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Bikaner House exhibition: रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 74 तस्वीरें हटाने पर विवाद, क्या है पूरा मामला?

Bikaner House exhibition, दिल्ली के बीकानेर हाउस में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी को लेकर विवाद सामने आया है।

Bikaner House exhibition : प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा फिर चर्चा में, फोटो प्रदर्शनी से हटाई गईं 74 तस्वीरें

Bikaner House exhibition, दिल्ली के बीकानेर हाउस में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी को लेकर विवाद सामने आया है। उनकी प्रदर्शनी से विरोध प्रदर्शनों की 74 तस्वीरें हटाए जाने के बाद कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक संस्थानों में राजनीतिक विषयों को प्रदर्शित करने के नियमों पर बहस शुरू हो गई है। रेहान वाड्रा का आरोप है कि प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले प्रबंधन ने उन्हें कई तस्वीरें हटाने के लिए कहा। वहीं, इस मामले पर कांग्रेस के नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। 22 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, तस्वीरें हटाने के पीछे बीकानेर हाउस की बुकिंग नीति का हवाला दिया गया, हालांकि प्रबंधन की ओर से इस मामले में सार्वजनिक रूप से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था।

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क्या है पूरा मामला?

रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी का नाम No Idea Is Final है। इसमें फोटोग्राफी और दूसरी कलाकृतियों के माध्यम से अलग-अलग विषयों को प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में वन्यजीवों से जुड़ी तस्वीरों और अमूर्त कला के साथ दिल्ली में हाल के महीनों में हुए युवा आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें भी शामिल थीं।रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनी में कुल 105 तस्वीरें प्रदर्शित करने की योजना थी। लेकिन रेहान वाड्रा के मुताबिक, बीकानेर हाउस के प्रबंधन ने इनमें से लगभग 75 तस्वीरें हटाने को कहा। अंततः 74 तस्वीरें प्रदर्शनी से हटा दी गईं। इन तस्वीरों में दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दृश्य दर्ज किए गए थे।रेहान का कहना है कि उनका उद्देश्य इन आंदोलनों को फोटोग्राफी के माध्यम से दर्ज करना था। उनके अनुसार, तस्वीरों के जरिए वह यह दिखाना चाहते थे कि जब लोग किसी मुद्दे को लेकर एक साथ आते हैं, तो उस दौरान सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में किस तरह के दृश्य सामने आते हैं। उन्होंने इन तस्वीरों को किसी राजनीतिक संदेश के बजाय घटनाओं के दृश्यात्मक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही।

प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले मिला तस्वीरें हटाने का निर्देश

रेहान वाड्रा के अनुसार, तस्वीरों को लेकर आपत्ति प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले सामने आई। उन्होंने बताया कि उन्हें 21 अक्टूबर को लिखित निर्देश दिया गया, जिसमें बीकानेर हाउस की बुकिंग नीति का पालन नहीं करने का हवाला दिया गया था। उनके मुताबिक, तस्वीरें नहीं हटाने की स्थिति में प्रदर्शनी रद्द किए जाने की बात कही गई थी।रेहान का दावा है कि उन्होंने प्रदर्शनी की रूपरेखा पहले ही प्रबंधन के साथ साझा की थी। उनका कहना है कि तस्वीरों को लेकर आपत्ति पहले स्पष्ट रूप से नहीं जताई गई थी, जबकि आयोजन की तैयारी काफी पहले से चल रही थी। ऐसे में प्रदर्शनी शुरू होने के ठीक पहले तस्वीरें हटाने का निर्देश मिलने से उन्हें अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा।हालांकि, तस्वीरों को लेकर प्रबंधन की ओर से उठाई गई आपत्तियों और कलाकार के दावों पर आधिकारिक पक्ष का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं था। इसलिए इस विवाद में दोनों पक्षों की स्थिति को समझने के लिए प्रबंधन की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण है।

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तिरंगे की तस्वीरों को लेकर भी हुआ विवाद

इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे की तस्वीरों का मुद्दा भी चर्चा में आया। रेहान वाड्रा के मुताबिक, प्रबंधन ने दो ऐसी तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा था, जिनमें तिरंगा दिखाई दे रहा था। उन्होंने शुरुआत में इन तस्वीरों को हटाने से इनकार किया।रेहान ने कहा कि वह भारतीय ध्वज की तस्वीर को हटाने के पक्ष में नहीं थे। हालांकि, उनके अनुसार, बाद में जब वह कुछ समय के लिए वहां मौजूद नहीं थे, तब कर्मचारियों ने तिरंगे वाली तस्वीरों में से एक को हटा दिया।यह विवाद सामने आने के बाद प्रदर्शनी में दिखाई जाने वाली तस्वीरों और उन्हें हटाने के कारणों पर चर्चा तेज हो गई। कलाकार का कहना है कि उनकी तस्वीरें हाल के विरोध प्रदर्शनों को दर्ज करती हैं। वहीं, रिपोर्टों में बुकिंग नीति और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री को लेकर आपत्ति का उल्लेख किया गया है। बीकानेर हाउस की ओर से इस विषय पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आने तक तस्वीरें हटाने के निर्णय के सभी कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।

प्रियंका गांधी और कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल

रेहान वाड्रा की तस्वीरें हटाए जाने के बाद उनकी मां और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कलाकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए और कहा कि आज एक कलाकार के काम पर रोक लगती है, तो भविष्य में दूसरे कलाकारों के साथ भी ऐसा हो सकता है।कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने भी तस्वीरें हटाए जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि विरोध प्रदर्शनों को दर्ज करने वाली तस्वीरों को प्रदर्शित करने में आपत्ति क्यों थी। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी बीकानेर हाउस के प्रबंधन के व्यवहार पर सवाल उठाए।कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को कलात्मक अभिव्यक्ति पर रोक लगाने से जोड़कर देखा। हालांकि, यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया और मामले को लेकर उनका नजरिया है। तस्वीरें हटाने के निर्णय के पीछे प्रबंधन की पूरी दलील सामने आने पर ही विवाद के सभी पहलुओं का आकलन किया जा सकेगा।

तस्वीरें हटने के बाद भी जारी रही प्रदर्शनी

तस्वीरें हटाए जाने के बावजूद No Idea Is Final प्रदर्शनी को पूरी तरह रद्द नहीं किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 21 अक्टूबर को इसका प्रीव्यू आयोजित हुआ और 22 से 25 अक्टूबर 2026 तक इसे आम लोगों के लिए खोले जाने का कार्यक्रम था।प्रदर्शनी में वन्यजीवों से जुड़ी तस्वीरें और अन्य कलाकृतियां मौजूद रहीं। हटाई गई तस्वीरों को देखने के लिए एक कैटलॉग भी उपलब्ध कराया गया, ताकि दर्शक उन तस्वीरों के बारे में जान सकें जिन्हें मूल रूप से प्रदर्शनी में शामिल करने की योजना थी।रेहान वाड्रा ने कहा कि वह हटाई गई तस्वीरों को किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शित करने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने दिल्ली में इसके लिए वैकल्पिक जगह तलाशने की बात कही थी। उन्होंने दिसंबर 2026 में बेंगलुरु में प्रस्तावित प्रदर्शनी में भी इन तस्वीरों को शामिल करने की योजना का उल्लेख किया।

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कला की स्वतंत्रता और संस्थानों के नियमों पर बहस

बीकानेर हाउस का यह मामला कला, सार्वजनिक संस्थानों की नीतियों और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों के बीच संबंध को लेकर बहस का विषय बन गया है। एक ओर कलाकार का कहना है कि तस्वीरों के माध्यम से विरोध प्रदर्शनों को दर्ज करना उनके काम का हिस्सा है। दूसरी ओर, इस मामले में बुकिंग नीति का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है।यह विवाद इस सवाल को भी सामने लाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित कला प्रदर्शनियों के लिए नियम किस तरह लागू किए जाते हैं और आयोजकों को सामग्री से जुड़ी आपत्तियों की जानकारी कितनी पहले दी जानी चाहिए। समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने से कलाकारों और आयोजकों को अपनी तैयारियां उसी के अनुसार करने का अवसर मिल सकता है।

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