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जानें कौन है जिन्होंने व्हाट्सऐप प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ दायर की याचिका, साथ ही इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का जवाब

व्हाट्सऐप का जवाब – यूजर्स इसे मानने के लिए बाध्य नहीं।


पिछले साल दिसंबर महीने में व्हाटस्ऐप ने अपने यूजर्स को शॉक करते हुए प्राइवेसी पॉलिसी का ऑप्शन भेजा था।  जब भी कोई व्यक्ति अपना व्हाट्सऐप खोलता उसे शर्ते मानने को कहा जाता है। हर कोई इससे हैरान था। इस दौरान लोग एक दूसरे को सतर्क करते हुए स्टेट्स में यह चेतावनी देते थे कि अलॉऊ वाले बटन पर क्लिक न करें। अगर आप क्लिक करेंगे तो व्हाट्सऐप आपकी सारी जानकारी ले लेगा। इतना ही नहीं आपकी पर्सनल चैट को भी देख सकता है। साथ ही आपका डेटा किसी विज्ञापन कंपनी को बेचा जा सकता है। इतना ही नहीं सर्वे के लिए यह सारी चीजें इस्तेमाल की जा सकती हैं।

व्हाटस्ऐप द्वारा अपने यूजर्स पर  थोपी जा रही इस प्राइवेसी पॉलिसी का सबसे बड़ा कारण है वह आज के दौर का यह अकेला ऐसा ऐप है जो लोगों को आसानी से चैट के लिए जोड़ रहा है। कोरोना और लॉकडाउन के  बाद तो यह और ज्यादा डॉमिनेट हो गया है। जिसका सबके बड़ा कारण है कंपनियों का अपने काम के लिए सबसे ज्यादा इस पर निर्भर होना। अब व्हाटसऐप की इस मनमानी पर दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को इस पर रोक लगा दी है।

 

व्हाट्सऐप का हाईकोर्ट को जवाब

आपको बता दें कि व्हाट्सऐप प्राइवेसी पॉलिसी इसी साल फरवरी में लागू होने वाली थी। लेकिन विरोध के  बाद इसे मई तक के लिए टाल दिया है। शुक्रवार को आए फैसले के दौरान व्हाट्सऐप की तरफ से वरिष्ट वकील हरीश साल्वे ने कहा कि हम स्वतः ही इस नीति पर रोक लगाने के लिए तैयार हो गए हैं। हम यूजर्स को इसे मानने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। इसके बावजूद भी व्हाट्सऐप अपने उपयोगकर्ताओं के लिए अपडेट के विकल्प को दर्शाना जारी रखेगा। कोर्ट में व्हाट्सऐप की तरफ से यह भी कहा गया कि उसके पास कोई रेगुलेटर बॉडी नहीं है। ऐसे में वह प्राइवेसी पॉलिसी पर सरकार के फैसले का इंतजार करेगी। शुक्रवार को व्हाट्सऐप ने साफ कर दिया है कि वह कुछ समय के लिए प्राइवेसी पॉलिसी को लागू नहीं करेगा।

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छह युवा वकीलों की टीम ने व्हाट्सऐप के खिलाफ की अपील

व्हाट्सऐप प्राइवेसी को लेकर कोर्ट में व्हाट्सऐप की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे हाजिर हुए थे। आज हम आपको उन युवाओं को बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होंने आम जनता की तरफ से व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ याचिका लगाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के छह वकील गुरकरण सिंह, तन्वी शर्मा, अभिषेक भट्टी, ज़िना मेहता, तानिया मल्होत्रा, प्राची कोहली है। हमने एडवोकेट गुरकरण सिंह से इस केस के सिलसिले में बात की।

केस के बारे में गुरकरण सिंह बताते हैं कि वह व्हाट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया के पास 12 मार्च को एक ड्राफ्ट लेकर गए। जिसका ऑर्डर 23 मार्च को आया। इस ऑर्डर में  बताया कि व्हाट्सऐप डोमिनेंट हैं। इसलिए इस पर हम पाबंदियां शुरु कर देते हैं और साथ ही इस पर संज्ञान भी लेते हैं। हमें जवाब में यह भी बताया कि वह अब व्हाट्सऐप के खिलाफ जांच शुरु कर देगें। सीसीआइ (कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया) 60 दिन के दरम्यान किसी भी जांच को पूरी करती है।

गुरकरण बताते हैं कि सीसीआइ की सूचना के आधार पर जो जांच होने वाले थी व्हाट्सऐप और फेसबुक उसी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट चले गए। 22 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सीसीए व्हाट्सऐप की खिलाफ जो जांच कर रही है उस पर रोक नहीं लगाया जाएगा।

इस फैसले के बाद व्हाट्सऐप और फेसबुक एक बार फिर डिवीजन बेंच के पास गए। जिसका फैसला पिछले शुक्रवार को आया है। जिसमें कोर्ट ने अपना रुख साफ कर दिया है। अब अगली सुनवाई 23 जुलाई को होनी हैं। जिसमें उम्मीद है सारी चीजें स्पष्ट हो जाएगी।

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