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क्या आपने भी पढ़ा ढाई आखर प्रेम का

क्या आपने भी पढ़ा ढाई आखर प्रेम का


संत कबीर, किसी ज़माने में हम सभी को सिखा गए कि ‘पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोई, ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होए।‘ अब बात कुछ गलत थोड़ी ना कही कबीर जी ने,  चाहे जितना ज्ञान सीख लिया जाए पर जब तक प्यार की भाषा न सीखी जाए तब तक ज्ञानी कैसे हो सकते हो? आखिर प्यार की भाषा तो हर कोई समझ जाता है।

प्रेम
अँधेरे में रौशनी का काम करता है प्यार

कहते है कि प्रेम की भाषा ऐसी है जो अंधे को दिखती है, बहरे को सुनाई देती है और मूक बोल सकता है। सोचा है कितनी ही ताकत है इस भाषा में। ये ढाई आखरो से बना शब्द बहुत ही बड़ा और गहरा है। इस शब्द का अस्तित्व सिर्फ ‘आई लव यू’ तक सीमित नहीं है। सिर्फ बोलने से ही प्यार का एहसास नहीं दिलाया जाता।

माँ का ममता भरा स्पर्श, पिता की डाँट, दोस्त की झप्पी सब हमारे प्रति प्यार ही तो दर्शाता है। ये सभी लोग हमें दिन में दस बार ‘आई लव यू’ नहीं बोलते, पर हमें फिर भी पता होता है कि ये सभी लोग हमसे कितना प्यार करते है। सच्चे प्यार को महसूस किया जाता है, बिना कहे ही इसको समझ लिया जाता है।

प्रेम
प्यार बातों तक सीमित नहीं होता

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प्यार एक एहसास है, इसे शब्दो के माध्यम से समझाया नहीं जा सकता। आज कल प्यार सिर्फ एक मजाक बनके रह गया है। गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के “प्यार” से बहुत ऊपर होता है। अब तो प्यार को खोखला बना दिया गया है। सच्चा प्यार एक अलग सा सुकून देता है, एक अलग सी ख़ुशी देता है।

इस ढाई आखर में पूरी दुनिया को समेटा जा सकता है। इस लफ्ज़ में, इस एहसास में हर शक्ति से ज़्यादा ताकत है। अगर हर कोई इस लफ्ज़ को पढ़ के सीख ले या इस एहसास की इज़्ज़त करना शुरू करदे तो ये दुनिया एक बेहतर जगह होगी, जहाँ इंसानियत भी होगी और खुशियाँ भी।

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