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Malalai Kakar: जाने कौन है कर्नल मलालाई कक्कड़, जिन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पहनी थी वर्दी

Malalai Kakar: जाने अफगान महिलाओं की सुरक्षा के लिए लड़ाई लड़ने वाली कर्नल मलालाई कक्कड़ के बारे में


Malalai Kakar : आज के समय पर अफगानी महिलाओं की दुर्दशा और उन पर लगने वाली बंदिशें किसी से छुपी नहीं हैं। जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना कब्जा किया है तब से ही वहां की महिलाओं की स्थिति ओर ज्यादा खराब होने का दावा किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अभी तालिबानियों द्वारा अफगानी महिलाओं के ऊपर कई नियम कायदे लगाएं जा रहे हैं। अभी अफगानिस्तान में महिलाओं को अपने परिवार के किसी पुरुष के बिना घर से बाहर जाने की मनाही हैं। यहां तक की अभी वहां की महिलाओं के पढ़ाई पर भी कई तरह की बंदिशें हैं लेकिन इन सबके बीच सवाल ये उठता है कि क्या हमेशा से अफगानी महिलाओं ही यही स्थिति थीं? क्या किसी भी महिला ने इन सख्त नियमों से आजादी पाने और देश के नाम को बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया। तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।

Malalai Kakar

अगर आप भी ये सोचते है कि अफगानिस्तान में महिलाओं ने इन सख्त नियमों के खिलाफ आवाज उठाने की या फिर देश का नाम आगे बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया या फिर अफगानी महिलाओं की हमेशा यही स्थिति थीं तो आप गलत है। आपको बता दें कि अफगान महिलाओं की स्थिति हमेशा से इतनी खराब नहीं थीं। अफगानिस्तान में भी महिलाओं को अपने अनुसार पढ़ने, मन मुताबिक कपड़े पहनने और अपने देश की बढ़ती संस्था में एक सम्मानित पद पर काम करने की आजादी थी। इस आजादी का भरपूर फायदा उठाया मलालाई कक्कड़ ने। ये नाम शायद अपने नहीं सुना होगा लेकिन अफगान इतिहास में इस महिला ने अपना नाम अपने काम के बलबूते सुनहरे अक्षरों से लिख दिया है। तो चलिए विस्तार से जानते है कौन है मलालाई कक्कड़ और कौन कौन सी उपलब्धि है उनके नाम।

Malalai Kakar

जाने कौन है मलालाई कक्कड़

मलालाई कक्कड़ का जन्म अफगानिस्तान के कंधार में साल 1967 में हुआ था। उनके पिता और भाई अफगानिस्तान के पुलिस विभाग में काम करते थे। बता दें कि मलालाई कक्कड़ भी अपने पिता और भाई के नक्शेकदम पर चलते हुए अफगान पुलिस बल में शामिल हो गई थी। उन्होंने साल 1982 में पुलिस बल ज्वाइन किया था। लेकिन उसके बाद जब 1990 में तालिबान ने अफगानिस्तान के कंधार पर कब्जा किया तो सभी महिलाओं के काम करने पर रोक लगा दी गई।

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पहली महिला पुलिस अधिकारी

साल 1990 में तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना कब्जा कर लिया था। लेकिन उसके बाद तालिबान सत्ता से बेदखल हो गया। जिसके तुरंत बाद ही मलालाई कक्कड़ अपनी ड्यूटी पर वापस लौट आयी। बता दें कि जिस समय पर पूरा अफगानिस्तान खासकर वहां की महिलाएं तालिबानियों के आतंक से सहमी हुई थी उस समय पर मलालाई कक्कड़ अपने काम पर वापस लौटने वाली देश की पहली महिला पुलिस अधिकारी थीं।

जाने मलालाई कक्कड़ ने अफगानी महिलाओं के लिए क्या किया

मलालाई कक्कड़ ने महिलाओं पर हो रहे अपराध पर अधिक फोकस किया। अफगानिस्तान में विद्रोहियों के खिलाफ जंग में वहां की दिलेर महिला पुलिसकर्मी ने अहम भूमिका निभाई। दरअसल जब भी अफगानिस्तान में सुरक्षाबल और पुलिस किसी को पकड़ने के लिए उनके घरों में तलाशी लेते थे तो महिलाओं के कमरों में जाने और उनकी तलाशी लेने में काफी समस्या आती थी, क्योंकि उनके ऐसे करने से अफगानिस्तान के लोग नाराज हो जाते थे। और विद्रोही इसी बात का फायदा उठा कर महिलाओं के कमरों में हथियार छुपा देते थे, या फिर बुर्का पहन कर महिलाओं के कमरों में छिप जाते थे। आपको बता दें कि इस तरफ के अभियान में मलालाई कक्कड़ शामिल होती थीं और महिलाओं की तलाशी लेती थीं।

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मलालाई कक्कड़ के नाम है ये उपलब्धि

अगर हम मलालाई कक्कड़ की उपलब्धि की बात करें तो उन्होंने कंधार पुलिस अकादमी से स्नातक की डिग्री पूरी करनी वाली पहली अफगानी महिला थीं। इतना ही नहीं जब 1990 में तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना कब्जा किया था। और उसके बाद अफगानिस्तान से तालिबान की सत्ता हटी तो उसके बाद मलालाई कक्कड़ काम पर लौटने वाली पहली अफगानी महिला पुलिस अधिकारी बनी। इसके साथ ही मलालाई कक्कड़ कंधार पुलिस विभाग के साथ एक अन्वेषक या इनवेस्टिगेटर बनने वाली पहली अफगानी महिला थी।

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