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Protein Powder: क्या आपका प्रोटीन पाउडर असली है? पैकेट पर लिखी इन चीजों को जरूर करें चेक

Protein Powder, जिम में मेहनत, नियमित वर्कआउट और संतुलित डाइट के साथ कई लोग मसल्स बनाने और शरीर की प्रोटीन जरूरत पूरी करने के लिए प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाले हर सप्लीमेंट की गुणवत्ता एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है।

Protein Powder : मसल्स बनाने के चक्कर में न खरीद लें नकली प्रोटीन पाउडर, इन 7 बातों का रखें ध्यान

Protein Powder, जिम में मेहनत, नियमित वर्कआउट और संतुलित डाइट के साथ कई लोग मसल्स बनाने और शरीर की प्रोटीन जरूरत पूरी करने के लिए प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाले हर सप्लीमेंट की गुणवत्ता एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। किसी उत्पाद की पैकेजिंग असली जैसी दिखने के बावजूद उसकी सामग्री, प्रोटीन की मात्रा या गुणवत्ता को केवल देखकर सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।भारत में प्रोटीन सप्लीमेंट की गुणवत्ता को लेकर प्रकाशित एक अध्ययन में 36 उत्पादों के नमूनों का विश्लेषण किया गया था। शोधकर्ताओं ने कई नमूनों में लेबल पर लिखी मात्रा और जांच में मिली प्रोटीन मात्रा के बीच अंतर पाया। कुछ नमूनों में अन्य संदूषकों की मौजूदगी भी दर्ज की गई।

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1. सबसे पहले पैकेजिंग और सील की जांच करें

प्रोटीन पाउडर खरीदते समय सबसे पहले डिब्बे की पैकेजिंग को ध्यान से देखें। सील टूटी हुई हो, ढक्कन ढीला हो, पैकेट पर दोबारा चिपकाए जाने के निशान हों या प्रिंटिंग में असामान्य अंतर दिखाई दे, तो उत्पाद खरीदने से बचें। गलत स्पेलिंग, धुंधला लोगो और लेबल पर छपी जानकारी में गड़बड़ी भी संदेह पैदा कर सकती है।हालांकि, केवल पैकेजिंग देखकर यह पक्का नहीं किया जा सकता कि उत्पाद नकली है या असली। नकली उत्पाद बनाने वाले लोग असली पैकेजिंग की नकल भी कर सकते हैं। इसलिए पैकेजिंग के साथ दूसरे सुरक्षा संकेतों की भी जांच करें।

2. QR कोड और बैच नंबर जरूर चेक करें

कई कंपनियां अपने उत्पाद की प्रामाणिकता जांचने के लिए QR कोड, स्क्रैच कोड या अन्य वेरिफिकेशन सिस्टम देती हैं। अगर आपके प्रोटीन पाउडर पर ऐसा कोड मौजूद है, तो उसे स्कैन करके कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या उसके बताए गए माध्यम से जांच करें।डिब्बे पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट भी देखें। यदि कोड काम नहीं करता, जानकारी मेल नहीं खाती या वेबसाइट पर उत्पाद का रिकॉर्ड नहीं मिलता, तो कंपनी के आधिकारिक कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें। ध्यान रखें कि QR कोड का होना अपने आप में असली होने का प्रमाण नहीं है, क्योंकि नकली उत्पादों पर भी कॉपी किया हुआ कोड लगाया जा सकता है।

3. FSSAI लाइसेंस और लेबल की जानकारी पढ़ें

भारत में बिकने वाले खाद्य उत्पादों पर लागू नियमों के अनुसार जरूरी लेबलिंग जानकारी की जांच करना महत्वपूर्ण है। पैकेट पर FSSAI का लोगो और लाइसेंस नंबर देखें। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस की जानकारी आधिकारिक FSSAI माध्यमों से सत्यापित करें।इसके अलावा, सामग्री की सूची, प्रति सर्विंग प्रोटीन की मात्रा, सर्विंग साइज, शुगर, अन्य पोषक तत्व और इस्तेमाल से जुड़े निर्देश पढ़ें। अगर किसी उत्पाद पर प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा बताई गई है, लेकिन न्यूट्रिशन लेबल पर आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं, तो खरीदने से पहले जानकारी की पुष्टि करें।यह भी समझें कि FSSAI लाइसेंस नंबर छपा होना अपने आप में उत्पाद की हर खेप की गुणवत्ता की गारंटी नहीं है।

4. बहुत सस्ता मिल रहा है तो सावधान रहें

अगर कोई विक्रेता किसी लोकप्रिय प्रोटीन पाउडर को सामान्य कीमत से बहुत कम दाम पर बेच रहा है, तो तुरंत खरीदने के बजाय उसकी प्रामाणिकता जांचें। खासकर अनजान वेबसाइटों, सोशल मीडिया पेजों और मैसेजिंग ऐप्स पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर के मामले में सावधानी बरतें।जहां संभव हो, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत विक्रेता से खरीदें और बिल जरूर लें। बिल होने से खरीद का रिकॉर्ड रहता है और शिकायत करने की स्थिति में मदद मिल सकती है। FSSAI भी उपभोक्ताओं को अधिकृत विक्रेताओं से खरीदने, बिल लेने और संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर से सावधान रहने की सलाह देता है।

5. रंग, गंध या घुलने से असलियत तय न करें

कई लोग मानते हैं कि असली प्रोटीन पाउडर पानी या दूध में आसानी से घुल जाता है, जबकि नकली पाउडर में गांठें बनती हैं। लेकिन केवल इस तरीके से उत्पाद की असलियत तय नहीं की जा सकती। अलग-अलग प्रोटीन, फ्लेवर और फॉर्मूलेशन की घुलने की क्षमता अलग हो सकती है।अगर पाउडर के रंग, गंध या बनावट में असामान्य बदलाव दिखे, सील खुली हो या नमी नजर आए, तो उसका इस्तेमाल रोककर कंपनी से संपर्क करें। फिर भी, सामान्य दिखने वाला पाउडर जरूरी नहीं कि सुरक्षित हो। मिलावट, भारी धातुओं या प्रोटीन की वास्तविक मात्रा का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच की जरूरत पड़ सकती है।

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6. नकली प्रोटीन पाउडर से क्या खतरा हो सकता है?

संदिग्ध या मिलावटी सप्लीमेंट से शरीर को अपेक्षित प्रोटीन नहीं मिल सकता। यदि उसमें हानिकारक संदूषक मौजूद हों, तो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने का जोखिम भी हो सकता है। 2024 में प्रकाशित एक भारतीय अध्ययन में जांचे गए 36 प्रोटीन सप्लीमेंट नमूनों में से कई में घोषित और मापी गई प्रोटीन मात्रा के बीच अंतर मिला। कुछ नमूनों में अफ्लाटॉक्सिन, कीटनाशक अवशेष या भारी धातुएं भी पाई गईं। यह निष्कर्ष उन नमूनों तक सीमित है और इसे सभी उत्पादों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। अगर संदिग्ध सप्लीमेंट लेने के बाद उल्टी, पेट दर्द, एलर्जी या कोई अन्य परेशानी होती है, तो उसका इस्तेमाल बंद करें और डॉक्टर से सलाह लें। गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। इस्तेमाल किया हुआ डिब्बा और खरीद का बिल सुरक्षित रखें।

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7. शक होने पर शिकायत और जांच कैसे कराएं?

अगर आपको लगता है कि खरीदा गया प्रोटीन पाउडर नकली है या उसके लेबल पर गलत जानकारी दी गई है, तो पहले कंपनी के आधिकारिक कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें। बिल, बैच नंबर, पैकेजिंग की तस्वीरें और वेरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी संभालकर रखें।जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग या FSSAI के उपभोक्ता शिकायत माध्यम से शिकायत की जा सकती है। FSSAI की जानकारी के अनुसार, उपभोक्ता अधिसूचित प्रयोगशालाओं में उत्पाद की जांच कराने के विकल्प के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं। वास्तविक प्रोटीन मात्रा और संदूषकों की मौजूदगी की पुष्टि के लिए मान्य प्रयोगशाला परीक्षण ही भरोसेमंद तरीका है।  पैकेजिंग, QR कोड, बैच नंबर, FSSAI लाइसेंस, सामग्री और बिल की जांच जरूर करें। लेकिन किसी एक संकेत के आधार पर प्रोटीन पाउडर को असली या नकली न मानें। सही विक्रेता से खरीदना और जरूरत पड़ने पर उत्पाद की वैज्ञानिक जांच कराना ही ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

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