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राम मंदिर ट्रस्ट की डील का क्या है पूरा घोटाला?

राम मंदिर ट्रस्ट डील से राजनीतिक रुप से किसे हो रहा सबसे ज्यादा नुकसान


रविवार की शाम अचानक से सारे टीवी चैनल्स पर ये खबरे आऩे लगी की राम मंदिर ट्रस्ट ने जमीन खरीदने में घोटाला किया है।  इस खबर के आने के बाद ही यह आग की तरह फैल गई। जिसमें राजनीति एंगल भी खोजा जाने लगा।  ऐसा कहा जा रहा है कि मात्र 2 मिनट के अंदर 16 करोड़ का घोटाला हुआ है। क्या है पूरा मामला आईये आपको विस्तार से बताते है.

पिछले साल पांच अगस्त को राम जन्मभूमि का शिलान्यास विधि विधान के साथ किया गया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार मोदी सरकार ने फरवरी 2020 में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट  का गठन किया। जिसमें 15 सदस्यों में से 12 सदस्य मोदी सरकार द्वारा नामित किया गए थे। अब इस जमीन के लेकर विवाद शुरु हो गया है।  जिसके अनुसार कुसुम पाठक और हरीश पाठक ने सुल्तान अंसारी समेत आठ लोगो को 2 करोड़ में यह जमीन बेची थी। जिसकी कीमत मात्र 15 मिनट में बढ़कर  18 करोड़ हो गई।

सपा नेता पवन पांडेय ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

इसके तुरंत बाद ही इनसे राजनीति रुप ले लिया। इस मामले में सपा के नेता पवन पांडेय पर भी लैंड लीड को लेकर आरोपों का बाजार हैं। इस बीच उन्होंने स्वयं ही ट्रस्ट पर घोटाले का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राम जन्मभूमि की जमीन से लगी एक जमीन पुजारी हरीश पाठक और उनकी पत्नी ने 18 मार्च की शाम सुल्तान अंसारी और रवि मोहन को दो करोड़ रुपये में बेची। वही जमीन कुछ मिनट बाद चंपत राय ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट की तरफ से 18.5 करोड़ रुपये में खरीद ली । जिस पर मैं भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा हूं। आपको बता दें कि पवन पांडेय यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं।

पवन पांडेय ने आरोप लगाया है कि 10 मिनट पहले जमीन का बैनामा(डीनॉमिनेशन) 2 करोड़ में हुआ। उसी दिन सिर्फ 18.5 करोड़ में एंग्रीमेंट हुआ। एंग्रीमेंट और बैनामा दोनों में ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा और अयोध्या नगर नियम के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह है।  पवन पांडेय का कहना है कि जिस जमीन को 2 करोड़ में खरीदा गया है उसी जमीन का एंग्रीमेंट 18 करोड़ में कैसे हो गया?  इस घोटाले के लिए वह लगातार सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे है। मेयर पर लगते आरोपों के बीच उन्होंने कहा कि मैं तो तमाम मंदिरों के प्रॉपर्टी सेल में गवाह रहा हूं, लेकिन डील तो बायर और सेलर के बीच होती है। उससे गवाह का कोई लेना-देना नहीं।

राजनीतिक रुप से तुल पकड़ने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि झूठ पकड़ा गया है  5 करोड़ 80 लाख है।  ये जमीन सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को 2 करोड़ में मिली तो 5 मिनट बाद ट्रस्ट को 18.5 करोड़ में क्यों मिली?  अब इस मामले को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि उन्हें बदनाम करने के लिए यह सब किया जा रहा है।

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चंपत राय का बयान हम पर तो गांधी की हत्या का भी आरोप है

वहीं दूसरी ओर इस आरोप के बारे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि सभी प्रकार की कोर्ट फीस और स्टैंप पेपर की खरीददारी ऑनलाइन हो रही है। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद से अयोध्या में जमीन खरीदने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां आने लगे। जिसके कारण यहां जमीन का दाम बढ़ गया। अब जिस जमीन की चर्चा हो रही है वह रेलवे स्टेशन के पास है।

ट्रस्ट ने जितनी भी जमीन खऱीदी है वह सभी खुले बाजार से काफी कम कीमत पर खरीदी गई है। जमीन खरीदने के लिए वर्तमान विक्रतागणों से वर्षो पूर्व जिस मूल्य पर एंग्रीमेंट हुआ था उस जमीन को उन्होंने 18 मार्च 2021 को बैनामा कराया। इसके बाद ट्रस्ट के साथ एंग्रीमेंट किया। उनका कहना है कि राजनीति रुप से लोगों को गुमराह किया जा रहा है। वह यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि हम पर तो गांधी की हत्या के भी आरोप लगे हैं। हम आरोपों से नहीं डरते, जो आरोप लगे हैं उसकी जांच करुंगा।

ट्रस्ट ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट

श्री रामजन्म भूमि ट्रस्ट पर लगते आरोप प्रत्यारोप के बीच ट्रस्ट ने केंद्र सरकार और आरएसएस को इसकी रिपोर्ट सौंपी है। रिर्पोट में कई अहम बिंदु को रेखांकित किया गया है। जिसमें कहा गया है कि राजनीतिक कारणों से ट्रस्ट पर आरोप लगाए जा रहे हैं। रिपोर्ट में संबंधित जमीन के आसपास की जमीन की वर्तमान कीमतों की भी जानकारी दी गई है। इतना ही नहीं सौदे की एक-एक जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। आपको बता दें सपा और आप द्वारा लगाए आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने इसकी रिपोर्ट मांगी थी।

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