Voter List: पीलीभीत में वोटर लिस्ट विवाद, शिकायतों के बाद दो SDM पर गिरी गाज, FIR भी दर्ज
Voter List, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद निर्वाचन प्रशासन ने कार्रवाई की है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में मतदाता पहचान पत्र संख्या यानी EPIC नंबर से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी।
Voter List : वोटर लिस्ट की शिकायतों पर प्रशासन सख्त, पीलीभीत में दो SDM के खिलाफ कार्रवाई
Voter List, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद निर्वाचन प्रशासन ने कार्रवाई की है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में मतदाता पहचान पत्र संख्या यानी EPIC नंबर से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी। मामले की शुरुआती जांच में गड़बड़ियां मिलने के बाद दो उपजिलाधिकारियों (SDM) को उनके पदस्थ कार्यक्षेत्र से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इसके अलावा, एक कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त करने और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की कार्रवाई भी सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची की त्रुटियों की जांच और उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए हैं।

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में क्या गड़बड़ी मिली?
यह मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची से जुड़ा है। शिकायतों के अनुसार, कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर को ऑनलाइन खोजने पर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम या विवरण दिखाई दे रहा था। मतदाता पहचान पत्र संख्या किसी मतदाता की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी होती है। ऐसे में नंबर और उससे जुड़े नाम में अंतर होने पर मतदाता की पहचान और सूची की शुद्धता को लेकर सवाल उठते हैं।इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने शिकायतें की थीं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रारूप जारी होने के बावजूद जुलाई से सितंबर के बीच कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर और क्रमांक वही रहने के बावजूद उनके नाम बदल दिए गए। यह संख्या पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप का हिस्सा है।
दो एसडीएम को हटाया गया, कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त
शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच कराई। शुरुआती जांच में मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई।कार्रवाई के तहत पूरनपुर में तैनात रहे एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया में तैनात रहे एसडीएम हेमंत चौधरी को उनके मौजूदा कार्यक्षेत्र से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। दोनों अधिकारी मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की जिम्मेदारी निभा चुके थे।इसके साथ ही वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। रिपोर्टों के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई और 22 अक्टूबर 2026 को इस मामले में FIR दर्ज किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। संबंधित लोगों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
शिकायत करने वाले मतदाताओं ने क्या सवाल उठाए?
इस मामले में मतदाता सूची में दर्ज नाम और पहचान संबंधी विवरणों को लेकर शिकायतें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अक्टूबर को फैजान और फरहान नाम के दो लोगों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी EPIC ID से जुड़ी गड़बड़ी की शिकायत की थी। शिकायत में पहचान संबंधी विवरणों में अंतर की बात कही गई थी। इसके बाद अन्य शिकायतों और राजनीतिक दलों की ओर से उठाए गए मुद्दों के चलते मामला निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचा।कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो संबंधित क्षेत्र में रह रहे थे। वहीं, कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़ने का दावा भी किया गया, जिनके वहां रहने पर सवाल उठाए गए। इन आरोपों की पुष्टि और प्रत्येक मतदाता के रिकॉर्ड की स्थिति जानने के लिए दस्तावेजों का मिलान तथा संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। किसी राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पूरे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों की जांच के निर्देश
पीलीभीत में मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन अधिकारी को पीलीभीत के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में इस तरह की त्रुटियों की गहन जांच करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। साथ ही, प्रदेश के अन्य जिलों में भी मतदाता सूचियों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।रिपोर्टों के अनुसार, सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों से मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की जांच कर 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। इस जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कहीं अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी EPIC नंबर, मतदाता के नाम, क्रमांक या अन्य विवरणों में इसी तरह की विसंगतियां तो नहीं हैं। यदि किसी अन्य स्थान पर त्रुटियां मिलती हैं, तो संबंधित रिकॉर्ड को दुरुस्त करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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मतदाताओं के लिए सही जानकारी क्यों जरूरी है?
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें किसी व्यक्ति का नाम, पहचान संबंधी जानकारी और अन्य विवरण सही होना जरूरी है, ताकि मतदान के समय अनावश्यक परेशानी न हो। नाम या EPIC नंबर से जुड़ी त्रुटि सामने आने पर मतदाता को अपने रिकॉर्ड की स्थिति की जांच करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत दर्ज करानी चाहिए।पीलीभीत का मामला यह स्पष्ट करता है कि मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों की समय पर जांच और रिकॉर्ड की शुद्धता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई के साथ विस्तृत जांच भी अहम है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि गड़बड़ियां किस स्तर पर हुईं, कितने मतदाताओं के रिकॉर्ड प्रभावित हुए और किन अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होती है। प्रदेश स्तर पर होने वाली जांच की रिपोर्ट से इस मामले के व्यापक प्रभाव और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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