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घरों में झाड़ू-पोछा लगा कर मां ने एक बेटी को बनाया डॉक्टर: माँ का साथ हो तो हर तैयारी हैं आसान, हैं न ? 

लोगों के घरों में झाड़ू-पोंछा लगाकर भी माँ ने पूरा किया बेटी का सपना


अपने लोगों की सफलता की कहनी तो बहुत सुनी होगी परन्तु आज हम आपको एक माँ की सफलता की कहानी बताने जा रहे है। कैसे एक माँ ने सब्जी की दुकान लगाकर, लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाकर और स्टैंड पर पानी बेचकर अपनी बेटी को डॉक्टर बना दिया। ये कहानी यूपी के हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे की रहने वाली सुमित्रा की है। सुमित्रा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके  2 बेटे और 3 बेटियां। 14 साल पहले सुमित्रा के पति की मौत किसी बीमारी की वजह से हो गई थी। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी सुमित्रा पर आ गई थी। सुमित्रा ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी गरीबी का असर अपने बच्चों की पढ़ाई पर नहीं आने दिया।

सबसे छोटी बेटी को बनाया डॉक्टर

सुमित्रा ने बताया की उनके सबसे छोटी बेटी अनीता पढ़ाई में बचपन से ही बेहद होशियार है और डॉक्टर बनना चाहती थी। अनीता ने 10वीं में 71% और  12वीं में 75 % अंकों के साथ पास हुई साथ ही स्कूल में भी टॉप किया। सुमित्रा कहती है की उनको भी ओर लोगों की तरह लगता था की डॉक्टर, इंजीनियर बड़े घरों के बच्चे बनते है, गरीब परिवारों के नहीं। लेकिनी साथ ही सुमित्रा ये भी समझती थी कि दुनिया में कोई काम नामुमकीन नहीं होता। साथ ही उन्होंने दिल छू जाने वाली एक बात बोली कि एक मां होने के नाते मेरा फर्ज बनता है कि मैं अपने बच्चों का हर सपना पूरा करने में उनकी मदद करूं।

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बेटी को डॉक्टर बनाने का काम कैसे शुरू किया?

अनीता को डॉक्टर बनाने के लिए माँ ने सभी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने लोगों के घरों पर झाड़ू-पोछा करने का काम शुरू कर दिया। साथ ही वो शाम को सब्जी की दुकान भी लगती थी इसके अलावा वो बस स्टैंड पर लोगों को पानी भी बेचती थी। अनीता को डॉक्टर बनाने के लिए उनके भाई ने भी अपना पूरा योगदान दिया। अनीता का भाई भी अपनी माँ के साथ सब्जी का ठेला लगता था फिर वो लोग एक एक पाई जोड़कर अनीता को रुपए भेजते थे।

जब बेटी बनी डॉक्टर तो रात भर रोती रही माँ

2013 में सुमित्रा की मेहनत रंग लाई। जब उनकी बेटी का कानपुर में एक साल की तैयारी के बाद सीपीएमटी में सलेक्शन हो गया। अनीता ने 682 रैंक हासिल की थी। जिसके बाद उसे इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। अनीता ने बताया जब मेरा सलेक्शन हुआ तब मेरी माँ बहुत रोई। उन्हें देख कर मुझे भी रोना आ गया था। साथ ही अनीता ने कहा मेरे पिता की मौत बीमारी की वजह से हुई थी उस समय हमारे पास इलाज के पैसे नहीं थे। इस लिए हमने अपने पिता को खो दिया। मैंने अपनी ज़िन्दगी में गरीबी देखी है इसलिए भविष्य में उन लोगों के लिए मुफ्त इलाज करूंगी जो गरीब होने की वजह से अपना इलाज नहीं करा पाते।

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मनोरंजन

सुरवीन चावला के घर गूंजी किलकारियाँ

सुरवीन चावला के घर आई  एक नन्ही परी


सुरवीन चावला  के फैन्स के लिए  आई  एक अच्छी खबर  जी हाँ  सुरवीन चावल के घर गूंजी किलकारियां . सुरवीन ने बेटी को दिया जन्म. वही बेटी को जन्म देने पर सुरवीन चावला ने  बताया की मेरे पास  शब्द ही नहीं है में अपनी ख़ुशी बयां भी नहीं कर सकती । सुरवीन चावला ने 15 अप्रैल को दिया था बेटी को जन्म  .माँ और बेटी दोनों ही स्वस्थ है .साथ ही  माँ सुरवीन चावला और पिता अक्षय ठक्कर ने बेटी  का नाम रखा है  ईवा  .
सुरवीन के  मुताबिक वह बहुत खुश है और काफी अच्छा महसूस कर रही है ख़ुशी मे  वो इतनी मग्न है की अपनी ख़ुशी को शब्दों मे बयान नहीं कर सकती  . सुरवीन ने बिजनेसमैन अक्षय ठक्कर के साथ शादी 28 जुलाई 2015 मे की थी  . शादी से पहले दोनों  2013 से डेटिंग कर रहे थे , लेकिन शादी  के दो साल बाद तक ये बात छुपाए  रखी  . करीब 6 महीने पहले सुरवीन चावला ने एक तस्वीर के ज़रिये अपने प्रेग्नेंट होने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी   . सुरवीन चावला हिंदी के अलावा पंजाबी,कन्नड़ और तेलगु फिल्मो मे  भी सक्रीय है  .

ऐसा रहा सुरवीन चावला का फ़िल्मी करियर

सुरवीन ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत  फिल्म परमेशा पानवाला से की थी  . इसके बाद उन्होंने कई  पंजाबी फिल्मो मे  भी काम किया  . सुरवीन ने पहला अपना हिंदी आइटम सांग  फिल्म हिम्मतवाला मे किया  . सुरवीन ने बॉलीवुड मे हम तुम शबाना से डेब्यू किया था  लेकिन पहचान उन्हे फिल्म हेट स्टोरी से मिली   . सुरवीन ने अपने टीवी करियर की शुरुआत धारावाहिक कही तो होगा से की , इसके बाद उन्होंने ने कसक का किरदार निभाया धारावाहिक कसौटी ज़िन्दगी की मे , सुरवीन कज्जल मे भी अहम भूमिका मे  नज़र आयी  .
सुरवीन एक रियलिटी डांस शो एक खिलाड़ी एक हसीना का भी हिस्सा रह चुकी है जहा उनके पार्टनर पूर्व क्रिकेट खिलाडी श्रीसंत थे. इसी के साथ साथ वे वेब सीरीज़ सेक्रेड गेम्स मे भी काफी अच्छा काम कर चुकी है  .
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सामाजिक

मां की ऐसी बातें जो बनाती है मां को दुनिया की बेस्ट माॅम

मां, एक ऐसी दोस्त जिसकी पहली प्राथमिकता आप होते है


हमारे समाज में मां का दर्जा भगवान् से भी ऊपर दिया गया हैं क्योंकि उनकी ममता असीम है। मां को अपना बच्चा दुनिया मे सबसे ज्यादा प्यारा होता है। मां-बच्चे में भावनात्मक रिश्ता बचपन से ही जुड़ जाते हैं। अगर पापा की डांट से बचना हो तो मां उसमें भी बच्चों की साइड लेकर पूरी मदद करती है। जब कभी बच्चा दुखी हो तो मां उसके दुख को अपना लेती है और दुखों को छू-मंतर कर देती है, इसीलिए तो वो एक मां कहलाती है।

मां और बच्चा

आज हम आपको ऐसी ही बातों के बारे में बताएंगे, जो मां को बैस्ट बनाती है:-

आपकी पहली टीचर

हर बच्चे की पहली टीचर होती है उसकी मां। क्योंकि बचपन में बच्चा जो कुछ भी सिखता है, वह सब कुछ अपनी मां से ही सिखता है। जैसे कि लोगों की रिस्पेक्ट करने से लेकर एक अच्छा इंसान बनना। ये सारे संस्कार बच्चों को मां ही सिखाती है।

खाने-पीने को लेकर चिंता

अरे, अपना टिफिन बॉक्स पूरा क्यों नहीं खाया? आज भूख क्यों नहीं लगी तुम्हें? कहीं बाहर जाने से पहले खाना खा कर जाना। इस तरह की बातें मां अक्सर अपने बच्चों से यहीं सब बातें पूूछा करती है। इन्हीं बातों से पता चलता है कि मां को अपने बच्चे की कितनी चिंता होती है।

पापा का गुस्सा, मम्मी बचाओ!

मां अपने बच्चों को बड़ी से बड़ी मुसीबतों से बचा लेती हैं। फिर वो मुसीबत कोई और हो या पापा का गुस्सा हो। मां को तो बीच में आना ही पड़ता है और इस तरह पापा की डांट से मम्मी बचा ही लेती है।

ब्रेकअप के बाद…!

अगर कभी बच्चों का ब्रेकअप हो जाए और बच्चे बेवजह अपना गुस्सा खाने पे निकाले तो मां दिलासा देती हुए कहती है कि “अरे वो तेरे लायक था/थी ही नहीं। मैं तेरे लिए इससे लाख गुणा अच्छा लड़का/लड़की ढूंढ लाऊगी!” तो रोना-धोना छोड़ और खाना खा अच्छी तरह से।

मां और बच्चा

एक्जाम मेरा, चिंता मां को!

एक्जाम अगर बच्चे का हो तो चिंता मां को लगी ही रहती है। कई रातें तो मां बच्चों के साथ बैठ कर गुजार देती है। कहीं बच्चे को नींद न आ जाए इसीलिए बीच-बीच में बच्चों को गर्माॉगर्म कॉफी या कुछ खाने को भी बना कर देती है।

आपके फ्रैंड्स मां के फ्रैंड्स

अगर कभी-कभार बच्चों के फ्रैंड्स घर पर आ जाए तो मां भी उनको पूरा प्यार देती है और उनका भी अपने बच्चे की तरह ही ख्याल रखती है। उनके साथ अपने ही बच्चे की तरह मजाक-मस्ती करती है। मां की यहीं बातेंं उनके बच्चों के करीब ला देती है।

आप बीमार, मम्मी परेशान

अगर बच्चा परेशान या बीमार होता है तो सबसे ज्यादा इस तकलीफ का अहसास मां को ही होता है। ऐसे में मां अपने सारे काम-काज छोड़कर आपके सिरहाने बैठ जाती है और आपसे बातें करती हैं ताकि आपका मन बहल जाए। आपके परेशानियों को दूर करने और आपके सेहतमंद होने की दुआए करती है।

आपका करियर उनका ख्वाब

जब बात आपके ख्वाहिशों और ख्वाबों की हो तो आपका ख्वाब भी मां का ख्वाब बन जाता है। वह आपके करियर को लेकर काफी चिंता करती है। आपके जीवन के हर पड़ाव पर सलहा देना चाहती है, जिनसे आपको थोड़ी-बहुत भी मदद मिल सके।

मानें या ना मानें शायद एक मां ही आपको सबसे पहले इंसान की परख करने का हुनर सि‍खाती है, अनुभवों से सीखने का दौर तो बहुत बाद में आता है। मां दरअसल एक ऐसी दोस्त है जिसकी पहली प्राथमिकता आप होते हैं, यानी वो आपकी बेस्ट फ्रेंड होती है।

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सामाजिक

माँ ना बन पाने की कुछ खास वजह

लाइफस्टाइल और आनुवंशिकता हो सकते हैं इसके बड़े कारण


भारत में 25% महिलाएं अपने अनिमियत पीरियड्स और पीरियड्स से जुडें समस्यों से परेशान हैं और इनमे से 90% मामलों में बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पता। इस समस्या की चपेट में केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि युवतियां भी हैं। ऐसे में आजकल कम उम्र में ही कुछ ऐसी बिमारियाँ शरीर को घेर लेती हैं। जिनसे निकल पाना आसान नहीं होता। हर लड़की का सपना होता है की वो माँ बनें। अगर माँ बनने की उम्र में अगर महिलाएं माँ नहीं बन पति तो वो उसकी जिंदगी की सबसे बड़ा अभिशाप बन जाता है। दुनिया मनो रुकी हुई सी लगने लग जाती है। वैसे तो माँ न बन पाने के कई कारण हैं जिसमे से सबसे बड़ा कारण है ओवरिज का फेल हो जाना। अगर किसी भी महिला के साथ ये समस्या है तो उसे जल्द किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ को मिलना चाहिए।

माँ पिक्स

पीओएफ का मतलब होता है 40 की उम्र से पहले ओवरिज का सामान्य तरह से काम नहीं करना। ये ओवरिज सामान्य रूप से ऐसट्रोजन हर्मोने का निर्माण नहीं कर पाते या नियमित रूप से अंडे का रिलीज़ नहीं हो पता। इसे बाँझपन या बच्चे ना होने की आम समस्या कहते हैं। कई बार अपनी सही उम्र से पहले ओवरिज का फेल होने को भी मेनोपॉज से जोड़ दिया जाता है लेकिन ये दोनों समस्याएं बिलकुल अलग-अलग हैं। अगर किसी महिला का ओवरिज फेल हो गया है तो उसे अनिमियत पीरियड्स हो सकती है और वो गर्वधारण भी कर सकती है। उम्र से पहले मेनोपॉज का अर्थ है की माहवारी का स्थायी तौर पर रुक जाना और उसके बाद गर्भवती होना नामुमकिन है।

लाइफ स्टाइल और आनुवंशिकता है बड़ा कारण-

कुछ समय पहले से ही महिलाओ में ओवरिज के फेल होने के खतरे बढें हैं लेकिन पर्यावरण और लाइफ स्टाइल जैसे की धुम्रपान, शराब का सेवन, लम्बी और बड़ी बिमारियों जैसे जेनिटल टीवी, किमोथैरपी और रेडियोथैरपी होना भी इसके मुख्य कारण हैं। भारत में 30-40 आयु के लोगों में पीएफओं के मामले 0.1% है। ये आंकडें दिखने में नाममात्र के दिखतें हैं लेकिन 25% महिलाएं अनिमियत पीरियड्स और पीरियड्स से जुडें कई समस्यों से सामना कर रही हैं।

आज के बदलते पर्यावरण और लाइफ स्टाइल के कारण शरीर में कम उम्र की लड़कियां भी इस बिमारियों की चपेट में आ जाती हैं। लेकिन इस तरह की बिमारियों से बचने के लिए बेहतर है कि समय पर परिवार शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। अगर किसी भी ततः की दिक्कत आ रही हो तो अपना मेडिकल जाँच जरुर करवाएं।

आइवीएफ तकनीक-

एग डोनेशन के तकनीक को अपनाकर बच्चे की चाहत को पूरी की जा सकती है। इस तकनीक के बाद महिलाएं 35वर्ष के बाद भी गर्वधारण कर सकती हैं। ये तकनीक उन कपल्स के लिए चमत्कारी है जो इन बिमारियों की वजह से परेशान रहते हैं। ऐसे में महिलाओं को अपनी जीवन शैली नियंत्रित करने की खास जरुरत है। जिससे इन समस्यों से आसानी से बाहर निकला जा सके।

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लाइफस्टाइल

क्या होता है जब माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा ज़्यादा होता है।

माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा


हमारी माँ सबसे प्यारी होती है। माँ हर किरदार निभाती है। उसका हर ये किरदार हमे बहुत अच्छा लगता है। पर जब हमारी माँ का अंधविश्वासों पर भरोसा बढ़ जाता है तब वही अच्छी और प्यारी माँ हमारी परेशानी का कारण बन जाती है। उसका अंधविश्वास हम सभी के लिए परेशानी पैदा कर देता है। और फिर उसे जितना भी समझा लो की उसका मान्यता विश्वास नहीं पर महज़ एक मिथ्या है।

शुभ दिन पर ये काम नहीं।

जब माँ का अंधविश्वासी पर भरोसा ज़्यादा हो जाता है तब अक्सर हमे इन सभी चीज़ो से गुज़रना पड़ता है:-

शुभ दिन का झंझट

हर मंगलवार, गुरुवार और शनिवार बहुत ही शुभ दिन हो जाते है। इन दिनों पर नाख़ून काटना, बाल कटवाना और कपडे धोना बिलकुल मना है। यही नहीं इन दिनों पर माँसाहार खाना मतलब कुछ अशुभ करना है।

बिल्ली का रास्ता काटना

अंधविश्वासों को मानने वाली माँ के लिए अगर किसी भी काम से पहले अगर बिल्ली रास्ता काट जाए या फिर कोई छींक दे तो वो काम नही करना चाहिए। अशुभ होता है। और वही काम अगर करना ज़रूरी है तो उसे कुछ समय बाद किया जाए।

‘नज़र लग गई हैं’

घर परिवार में आयी कोई भी परेशानी या बीमारियों का कारण माँ यही देती है कि घर को किसी की बुरी नज़र लग गयी है। बच्चो की बीमारी किसी और कारण से नहीं पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों की बुरी नज़र लगने की वजह से हुई है।

पीछे से टोकना

घर से बाहर निकलते हुए अगर कोई पीछे से टोक दे तो उनको नहीं सुनना चाहिए। पीछे से टोकना बहुत बुरी बात है। अगर आप अपनी माँ को भी पीछे से टोक दे तो वो आपको बहुत डाँटती है।

बाबा जी का फंडे

अंधविश्वासों में मानने वाली माँओ में कुछ ऐसी होती है जो बाबाओं के लफड़े में फँस जाती है। परिवार का हर काम उनके अनुसार ही चलता है। उनके द्वारा दी गई आभूषण और तरीको पर ही काम किये जाए तो ही अच्छा होता है।

जानवर को खिलाओ

माँ का अक्सर ये मानना होता है कि अगर जानवरो को खाना डाला जाए तो वो हमारे लिए शुभ होता है, हमारे सारे काम बनने लग जाएंगे। ऐसा करने से हमारी सभी दुआएँ कबूल हो जाती है।

माँ की मान्यता है।

कभी वो हमारी दोस्त बन जाती है, तो कभी बच्ची बन कर हमारे साथ हर शरारत में हमारा साथ निभाती है। मम्मी की यही छोटी बड़ी बातें कभी हमे परेशान करती है तो कभी हँसने का कारण बन जाती है। माँ जैसी कोई नही होती। और माँ जैसी भी हो, उनकी मान्यताएँ चाहे जो भी हो वो हमारे भले के लिए ही होती है।

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लाइफस्टाइल

क्यों माँ के बिना ज़िन्दगी होती हैं मुश्किल

माँ के बिना ज़िन्दगी मुश्किल


माँ के बिना ज़िन्दगी के बारे में सोचने से भी डर लगता है। माँ हमारी हर ज़रूरत को समझती है। उनको पता होता है की हमारी व्यस्त दिनचर्या में भी कैसे हमें हमारी ज़रूरते पूरी करनी है। माँ के बिना ज़िन्दगी सोचना भी मुश्किल है। माँ हमे हर चीज़ के लिए सपोर्ट करती है। मुश्किल के समय में हमे सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करती है। पर जब हम स्वतंत्र जीवन जीते है तब हमें एहसास होता है कि के हमारी माँ ने हमारे लिए कितने कष्ट उठाए हमें। हमे अपने पैरों पर खड़े होना तो सिखाया पर उनकी ऊँगली छोड़े बिना कैसे चले वो तो हम कभी सीख ही नहीं पाए। चले तो जा रहे है पर वो ख़ुशी और वो पूर्णता कही गायब सी हो गई है।

माँ का प्यार

आखिर क्यों माँ के बिना ज़िन्दगी मुश्किल हो जाती है?

  • खाना

माँ को हमारी पसंद और नापसंद का ज्ञान सबसे बेहतार होता है। जब वो होती है तब खाने का ध्यान वही रखती है। और हमे उस बात की चिंता बिलकुल नहीं लेनी पड़ती। फ्रिज में अच्छा खाना होता है और नाश्ते से लेकर डिनर तक हमे उसकी बिलकुल टेंशन नहीं लेनी पड़ती।

  • कपड़े

हमारी माँ हमारे कपडे जितने संभाल के रखती थी हम उतने ही बिखेर के रखते है। माँ के होते हुए हमारी अलमारी और हमारे कपड़े एकदम आयोजित रहती है पर जब माँ नहीं होती तब हमे किसी चीज़ की होश ही नहीं होता।

माँ सब संभाल लेती है
  • बीमारी

बीमारी में माँ हमारा सबसे अच्छे से ध्यान रखती है। जब वो नहीं होती तो हम बस इसी उम्मीद में रहते है कि किसी तरह ठीक हो जाए। दवाइयों के सहारे बस चलते रहते है। माँ होती है तो वो हमारा पूरा ध्यान रखती है।

  • परेशानी

परेशानी छोटी हो या बड़ी माँ हमेशा हमारी मदद करती है। हमें सही बात समझाती है और हमारी हर बात सुनती है। माँ हमे सही राय भी देती है। हम सभी परेशानियां किसी और के साथ बाँटे या ना बाँटे माँ के साथ हर बात बाँट सकते है।

माँ के सहारे के बिना हमारे लिए चलना उतना ही मुश्किल है जितना बिना पानी के आग बुझाना। चल तो सकते है पर वो आत्मशक्ति नहीं मिल पाती।

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लाइफस्टाइल

10 वजह किक्यों माँ होती है हमारी सबसेअच्छी दोस्त

10 वजह किक्यों माँ होती है हमारी सबसेअच्छी दोस्त


माँ वो होती है, जो हमे बिना देखे हम सेबेशुमारप्यारकरतीहै। बिनाकिसीशिकायतकेउम्रभरहमेंप्यारसेपालकर,हमारीहरज़रूरतपूरीकरतीहै।माँसिर्फहमारीमाँनहीहोती। परवहहमारीदोस्त, हमारीशुभचिंतकऔरहमारीसमर्थकभीहोतेहै।

वैसेतोमाँअनगिनतकारणोंसेख़ासहोतीहैपरफिरभीये 10 कारणऐसेहैजिनसेकोईअसहमतनहीहोसकता।

माँ
  • माँ हमेशाअपनेहरबच्चेसेएकसमानसाप्यारकरतीहै।वोकभीभेदभावनहीकरती।
  • तुम्हारे हर सुखदुखमेंवोतुम्हारेसाथहोतीहै।समयकैसाभीहो, माँकाआशीर्वादहमेशाहमारेसाथहोताहै।
  • तुम्हारीहरकमीयागलतीकेबावजूदतुमसेबेहदप्यारकरतीहैवो।नाहीतुम्हेतुम्हारीग़लतियोकेलिएतुम्हेबारबारसुनातीहैऔरनाहीवहतुम्हेकभीअपनेबारेमेंबुरामहसूसकरवातीहै।
  • माँवोहैजोहरकदमपरतुम्हारामार्गदर्शनकरतीहै।सिर्फवहीनिष्पक्षऔरसहीढंगसेतुम्हारीआलोचकहोतीहै।
  • दोस्तोंसेलड़ाईहोयापापासेबहस, माँतुम्हारीहरबातसुनतीहैऔरसहीमायनोंमेंसहीसलाहभीदेतीहै।
  • बिनाअपनीपरवाहकरेदेरराततुम्हारीपरीक्षाकेसमयतुम्हारेसाथजागतीहै।तुम्हारीसुधिवाकेलिएवहहरअसुविधाकोनज़रअंदाज़करदेतीहै।
  • तुमचाहेउनसेमीलोदूरक्योंनाहो, वोफिरभीतुम्हारेकरीबहोतीहै।तुम्हेहरनईजगहकीज़रूरतकेअनुसारहरबातसमझादेतीहै।
  • तुम्हारेबिनाकहेतुम्हारीहरज़रूरतसमझजातीहै।तुम्हारीपरेशानीऔरतुम्हारेसवालतुम्हारीआँखोंमेंपढ़लेतीहैतुम्हारीमाँ।

 

माँ

 

  • कुछचीज़ोंकामज़ासिर्फमाँकेसाथआताहै।चाहेवोरातभरबैठकेगप्पेमारनाहोयागलीकेगोलगप्पेखानाहो।
  • आपअपनीमाँकेसाथहँसतेहँसतेगिरसकतेहैऔररोतेरोतेहँससकतेहै।आपकेरोनेकोमाँकभीगलतनहींकहेऔरआपकीहरबातवपरेशानीकोबड़ीहीशांतिऔरगंभीरतासेसुनेगी।

 

इसदुनियामेंमाँसेकोईतुलनानहींकरसकता।वोआपसेबेइंतहांप्यारकरतीहै।वहकभीआपकीआलोचनानहींकरतीपरआपकीपरिस्तिथिकीआलोचनाकरआपकोसहीफैसलालेनेमेंआपकीमददकरतीहै।आजकलकीव्यस्तज़िन्दगीमेंहमनेमाँकोकहीनज़रअंदाज़करदियाहै।ज़रूरतहैतोजाकेउसेप्यारसेमिलकरज़ोरसेझप्पीदेनेकीऔरहरपुरानीबातेंयादकरनेकी।

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साहित्य और कविताएँ

लड़की है या कोई मशीन…

लड़की है या कोई मशीन….


लड़की है या कोई मशीन,

या किसी के सपनों की दुकान,

जब चाहा उसके आगे खोल दी अपने ख्वाइशों की दुकान,

जब उसने आगे बढ़ना चाहा, तो बांध दिए मजबूरी के तार…

रख दिए उसके आगे छोटों की खुशियां और बड़ों के सपने,

अपने सपने को भूल दूसरों के सपने को अपना मान चल दी आगे,

जिसने जैसा चाहा उसने कर दिया,

जिसने जैसा कहा उसने मान लिया,

एक और लड़की ने अपना जीवन दाव पर लगा दिया,

उससे भी तो कोई पूछे वो,

लड़की है या कोई मशीन।।

लड़की है या

कितना समझाया उसे फिर भी समझ ना पाई वो,

घरवालों की खुशी में ही लड़की का सुख है…

यह बात बचपन से उसे समझी किसी ने जो थी,

घर के कामों में सुख और पढ़ाई में दुख पाओगी,

यह पाठ उसे किसी ने पढ़ाया था,

कितना समझाया फिर भी समझ ना पाई वो,

अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को,प्यार समझ जो बैठी थी वो…

समझ तो मुझे नहीं आता…

लड़की है या कोई मशीन ।

यहाँ पढ़ें: आइए जाने किताबों को पढ़ने के फायदे

जिस कैंची से उसे कपड़े काटना सिखा रही थी उसकी मां,

यह भूल गई काट रही है पंख अपनी, बेटी के उसकी मां…

हद तो तब पार हो गई …

जब जिंदगी जीने के और  पिया के घर जाने के दिन गिनवा रही थी उसकी मां,

वह सच में एक मां थी!

यह बात मुझे समझ नहीं आई,

वो लड़की है या कोई मशीन,

लड़की है या कोई मशीन….

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