IAS Shikhar Agarwal: राजस्थान में बड़े अधिकारियों पर जांच की आंच, IAS-IPS दंपति की बेनामी संपत्तियों की पड़ताल
IAS Shikhar Agarwal, राजस्थान में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी और उनकी IPS पत्नी से जुड़ा संपत्ति का मामला इन दिनों चर्चा में है। उदयपुर से लेकर अलवर तक खरीदे गए विला और एक निजी कंपनी को कथित तौर पर पहुंचाए गए सरकारी फायदों को लेकर जांच शुरू हो गई है।
IAS Shikhar Agarwal : उदयपुर-अलवर में संपत्तियों का जाल? IAS अधिकारी और IPS पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच
IAS Shikhar Agarwal, राजस्थान में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी और उनकी IPS पत्नी से जुड़ा संपत्ति का मामला इन दिनों चर्चा में है। उदयपुर से लेकर अलवर तक खरीदे गए विला और एक निजी कंपनी को कथित तौर पर पहुंचाए गए सरकारी फायदों को लेकर जांच शुरू हो गई है। मामला राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़ा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों ने उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में बड़ी संख्या में विला खरीदे थे। आरोप है कि इन संपत्तियों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदा गया। अब राजस्थान सरकार ने इस मामले में विस्तृत जांच को मंजूरी दे दी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई और क्या सरकारी पद का इस्तेमाल करके किसी निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया था।
कौन हैं IAS शिखर अग्रवाल और IPS पत्नी प्रशाखा माथुर?
शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। वह उदयपुर के जिला कलेक्टर रहने के साथ राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे पदों पर भी रहे हैं।इसके अलावा वह राज्य में उद्योग, MSME और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर भी भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS अधिकारी हैं।शिखर अग्रवाल को 28 अक्टूबर 2026 को राजस्थान सरकार ने APO यानी Awaiting Posting Order में डाल दिया था। इसका मतलब है कि फिलहाल उन्हें नई पोस्टिंग नहीं दी गई है। यह कार्रवाई उनके और परिवार के सदस्यों की संपत्तियों को लेकर सामने आए आरोपों के बीच हुई। इसके बाद 30 अक्टूबर को सरकार ने ACB को विस्तृत जांच की मंजूरी दे दी।
उदयपुर में 10 और अलवर में 8 विला खरीदने का आरोप
ACB की शुरुआती जांच में सामने आया है कि शिखर अग्रवाल और उनके परिवार ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े अनंता रिसॉर्ट में कई संपत्तियां खरीदी थीं। यह कंपनी होटल और रिसॉर्ट कारोबार संचालित करती है।जांच के मुताबिक, उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला खरीदे गए। प्रत्येक विला की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है।वहीं, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में दोनों के नाम पर आठ-आठ विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। यहां प्रत्येक विला की कीमत लगभग 16.5 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा उनके दोनों बेटों के नाम पर चार विला और सास-ससुर के नाम पर भी चार विला खरीदे जाने की बात सामने आई है।इस तरह ACB की शुरुआती जांच में परिवार के सदस्यों के नाम पर कुल 40 विला और कॉटेज की खरीद का मामला सामने आया है। एजेंसी को संदेह है कि इन संपत्तियों की कीमत बाजार में प्रचलित दरों के मुकाबले काफी कम रखी गई थी। अब जांच में संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य और रजिस्ट्री में दर्ज कीमतों का मिलान किया जाएगा।
निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का भी आरोप
इस मामले में केवल संपत्तियों की खरीद ही जांच का विषय नहीं है, बल्कि एक निजी कंपनी को कथित तौर पर सरकारी स्तर पर फायदा पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं। ACB के अनुसार, शिखर अग्रवाल ने अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर रहते हुए गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ कथित मिलीभगत की।आरोप है कि कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में छूट दिलाई गई। इसके अलावा जरूरी प्रमाणपत्रों की उचित जांच के बिना कुछ मंजूरियां दी गईं और कंपनी को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज भी उपलब्ध कराया गया।ACB का कहना है कि इन फैसलों से कंपनी को अनुचित आर्थिक लाभ मिल सकता था और राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित सरकारी मंजूरियां किन परिस्थितियों में दी गई थीं और उनमें शिखर अग्रवाल की क्या भूमिका थी।
27 मार्च को विला की रजिस्ट्री और कंपनी को आर्थिक पैकेज
इस पूरे मामले में 27 मार्च 2026 की तारीख भी जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण बन गई है। ACB के मुताबिक, इसी दिन वित्त विभाग ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया था।जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि उसी दिन शिखर अग्रवाल के नाम पर 20 विला की रजिस्ट्री कराई गई थी। एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि एक ही तारीख को कंपनी को आर्थिक राहत मिलने और संपत्तियों की रजिस्ट्री होने के बीच कोई संबंध था या नहीं।हालांकि, केवल एक ही तारीख पर दो घटनाएं होने से किसी तरह की मिलीभगत साबित नहीं होती। जांच एजेंसी को संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और सरकारी फैसलों के आधार पर पूरे मामले की पुष्टि करनी होगी।
आय से अधिक संपत्ति की भी होगी जांच
ACB अब यह भी पता लगाएगी कि शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों ने इन संपत्तियों को खरीदने के लिए कितनी रकम खर्च की और उसका स्रोत क्या था। एजेंसी को आशंका है कि परिवार के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की कीमत और उनकी वास्तविक बाजार कीमत में बड़ा अंतर हो सकता है।इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि अधिकारी और उनके परिवार की घोषित आय के मुकाबले संपत्तियों का कुल मूल्य कितना है। अगर जांच में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के तथ्य सामने आते हैं, तो उस पहलू पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-A के तहत विस्तृत जांच के लिए पूर्व मंजूरी दी है। इस जांच के दायरे में शिखर अग्रवाल के साथ गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और अन्य संबंधित लोग भी आ सकते हैं।
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अशोक गहलोत ने CBI और ED जांच की मांग की
इस मामले पर राजस्थान की राजनीति में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले की जांच केवल ACB तक सीमित न रखने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी जांच कराने की मांग उठाई है।गहलोत ने आरोपों को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।वहीं, इस मामले में जयपुर के संगठन पब्लिक अगेंस्ट करप्शन से जुड़े वकीलों की ओर से भी CBI के पास शिकायत पहुंचने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में कथित आय से अधिक संपत्ति, संपत्तियों के कम मूल्यांकन और निजी कंपनी को दिए गए लाभों की जांच की मांग की गई है। ये राजनीतिक आरोप और शिकायतें हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से जांच होनी बाकी है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में ACB की शुरुआती जांच के आधार पर राजस्थान सरकार ने विस्तृत जांच की मंजूरी दी है। जांच एजेंसी संपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज, रजिस्ट्री, भुगतान के स्रोत, कंपनी को दिए गए सरकारी लाभ और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करेगी।यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक सामने आए आरोप जांच के शुरुआती निष्कर्षों पर आधारित हैं। किसी भी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही सामने आएगा।
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