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Organic Jaggery Benefits: चाय में गुड़ या शहद डालना है तो न करें ये गलती, सेहत पर पड़ सकता है असर

Organic Jaggery Benefits, भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। सुबह उठते ही एक कप चाय से दिन की शुरुआत करने से लेकर शाम की थकान मिटाने तक, करोड़ों लोग चाय का आनंद लेते हैं।

Organic Jaggery Benefits : चाय को हेल्दी बनाने के चक्कर में तो नहीं कर रहीं ये गलती? गुड़-शहद से जुड़ी जरूरी बातें

Organic Jaggery Benefits, भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। सुबह उठते ही एक कप चाय से दिन की शुरुआत करने से लेकर शाम की थकान मिटाने तक, करोड़ों लोग चाय का आनंद लेते हैं। अब हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ कई लोग अपनी चाय में सफेद चीनी की जगह गुड़ या शहद डालने लगे हैं। माना जाता है कि ये दोनों प्राकृतिक स्वीटनर हैं और इसलिए चीनी से बेहतर विकल्प हो सकते हैं। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है?अगर आप भी रोजाना चाय में गुड़ या शहद डालती हैं, तो इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें जानना आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के मुताबिक गुड़ और शहद को पूरी तरह “हेल्दी” मान लेना सही नहीं है। इनका इस्तेमाल किस मात्रा में और किस तरह किया जा रहा है, यह भी काफी मायने रखता है।

क्या गुड़ चीनी से ज्यादा हेल्दी है?

गुड़ को आमतौर पर सफेद चीनी का बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह अपेक्षाकृत कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें कुछ मिनरल्स मौजूद हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ कैलोरी या शुगर से मुक्त है। शरीर में पहुंचने के बाद गुड़ भी मुख्य रूप से शुगर ही उपलब्ध कराता है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ चीनी की जगह गुड़ डालकर चाय पी रहा है, तो इससे चाय अचानक हेल्थ ड्रिंक नहीं बन जाती। गुड़ में मौजूद थोड़ी मात्रा में मिनरल्स के बावजूद इसे जरूरत से ज्यादा लेना उचित नहीं है।इसलिए अगर आप गुड़ वाली चाय पसंद करती हैं, तो कम मात्रा में इसका इस्तेमाल करना बेहतर है। साथ ही दिनभर में ली जाने वाली कुल चीनी और मीठे खाद्य पदार्थों पर भी ध्यान देना चाहिए।

क्या शहद वाली चाय बेहतर विकल्प है?

शहद को भी प्राकृतिक स्वीटनर के रूप में देखा जाता है। इसमें कुछ एंटीऑक्सीडेंट और अन्य प्राकृतिक कंपाउंड पाए जाते हैं। लेकिन शहद को भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। शहद में प्राकृतिक शर्करा होती है, इसलिए इसे असीमित मात्रा में पीना वजन या ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिहाज से सही नहीं माना जा सकता।सबसे जरूरी बात इसका तापमान है। हालिया विशेषज्ञ जानकारी के अनुसार बहुत अधिक गर्मी शहद के कुछ एंजाइम, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य प्राकृतिक घटकों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अगर आप चाय में शहद डालना चाहती हैं, तो उसे खौलती हुई चाय में डालने के बजाय चाय के थोड़ा ठंडा होने के बाद मिलाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

खौलती चाय में शहद डालने से क्या होगा?

सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि गर्म चाय में शहद डालना “जहरीला” हो जाता है। इस दावे को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं समझना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गर्म करने से शहद के कुछ लाभकारी घटक कम हो सकते हैं, लेकिन सामान्य रूप से गर्म किए गए शहद को अचानक जहरीला मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।अगर आपका उद्देश्य शहद के प्राकृतिक गुणों का अधिकतम लाभ लेना है, तो इसे बहुत गर्म पेय में डालने के बजाय हल्के गुनगुने पेय में मिलाना बेहतर है।

वजन घटाने वालों के लिए क्या गुड़ या शहद सही है?

वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच यह धारणा काफी लोकप्रिय है कि चीनी छोड़कर गुड़ या शहद लेने से वजन तेजी से कम हो सकता है। लेकिन केवल स्वीटनर बदलने से वजन कम नहीं होता।वजन घटाने में आपकी पूरी डाइट, कुल कैलोरी, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली की भूमिका होती है। अगर आप पहले दो चम्मच चीनी वाली चाय पीती थीं और अब उतनी ही मात्रा में गुड़ या शहद डाल रही हैं, तो सिर्फ नाम बदलने से कैलोरी का सेवन खत्म नहीं हो जाता।इसलिए वजन घटाने के लिए चाय को कम मीठा करना या बिना चीनी की चाय की आदत डालना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

Jaggery tea

डायबिटीज में क्या गुड़ वाली चाय पी सकते हैं?

डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या वाले लोगों को गुड़ और शहद को चीनी का ऐसा विकल्प नहीं समझना चाहिए जिसे बिना मात्रा की चिंता किए लिया जा सके। दोनों में शर्करा होती है और इनका सेवन ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकता है।ऐसे लोगों को अपनी डाइट के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेनी चाहिए। खासकर अगर आप रोजाना कई कप मीठी चाय पीती हैं, तो कुल शुगर इनटेक पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

चाय में गुड़ डालने का सही तरीका

अगर आपको गुड़ वाली चाय पसंद है, तो इसे बनाते समय एक बात का ध्यान रखें गुड़ को जरूरत से ज्यादा न डालें। कुछ रेसिपी में चाय तैयार होने के बाद गुड़ मिलाया जाता है। उदाहरण के तौर पर जिंजर-जैगरी टी की एक रेसिपी में चाय तैयार करने के बाद गुड़ डालने की विधि बताई गई है।दूध वाली चाय में गुड़ डालने पर कभी-कभी दूध फटने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए गुड़ वाली चाय बनाते समय तापमान और सामग्री के क्रम का ध्यान रखना जरूरी है।

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चाय पीते समय इन बातों का भी रखें ध्यान

सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि चाय में चीनी है या गुड़-शहद। चाय कितनी मात्रा में और कब पी जा रही है, यह भी महत्वपूर्ण है।बहुत ज्यादा चाय पीने से कैफीन का सेवन बढ़ सकता है। इसके अलावा चाय में मौजूद कुछ कंपाउंड आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए भोजन के तुरंत साथ चाय पीने की आदत से बचना बेहतर माना जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें आयरन की कमी का जोखिम है।चाय को बार-बार गर्म करके पीने से भी बचना चाहिए। हालिया हेल्थ रिपोर्ट्स में विशेषज्ञों ने बार-बार गर्म की गई चाय को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

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तो आखिर कौन सा स्वीटनर चुनें?

अगर आप स्वस्थ तरीके से चाय पीना चाहती हैं, तो सबसे जरूरी बात है मात्रा पर नियंत्रण। सफेद चीनी की जगह थोड़ी मात्रा में गुड़ या शहद लेना आपकी पसंद हो सकती है, लेकिन इसे हेल्दी फूड समझकर ज्यादा मात्रा में लेना सही नहीं है।अगर संभव हो तो धीरे-धीरे चाय में मिठास की मात्रा कम करें। इससे कुछ समय बाद कम मीठी या बिना चीनी वाली चाय पीने की आदत विकसित हो सकती है।गुड़ और शहद प्राकृतिक स्वीटनर जरूर हैं, लेकिन इन्हें चीनी का ऐसा विकल्प नहीं माना जाना चाहिए जिसे कितनी भी मात्रा में लिया जा सके। गुड़ में कुछ मिनरल्स होते हैं, लेकिन यह फिर भी शुगर का स्रोत है। वहीं शहद में मौजूद प्राकृतिक कंपाउंड बहुत अधिक गर्मी से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए शहद को खौलती चाय में डालने के बजाय चाय के थोड़ा ठंडा होने के बाद मिलाना बेहतर है।सबसे बेहतर तरीका यही है कि चाय में किसी भी तरह की मिठास सीमित रखें और अपनी पूरी डाइट को संतुलित बनाएं। खासकर डायबिटीज, वजन प्रबंधन या आयरन की कमी जैसी स्थिति में व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से संपर्क करना उचित रहेगा।

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