सामाजिक

मां की ऐसी बातें जो बनाती है मां को दुनिया की बेस्ट माॅम

मां, एक ऐसी दोस्त जिसकी पहली प्राथमिकता आप होते है


हमारे समाज में मां का दर्जा भगवान् से भी ऊपर दिया गया हैं क्योंकि उनकी ममता असीम है। मां को अपना बच्चा दुनिया मे सबसे ज्यादा प्यारा होता है। मां-बच्चे में भावनात्मक रिश्ता बचपन से ही जुड़ जाते हैं। अगर पापा की डांट से बचना हो तो मां उसमें भी बच्चों की साइड लेकर पूरी मदद करती है। जब कभी बच्चा दुखी हो तो मां उसके दुख को अपना लेती है और दुखों को छू-मंतर कर देती है, इसीलिए तो वो एक मां कहलाती है।

मां और बच्चा
मां और बच्चा

आज हम आपको ऐसी ही बातों के बारे में बताएंगे, जो मां को बैस्ट बनाती है:-

आपकी पहली टीचर

हर बच्चे की पहली टीचर होती है उसकी मां। क्योंकि बचपन में बच्चा जो कुछ भी सिखता है, वह सब कुछ अपनी मां से ही सिखता है। जैसे कि लोगों की रिस्पेक्ट करने से लेकर एक अच्छा इंसान बनना। ये सारे संस्कार बच्चों को मां ही सिखाती है।

खाने-पीने को लेकर चिंता

अरे, अपना टिफिन बॉक्स पूरा क्यों नहीं खाया? आज भूख क्यों नहीं लगी तुम्हें? कहीं बाहर जाने से पहले खाना खा कर जाना। इस तरह की बातें मां अक्सर अपने बच्चों से यहीं सब बातें पूूछा करती है। इन्हीं बातों से पता चलता है कि मां को अपने बच्चे की कितनी चिंता होती है।

पापा का गुस्सा, मम्मी बचाओ!

मां अपने बच्चों को बड़ी से बड़ी मुसीबतों से बचा लेती हैं। फिर वो मुसीबत कोई और हो या पापा का गुस्सा हो। मां को तो बीच में आना ही पड़ता है और इस तरह पापा की डांट से मम्मी बचा ही लेती है।

ब्रेकअप के बाद…!

अगर कभी बच्चों का ब्रेकअप हो जाए और बच्चे बेवजह अपना गुस्सा खाने पे निकाले तो मां दिलासा देती हुए कहती है कि “अरे वो तेरे लायक था/थी ही नहीं। मैं तेरे लिए इससे लाख गुणा अच्छा लड़का/लड़की ढूंढ लाऊगी!” तो रोना-धोना छोड़ और खाना खा अच्छी तरह से।

मां और बच्चा
मां और बच्चा

एक्जाम मेरा, चिंता मां को!

एक्जाम अगर बच्चे का हो तो चिंता मां को लगी ही रहती है। कई रातें तो मां बच्चों के साथ बैठ कर गुजार देती है। कहीं बच्चे को नींद न आ जाए इसीलिए बीच-बीच में बच्चों को गर्माॉगर्म कॉफी या कुछ खाने को भी बना कर देती है।

आपके फ्रैंड्स मां के फ्रैंड्स

अगर कभी-कभार बच्चों के फ्रैंड्स घर पर आ जाए तो मां भी उनको पूरा प्यार देती है और उनका भी अपने बच्चे की तरह ही ख्याल रखती है। उनके साथ अपने ही बच्चे की तरह मजाक-मस्ती करती है। मां की यहीं बातेंं उनके बच्चों के करीब ला देती है।

आप बीमार, मम्मी परेशान

अगर बच्चा परेशान या बीमार होता है तो सबसे ज्यादा इस तकलीफ का अहसास मां को ही होता है। ऐसे में मां अपने सारे काम-काज छोड़कर आपके सिरहाने बैठ जाती है और आपसे बातें करती हैं ताकि आपका मन बहल जाए। आपके परेशानियों को दूर करने और आपके सेहतमंद होने की दुआए करती है।

आपका करियर उनका ख्वाब

जब बात आपके ख्वाहिशों और ख्वाबों की हो तो आपका ख्वाब भी मां का ख्वाब बन जाता है। वह आपके करियर को लेकर काफी चिंता करती है। आपके जीवन के हर पड़ाव पर सलहा देना चाहती है, जिनसे आपको थोड़ी-बहुत भी मदद मिल सके।

मानें या ना मानें शायद एक मां ही आपको सबसे पहले इंसान की परख करने का हुनर सि‍खाती है, अनुभवों से सीखने का दौर तो बहुत बाद में आता है। मां दरअसल एक ऐसी दोस्त है जिसकी पहली प्राथमिकता आप होते हैं, यानी वो आपकी बेस्ट फ्रेंड होती है।

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