Categories
काम की बात करोना

जाने कैसे ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चों को दे हेल्दी और खुशनुमा माहौल

जाने कैसे पैरेंट्स के लिए ऑनलाइन क्लास बन गई है एक चैलेंज


पिछले साल से फैले कोरोना वायरस ने आज के समय पर हम सभी की लाइफ को एक तरह से बदल सा दिया है। जहां लोग पहले डेली ऑफिस जाया करते थे वहां आज लोगों के ऑफिस बंद पड़े हुए है और वो वर्क फ्रॉम होम कर रहे है। आज के समय पर लोगों को सुबह जल्दी उठने की या ड्राइव करके ऑफिस जाने की चिंता नहीं सताती। अब हमारी प्यारी लेडीज को ऑफिस में कल क्या पहनना है वो टेंशन भी नहीं रहती। लेकिन जहां लोगों की टेंशन आधी खत्म हुई है वही पैरेंटस् के लिए चीजें आसान होने के साथ के साथ थोड़ी जटिल भी हुई हैं। आज भले ही बच्चों को सुबह उठने और तैयार हो कर स्कूल जाने की टेंशन न रही हो लेकिन पैरेंटस् आज उनका स्कूल ड्रेस में स्कूल जाते देखना चाहते है उन्हें थके हारे घर आना बहुत ज्यादा मिस कर रही है। क्योकि जब से बच्चों की वर्चुअल लर्निंग क्या शुरू हुई मानो पैरेंट्स के लिए काम डबल हो गया। आज के समय पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास किसी चैलेंज से कम नहीं हैं। बच्चों और टीचर दोनों को ऑनलाइन क्लास में टेक्निकल परेशानियों से लेकर समझने और समझाने की भी कई दिक्कतें आती है। तो चलिए आज आपको बताते है अगर आपका बच्चा ऑनलाइन क्लास ले रहा है तो कैसे आप उससे हेल्दी और खुशनुमा माहौल दे सकते है।

माहौल हो शांत: अगर आपका बच्चा ऑनलाइन क्लास लेता है तो उसके लिए वर्किंग स्टेशन निर्धारित करते समय आपको ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि जगह शांत हो जिससे की पढ़ाई के समय बच्चे को किसी भी तरह का कोई डिस्टरबेंस ना हो। आपको बच्चे की लर्निंग स्टेशन जैसी जगह रखनी चाहिए जहां घर के और लोगों की आवाजाही कम हो।

और पढ़ें: जाने विशाल मेगामार्ट की शुरुआती कहानी, कैसे एक फोटोकॉपी की दुकान से 1000 करोड़ की कंपनी बनाई

टाइम टेबल: आपको अपने बच्चे को समझना चाहिए कि भले ही उससे स्कूल नहीं जाना लेकिन उससे अपनी पढ़ाई पूरी करनी होगी। उससे एक अच्छा टाइम टेबल फॉलो करना होगा। घर पर स्कूल की तरह बेल तो नहीं बज सकती लेकिन आपको बच्चे को पंक्चुअल होने के फायदे ज़रूर गिनवाने चाहिए। आपको बच्चे को समझना चाहिए कि टीचर के लाग- इन करने से 5 मिनट पहले उन्हें क्लास में एंटर कर लेना चाहिए।

लर्निंग स्टेशन बनाएं: ऑनलाइन क्लास लेने के लिए सबसे पहले आपको अपने बच्चे के लिए ऐसी जगह निर्धारित करनी चाहिए जहा हर रोज़ बैठ कर वह अपनी क्लासेस अटेंड कर पाए। क्योकि रोज रोज जगह बदलने से बच्चे का फोकस बिगड़ेगा। घर के एक जगह पर टेबल चेयर लगा लें और बच्चे के डेकसटाप या लैपटॉप वहां रख दे।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
लाइफस्टाइल

जाने क्या होती है हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग और कैसे होती है यह बच्चों के लिए नुकसानदेह

जाने क्या होती है हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग


पैरेंटिंग ये शब्द जितना सुनने में अच्छा लगता है उससे कई गुना ज्यादा इसमें ज़िम्मेदारियां होती है। हर माता पिता चाहते हैं कि वो अपने बच्चे को एक अच्छी परवरिश दे। उससे उंगली पकड़ कर उससे चलना सिखाएं। उसकी हर चीज में उसका साथ दे, उसके साथ खड़े रहे। लेकिन कई बार ये प्यार और केयर एक अलग लेवल पर चली जाती है जिसे हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग है। जब कोई भी माता पिता अपने बच्चे की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल देने लगते हैं अपने बच्चे के साथ हेलिकॉप्टर की तरह हरदम मंडराते रहते है जिसे वो खुद अपने फैसले नहीं ले पाता है। उससे ही हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग कहा जाता है।

 

जाने क्या करें, क्या न करें

जब बच्चा छोटा होता है तो उससे हर पल माता पिता के साथ की ज़रूरत होती है लेकिन जैसे जैसे वो बड़ा होता है। उसकी ये जरूरत कम होने लगती है। हां ये बात सही है कि बच्चे को आपके साथ की ज़रूरत होती है, आपके मोटिवेशन की जरूरत होती है, उससे पढ़ाई में भी आपकी मदद चाहिए होती है। एक माता पिता होने के नाते आपको पता होना चाहिए कि आपके बच्चे के दोस्त कौन कौन है उनके बीच किस तरह की बातें होती है लेकिन दिक्कत तब आने लगती है जब आप हर बात पर उनकी जिंदगी में इंटरफेयर करने लगते है। तो चलिए आज हम आपको बताएंगे बच्चों के साथ कब क्या किया जाना चाहिए जिससे की आपके और आपके बच्चे के बीच प्रॉब्लम न आये।

आज़ादी: आपको अपने बच्चे को थोड़ी आज़ादी देनी चाहिए। माना की आपको अपने बच्चे की चिंता होती है लेकिन आप खुद सोचिये, क्या आप चाहेंगे है कि आपके बच्चे को जिंदगी भर आपकी जरूरत पड़े। वो खुद इंडिपेंडेंट होकर अपनी प्रॉब्लम्स खुद सुलझा न सकें। नहीं न तो इसलिए आपको अपने बच्चे को थोड़ी आज़ादी देनी चाहिए जिसे वो इंडिपेंडेंट होकर अपनी प्रॉब्लम्स खुद सुलझा सकें।

और पढ़ें:  जाने वास्तु के अनुसार घर पर एक्वेरियम रखना क्यों माना जाता है शुभ

बच्चे अपना काम खुद करें: आपको अपने बच्चे को बचपन से ही सीखना चाहिए कि उससे अपने काम खुद करने चाहिए। क्योकि ये उसके आने वाले कल के लिए ठीक है। बच्चे को लाड़-प्यार करना चाहिए लेकिन उससे कभी भीं लाड़-प्यार में बिगाड़ना नहीं चाहिए।

लड़ाई: आपको अपने बच्चे को हर सिचुएशन को हैंडल करना सीखना चाहिए। अगर आपके बच्चे की स्कूल में लड़ाई हो जाएं, तो आपको उससे घर पर ही समझाना चाहिए कि उससे सिचुएशन को कैसे हैंडल करना है न की उसके स्कूल खुद चले जाएं टीचर से शिकायत लगाने या दूसरे बच्चों को डांटने।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
लाइफस्टाइल

जाने आखिर किताबें पढ़ना क्यों है जरूरी, साथ ही जाने दिमाग को इससे मिलने वाले फायदों के बारे में

किताबें पढ़ना  सिर्फ आपकी नॉलेज के लिए बल्कि आपकी हेल्थ और वेलनेस के लिए भी है फायदेमंद


किताबें हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है आपको याद होगा कि जब आप छोटे बच्चे थे तो

आपके माता पिता आपके टीचर सभी लोग आपको किताब पढ़ने को कहते थे। क्योंकि किताब पढ़ना एक अच्छी आदत है। किताब पढ़ना से  न सिर्फ आपकी नॉलेज बढ़ती है बल्कि ये आपके हेल्थ और वेलनेस के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। शायद इसीलिए बचपन में हमारे माता पिता से लेकर डॉक्टर, टीचर्स और लाइब्रेरियन तक

सभी लोग हमे कहते थे कि हमें किताबे पढ़नी चाहिए। लेकिन शायद आपको किसी ने ये नहीं बताया होगा कि रोज किताब पढ़ने से आपके दिमाग को क्या फायदे मिलते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक रोज किताब पढ़ने से न सिर्फ आप स्मार्ट बनते है बल्कि आपकी उम्र बढ़ने के साथ यह आपको शार्प और एनालिटिकल भी बनाता है। तो चलिए आज हम आपको बताएंगे रोज किताब पढ़ने के फायदे।

और पढ़ें:  जाने क्या ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली और गर्भवती महिलाओं को लेनी चाहिए कोरोना वैक्सीन

 

1.     दिमाग की कनेक्टिविटी बढ़ती है: क्या आपको पता है रोज किताब पढ़ने से दिमाग की कनेक्टिविटी बढ़ती है।एक रिसरच के मुताबिक नोवेल पढ़ने से आपके दिमाग कीकनेक्टिविटी बढ़ती है यह कनेक्टिविटी  सिर्फ किताब पढ़ते हुए तक रहती है बल्कि लम्बे समय तक आपके दिमाग में रहती है।

2. कम्यूनिकेशन को बेहतर बनाती हैअगर आप अपनी कम्यूनिकेशन को बेहतर बनना चाहते है तो आपको रो किताब पढ़ना चाहिए। जो व्यक्ति रोज किताबें पढ़ता है उसकी वोकैबलरी हमेशा उस व्यक्ति से बेहतर होगी जो कभी किताब नहीं पढ़ता। एक रिसर्च के मुताबिक रीडिंग एक्सरसाइज ब्रेन टिशूज़ को पॉजिटिवली बदल सकता है। इतना ही नहीं इससे ब्रेन खु को रिवायर करता है और ब्रेन में व्हाइ मैटर को बढ़ाता है।

3. याददाश्तरेगुलर बुक रीडिंग एक ब्रेन एक्सरसाइज का काम करती है। रेगुलर रीडिंग से  सिर्फ आपकी याददाश्त तेज होती है बल्कि आपकी चीजों पर अटेंशन करने की क्षमता भी बढ़ जाती है। रेगुलर रीडिंग से ब्रे को सीक्वेंस में सोचने में मद मिलती है। इससे आपके दिमाग का अटेंशन स्पैन भी बढ़ता है।

4. एनालिटिकल रीज़निंग: अगर आप भी थ्रिलर बुक्स लवर है तो आप  बात को मानते होंगे कि थ्रिलर बुक्स ढ़ने से आपकी एनालिटिकल रीज़निंग में सुधार होता है। आपका बारबा रहस्यों और रोमांच के बारे में पढ़ना आपके ब्रेन को उसी तरह फ्रे करता है।

5. ब्रेन सेल्स को मजबूत बनाना: एक रिसर्च के मुताबिक बुक रीडिं के समय दिमाग में

सर्किट और सिंग्नल्स का एक कॉम्प्लैक्स नेटवर्क काम करता है। जैसेजैसे आपकी रीडिंग की हैबि बढ़ती है वैसेवैसे ब्रेन सेल् नेटवर्क भी मजबूत होते है। अपने बहुत सारे लोगों से सुना होगा कि जब वो

किताब पढ़ते है तो उनको ऐसा फील होता है जैसे वो फिल्म देख रहे हो। ऐसा इमेजिनेशन के कारण होता है। जितना अधिक आप पढ़ते है उतनी ही आपकी इमेजिनेशन पॉवर बढ़ती है।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
सेहत

अगर आपका बच्चा भी कर रहा है परीक्षा की तैयारी, तो ये चीजे करे उसकी डाइट में शामिल, दिमाग बनेगा तेज

दिमाग तेज करने के लिए इन चीजों को करे अपने बच्चे की डाइट में शामिल


 

अपने देखा होगा कि जब भी बच्चों के परीक्षा आने वाली होती है तो उससे पहले वो बहुत ज्यादा परेशान हो जाते है कि इतना कुछ कैसे याद करें। इसके लिए वो रात-रात भर जगकर पड़ते रहते है। उनके मन में भी एक अजीब सा डर रहता है। अपना सारा सिलेबस याद करने के लिए वो दिन रात मेहनत करते है साथ ही अपने दिमाग को तेज करने के लिए तमाम कोशिशें करते हैं जिनसे उन्हें लाभ मिल सके। लेकिन बच्चे ये नहीं समझ पाते कि कुछ भी याद करने और पढ़ाई करने के लिए उनका तंदुरुस्त होना बेहद जरूरी है। लेकिन आपको माता पिता होने के नाते अपने बच्चे का ध्यान रखना चाहिए और उसकी डाइट में ऐसी चीजे शामिल करनी चाहिए जिसे उसका दिमाग तेज हो। तो चलिए आज हम आपको कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहे है जिसे डाइट में शामिल करने के बाद आपके बच्चे का दिमाग तेज बनेगा।

 

सेब: अगर आपका बच्चा स्कूल में है और उसकी परीक्षा आने वाली है तो आपको आपने बच्चे की डाइट में डेली एक सेब को शामिल करना चाहिए। क्योकि जब भी बच्चे एग्जाम के लिए तैयारी करते हैं, तो कई बार वो कई चीजें याद नहीं हो पाती है ऐसे में रोजना एक सेब का सेवन आपके बच्चे के दिमाग को तेज बनाएगा। क्योकि सेब में क्यूरसेटिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हमारे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है।

 

और पढ़ें: इम्यूनिटी बढ़ाने के चक्र में न ले जरूरत से ज्यादा विटामिन-सी, वरना झेलने पड़ेगे ये साइड इफेक्ट

 

Image source – pressurecookrecipes

अड़ा: अगर आपको अंडे खाना पसंद है तो ये आपके लिए एक अच्छी चीज है। क्योकि अंडे आपके दिमाग को तेज करने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं। अंडे में बहुत सारे पोषक तत्व मौजूद होते है। शायद इसी लिए अंडे को प्रकृति के मल्टीविटामिन के रूप में जाना जाता है। अंडे में विाटमिनबी6, बी12, कोलीन, और फोलिक एसिड पाया जाता है।

 

सोया: सोया बच्चों के दिमाग को तेज बनाने में हमारी मदद करता है। इसके सेवन से बच्चों को चीजें याद रखने में काफी मदद मिलती है। सोया में पॉलीफेनोल्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। सोया बच्चों की याददाश्त को सही रखने में भी हमारी मदद करता है। इतना ही नहीं सोया में आइसोफ्लेवोन्स नाम का पॉलीफेनोल्स होता है, जो केमिकल एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करने के लिए जाना जाता है।

 

मांसाहारी खाना: अगर आपकी फॅमिली मांसाहारी है तो इसका फायदा आपके बच्चे को भी मिलेगा। क्योकि मछली खाने से आपके बच्चे का दिमाग तेज होगा। इससे आपके बच्चे को परीक्षा के समय चीजे याद करने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो हमारे बच्चे के दिमाग की हेल्थ को दुरुस्त करने के लिए काफी जरूरी होता है।

 

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

स्कूलों की तानाशाही, एफडी तोड़ बच्चों की फीस भरने को मजबूर है अभिभावक 

निजी स्कूलों ने दी अभिभावक को चेतावनी, फीस न भरने पर परीक्षाओं में नहीं बैठ पाएंगे बच्चे


मिलेनियम सिटी में अपने बच्चों को प्राइवेट और बड़े स्कूलों में पढ़ाना लोगों का सपना होता है. लोगों को लगता है है कि जितने बड़े स्कूल में उनका बच्चा पढ़ेगा उतनी ज्यादा उनकी शान बढ़ेगी. हर साल अभिभावक इन स्कूलों में लाखो रुपये की फीस भरते है. लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण सभी लोगों का बजट बिगड़ा गया है. कई अभिभावकों की नौकरी चली गई तो कई की सैलरी में कटौती कर दी गई . आलम यह अब यह है कि अभिभावक बच्चों की स्कूल भरने के लिए अपनी ज्वेलरी बेच रहे हैं और एफडी तुड़वा रहे हैं. इसके पीछे कारण यह है कि इस बार प्राइवेट और बड़े स्कूल अभिभावकों पर फीस का दबाव बनाने के लिए अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं और बोर्ड की परीक्षाओं का हवाला दे रहे हैं. यहाँ तक की स्कूलों ने अभिभावकों को फीस न भरने पर निजी स्कूल परीक्षाओं में बच्चों को न बिठाने की चेतावनी भी दे दी है.

और पढ़ें: देशव्यापी हड़ताल के बीच बिल के विरोध में  पंजाब के किसान उतरे पटरियों पर, 20 ट्रेनें हुई रद्द

स्कूल की फीस भरने के बाद ही अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में बैठ पाएंगे स्टूडेंट्स 

हाल ही में सोशल मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार गुरुग्राम अभिभावक संगठन के सदस्य हिमांशु शर्मा ने बताया कि बहुत से अभिभावक फीस न भर पाने के कारण इतना परेशान हो चुके है कि अब उन्हें इसके लिए अपनी एफडी तुड़वानी पड़ी.  यहाँ तक की कुछ अभिभावकों ने इसके लिए अपनी ज्वेलरी भी गिरवी रखी है. अभिभावक बच्चे का नाम स्कूल से न कटे इसके लिए अब तक लाखों रुपये स्कूल में भर चुके है. अभिभावकों का कहना है कि अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इसलिए मजबूरी में उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाई और ज्वेलरी भी गिरवी रखी है.

40 हजार से ज्यादा छात्रों ने छोड़े निजी स्कूल

जुलाई तक हरियाणा में 43,293 छात्र निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले चुके है. जिसमें से 2453 स्कूल गुरुग्राम से हैं. और 2074 छात्र फरीदाबाद के निजी स्कूलों को छोड़ चुके हैं. अभी यह आंकड़ा और भी बढ़ता जा रहा है. निदेशालय जल्द ही सोशल मीडिया पर दूसरी रिपोर्ट भी पेश करेगा. गुरुग्राम में बहुत बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावकों भी है, जो अपने बच्चों का स्कूल छुड़वा कर घर पर बिठा चुके हैं.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

Covid 19 Guidelines: स्कूल खुलने बाद कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीचर और स्टूडेंट को फॉलो करनी होगी ये चीजें 

कोरोना वायरस से बचाव के लिए ध्यान रखनी होगी ये बातें


अभी हाल ही में गृह मंत्रालय ने कक्षा 9 से 12 के लिए स्वैच्छिक आधार पर स्कूलों को आंशिक रूप से एक बार फिर से खोलने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, जो भी छात्र स्कूल आएगा. वो अपने माता-पिता से लिखित अनुमति के साथ ही अपने शिक्षकों से मार्गदर्शन लेने के लिए अपने स्कूलों का आ सकता है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से कोरोना वायरस के जोखिम को कम करने के लिए सभी छात्रों और शिक्षकों को कुछ चीजें ध्यान में रखनी होगी. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि कोरोना वायरस से खुद का और दूसरा का बचाव करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

और पढ़ें: अब लोगों के दिलों से खत्म हो रहा है कोरोना का डर, भूल रहे है अपनी जिम्मेदारी

  1. स्कूल में शिक्षक और छात्रों दोनों को ही सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखनी होगी. इसलिए स्कूल में प्रवेश का आयोजन संगठित रूप से किया जाना चाहिए.
  2. फेस मास्क का उपयोग छात्रों, शिक्षको और अन्य स्कूल स्टाफ के लिए बेहद जरूरी है.
  3. गृह मंत्रालय के अनुसार, जो भी शिक्षक और छात्र कंटेनमेंट ज़ोन में रह रहे हैं उन्हें स्कूल आने की अनुमति नहीं होगी. सिर्फ उन्हीं शिक्षक और छात्रों को स्कूलों आने की अनुमति होगी, जो कंटेनमेंट ज़ोन में नहीं हैं.
  4. सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए, छात्रों के बैठने का इंतज़ाम उसी तरह होगा, जिसे सभी छात्रों के बीच कम से कम 6 फीट की दूरी बनी रहेगी.
  5. गृह मंत्रालय ने स्कूलों को कहा है कि वे क्लास की बजाय ज़्यादा से ज़्यादा बाहर की जगह का इस्तेमाल करें.
  6. गृह मंत्रालय ने स्कूलों को कहा है कि एसी के इस्तेमाल से बचें या फिर एसी का तापमान 24-30 के बीच ही रखें.
  7. गृह मंत्रालय के मुताबिक जो छात्र या शिक्षक बीमार महसूस कर रहे हो, वे स्कूल न आएं. सभी लोगो को अपनी स्वच्छता का ख्याल सबसे पहले रखना चाहिए.
  8. गृह मंत्रालय के अनुसार अगर कोई छात्र स्कूल जाने का फैसला करता हैं, तो उनके पास अपने माता-पिता द्वारा लिखित अनुमति होनी चाहिए.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

International Literacy Day: जाने क्यों मनाया जा है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस और इसका महत्व

जाने कब मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस


हर साल 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है. दुनिया भर में शिक्षा के महत्व को दर्शाने और निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य से 17 नवंबर 1965 को यह निर्णय लिया गया, कि प्रत्येक वर्ष 8 सि‍तंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा. 1966 में पहली बार शिक्षा को दर्शाने और बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया था. यूनेस्को का मानना है कि शिक्षा सबके लिए एक मानवाधिकार है, जो पूरी ज़िंदगी काम आती है. किसी भी व्यक्ति के जीवन में इसकी उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों का तालमेल होना बेहद जरूरी है. इसका मुख्य समारोह यूनेस्को के मुख्यालय फ़्रांस की राजधानी पेरिस में मनाया जाएगा.

भारत में चल रहासाक्षर भारत मिशनका मुख्य उद्देश्य 

भारत में ‘साक्षर भारत मिशन’ के नाम से चलाया जा रहा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि इसके द्वारा साक्षर लोगों की संख्या में वृद्धि की जा सकें. इसके लिए उम्र में बड़े लोगों को यानि प्रौढ़ लोगों को साक्षरता का बेहद बुनियादी प्रशिक्षण देकर, परीक्षाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है. इतना ही नहीं इसमें पास होने वाले व्यक्तियों को उनका साक्षर होने का प्रमाण पत्र दिया जाता है.

और पढ़ें: नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के साथ ही मरीजों को पर्ची रखने से मिलेगी निजात

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व

साक्षरता कौशल विकास का एक मूलभूत भाग है. इसका विकास जीवन भर होता रहता है. साथ ही साक्षरता एक मानव अधिकार है यह व्यक्तिगत सशक्तिकरण का न केवल एक उपकरण है बल्कि मानव और सामाजिक विकास के लिए एक प्रमुख साधन भी है. साक्षरता में वृद्धि पूरी तरीके से शैक्षिक संभावनाओं पर निर्भर करता हैं. साक्षरता सभी लोगों के लिए मौलिक शिक्षा का मूल है. साथ ही गरीबी को दूर करने, बाल मृत्यु दर में कमी करने, जनसंख्या वृद्धि को रोकने, शांति और लोकतंत्र को मजबूत बनाये रखने जैसी चीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
सेहत

डिजिटल क्लास बन सकती है आपके बच्चे की सर्वाइकल की वजह, इन बातों का रखें खास ध्यान

डिजिटल क्लास से होने वाली समस्याएं – ऐसे रखे अपने  बच्चे का ख्याल


कोरोना वायरस ने लोगों के सामने नए तरीके से जीवन जीने की चुनौती पैदा कर दी है। अब आप सामान्य दिनों की तरह काम-काज नहीं कर पाते है। अब आपको कुछ भी करने और कही भी जाने से पहले बहुत सारी चीजें सोचनी पड़ती हैं । कुछ समय पहले आये कोरोना ने सभी लोगों को परेशान कर के रख दिया है अभी सभी लोगों का लाइफस्टाइल बदल गया है। और ये  हमारे लिए अच्छा भी है कि सभी लोग मौजूदा हालात को नया सामान्य मानते हुए आगे बढ़े। इन दिनों सबसे बड़ी मुसीबत माता पिता के लिए उनके बच्चों की पढ़ाई है। क्योकि इस समय बच्चों को डिजिटल क्लास से पढ़ाया जा रह है। इसके लिए परिवार वालों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं इसके साथ बच्चों को भी आए दिन कई तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। जैसे मसलन- चिड़चिड़ापन, मानसिक समस्याएं और आंखों पर स्ट्रेस आदि। तो चलिए आज हम आपको बतायेगे डिजिटल क्लास से जुडी महत्वपूर्ण बातें।

1. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के गाइडलाइन के अनुसार प्री-प्राइमरी स्टूडेंस के लिए ऑनलाइन क्लास का समय 30 मिनट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जबकि कक्षा 1 से 8 के लिए 45 मिनट के दो ऑनलाइन सेशन होंगे। कक्षा 9 से 12 के लिए 30-45 मिनट की चार ऑनलाइन सेशन होंगे।

2. ऑनलाइन क्लास ने सभी  के लिए मुसीबत पैदा कर दी है। क्योंकि लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। कई बार खराब इंटरनेट के कारण वीडियो और ऑडियो की क्वालिटी खराब होती है जिसके कारण बच्चों को कॉन्संट्रेशन की समस्या हो सकती है। और उनको चीजें समझ भी नहीं आती है।

और पढ़ें: किताबों से दोस्ती होती  है बेहद फायदेमंद, जाने इससे दिमाग को मिलने वाले फायदों के बारे में

3. भारत के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पढ़ना  नया है। इसके लिए शिक्षक, बच्चे और उनके माता पिता कोई भी पूरी तरह से तैयार नहीं है। शिक्षकों के लिए भी ये बिल्कुल नया है तो उनके लिए भी आसान नहीं होता एक साथ इतने बच्चों का ध्यान रख पाना। जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।

4. लगातार लम्बे समय तक ऑनलाइन क्लास लेने से बच्चों को आने वाले समय में कमर संबंधी, सर्वाइकल स्पाइन और मोटापे जैसी परेशानी हो सकती है।

5. जब बच्चे घर से ऑनलाइन क्लास से पढ़ते है तो उन्हें बहुत सारी चीजों का सामना करना पड़ता है जैसे बच्चा कितनी हाइट की कुर्सी पर बैठ रहे है ,उसकी स्क्रीन का साइज कितना बड़ा है। उसकी बैठने की मुद्रा सही है या नहीं। ये सारी बाते सीधे बच्चे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इस लिए कोशिश  करे जब भी बच्चा क्लास ले तो इटरनेट की स्पीड अच्छी हो। और अपने आपके स्क्रीन का साइज भी बड़ा हो। उसके बैठने का तरीका ठीक हो।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
लाइफस्टाइल

किताबों से दोस्ती होती  है बेहद फायदेमंद, जाने इससे दिमाग को मिलने वाले फायदों के बारे में

किताब पढ़ना न सिर्फ आपकी नॉलेज के लिए बल्कि आपकी हेल्थ और वेलनेस के लिए भी है फायदेमंद


किताबें हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा होती है आपको याद होगा कि जब आप छोटे बच्चे थे तो आपके माता पिता आपके टीचर सभी लोग आपको किताब पढ़ने को कहते थे। क्योकि किताब पढ़ना एक अच्छी आदत है। किताब पढ़ना न सिर्फ आपकी नॉलेज बढ़ती है बल्कि ये आपके हेल्थ और वेलनेस के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। शायद इसी लिए बचपन में हमारे माता पिता से लेकर डॉक्टर, टीचर्स और लाइब्रेरियन तक सभी लोग हमे कहते थे कि हमे किताबे पढ़नी चाहिए। लेकिन शायद आपको किसी ने ये नहीं बताया होगा कि रोज किताब पढ़ने से आपके दिमाग को क्या फायदे मिलते है। एक रिसर्च के मुताबिक रोज किताब पढ़ने से न सिर्फ आप स्मार्ट बनते है बल्कि आपकी उम्र बढ़ने के साथ यह आपको शार्प और एनालिटिकल भी बनाता है। तो चलिए आज हम आपको बताएंगे रोज किताब पढ़ने के फायदे।

1. दिमाग की कनेक्टिविटी बढ़ती है: क्या आपको पता है रोज किताब पढ़ने से दिमाग की कनेक्टिविटी बढ़ती है। एक रिसर्च के मुताबिक नोवेल पढ़ने से आपके दिमाग की कनेक्टिविटी बढ़ती है यह कनेक्टिविटी न सिर्फ किताब पढ़ते हुए तक रहती है बल्कि लम्बे समय तक आपके दिमाग में रहती है।

और पढ़ें: अगर आपको भी पसंद है ब्यूटी प्रोडक्ट् तो खरीदते हुए इन बातों का रखें खास ख्याल

2. कम्यूनिकेशन को बेहतर बनती है: अगर आप अपनी कम्यूनिकेशन को बेहतर बनना चाहते है तो आपको रोज किताब पढ़ना चाहिए। जो व्यक्ति रोज किताबें पढ़ता है उसकी वोकैबलरी हमेशा उस व्यक्ति से बेहतर होगी जो कभी किताब नहीं पढ़ता। एक रिसर्च के मुताबिक रीडिंग एक्सरसाइज ब्रेन टिशूज़ को पॉजिटिवली बदल सकता है। इतना ही नहीं इससे ब्रेन खुद को रिवायर करता है और ब्रेन में व्हाइ मैटर को बढ़ाता है।

3. याददाश्त: रेगुलर बुक रीडिंग एक ब्रेन एक्सरसाइज का काम करती है। रेगुलर रीडिंग से न सिर्फ आपकी याददाश्त तेज होती है बल्कि आपकी चीजों पर अटेंशन करने की क्षमता भी बढ़ जाती है। रेगुलर रीडिंग से ब्रेन को सीक्वेंस में सोचने में मदद मिलती है। इससे आपके दिमाग का अटेंशन स्पैन भी बढ़ता है।

4. एनालिटिकल रीज़निंग: अगर आप भी थ्रिलर बुक्स लवर है तो आप इस बात को मानते होंगे कि थ्रिलर बुक्स पढ़ने से आपकी एनालिटिकल रीज़निंग में सुधार होता है। आपका बार-बार रहस्यों और रोमांच के बारे में पढ़ना आपके ब्रेन को उसी तरह फ्रेम करता है।

5. ब्रेन सेल्स को मजबूत बनाना: एक रिसर्च के मुताबिक बुक रीडिंग के समय दिमाग में सर्किट और सिंग्नल्स का एक कॉम्प्लैक्स नेटवर्क काम करता है। जैसे-जैसे आपकी रीडिंग की हैबिट बढ़ती है वैसे-वैसे ब्रेन सेल्स नेटवर्क भी मजबूत होते है। अपने बहुत सारे लोगों से सुना होगा कि जब वो किताब पढ़ते है तो उनको ऐसा फील होता है जैसे वो फिल्म देख रहे हो। ऐसा इमेजिनेशन के कारण होता है। जितना अधिक आप पढ़ते है उतनी ही आपकी इमेजिनेशन पावर बढ़ती है।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Categories
हॉट टॉपिक्स

CBSE 12th Board Result 2020: आज सीबीएसई ने जारी किया 12वीं का रिजल्‍ट, हर साल की तरह इस साल भी लड़कियों ने मारी बाजी

इस साल त्रिवेंद्रम के छात्रों ने मारी बाजी


 

आज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानि सीबीएसई ने 12वीं का रिजल्‍ट जारी किया। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर दी। इस बार सीबीएसई ने मेरिट लिस्ट नहीं जारी की। हालांकि सीबीएसई बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक इस साल सबसे अच्छा रिजल्‍ट त्रिवेंद्रम के छात्रों का है। त्रिवेंद्रम में करीब 97.67 फीसद छात्र पास हुए है। जबकि दूसरे नम्बर पर बैंगलोर और तीसरे नम्बर पर चेन्नई है। पिछले साल के मुकाबले इस साल 5.38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, इस साल पास होने वाले छात्रों की सख्या 88.78 फीसद है।

दिल्ली में लड़कों के मुकाबले लड़कियों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन

आज सीबीएसई ने 12वीं क्लास का रिजल्‍ट जारी किया। इस बार भी लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। अगर हम बात करे भारत की राजधानी दिल्ली के पश्चिमी जोन की तो इस बार यहाँ 94.61 फीसद छात्र पास हुए और अगर हम बात करे दिल्ली के पूर्वी जोन की तो यहाँ 92.24 फीसद छात्र पास हुए।

और पढ़ें: जाने UGC एग्जाम से जुड़ी हर डिटेल, सरकार ने जारी की एग्जाम की नई गाइडलाइन

विदेश में इतने फीसद छात्र हुए पास

जैसा की हम सब लोग देख रहे है कि पिछले कुछ समय से कोरोना महामारी चल रही है, जिसके चलते ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया इससे परेशान है। कोरोना महामारी के कारण न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी छात्रों की परीक्षाएं टाल दी गई थी। आज जब सीबीएसई ने रिजल्‍ट जारी किया तो इस पर आपको कोरोना महामारी का असर देखने को मिल जाएगा। इस साल बच्चों का रिजल्‍ट कुछ खास नहीं रहा। इस साल विदेश में पड़ने वाले 94.26 फीसद छात्र पास हुए जबकि पिछली साल 95.43 फीसद छात्र पास हुए थे।

कैसे देखें अपना रिजल्ट

अगर आपको अपना या किसी अपने जाने वाले का रिजल्ट देखना है तो आप सीबीएसई की ऑफिसियल वेबसाइट cbse.nic.in पर देख सकते है। अगर सीबीएसई की ऑफिसियल वेबसाइट न चले तो आप cbseresults.nic.in पर देख सकते है। साथ ही आपको ये भी बता दे कि अगर आप रिजल्ट देख रहे है तो वेबसाइट बीच में हैंग हो सकती है इससे आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योकि इस तरह की परेशानी वेबसाइट में सुबह से दो तीन बार आ चुकी है।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com