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समीरा रेड्डी ने बेटे के पैदा होने के बाद पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन के बारे में कहीं ये बातें

आखिर क्यों postpartum depression के बारे कही समीरा रेड्डी ने बड़ी बात


दूसरी बार बनी हैं समीरा रेड्डी माँ

समीरा रेड्डी ने हाल ही में एक बच्ची को जन्म दिया है। अभिनेत्री ने दूसरी बार मातृत्व ग्रहण किया। और हाल ही में एक इवेंट में अभिनेत्री ने पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन के बारे में बात की।

पहले बच्चे के जन्म के बाद हो गया था डिप्रेशन –

अभिनेत्री ने अपने पहले बच्चे के जन्म के बाद खुलासा किया, वह डिप्रेशन के कारण अपने नवजात शिशु के साथ पूरी तरह से डिस्कनेक्ट हो गईं थीं। उन्होंने अपने बेटे हंस को अपने पति को दे दिया था और कहा था कि वह उसके बारे में अच्छा महसूस नहीं करती है। यह भी कहा कि यह सबसे बुरा काम था और अब उसे उम्मीद है कि दोबारा ऐसा नहीं होगा।

क्या कहा समीरा रेड्डी ने-

अपने गर्भावस्था के चरण के बारे में बात करते हुए, उन्होंीने कहा कि मेरा वजन 72 किलोग्राम से 105 किलोग्राम तक हो गया और जब मैंने अपने बेटे को जन्म दिया, तो मैं बहुत ज्यादा उदास थी। सी-सेक्शन से मेरे बेटे का जन्म हुआ था। मुझे नहीं पता था कि क्या हो रहा था… मैं बहुत खुश थी। लेकिन जब मैंने बेटे को जन्म दिया तो मेरा मोहभंग हो गया। मेरे पति मुझसे कह रहे थे कि मैं सुंदर हूं। मैंने कहा कि धन्यवाद लेकिन जाहिर है, आप झूठ बोल रहे हैं। मुझे इस बात से मोहभंग हो गया था कि मुझे काट दिया गया है। इस बारे में मुझसे किसी ने बात नहीं की। उन्होंने बताया कि किसी ने मुझसे नहीं कहा कि समीरा ऐसा भी हो सकता है। आपके हार्मोन टॉस के लिए जा सकते हैं। आपको पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन जैसा कुछ हो सकता है।

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उन्होंने आगे कहा कि स्थिति तब और खराब हो गई जब महिलाओं ने उसके वजन बढ़ने पर बातें बनाना शुरू कर दिया था।आपको बता दें, समीरा ने साल 2014 में बिजनेसमैन अक्षी वर्दे से शादी की थी। इस दंपति ने एक बेटे को जन्म, दिया था जो साल 2015 में हुआ था।काम की बात करें तो अभिनेत्री ने डरना मना है, नो एंट्री, रेस , दे दना दन जैसी कई फिल्मों से दर्शकों का मनोरंजन किया है।

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क्या आप अपनी उम्र से अधिक बड़े दिखाई देते हैं, जानिये इसका कारण

क्या आप अपनी उम्र से अधिक के दिखाई देते हैं


आजकल की जनरेशन फ़ास्ट पेस मोड में रहती हैं जिसके चलते वो समय से पहले बूढी होने लगी हैं। पुराने ज़माने में लोग फुर्सत से रहा करते थे और फुर्सत में सब कुछ करते थे लेकिन आज के समय में हर काम में जल्दबाज़ी और टेंशन रहती हैं वो चाहे घर का काम हो या ऑफिस की भागदौड़। इसी कारणवश आज की जनरेशन के लोग कुछ ना कुछ बीमारी के शिकार रहते है और उन्हें स्वास्थ्य समस्या लगी रहती हैं जैसे मानसिक बीमारी, शरीर में थकान, डिप्रेशन,माइग्रेन आदि। इन सबमें सबसे बड़ी टेंशन हैं – डिप्रेशन की बीमारी जिसके चलते एक से अधिक समस्याएं होने लगती है और व्यक्ति समय से पहले बूढ़ा हो जाता हैं।  आज के समय में  40 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लोगों में डिप्रेशन पहले के मुकाबले डबल होने लगा है और आंकड़ों के हिसाब से डिप्रेशन पुरुषों के मुकाबले महिलाओ में ज्यादा रहता हैं।

आइये जानते है समय से पहले बूढ़ा होने के कारण –

शादीशुदा महिलायें – हाल ही में एक अध्ययन से यह पता चला है कि  महिलायें शादीशुदा महिलाओ के मुकाबले ज्यादा खुश रहती हैं। इसका कारण शादीशुदा महिलाओ को घर की जिम्मवारियों और सामाजिक जिम्मवारियों के चलते डिप्रेशन की समस्या हो जाती हैं। वो समय से पहले बड़ी उम्र की दिखने लगती हैं। आपके लिए जरूरी नहीं कि आप हर जगह खुद को परफेक्ट साबित करें और जरूरत से अधिक उम्मीदें पूरी करें। उम्मीदें पूरी ना कर पाने पर डिप्रेशन होता है। डिप्रेशन के कारण हार्मोनल इंबैलेंस होना और मूड स्विंग की समस्या भी हो जाती हैं। इसी के साथ अगर हम पुरुषों की बात करें तो ऑफिस के काम के प्रेशर और घर की जीवीका कमाने के चक्कर वो कभी-कभी इतना अधिक भाग-दौड करने लगते है कि उन्हें डिप्रेशन होने लगता हैं। इसी डिप्रेशन के चलते वो समय से पहले बुढ़ापे के शिकार हो जाते हैं।

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आइये जानते है डिप्रेशन से बचें और समय से पहले बुढ़ापे से बचने के टिप्स –

  • बैलेंस कैसे बनाये – आज के लाइफ स्टाइल के चलते मे प्रॉब्लम होना स्वाभविक है लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आप डिप्रेशन में आ जाएँ। अपने मन को शांत रख तनाव से दूर रहें। पुरुषों और महिलाओं को अपनी सेहत के साथ-साथ कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। अपनी लाइफ बैलेंस करें और खुद के लिए भी समय निकालें। दूसरों की उम्मीदों का बोझ अपने सर पर ना डालें और अपना सोशल सर्किल बनाकर रखें।
  • डिप्रेशन को दूर करने के कारणों को तलाश करें – अगर आप डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे है तो आपको इसको इग्नोर करने के बजाय इसके कारणों को तलाश करना चाहिए। ऐसा करने से आप स्वस्थ रहेंगे और आप पर बुढ़ापा भी हावी नहीं होगा। अपने लिए समय निकालकर योग और व्यायाम करें. मन को शांत रखें। अपनी समस्यायों को घरवालों से और किसी दोस्त के साथ शेयर करें।
  • नयी आदतें अपनाएँ – खुद को डिप्रेशन से दूर रखने और हमेशा जवान दिखने के लिए कोई अच्ची आदत अपनाएँ। आप चाहे तो डांस क्लास ज्वाइन करें, पेंटिंग करें, सिंगिंग करें, नई जगहों पर जाकर कुदरती नजारों का आनंद लें या फिर घर पर रहते हुए कुकिंग को एंजॉय करें। यह सब बातों को अपनाकर आप  डिप्रेशन से दूर रह सकते हैं और खुद को समय से पहले बूढ़ा होने से बचा सकता हैं।

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लाइफस्टाइल

टीना दत्ता ने किया अपने जीवन से जुड़ा बड़ा खुलासा, फांसी थी बुरे रिलेशनशिप में.

प्यार की तलाश कर रही है टीना दत्ता, क्या सिंगल है आप?


वर्ल्ड मेन्टल हेल्थ अवेयरनेस बढ़ाने के लिए हर साल 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेन्टल हेल्थ डे बनाया जाता है। 10 अक्टूबर, 2014 में नेशनल मेन्टल हेल्थ पॉलिसी की घोषणा की गई थी। मानसिक सवस्थ देख-रेख के अधिनियम को 2017 में राष्टपति ने लागु किया था। इस समस्या को प्रेजिडेंट प्रणब मुखर्जी ने  काफी गंभीर रूप से लिया। वर्ल्ड मेन्टल हेल्थ डे नज़दीक आ रहा है और इसी के मौके पर कलर्स टीवी पर आने वाले शो ‘उतरन’ से फेम पा चुकी ‘इच्छा’ उर्फ़ टीना दत्ता हाल में ही अपने मेन्टल हेल्थ के बारे में खुल बोलते नज़र आयी।

बुरे दौर से गुजरने के बाद ज़िंदगी में आगे बढ़ने की है चाह 

आपको बाता दे की, टीना दत्ता एक बुरे रिलेशनशिप में थी जहां पर उनके साथ काफी हिंसा की गयी थी। उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया की कैसे अपने उस बुरे दौर से बाहर निकली और अब वो अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहती है। एक्ट्रेस ने खुलास किया है की अब वो फिर से अपने जीवन में प्यार की तलाश कर रही है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई बेस्ट पार्टनर नहीं मिला है।
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दत्ता ने अपनी मेन्टल हेल्थ के बारे में आगे बताया की वो किसी पर भी भरोसा नहीं कर पाती थी,  और एक समय ऐसा आया जब वो डिप्रेशन में चली गई थी। उन्होंने अपने उस दौर को काफी डरावना बताया है। उन्होंने आगे कहा की वो उस वक़्त छोटी उम्र में प्यार कर बैठी थी जहा उन्हें किसी भी चीज़ की समझ नहीं थी. उस वक़्त उन्हें सब कुछ खत्म कर देना चाहिए था पर वो उस रिश्ते को बचाने में लगी हुई थी, और सबसे अनोखी बात यह है की वो आज भी उस इंसान को किसी भी प्रकार का दोषी नहीं मानती है। दरसअल, वो यही कहती है की जो मर्द आप पर हाथ उठाता है वो मर्द ही नहीं होता है।

मगर अब टीना काफी कुश है अपने जीवन में और वो यही बोलती है की किसी को भी हक़ नहीं है, जो आपकी बेज़्ज़ती करें, आपकी खुशी आपके ही हाथ में है।

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सेहत

देर तक काम करना बन सकता है महिलाओं मे अवसाद का कारण

जाने क्यों हो जाती है महिलाये अवसाद का शिकार


महिलाओं में अवसाद का कारण

अगर हम 21 वीं सदी की बात करें तो महिलाएं  समाज में पुरुषों से कंधे से कन्धा मिलकर चलने को तैयार हैं और इसके लिए वो हर क्षेत्र में अव्वल बन  रही हैं। आजकल की महिलायें घरेलू काम-काज के बदले बाहर निकलकर ऐसे काम कर रही है है जिन  पर हक़ कभी सिर्फ पुरुषों को हुआ करता था। अगर हम विकास की बात करें तो ये एक अच्छी बात है लेकिन ऐसा करने से महिलाओ में अवसाद और तनाव की दर बढ़ती जा रही हैं।

क्या आप जानते है लंबे समय तक काम करने से महिलाओं को अधिक अवसाद होता है जबकि पुरुषों में ऐसा नहीं होता है। हाल ही में किए गए एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक तनाव और अवसाद से ग्रस्त रहती है और इसका कारण है उनका लम्बे समय तक काम करना। आंकड़ों के अनुसार, अगर कोई महिला एक सप्ताह में 55 घंटे से अधिक काम करती है तो वो अवसाद और तनाव की शिकार हो सकती हैं।

साल 2018  में नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में काम करने के लिए वर्किंग हॉर्स सबसे ज्यादा हैं। शहरों में लोग औसतन एक हफ्ते में 53-54 घंटे काम करते हैं और वही बात अगर हम गांवों की करें वो वहा एक सप्ताह में लगभग 46-47 घंटे काम किया जाता हैं। 

आइये जानते है नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

अध्ययन के अनुसार, प्रति सप्ताह 35-40 घंटे की काम करने वाली महिलाओं की तुलना में एक सप्ताह में 55 घंटे से अधिक काम करने वाली महिलाओं में
अधिक अवसाद ग्रस्तता वाले लक्षण दिखाई दिए।

• अध्ययन में, 55 घंटे से अधिक काम करने वाली महिलाओं में तनाव के अतिरिक्त अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी नजर आई।
• इसके विपरीत जिन पुरुषों ने 55 घंटे से अधिक लंबे समय तक काम किया, उनमे अवसाद और तनाव के लक्षण नहीं दिखाई दिए।
• इस अध्ययन में महिला और पुरुषों के बीच परिणामों में अंतर का कारण दोनों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को माना गया।
• जब महिलाएं समाज में अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश करती हैं और साथ ही उन्हें घर की जिम्मवारियों को भी उठाना होता है तो उन्हें अवसाद और तनाव रहता हैं।

लम्बे समय तक काम करने से एक महिला की मानसिक स्थिति में बदलाव आता है और वो अवसाद, तनाव से घिर जाती हैं इसके लिए हम आपको कुछ उपाय बताएँगे जिन्हे करने से आप अपनी पहचान स्थापित करने के साथ-साथ घर की जिम्मवारियों को भी उठा सकती हैं –

• लंबे समय तक काम के घंटे के बीच मस्तिष्क को कार्यशील रखने के लिए अपने काम के बीच छोटे -छोटे ब्रेक लेने की कोसिश  करें।
• अपने काम को  बोझ ना समझें और अपने काम से प्यार करें।
• जैसे ही आपको लगता है कि तनाव महसूस कर रहे है तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए कही घूमने जाएँ, मूवी देखें या हो सकें तो एक छोटा सा ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं।
• रोजना उठकर अपने लिए समय निकालें और व्यायाम और मैडिटेशन करें।
• कम से कम 7 – 8 से घंटे की नींद लें, पौष्टिक और नुट्रिशयस डाइट लें।

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क्या आप को बार-बार मोबाइल चेक करने की लत लग गई है तो हो जाए सावधान!

क्या आप को मोबाइल चेक करने की लत लग गई है?


आज के समय में हर इंसान के जीवन में फोन मुख्य भूमिका निभाता है। लोग फोन लिए बिना घर से बाहर तक नहीं निकलते है। हम अक्सर देखते हैं कि कई लोगो को बेवजह अपने फोन को बार-बार चेक करने की आदत होती है।

ऐसे लोग अगर कुछ समय तक अपना फोन ना चेक करे तो उन्हे बेचैनी सी होने लगती है। पर क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा क्यों है, अगर आप एक्सपर्टस के नजरिए से देखे तो ऐसे लोग डिप्रेशन के शिकार हो सकते है। तो क्या आप को बार-बार मोबाइल चेक करने की लत लग गई है?

मोबाइल चेक करने की लत

रिसर्च में सामने आया की 96% लोग करते है मोबाइल चेक। उठने के बाद पांच मिनट के अंदर अपना मोबाइल यूज करने वालों की संख्या 61% और सुबह उठने के बाद 30 मिनट के भीतर मोबाइल चेक करने वालो की संख्या 88% तो वहीं एक घंटे के भीतर संख्या बढ़कर 96% तक हो जाती है।

अगर देखा जाये तो मोबाइल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। सुबह और शाम के साथ-साथ आदमी दिन में भी ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने मोबाइल फोन की तरफ देखकर ही बिता रहा है।

अगर कोई इंसान बार-बार अपना फोन चेक करता है तो उसे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि यही आदत आगे चलकर बीमारी का रूप ले सकती है।

डिप्रेशन के अलावा बार-बार फोन चेक करने के और भी नुकसान

• मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने से आंखो व दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे आंखो में कमजोरी होती है और दिमाग पर असर होने की वजह से निर्णय लेने की श्रमता पर भी प्रभाव पड़ता है।

• सुबह उठते साथ ही और रात को देर तक मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इस समय आपको आराम की जरूरत होती है।

• आपको बता दे कि बार-बार फोन को देखने से आप तनावग्रस्त हो सकते है।

• जरूरी काम करने के बाद ही अपने मोबाइल को चेक करना चाहिए नहीं तो आपके जरूरी काम रह जाते है।

• देर रात तक मोबाइल का उपयोग करने से नींद पूरी नहीं हो पाती है इसलिए तनाव बढ़ता है।