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Gyanvapi : मध्यस्थता कोर्ट में सुनवाई पूरी, मंदिर और मस्जिद पक्ष ने समझौते से किया इनकार

Gyanvapi विवाद में मध्यस्थता कोर्ट की सुनवाई पूरी हो गई है। मंदिर और मस्जिद, दोनों पक्षों ने समझौते से इनकार करते हुए अदालत के अंतिम फैसले को स्वीकार करने की बात कही है। जानिए सुनवाई में क्या हुआ।

Gyanvapi : मध्यस्थता की कोशिश रही बेनतीजा, मंदिर-मस्जिद दोनों पक्ष बोले- फैसला कोर्ट ही करेगी

Gyanvapi वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता कोर्ट की सुनवाई पूरी हो गई है। सुनवाई के दौरान मंदिर और मस्जिद दोनों पक्षों ने किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया। दोनों पक्षों ने कहा कि वे मामले का समाधान केवल अदालत के फैसले के माध्यम से चाहते हैं और न्यायालय के अंतिम निर्णय का सम्मान करेंगे।

मध्यस्थता की प्रक्रिया हुई समाप्त

मामले से जुड़ी चार अलग-अलग पत्रावलियों पर मध्यस्थता के तहत सुनवाई हुई। सभी पक्षकार अदालत में उपस्थित हुए और अपनी-अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि वे किसी समझौते के पक्ष में नहीं हैं और कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही विवाद का समाधान चाहते हैं। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शुरू हुई मध्यस्थता की प्रक्रिया फिलहाल बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई।

मंदिर पक्ष ने क्या कहा?

मंदिर पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर प्राचीन मंदिर का हिस्सा है और वहां पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए। पक्षकारों का दावा है कि यह स्थान आदिकाल से मंदिर रहा है और वे अपने धार्मिक अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। मंदिर पक्ष के अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि परिसर के तलगृह में पहले से पूजा की जा रही है और वे पूरे परिसर में धार्मिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

मस्जिद पक्ष ने भी समझौते से किया इनकार

मस्जिद पक्ष के प्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं ने भी मध्यस्थता के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने किसी भी समझौते से इनकार करते हुए कहा कि विवाद का समाधान अदालत के निर्णय के अनुसार ही होना चाहिए। इस तरह दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहे और किसी भी प्रकार की आपसी सहमति नहीं बन सकी।

क्या है Gyanvapi  विवाद?

Gyanvapi  परिसर वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा एक लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद है। मंदिर पक्ष का दावा है कि वर्तमान ज्ञानवापी परिसर के नीचे प्राचीन आदि विश्वेश्वर मंदिर के अवशेष मौजूद हैं। वहीं मस्जिद पक्ष का कहना है कि यह स्थल लंबे समय से मस्जिद और वक्फ संपत्ति का हिस्सा है।

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ASI सर्वे और कानूनी स्थिति

इस मामले में जिला अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सर्वे भी कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। फिलहाल यह मामला वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से विचाराधीन है।

आगे क्या होगा?

मध्यस्थता की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब मामले की सुनवाई नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार करेंगे और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

निष्कर्ष

ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। अब इस संवेदनशील मामले का अंतिम फैसला न्यायालय की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। देशभर की नजर इस महत्वपूर्ण मामले की आगामी सुनवाई पर बनी हुई है।  

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