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Acid Reflux: सीने में जलन और गले में आता है खट्टा पानी? इन चीजों से कंट्रोल करें Acidity

Acid Reflux, खाना खाने के बाद सीने में जलन, गले में खट्टा पानी आना, बार-बार खट्टी डकारें और पेट में भारीपन जैसी समस्या काफी लोगों को परेशान करती है। कई बार लोग इसे सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दरअसल,

Acid Reflux : खट्टी डकार और सीने की जलन को न करें नजरअंदाज, Acidity से बचने के लिए अपनाएं ये डाइट

Acid Reflux, खाना खाने के बाद सीने में जलन, गले में खट्टा पानी आना, बार-बार खट्टी डकारें और पेट में भारीपन जैसी समस्या काफी लोगों को परेशान करती है। कई बार लोग इसे सामान्य गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दरअसल, ये लक्षण एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स से जुड़े हो सकते हैं। जब पेट का एसिड ऊपर की ओर भोजन नली में आने लगता है, तो सीने या गले में जलन महसूस हो सकती है।खान-पान की आदतें एसिडिटी के लक्षणों को बढ़ाने या कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति में ट्रिगर अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी डाइट को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि एसिडिटी से परेशान होने पर डाइट में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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सबसे पहले समझें एसिडिटी क्यों होती है

हमारा पेट भोजन को पचाने के लिए एसिड बनाता है। सामान्य स्थिति में पेट और भोजन नली के बीच मौजूद एक मांसपेशीय वाल्व पेट की सामग्री को ऊपर आने से रोकने में मदद करता है। जब यह ठीक से काम नहीं करता या पेट पर दबाव बढ़ता है, तो एसिड भोजन नली में वापस आ सकता है।इसी वजह से सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन या मुंह में खट्टा स्वाद महसूस हो सकता है। बहुत ज्यादा खाना, खाने के तुरंत बाद लेटना और कुछ विशेष खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में इन लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।

एक बार में बहुत ज्यादा खाना न खाएं

एसिडिटी से बचने के लिए सबसे पहले अपनी मील की मात्रा पर ध्यान दें। एक बार में बहुत ज्यादा खाना खाने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है और रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है।इसलिए दिनभर में जरूरत के अनुसार छोटे और संतुलित मील लेना बेहतर हो सकता है। खाना धीरे-धीरे खाएं और अच्छी तरह चबाकर खाएं। जल्दी-जल्दी खाने की आदत भी पेट से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती है।

तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना कम करें

अगर आपको बार-बार एसिडिटी होती है, तो बहुत ज्यादा ऑयली, फ्राइड और मसालेदार भोजन कम करना फायदेमंद हो सकता है। समोसा, पकौड़े, पूरी, फ्रेंच फ्राइज और बहुत ज्यादा तेल में बने व्यंजन कुछ लोगों में हार्टबर्न को ट्रिगर कर सकते हैं।इसी तरह बहुत तीखा खाना भी संवेदनशील लोगों में सीने की जलन बढ़ा सकता है। भोजन को हल्का रखने और कम तेल में पकाने की कोशिश करें।

ज्यादा खट्टे खाद्य पदार्थों से रहें सावधान

नींबू, संतरा, मौसमी, टमाटर और दूसरे खट्टे खाद्य पदार्थ पोषक होते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ये एसिड रिफ्लक्स के लक्षण बढ़ा सकते हैं। अगर आपको किसी खास खट्टी चीज को खाने के बाद जलन या खट्टी डकारें ज्यादा महसूस होती हैं, तो कुछ समय के लिए उसकी मात्रा कम करके देखें।यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को सभी खट्टे खाद्य पदार्थों से परेशानी हो। इसलिए अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया पर ध्यान देना बेहतर है।

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चाय और कॉफी का सेवन सीमित करें

कुछ लोगों में कैफीन एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकता है। अगर आपको चाय या कॉफी पीने के बाद सीने में जलन या खट्टी डकारें अधिक होती हैं, तो इसकी मात्रा कम करने की कोशिश करें।खासकर देर शाम या रात में ज्यादा चाय-कॉफी लेने से बचना उपयोगी हो सकता है। इसकी जगह सामान्य पानी या अपनी पसंद का कोई ऐसा पेय लिया जा सकता है जो आपको सूट करता हो।

कार्बोनेटेड ड्रिंक्स से बनाएं दूरी

सॉफ्ट ड्रिंक और दूसरे कार्बोनेटेड पेय पेट में गैस और डकार की समस्या बढ़ा सकते हैं। कुछ लोगों में इनके सेवन के बाद एसिड रिफ्लक्स के लक्षण भी बढ़ जाते हैं।इसलिए अगर आपको अक्सर खट्टी डकारें आती हैं, तो सोडा और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की जगह सादा पानी पीने की आदत डालें।

रात का खाना सोने से ठीक पहले न खाएं

एसिडिटी से बचने के लिए खाने और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना महत्वपूर्ण है। खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से पेट की सामग्री के भोजन नली में वापस आने की संभावना बढ़ सकती है।इसलिए कोशिश करें कि सोने से कुछ घंटे पहले रात का खाना खा लिया जाए। डिनर हल्का रखें और खाने के बाद कुछ देर सामान्य गतिविधि करते रहें।

डाइट में फाइबर वाली चीजें शामिल करें

संतुलित मात्रा में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे ओट्स, साबुत अनाज, सब्जियां और कुछ फल आपकी डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।हालांकि अगर किसी विशेष फल या सब्जी से आपको एसिडिटी बढ़ती महसूस होती है, तो उसे अपनी व्यक्तिगत सहनशीलता के अनुसार सीमित करें।

केला और अन्य फल कब खाएं?

फल सामान्य रूप से संतुलित डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन एसिडिटी की समस्या में यह देखना जरूरी है कि कौन-सा फल आपको सूट करता है।कुछ लोगों को केला जैसे कम अम्लीय फल आरामदायक लग सकते हैं, जबकि कुछ लोगों में कोई विशेष फल परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए केवल इंटरनेट पर बताए गए ‘एसिडिटी के लिए सबसे अच्छा फल’ पर निर्भर रहने के बजाय अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझें।

पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं

शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने की कोशिश करें। हालांकि खाना खाते समय बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पीने के बजाय इसे पूरे दिन में बांटकर पीना कुछ लोगों को अधिक आरामदायक लग सकता है।पानी के अलावा बहुत ज्यादा कैफीन, सोडा या ऐसे पेय जिनसे आपको व्यक्तिगत रूप से जलन बढ़ती हो, उनका सेवन सीमित करें।

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खाना खाने के बाद ये गलती न करें

अगर आपको एसिडिटी की शिकायत रहती है तो खाना खाने के तुरंत बाद बिस्तर या सोफे पर लेटने से बचें। लंबे समय तक झुककर बैठना भी कुछ लोगों में परेशानी बढ़ा सकता है।खाने के बाद हल्की-फुल्की गतिविधि करना बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि तुरंत भारी एक्सरसाइज करने से बचें।

अपना फूड डायरी बनाना हो सकता है मददगार

हर व्यक्ति में एसिडिटी के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। किसी को मसालेदार खाना परेशान करता है तो किसी को कॉफी, चॉकलेट, टमाटर या बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन।अगर आपको बार-बार समस्या होती है, तो कुछ दिनों तक क्या खाया और उसके बाद कौन-से लक्षण हुए, इसकी डायरी बना सकते हैं। इससे आपको अपने व्यक्तिगत ट्रिगर पहचानने में मदद मिल सकती है।

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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

कभी-कभार होने वाली हल्की जलन आम हो सकती है, लेकिन अगर एसिडिटी बार-बार होती है, लंबे समय तक बनी रहती है या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।अगर सीने में तेज या दबाव जैसा दर्द हो, दर्द हाथ या जबड़े तक जाए, सांस लेने में परेशानी हो, निगलने में दिक्कत हो, लगातार उल्टी हो, खून आए या बिना वजह वजन कम हो रहा हो, तो इसे केवल गैस या एसिडिटी मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।एसिडिटी से राहत पाने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी खाने की मात्रा, समय और व्यक्तिगत फूड ट्रिगर पर ध्यान दें। बहुत ज्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन, अधिक कैफीन, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और देर रात भारी खाना कुछ लोगों में समस्या बढ़ा सकता है। इसके साथ ही खाना धीरे-धीरे खाना और खाने के तुरंत बाद न लेटना भी मददगार आदतें हैं।

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