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World Suicide Prevention Day: बुरे दौर मे एक दूसरे का हाथ पकड़ आगे बढ़े आत्महत्या की ख्याल को कम करें

आत्महत्या के पीछे बेरोजगारी भी एक बड़ा कारण


हर साल 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है. वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाने का मुख्य मकसद आत्महत्या के विरुद्ध लोगों में जागरुकता फैलाना है. इससे लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि हमारे द्वारा आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है. आत्महत्याओं की घटनाओं को रोकने के लिए दुनियाभर में अलग-अलग तरह के जागरुकता अभियान आयोजित किए जाते हैं. ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके. आज के समय पर आप जब भी अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से आपको दो चार होना ही पड़ता है. आत्महत्या एक ऐसा शब्द है जिसे सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है. 

एक चौथाई दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या

कोरोना के इस दौर में कई लोगों ने आत्महत्या कर ली. ज्यादातर लोगों की आत्महत्या का पीछे एक बड़ा कारण नजर आता है नौकरी चली जाना. पिछले महीने हमने अपने खास लेख काम की बात पर दो बार आत्महत्या का जिक्र किया है. जिसमें हमने आंकड़ों  के साथ-साथ कुछ जानकारों लोगों से इसके पीछे के कारण को जानने की भी कोशिश की थी. 

आंकड़ो की बात करें तो हर 55 मिनट में एक स्टूडेंस आत्महत्या कर रह हैं. साल 2019 की एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल जितने लोगों ने आत्महत्या की है उनमें लगभग एक चौथाई लोग दिहाड़ी मजदूर थे. आत्महत्या की कुल संख्या 1,39,123 में से 32,563 दिहाड़ी मजदूर है

और पढ़ें: ग्लैमराइज होती आत्महत्या की खबरें: क्या लोगों को कमजोर बना रही है?

नौकरी चला जाना है बढ़ा कारण

महामारी के इस दौर में जब अर्थव्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है. जीडीपी -23.9 पर पहुंच चुकी है. ऐसे समय में कई लोगों की नौकरियां चली गई है. नौकरी चली जाना भी आत्महत्या के पीछे का एक बड़ा कारण है. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार लॉकडाउन के दौरान  काम धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाने के कारण 12 दिनों में 47 लोगों ने मौत को गले लगा लिया. सूरत में नौकरी चली जाने के कारण 20 मजदूरों ने आत्महत्या कर ली. इस तरह की खबरें रोज अखबारों में हर शहर से आती है. आत्महत्या लोगों के लिए एक आसान उपाय  बन गया है.

 इस आसान उपाय से हमें लड़ना होगा. नौकरी आज चली गई कल दोबारा मिल जाएंगी. काले अंधेरे ने पूरे आसमान को घेरा है, एक दिन काला घेरा छटेगा और नया सवेरा फिर आएंगे. इसी विश्वास के साथ एक दूसरे हाथ पकड़कर आगे बढ़े और आत्महत्या वाले ख्याल को दूर करें.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

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