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महामारी के इस दौर में क्या कांवडा यात्रा जरुरी है, राज्य सरकारों कुंभ से क्यों नहीं रही सीख

कई राज्यों में कांवड़ यात्रा की तैयारियां शुरू, तो कई राज्यों में जारी हुए निर्देश


जैसा की हम सभी लोग जानते है कि आज के समय पर हम सभी लोगों के लिए कोरोना वायरस के कारण घर से बाहर जाना बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया है। पिछले साल से फैला कोरोना वायरस आज भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके कारण  सभी लोग परेशान है कोरोना महामारी के कारण उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जबकि वहीं दूसरी तरफ यूपी सरकार ने कांवड़ यात्रा का तैयारियां शुरू कर दी हैं। साथ ही इसकी अनुमति भी दे दी है।  आपको बता दें कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अफसरों के साथ बैठक कर कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की।  उन्होंने निर्देश जारी किए कि कांवड़ यात्रा पर सभी रूट की तैयारियों को जल्द से जल्द पूरा कर दिया जाए। यहाँ तक की उन्होंने कांवड़ मार्ग में आने वाले सभी शिवालय, शिव मंदिर, अन्य मंदिर और रास्तों को साफ करने के निर्देश जारी किये।

कांवड़ यात्रा के दौरान ‘कोरोना प्रोटोकॉल का रखें ध्यान’

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने अफसरों को कहा कि वे कांवड़ यात्रा के रास्तों पर स्ट्रीट लाइट का इंतजाम सुनिश्चित करें। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कांवड़ यात्रा के मार्गों पर बिजली आपूर्ति और पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था भी कराई जाए। साथ ही साथ उन्होंने कोरोना महामारी के माहौल को ध्यान में रखते हुए कांवड़ यात्रियों के दौरान मास्क, सेनेटाईज़र, थर्मामीटर, एंबुलेंस, प्लस मीटर और कोविड हेल्प सेंटर की अच्छी व्यवस्था भी की जाए। वहीं दूसरी ओर उतराखंड के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसी भी कंर्टेवर्सी से बचते हुए कांवड यात्रा पर अभी तक तो न ही कहा है। इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि दूसरी लहर के दौरान हरिद्वार में कुंभ स्नान के लिए लाखों को संख्या में लोग आएं थे। जिसके कारण अचानक से कोरोना के केस में बढ़ोतरी हो गई थी। इतना ही नहीं कई साधुओ को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। जिसके बाद पीएम को स्वयं स्नान पर लोगों से रोक लगाने की अपील की थी।

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25 जुलाई से शुरू हो रहा सावन

आपको बता दे कि इस साल सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू हो रहा है। आपको याद हो शायद सावन का महीना शुरू होने के साथ ही हर साल कांवड़ यात्रा की शुरुआत की जाती है। लेकिन पिछले साल से फैले कोरोना वायरस के कारण इस बार दूसरी बार हो रहा है कि इस साल भी यात्रा पर असमंजस बना हुआ है। हर साल की तरह इस साल भी कांवड़ यात्रा अच्छे से हो पाए इसके लिए अभी उत्तराखंड में कोरोना फैलने से रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी गई है।

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Chitai mandir: जाने अल्मोड़ा के चितई मंदिर के बारे में जहा चिट्ठी लिखने से पूरी होती है मनोकामना

Chitai mandir: जाने क्यों जाना जाता है उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से


Chitai mandir: ये बात तो शायद आप भी जानते ही होंगे कि उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना है। यानि की ऐसी भूमि जहां देवी देवता निवास करते हैं। इतना ही नहीं हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड को सबसे पावन क्षेत्र मनीषियों की पूर्ण कर्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दे कि उत्तराखंड में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। जहा जाकर आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है। उत्तराखंड के इन मंदिरों की प्रसिद्धि सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। इन्हीं मंदिरों में से एक है गोलू देवता का मंदिर। उत्तराखंड की स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गोलू देवता को न्याय का देवता भी कहा जाता है। तो चलिए आज जानते है गोलू देवता के बारे में

गोलू देवता को न्याय करने वाले देवता के तौर पर पूजा जाता है

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में गोलू देवता को गोलज्यू नाम से भी जाना जाता है। अल्मोड़ा में कुमाऊं के लोग गोलू देवता को सबसे बड़े और तुरंत न्याय करने वाले देवता के तौर पर पूजते है। गोलू देवता को उनके न्याय के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार गोलू देवता को भगवान शिव और कृष्ण का अवतार माना जाता है। वैसे तो गोलू देवता के उत्तराखंड में कई सारे मंदिर है लेकिन इनमे से सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय मंदिर अल्मोड़ा का चितई मंदिर है। गोलू देवता का ये चितई मंदिर अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर है।

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Image source – doonmozaic.com

गोलू देवता को लेकर मान्यताएं

उत्तराखंड में गोलू देवता को सबसे बड़े और तुरंत न्याय करने वाले देवता के तौर पर पूजा जाता हैं। उत्तराखंड में गोलू देवता को एक राजवंशी देवता के तौर पर भी जाना जाता है। गोलू देवता को सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि उनको विदेशों में भी जाना जाता है। जब भी कोई व्यक्ति उत्तराखंड के कुमाऊं की तरफ घूमने जाता है तो वो एक बार अपनी मनोकामना लेकर गोलू देवता के पास भी ज़रूर जाता है। मान्यता है कि लोगों की वहा जाकर मनोकामनाएं पूरी भी हो जाती है।

गोलू देवता को चिठ्ठी लिखने से पूरी हो जाती है मनोकामना

अगर आप उत्तराखंड में गोलू देवता के मंदिर जाएंगे तो वह आपको घंटियों के साथ लटकी लाखों चिट्ठियां दिखाई देंगे। इन चिट्ठियों को अगर आप गौर से देखेंगे या पढ़ेंगे तो आपको भी यहां आने वाले लोगों की आस्था और विश्वास का अभाव होगा।यहाँ कोई अपनी मनचाही नौकरी के लिए चिट्ठी लिखता है तो कोई अपने पारिवारिक क्लेश को लेकर, तो कोई सुखी जीवन को ले। सभी लोगों की अपनी अपनी परेशानी होती है तो सभी लोग उनके अनुसार गोलू देवता को चिठ्ठी लिखते है और अपनी मनोकामना पूरी होने का इंतजार करते है।

मनोकामना पूरी होने पर गोलू देवता को चढ़ाई जाती है घंटी

जब भी कोई भक्त गोलू देवता के मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर आता है और अपनी मनोकामना की चिठ्ठी लिख कर रख कर जाता है तो उसके बाद जब भी उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो वो भक्त गोलू देवता के मंदिर में फिर से आकर गोलू देवता को घंटी चढ़ा कर जाता है। गोलू देवता के चितई मंदिर पर लगी हज़ारों-लाखों घंटीयां इस बात का साबुत है कि कई सालों से गोलू देवता न्याय देते आ रहे हैं।

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जानें पहली महिला आईटीबीपी और उप महानिरीक्षक अपर्णा कुमार के बारे में, जो अभी उत्तराखंड रेस्क्यू ऑपरेशन को कर रही है लीड

जानें कौन है उत्तराखंड रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड करने वाली अपर्णा कुमार


उत्तराखंड के ऋषिगंगा क्षेत्र में आई त्रासदी के बाद पूरे क्षेत्र  में हलचल मची हुई है.  अभी भी प्रशासन 169 शवों की तलाश में जुटा हुआ है. अगर उत्तराखंड सरकार की माने तो गुरुवार तक मलबे से 35 शव निकाले जा चुके थे और 10 मृतकों की शिनाख्त हो चुकीहै जबकि बाकि 25 लोगों की शिनाख्त होना अभी भी बाकी है.  लेकिन क्या आपको पता है उत्तराखंड रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड दक्षिणी ध्रुव की चोटी को फतह करने वाली व पहली महिला आईटीबीपी अधिकारी उप महानिरीक्षक अपर्णा कुमार द्वारा किया जा रहा है.  इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अपर्णा कुमार के साथ सीमा सुरक्षा बल के पहाड़ी युद्ध कौशल कला में निपुण अधिकारी भी शामिल है. इतना ही नहीं इन अधिकारियों ने पहाड़ों पर आपदाओं को बहुत करीब से देखा है.  अपर्णा कुमार 2002 बैच की भारतीय पुलिस सेवा में उत्तर प्रदेश काडर की अधिकारी हैं.

 

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Image source – jagranjosh

 

साल 2019 में अपर्णा कुमार ने ये उपलब्धि हासिल की थी

क्या आपको पता है 45 वर्षीय अपर्णा कुमार ने साल 2019 में दक्षिणी ध्रुव को फतह करने की उपलब्धि हासिल की थी. वह पहली महिला आईपीएस एवं आईटीबीपी अधिकारी के रूप में जानी जाती है. अपर्णा कुमार मूल रूप से कर्नाटक की रहने वाली है और उनके दो बच्चे भी हैं. साल 2018 में प्रतिनियुक्ति पर वहआईटीबीपी में आई थी. अपर्णा कुमार की माने तो अभी तपोवन सुरंग में मलबा साफ करने का अभियान जारी है.  उन्होंने कहा ये काफी मुश्किल है लेकिन हम सभी लोग लगे हुए है. इतना ही नहीं अपर्णा कुमार ने ‘सेवन समिट चैलेंज’ भी पूरा किया है. इस सेवन समिट चैलेंज में सात महाद्वीपों की सात शीर्ष
चोटियों तक पहुंचना होता है.  क्या आपको पता है साल 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें इसके लिए राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया था.

 

जाने कौन है बेनुधर नायक

आईटीबीपी के एक अधिकारी ने बताया कि उत्तराखंड के ऋषिगंगा क्षेत्र में आई त्रासदी के बाद से अपर्णा कुमार वही तैनात है. अधिकारी ने बताया कि चमोली जिले के आईटीबीपी की पहली बटालियन के कमांडिंग अधिकारी बेनुधर नायक अपर्णा कुमार के सहायक हैं. खबरों के अनुसार बेनुधर नायक की पहाड़ों में काफी समय तक तैनाती रही है जिसके कारण उन्हें इसका खासा अनुभव है. अधिकारी ने बताया कि जब साल 2013 में उत्तराखंड में कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बाढ़ एवं  आपदा आई तो उस समय पर बेनुधर नायक उत्तराखंड में पदस्थ थे.

 

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अगर आप भी बना रहे है उत्तराखंड घूमने का प्लान, तो ये हिल स्टेशन है लाजवाब

जानें कैसे ट्रैवलिंग के लिए बेस्ट प्लेस है उत्तराखंड


देवभूमि के नाम से मशहूर उत्तराखंड एक ऐसी जगह है जहाँ के लिए आप लोग एक क्विक वेकेशन प्लान कर सकते हैं. यहाँ आपको एक वीकेंड में ही मन की शांति, हर रोज की भागदौड़ से छुटकारा और सेटिसफेक्शन मिल जाता है. उत्तराखंड न  सिर्फ हमारे देश के सबसे खूबसूरत और क्राउडेड ट्रैवल डेस्टिनेशन में एक है बल्कि ये आपके बजट में भी है. उत्तराखंड घूमने के लिए न तो आपको अपना बजट बिगड़ना पड़ेगा न ही अपनी जेब को खाली करना पड़ेगा. अगर आप ट्रैवलिंग के शौकीन है और अपने अपनी लिस्ट बनाई हुई है कि आपको कैसे कैसे जगह घुमनी है तो एक बार आप उत्तराखंड का प्लान  बना सकते है यहाँ आपको एडवेंचर, हाइकिंग, पैराग्लाइडिंग, झरने, बर्फ से घिरी पहाड़िया और भी काफी कुछ देखने को मिलेगा.  जो आपकी लिस्ट में होगा. तो चलिए आज हम आपको उत्तराखंड में घूमने लायक कुछ लाजवाब हिल स्टेशनों के बारे में बातएंगे.

औली: अगर आप स्कीइंग एक्टिविटीज लवर है तो आपके लिए औली एक परफेक्ट हिल स्टेशन है. यह उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है. यह प्राकृतिक नजारों और मनमोहक दृश्यों से भरपूर है. अगर आप दो-तीन दिन का ट्रिप प्लान कर रहे है तो औली इसके लिए बहुत बढ़िया जगह है। औली में आप बर्फ से ढके पहाड़ों को देखकर अपनी आंखों को सेटिसफाई कर सकते हैं.

भीमताल: अगर आपको शांत जगह ज्यादा पसंद आती है तो आप भीमताल जा सकते है.  यह नैनीताल से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.  भीमताल एक ऑफबीट डेस्टिनेशन है जो आपके ट्रिप के लिए परफेक्ट जगह है. क्योंकि यहां क्राउड कम होता है और शांति रहती है.

रानीखेत: अगर हम उत्तराखंड की बात कर रहे हो और रानीखेत की बात न करे तो ऐसा हो नहीं सकता. रानीखेत उत्तराखंड के टॉप हिल स्टेशनों की लिस्ट में आता है.  हरियाली और शानदार नजारों से भरपूर रानीखेत घूमने के लिए एक बेहद की खूबसूरत जगह है. यहाँ आपको ऊंचे देवदार के पेड़, ताजी हवा और शांत वातावरण का एक बेहतरीन कॉम्बो मिलेगा.

चोपता: चोपता ये नाम शायद ही अपने बहुत लोगों से सुना हो.  चोपता उत्तराखंड में 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह एक हैमलेट भी है, जो कि बहुत ही कम एक्सप्लोर की गई डेस्टिनेशन में से एक है.  यहाँ आपको काफी कम क्राउड मिलेगा. जोकि आपकी ट्रिप को शांत और शानदार बनाएगा.  चोपता में आपको त्रिशूल, नंदादेवी और चौखम्बा जैसी हिमालयी रेंज के शानदार नजारे देखने को मिलेंगे.

नैनीताल: नैनीताल को उत्तराखंड का बेस्ट हिल रिसॉर्ट माना जाता है.  नैनी झील से घिरा यह शहर, एक खड़ी घाटी में बसा हुआ है. जो की पहाड़ों पर एक वीकेंड बिताने के लिए परफेक्ट जगह है. यहाँ आप झील में पैडल बोट की सवारी कर सकते हैं. इतना ही नहीं आप चाहे तो घोड़े की सवारी भी कर सकते है.

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उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य, जो बनाएगा दूध से पेट फूड, इससे बनेगी कुत्तो की सेहत

दूध से तैयार किया जा रहा है पालतू कुत्तों का पेट फूड ‘छुरपी’


उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य, जो पालतू कुत्तों की सेहत बनाए रखने के लिए दूध से तैयार करेगा पेट फूड. इस पेट फूड का नाम है ‘छुरपी’. दूध से तैयार किया जा रहा छुरपी पालतू कुत्तों की सेहत बनाएगा. उत्तराखंड में दूध से तैयार की जाने वाली छुरपी की कीमत बाजारों में 750 रुपये प्रति किलो तक होगी. इससे उत्तराखंड के हजारों दुग्ध उत्पादकों की आमदनी भी बढ़ेगी.

जाने सबसे पहले छुरपी की शुरुआत किस देश से हुई थी

छुरपी बनाने की शुरूआत सबसे पहले पड़ोसी देश नेपाल में हुई थी. जिसके बाद दार्जिलिंग में कुछ लोगों ने छुरपी बनानी शुरू कर दी थी. उत्तराखंड  में दुग्ध विकास विभाग ने सबसे पहले सहकारी क्षेत्र में पेट फूड के रूप में छुरपी का उत्पादन शुरू कर दिया है.

लाखामंडल, सुमाड़ी, जखोला और कमेडी के ग्रोथ सेंटरों में छुरपी बनाने की शुरूआत की गई है. ग्रोथ सेंटरों में छुरपी को तैयार करके बंगलूरू की एक कंपनी को बेचा जा रहा है. इतना ही नहीं, विभाग की माने तो छुरपी बनाने से दुग्ध समितियों से जुड़े पांच हजार से अधिक दुग्ध उत्पादकों को इसका फायदा मिलेगा.

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जाने  कैसे बनाई जाती है ‘छुरपी’

क्या आपको पता है छुरपी कैसे बनाई जाती है. अगर नहीं तो कोई बात नहीं। आज हम आपको बतायेगे, कि छुरपी कैसे बनाई जाती है. जिस तरीके से दूध से पनीर बनाया जाता है, ठीक उसी तरह छुरपी भी तैयार की जाती है. लेकिन हमें पनीर में नमी की मात्रा दिखती है जबकि छुरपी में नमी की मात्रा को पूरी तरीके से निकाल कर उससे सख्त बनाया जाता है. उसके बाद इससे छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने के बाद इसे महीने भर तक सुखाने के बाद छुरपी तैयार की जाती है. छुरपी में प्रोटीन की मात्रा 60 प्रतिशत है.

हमारे देश में अभी तक किसी भी राज्य में सहकारी क्षेत्र में छुरपी का उत्पादन नहीं किया जाता है. उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जो पेट फूड के रूप में दूध से छुरपी बना रहा है. क्या आपको पता है यह योजना खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के दूरस्थ गांवों के उन दुग्ध उत्पादकों की आर्थिकी को मजबूत करेगी, जो अपने दूध को बाजार तक नहीं पहुंचा पाते हैं.

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