Tiger Shroff: टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग मामले में 2 महिलाओं की गिरफ्तारी, हथियारों की सप्लाई की जांच तेज
Tiger Shroff, बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई फायरिंग के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ हथियारों की सप्लाई से जुड़े कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश की रहने वाली दो महिलाओं, राधा और बबीता, समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
Tiger Shroff : मुंबई फायरिंग केस में बड़ा एक्शन, टाइगर श्रॉफ मामले में हथियार पहुंचाने के आरोप में 4 गिरफ्तार
Tiger Shroff, बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई फायरिंग के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ हथियारों की सप्लाई से जुड़े कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश की रहने वाली दो महिलाओं, राधा और बबीता, समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं पर आरोप है कि वे पिस्तौल और 20 कारतूस लेकर ट्रेन से मुंबई पहुंची थीं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इन हथियारों का इस्तेमाल अभिनेता की कार पर गोलीबारी करने वाले आरोपियों तक पहुंचाने के लिए किया गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और हथियारों की सप्लाई की पूरी योजना कैसे बनाई गई।

18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई थी फायरिंग
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल ग्राउंड से घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी कार के बाहर गोलीबारी की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने कार के पास पहुंचकर गोलियां चलाईं और फिर वहां से फरार हो गए। इस घटना में अभिनेता को चोट लगने की सूचना नहीं थी, जबकि उनके ड्राइवर और घटनास्थल के पास मौजूद एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने आई।घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए जांच शुरू की। तीन आरोपियों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद हथियारों की सप्लाई और आरोपियों को कथित तौर पर मदद पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका की जांच की गई। इसी कड़ी में चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया।
यूपी की दोनों महिलाओं तक कैसे पहुंची पुलिस?
इस मामले में गिरफ्तार महिलाओं की पहचान राधा और बबीता के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं और हरियाणा के सोनीपत में रह रही थीं। दोनों को 20 अक्टूबर को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। इनके साथ कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े कुणाल और सुमित को भी गिरफ्तार किया गया है। कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत जिले के निवासी बताए गए हैं।पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, 15 अक्टूबर को कुणाल ने दोनों महिलाओं को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ा था। इसके बाद वे ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हुईं। पुलिस का आरोप है कि राधा के बैग में पिस्तौल और कारतूस रखे गए थे। दोनों महिलाएं 17 अक्टूबर को मुंबई के दादर स्टेशन पहुंचीं और वहां एक होटल में ठहरीं।जांचकर्ताओं के मुताबिक, 17 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का होटल के पास पहुंचा और कथित तौर पर राधा से बैग ले गया। पुलिस को संदेह है कि इसी तरह हथियार उन लोगों तक पहुंचाया गया, जिन्होंने अगले दिन टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की थी। हालांकि, इस मामले में सभी आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।

जांच में हथियार की सप्लाई का कथित रास्ता अमृतसर से दिल्ली और फिर मुंबई तक जुड़ता दिखाई दे रहा है। पुलिस के अनुसार, कुणाल का संपर्क अनिल पंडित नाम के व्यक्ति से हुआ था। जांचकर्ताओं को संदेह है कि अनिल पंडित विदेश से इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था और उसका संबंध लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से हो सकता है।पुलिस का कहना है कि कुणाल ने अनिल पंडित के निर्देश पर अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस हासिल किए थे। इस काम में सुमित भी उसके साथ था। इसके बाद कथित तौर पर दोनों महिलाओं को हथियार मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई।जांच में ‘डेड लेटर बॉक्स’ नाम की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसका मतलब ऐसी पहले से तय जगह से है, जहां कोई वस्तु रख दी जाती है और दूसरा व्यक्ति उसे वहां से उठा लेता है। पुलिस के मुताबिक, हथियार हासिल करने के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। इस पूरे घटनाक्रम में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसकी जांच जारी है।
हथियार पहुंचाने के बदले पैसे मिलने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, हथियारों की सप्लाई से जुड़े इस काम के बदले पैसे दिए जाने की बात भी सामने आई है। जांचकर्ताओं का दावा है कि कुणाल को हथियारों की आवाजाही की व्यवस्था करने के लिए करीब 70,000 से 80,000 रुपये मिले थे। इनमें से लगभग 10,000 से 12,000 रुपये कथित तौर पर हथियार ले जाने वाली महिलाओं को दिए गए थे।पुलिस के मुताबिक, कुणाल और अनिल पंडित के बीच संपर्क के लिए एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि यात्रा के दौरान भी कुणाल दोनों महिलाओं के संपर्क में था और उन्हें निर्देश दे रहा था। इन दावों की जांच के लिए पुलिस डिजिटल बातचीत, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के आपसी संपर्क की पड़ताल कर रही है।

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चार नई गिरफ्तारियों के बाद जांच में क्या हुआ?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 अक्टूबर को कुणाल, सुमित, राधा और बबीता को गिरफ्तार किया। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस की अपराध जांच शाखा ने आरोपियों से पूछताछ के लिए उन्हें मुंबई ले जाने की अनुमति मांगी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने चारों आरोपियों के लिए तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की थी।इससे पहले फायरिंग में कथित तौर पर शामिल तीन आरोपियों को कोटा से पकड़ा गया था। इस तरह 21 अक्टूबर तक मामले में सात गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई थी। पुलिस की जांच अब गोलीबारी करने वालों के साथ-साथ हथियार उपलब्ध कराने और कथित तौर पर उनकी भागने में मदद करने वाले लोगों की भूमिका पर केंद्रित है।
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंध की जांच
इस मामले में पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। शुरुआती रिपोर्टों में अनिल पंडित को इस कथित नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। हालांकि, किसी आरोपी का किसी गिरोह से संबंध होने का आरोप और अदालत में उसका साबित होना अलग-अलग बातें हैं। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।फिलहाल, टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग का मामला केवल हमलावरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जांच का एक बड़ा हिस्सा हथियारों की सप्लाई, कथित बिचौलियों, पैसों के लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क का पता लगाने से जुड़ा है। यूपी की दोनों महिलाओं की गिरफ्तारी ने इस कथित नेटवर्क की जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किसके निर्देश पर पहुंचाए गए और इस घटना के पीछे शामिल सभी लोगों की क्या भूमिका थी।
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