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अगर आप भी खुलकर पर्सनल हेल्थ के बारे में बात नहीं कर सकते हैं तो इंस्टाग्राम के इन पेज पर करें विजिट

माता पिता और शिक्षण संस्थानों पर न मिलने वाली पर्सनल हेल्थ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अब आपको इन इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर मिलेगी


आज भले हमारा देश कितना भी आगे क्यों न बढ़ गया हो लेकिन जब बात आती है पर्सनल हेल्थ की तो आज भी हमारे देश में दबी आवाज़ों और बंद दरवाज़ों के पीछे ही ये बातें होती है। आज भी हमारे देश में सभी स्कूलों में पर्सनल हेल्थ से जुडी जानकारी नहीं दी जाती है और अगर बात की जाएं माता पिता की तो वो भी इस टॉपिक पर अपने बच्चों से बात करने में कतराते हैं। यही कारण है कि आज भी हमारे देश में लोगों को पर्सनल हेल्थ और महिलाओं के शरीर और उनके मेंस्ट्रुअल हेल्थ के लेकर कई गलतफहमियां लेकर बैठे होते है। कई बार तो बच्चों को सही समय पर सही जानकारी न मिलने पर वो गलत तरीके से जानकारी जुटाने में लग जाते है जिसके बीच वो कई बार गलतियां भी कर बैठते है। कई बार बच्चे एडल्ट फिल्में देखने लगते है और उनमें दिखाई जाने वाली चीज़ों को ही वो सच मान बैठते हैं। आमतौर पर तो बच्चों जो शिक्षा माता पिता और शिक्षण संस्थानों पर मिलनी चाहिए, जो उन्होंने नहीं मिल पाती। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट्स के बारे में बताएंगे जो आपको पर्सनल हेल्थ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देंगे।

@vitaminstree: जैसे की आप पेज के नाम से ही समझ सकते है कि ये पेज औरतों के पर्सनल हेल्थ और उनकी मदद के लिए बनाया गया। यह पेज उनकी  ही समस्याओं और सवालों पर केंद्रित है। आपको बता दे कि इस पेज की सबसे अच्छी बात यह है कि यह पेज महिलाओं की पर्सनल हेल्थ से जुडी और हाइजीन पर आधारित वीडियोज़ बनाता है जो की बहुत ही दिलचस्प होते हैं।

@seemaanandstorytelling: ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि हमारा देश एक पुरुष प्रधान देश है यहाँ पर हमेशा से महिलाओं को पुरुषों से कम आका जाता है। हमारे समाज में हमेशा से ही महिलाओं द्वारा पर्सनल
हेल्थ के विषय में चर्चा करना या अपनी पर्सनल हेल्थ से जुडी इच्छाओं को खुल कर व्यक्त करना महिलाओं के
चरित्र पर दाग माना जाता है। हमारे देश में ये मान लिया जाता है कि एक तय उम्र के
बाद महिलाओं की सेक्स में दिलचस्पी खत्म हो जाती है और शायद यही कारण है कि महिलाएं खुल कर इस पर बात नहीं कर पाती हैं।

 

@pratisandhi: आपको बता दे कि इस पेज ने इंस्टाग्राम पर बहुत ही कम समय में काफी ज्यादा
पॉपुलैरिटी पा ली है। कई जानी मानी मैगज़ीन और वेबसाइट्स ने इसके बारे में लिखा है। आपको बता दे ये अलग अलग विषयों पर अन्य सेक्स एडुकेटर्स के साथ सेशन्स करने के साथ ही ये पर्सनल
हेल्थ एजुकेशन पर क्वॉलिटी कंटेंट क्रिएट करते हैं। ये अपने यूजर को चीजें समझने के लिए वीडियोज़ से
लेकर इलस्ट्रेशन्स तक ये कई दिलचस्प तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

@agentsofishq: आपको बता दे कि इस पेज की  सबसे अच्छी बात यह है कि यह पेज मर्दों और औरतों की पर्सनल ज़रूरतों के बारे में जानकारी नहीं देता है बल्कि पर्सनल स्पेक्ट्रम की अन्य कम्यूनिटीज़ के बारे में भी खुल कर बात करता है। आपको बता दे कि इलस्ट्रेशन्स के ज़रिए ये यूजर को काफी अहम जानकारी शेयर करते है। इस पेज पर आपको हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में जानकारी में मिल जाएगी।

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अगर आपके साथ घरेलू हिंसा हो रही है तो जाने कानून और क्या हो सकती है सजा

जाने घरेलू हिंसा को लेकर कानून क्या कहता है


जैसे की आपने देखा होगा कई घरों में छोटी छोटी बातों पर लड़ाई होने लगती है। घरों में होने वाली इस लड़ाई को ही घरेलू हिंसा कहते है। आपको बता दे कि इस घरेलू हिंसा का शिकार महिलाएं और पुरुष दोनों ही होते हैं लेकिन आमतौर पर देखा जाता है कि ज्यादातर इस घरेलू हिंसा का शिकार महिलाओं को ही होना पड़ता है। इसलिए हमारे देश में समय समय पर घरेलू हिंसा को रोकने के लिए अलग-अलग कानून बनाए गए और उन्हें पारित किया गया है। तो चलिए आज उन कानून और उसमे मिलने वाली सजा के बारे में विस्तार से जानते है।

जाने कौन कौन सी बातें घरेलू हिंसा के दायरे में आती है

तो चलिए सबसे पहले आपको बताते है कि आखिर घरेलू हिंसा क्या है और कौन कौन सी बातें घरेलू हिंसा के दायरे में आती है। घरेलू हिंसा यानी की कोई भी ऐसा काम, जो किसी महिला और 18 साल से कम उम्र के बच्चे फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की के स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन पर मुश्किल लाता हो उसे घरेलू हिंसा ही कहा जाता है। घरेलू हिंसा में मारपीट से लेकर मानसिक नुकसान और आर्थिक क्षति तक को शामिल किया गया है।

इतना ही नहीं घरेलू हिंसा में तलाकशुदा महिलाओं को भी शामिल किया गया है। उन्हें उनके पूर्व पतियों से सुरक्षा प्रदान करने के इरादे से इससे शामिल किया गया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि तलाक के बाद पूर्व पति या उसके परिवार के लोग महिला और उसके घर वालों को कई तरह की धमकियां देते हैं और परेशान करते है। या फिर महिला की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ये सारी बातें घरेलू हिंसा के दायरे में आती है।

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जाने घरेलू हिंसा की श्रेणियों के बारे में

शारीरिक हिंसा: घरेलू हिंसा की श्रेणी में शारीरिक हिंसा सबसे गंभीर समस्या है जो की सबसे ज्यादा आम भी है। किसी भी महिला  या फिर 18 साल से कम उम्र के बच्चे फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की के साथ मारपीट, धक्का, पैर या हाथों से मारना या फिर कोई ऐसा तरीका, जो महिला या फिर बच्चे को शारीरिक तकलीफ दे, उससे इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

लैंगिक हिंसा: घरेलू हिंसा की श्रेणी में लैंगिक हिंसा भी एक गंभीर समस्या है इस श्रेणी में किसी भी महिला को अश्लील साहित्य या अश्लील तस्वीरों को देखने के लिए विवश करना,बलात्कार करना, अपमानित करना या उसके साथ दुर्व्यवहार करना आदि चीजे शामिल है।

आर्थिक हिंसा: आर्थिक हिंसा भी घरेलू हिंसा की एक श्रेणी है आर्थिक हिंसा के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी महिला से उसके द्वारा कमाए जा रहे पैसे का हिसाब उसकी मर्जी के खिलाफ लेता है या फिर उससे बच्चों की पढ़ाई, खाना-कपड़ा आदि चीजों के लिए परेशान करता है तो वो सजा का पात्र होगा।

मौखिक और भावनात्मक हिंसा: मौखिक और भावनात्मक हिंसा भी घरेलू हिंसा का एक भाग है। कई बार किसी महिला को पता भी नहीं होता कि वो घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है लेकिन वो हो जाती है ऐसा तब होता जब कोई व्यक्ति किसी महिला या बच्चे को ताने दे देकर उसका आत्मसम्मान खत्म कर देता है या किसी भी वजह से उसे अपमानित करना या फिर उसके चरित्र पर दोषारोपण लगाना ये सारी चीजे मौखिक और भावनात्मक हिंसा का ही भाग होती है।

जाने कौन कर सकता है शिकायत

आपको बता दे कि घरेलू हिंसा के सभी पहलुओं को देखते हुए ये तय किया गया कि घरेलू हिंसा की शिकायत सिर्फ पीड़िता ही नहीं बल्कि महिला के जानने वाले भी कर सकते हैं। अगर पीड़ित महिला अपने साथ हो रही घरेलू हिंसा की शिकायत करने से डरती है तो उनके पड़ोसी, रिश्तेदार या फिर दोस्त हिंसा की शिकायत दर्ज करवा सकते है। यहाँ तक कि जो लोग उस हिंसा के बारे में सुन चुके हो या देख चुके हो व फिर कोई सामाजिक कार्यकर्ता भी इसकी शिकायत दर्ज करवा सकता है।

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जाने वर्क प्लेस पर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को क्यों होता है ज्यादा स्ट्रेस

जाने पुरुषों के मुताबिक महिलाओं को क्यों करना पड़ता है अधिक तनाव और डिप्रेशन का सामना


जैसा की हम सभी लोग जानते हैं कि आज के समय में ज्यादातर लोग काम के कारण स्ट्रेस से गुजर रहे होते है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि ऑफिस में लड़कों के मुकाबले लड़कियां ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं। इसका एक बड़ा कारण है कि लड़कों को तो बस आपका ऑफिस संभालना होता है लेकिन महिलाओं को ऑफिस और घर दोनों ही चीजें संभालनी होती है। जिसके कारण कई बार उनको डिप्रेशन और तनाव का सामना भी करना पड़ता है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, ऑफिस में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को अधिक स्ट्रेस झेलना पड़ता है। जिसके कारण उन्हें कई सारी मानसिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं के लिए बहुत जरूरी होता है कि वो समय रहते खुद को स्ट्रेस से दूर रखें।

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जाने महिलाओं को क्यों होता है ज्यादा स्ट्रेस

ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि अक्सर महिलाएं भावनात्मक तौर पर कमजोर और अस्थिर होती हैं। जिसके कारण उनको अक्सर वर्क प्लेस पर वर्क प्रेशर का दवाब महसूस होने लगता हैं। अक्सर महिलाओं के साथ देखा जाता है कि उनको उनके काम के अनुसार प्रमोशन और पगार नहीं मिलती जबकि हमेशा उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। वही दूसरी तरफ कुछ महिलाओं को तो अपने ऑफिस और घर के बीच संतुलन भी बिठाना पड़ता है, जिसके कारण कई बार उनको काफी पीड़ा का सामना भी करना पड़ता है। जिसके कारण कई बार महिलाएं स्ट्रेस का शिकार भी हो जाती है।

वर्क प्लेस पर कर्मचारियों का सहयोग

वर्क प्लेस पर मैनेजमेंट को अपनी महिला कर्मचारी के साथ सहयोग करना चाहिए। मैनेजमेंट को अपने महिला कर्मचारी को जरूरत पड़ने पर हमेशा उससे सहयोग करना चाहिए। जब भी उनसे घर से काम करने की जरूरत हो, उससे वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जानी चाहिए। इतना ही नहीं हर कंपनी में मैनेजमेंट को महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को भी कंट्रोल करना चाहिए। जिसे की महिलाएं फ्री माइंड होकर काम कर सके और उनको अपने वर्क प्लेस पर स्ट्रेस भी फील न हो।

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लाइफस्टाइल

अगर आप भी लेते है स्ट्रीट साइड से कपड़े, तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान

कैसे आप अपने स्ट्रीट साइड से खरीदे कपड़ों को हाई-एंड और महंगा दिखा सकते है।


Street side shopping tips: इस बात में तो सभी लोग हामी भरते होंगे कि भले आप H&M से शॉपिंग कर लो या फिर Zara से लेकिन जो मज़ा सरोजिनी नगर और कोलाबा कॉज़वे की भीड़ में शॉपिंग करने में आता है वो कही ओर नहीं आता। क्योकि इन बाजारों में आप अपने अनुसार मोल भाव कर सकते है और 500 की चीज को 150 रुपए में भी खरीद सकते है। जो सुख आपको 500 की चीज़ 150 रुपए में खरीदने में मिलता है वो आपको कही और नहीं मिल सकता। ये सुख हर कोई नहीं समझ सकता। इसे वो ही लोग समझ सकते है जो इस तरह की मार्किट से शॉपिंग करते है। लेकिन कई लोगों की शिकायत होती है कि इन मार्किट से खरीदे गए कपड़े बहुत आसानी से पहचाने जाते हैं। ये देखने में भी काफी अजीब लगते है। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देंगे जिनकी सहायता से और छोटे-मोटे बदलाव कर आप इन कपड़ों को हाई-एंड और महंगा दिखाया जा सकता है।

Image source – ytimg.com

क्लेंज़: आपने देखा होगा कि स्ट्रीट साइड में बिकने वाले कपड़े लगातार कई दिनों तक खुले में टंगे रहते है जिसके कारण इनमें काफी ज्यादा धूल-मिट्टी इकट्ठा हो जाती है। इसलिए आपको स्ट्रीट साइड से कपड़े लेने के बाद इनको अच्छे से धोना चाहिए। आपको इन कपड़ों को धोते समय इनमें डिटर्जेंट के साथ डेटॉल या सैवलॉन जैसे एंटिसेप्टिक भी शामिल करने चाहिए।

फैब्रिक पर दें ध्यान: अक्सर स्ट्रीट साइड से खरीदे गए कपड़ों का फैब्रिक बेस्ट क्वॉलिटी का नहीं होता है। क्योंकि ये कपड़े या तो किसी बड़े ब्रांड की कॉपी या डुप्लीकेट होते हैं। इसलिए आपको स्ट्रीट साइड से कपड़े खरीदते हुए डिज़ाइन या ट्रेंड के साथ साथ फैब्रिक को भी अच्छे से देख लेना चाहिए।

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बटन्स और ज़िप: आपने देखा होगा कि अक्सर स्ट्रीट साइड की दुकानों पर मिलने वाले कपड़े रिजेक्टेड पीसेज़ होते हैं। जिसका कारण अक्सर इनमें लगे अलग-अलग बटन्स या खराब ज़िप होती हैं। अगर आपके खरीदे कपड़ों में भी ऐसा कुछ है तो इसके बटन्स और ज़िप बदलवा लें जिससे आपके कपड़े में कोई कमी न रह जाए।

स्टाइलिंग: ये एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट पॉइंट हैं। आप स्ट्रीट साइड से खरीदे कपड़ों को भी उतने ही ध्यान से स्टाइल करें जितने ध्यान से आप बाकी कपड़ों को करते है। इन्हे अच्छे एक्सेसरीज़ और फुटवेयर के साथ मैच करें। आप चाहो तो बेल्ट्स और जैकेट्स जैसे एलिमेंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं इससे आपको एक बेहतर लुक मिलेगा।

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जाने हमारे देश में आधी से ज्यादा महिलाएं क्यों नहीं लेती खुद अपने आर्थिक फैसले

क्या महिलाएं स्वयं पर निर्भर नहीं है?


अगर हम अपने देश की महिलाओं की बात करें तो हमारे देश में आधी से ज्यादा महिलाएं खुद अपने आर्थिक फैसले नहीं लेती. ये सब देख कर तो बस एक ही सवाल मन में आता है कि क्या महिलाएं स्वयं पर निर्भर नहीं है. हाल ही में किये गए एक सर्वे के अनुसार महिलाओं ने कहा कि वो अपने आर्थिक फैसलों के लिए खुद पर निर्भर नहीं हैं. यह सर्वे फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई द्वारा किया गया है. फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई में अपने साल 2020 में किये गए सर्वे में इस तरह के आंकड़े उपलब्ध कराए. हमारे देश में महिलाओं पर किया गया यह पहला सर्वे है. इस सर्वे में महिलाओं के हक की बात की गयी है।

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जाने क्या बताती है फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई सर्वे की रिपोर्ट

अगर हम फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई सर्वे की माने तो सर्वे के आंकड़ों में पता चला है कि लगभग 66 प्रतिशत सिंगल महिलाएं अपने आर्थिक फैसले खुद से नहीं लेती. जबकि 28 प्रतिशत महिलाएं वित्त के मामले में पति या पिता पर निर्भर रहती है. बाकि की 5 प्रतिशत महिलाएं अपनी माँ की मर्जी से वित्त संबंधी फैसले लेती हैं. जाने सर्वे में किस उम्र की महिलाओं को शामिल किया गया है

फाइनेंशियल प्लानिंग प्लेटफार्म एलएक्सएमई सर्वे में 25 साल से 54 साल की 1250 महिलाओं को शामिल किया गया था. मुंबई, बेंगलूरू, दिल्ली, पुणे और जयपुर जैसे बड़े शहरों की महिलाएं इस सर्वे में शामिल हुई थी इस सर्वे में सिंगल महिलाओं को शामिल किया गया था. या फिर जो महिलाएं शादी के बाद पति से अलग हो कर बच्चों के साथ रहती हैं. 69 प्रतिशत महिलाएं अपने शादी के बाद अपने पति से अलग रहने के बाद भी अपने आर्थिक फैसले खुद नहीं लेती है उनका कहना है कि वो अपने आर्थिक फैसलों के लिए अपने पिता पर निर्भर हैं. साथ ही साथ इस सर्वे में उन महलाओं को भी शामिल किया गया है जो अपने बच्चों को सेविंग करना सिखाती हैं. हमारे देश में 91 प्रतिशत महिलाएं अपने बच्चों को पैसे से जुड़ी जानकारी देती हैं. इतना ही नहीं हमारे देश में हर दस में से नौ महिला अपने बच्चों को गुल्लक देकर सेविंग की आदत डाल रही हैं.

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जानें इंटरनेशनल मैन्स डे का इतिहास, कब से मनाया जा रहा है

भारत में 2007 से मनाया जा रहा है


हम हमेशा सुनते है कि किसी महिला के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा है. तरह-तरह के अत्याचारों की जिक्र किया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है यह सिर्फ महिलाओं के साथ ही  ऐसा होता है. कई जगहों  में देखा गया है कि पुरुषों को भी कई तरह की उत्पीड़ना का शिकार होना पड़ता है. कई बार तो वह बराबरी की हक से भी महरुम रह जाते हैं. लेकिन मैन्स डे मनाने के पीछे यह कारण नहीं है. ब्लकि इसके पीछे का  मुख्य मकसद पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य, पुरुषत्थ के सकारात्मक गुणों की सराहना, रोल मॉडल्स पुरुषों को मुख्य धारा में लैंगिग समानता आदि है. जिससे पुरुषों को भी पहचान के साथ-साथ सराहना भी मिल सके. मैन्स डे क्यों मनाया जाता है. इसके पीछे क्या कारण है आज आपके बताते हैं.

मैन्स डे का इतिहास

हम सभी जानते है कि 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमेन डे  बड़े धूमधाम से पूरे विश्व में मनाया जाता है. इसी तर्ज पर 1923 में कुछ पुरुषों ने इंटरनेशनल मैन्स डे मनाए जाने की मांग की. जिसके बाद 1968 में अमेरिकन जर्नालिस्ट जॉन पी. हैरिस ने एक आर्टिकल लिखते हुए कहा था कि सोवियत प्रणाली में संतुलन की कमी है. यह प्रणाली महिलाओं के लिए इंटरनेशनल वुमेन डे मनाती है. लेकिन पुरुषों के लिए वो किसी प्रकार का दिन नहीं मानती है. इन सबके बाद 19 नवंबर 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों द्वारा पहली बार इंटरनेशनल मैन्स डे मनाया गया. भारत में यह 2007 के बाद मनाना शुरु किया गया है. लेकिन इस सोशल मीडिया के जमाने में लोग अब बड़े धूमधाम से इसे मनाने लगे हैं. क्या आप जानते हैं डॉ तिलकसिंह ने अपने योगदानों में पुरुषों को मुख्यधारा में लाना का बहुत प्रयत्न किया था. जिसके कारण उनके पिता के जन्मदिन 19 नवंबर को इंटरनेशनल मैन्स डे मनाया जाता है.

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अच्छे खाना खिला सकती है

अगर आप अपने किसी फ्रेंड, कजन, या किसी करीबी पुरुष से नराज है और उन्हें मनाने का प्लान कर रही है. तो आज का दिन बहुत बेस्ट है. लगातार होती नोकझोक के बीच आज आप अपने किसी खास मैन को स्पेशल तोहफा दी सकती है. घर में उसके लिए कुछ अच्छा खाना बना सकती है. अगर पढ़ने के शौकीन है तो पुरुषों के जीवन की कठिनाईयों से संबंधित किसी बुक को दे सकती है. जिससे उन्हें स्पेशल फील हो. जैसे वुमेन डे को इन सारी चीजें से स्पेशल बनाया जाता है. वैसे ही मैन्स डे को ऐसे ही स्पेशल बनाया जाए.

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