायक की सदस्यता स्वत: समाप्त नहीं होगी।

विधायकों पर एक्शन ले सकती पार्टी

क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक के बारे में अगर पार्टी जानती है तो उसके खिलाफ एक्शन ले सकती है। इन सबके बीच एक और सवाल है कि क्या दूसरे दल के प्रत्याशी को वोट करने के बाद दलबदल कानून लागू होता है? इसका जवाब है- नहीं। जब तक सदस्य जिस पार्टी से विधायक है उस पार्टी से इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी में शामिल नहीं होता है तब तक वह दलबदल कानून के दायरे से बाहर हैं।

सदस्यता पर कोई खतरा नहीं

देखा जाए तो किसी विधायक के क्रॉस वोटिंग करने मात्र से सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है और किसी भी क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक की सदस्यता नहीं जाएगी। ऐसे में अब अगर सपा के विधायक बीजेपी को और बीजेपी खेमे के विधायक सपा को वोट करते हैं तो इसके बाद भी उनकी सदस्यता को कोई खतरा नहीं है। आइए बारीकी से जानते हैं सब कुछ…

अपनी दावेदारी पेश करता है हर दल

संविधान के मुताबिक, राज्‍यसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की ओर से व्हिप तो जारी किया जा सकता है, लेकिन ये बेअसर ही होता है। दरअसल, पार्टी की ओर से जारी व्हिप को मानना या ना उसके खिलाफ जाना पूरी तरह से विधायकों और सांसदों की मर्जी पर निर्भर करता है। वहीं, राज्‍यसभा चुनावों में पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान करने पर दलबदल कानून भी लागू नहीं होता है। बता दें कि राज्यसभा में सांसदों की ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्या होना हर पार्टी के लिए जरूरी है, क्योंकि इसी संख्या के आधार पर राष्ट्रपति चुनाव में हर दल अपनी दावेदारी पेश करता है।

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राज्‍यसभा सदस्‍यों की भूमिका अहम

राष्ट्रपति चुनाव में राज्‍यसभा के सदस्‍यों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। सबसे पहले जानते हैं कि क्रॉस वोटिंग क्या है और ऐसा करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है? क्रॉस वोटिंग का मतलब है कि अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर दूसरी पार्टी के पक्ष में वोट करना। आमतौर पर दुनियाभर में राजनीतिक दलों के बीच संसद या महत्वपूर्ण मामलों में क्रासवोटिंग के उदाहरण हैं। हालांकि, पार्टियां इसे व्हिप जारी कर रोकने की पूरी कोशिश करती है। हालांकि, कई बार राजनीतिक दलों को इसमें नाकामी मिलती है।

नहीं छीनी जा सकती सदस्यता

राज्‍यसभा चुनावों में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है। साफ है कि हिमाचल प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश में पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वाले विधायकों पर पार्टी नेतृत्‍व कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगा। बेशक संविधान के मुताबिक, पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर मतदान करने वाले विधायकों की विधानसभा सदस्‍यता नहीं छीनी जा सकती है। लेकिन, कोई भी राजनीतिक दल क्रॉस वोटिंग करने वाले अपने विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्‍ता जरूर दिखा सकता है।

ऐसे विधायकों पर क्‍या होगी कार्रवाई

ये पार्टी नेतृत्‍व का विशेषाधिकार होता है। साफ है कि दोनों ही राज्‍यों में राजनीतिक दल अपने जिस-जिस विधायक का नाम क्रॉस वोटिंग में सामने आएगा, उन्‍हें पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखा सकती है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो उनकी पार्टी की प्राथमिकता सदस्‍यता तक छीनी जा सकती है। हिमाचल में ये पूरी तरह से कांग्रेस तो यूपी में सपा पर निर्भर होगा कि वे ऐसे विधायकों के खिलाफ क्‍या कार्रवाई करते हैं।

कांग्रेस ने सभी पदों से कर दिया बर्खास्त

राष्‍ट्रपति चुनावों के दौरान भी देखा गया था कि में एनडीए की उम्मीदवार Droupadi Murmu ने जबरदस्त जीत हासिल की। उम्‍मीद के उलट उन्हें ज्यादा वोट मिले। साफ था कि पूरे देश में उनके पक्ष में पार्टी के लोगों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया। इसके बाद पिछले राज्यसभा चुनावों में देखा गया कि हरियाणा के कुलदीप विश्‍नोई ने क्रास वोटिंग की। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें सभी पदों से बर्खास्त कर दिया। राष्‍ट्रपति चुनाव के मामले में प्रावधान है कि पार्टियां व्हिप जारी नहीं कर सकती।

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संविधान या प्रावधानों के दायरे में नहीं होगी कार्रवाई

दरअसल, President या Vice President के चुनावों को सदन की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाता। इसमें सांसद या विधायक अपनी इच्छा से वोट कर सकते हैं। हालांकि, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे पार्टी लाइन पर ही वोट दें। ये भी दलबदल कानून के तहत नहीं आता है। राज्‍यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ पार्टियां कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन ये संविधान या प्रावधानों के दायरे में नहीं होगी। ये कार्रवाई उनका अंदरूनी मसला होगा।

विधायकों को कारण बताओ नोटिस दे सकती पार्टी

पार्टियां क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को कारण बताओ Notice दे सकती हैं। जवाब से संतुष्‍ट नहीं होने पर पार्टी से निलंबित या बर्खास्त किया जा सकता है। वैसे तो राज्‍यसभा चुनाव में किसने किसे वोट किया, ये सीधे तौर पर पता नहीं किया जा सकता है। लेकिन, हर पार्टी में अंदरूनी तौर पर इस बात का पता कई तरीकों से लगाया जा सकता है। कई बार इसका पता नहीं लगता। लिहाजा, इन चुनावों में क्रासवोटिंग करने वालों के खिलाफ पार्टी बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं होती है।

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vrinda

मैं वृंदा श्रीवास्तव One World News में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर कार्य कर रही हूं। इससे पहले दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स न्यूज पेपर में काम कर चुकी हूं। मुझसे vrindaoneworldnews@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।
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