PIB Fact Check: PM मोदी और केंद्रीय मंत्री का फेक AI वीडियो वायरल, पाकिस्तानी हैंडल्स पर साजिश का आरोप
PIB Fact Check, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक केंद्रीय मंत्री के कथित वीडियो वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे फर्जी और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार किया गया डीपफेक बताया है।
PIB Fact Check : फर्जी AI वीडियो से फैलाया गया भ्रम? PM मोदी और मंत्री के वीडियो पर सरकार का बड़ा दावा
PIB Fact Check, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक केंद्रीय मंत्री के कथित वीडियो वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे फर्जी और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार किया गया डीपफेक बताया है। सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो पूरी तरह से डिजिटल तरीके से तैयार किए गए हैं और इनमें दिखाई गई बातें वास्तविक नहीं हैं। शुरुआती जांच में इन वीडियो को प्रसारित करने वाले कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के तार पाकिस्तानी हैंडल्स से जुड़े होने का दावा किया गया है।

क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक केंद्रीय मंत्री के नाम से कुछ वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो में नेताओं को ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया, जो उन्होंने कभी नहीं दिए। वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।मामले की जांच के बाद PIB फैक्ट चेक ने कहा कि ये वीडियो AI तकनीक और डीपफेक टूल्स की मदद से तैयार किए गए हैं। सरकार ने लोगों से ऐसे वीडियो पर भरोसा न करने और बिना सत्यापन उन्हें साझा न करने की अपील की है।
सरकार ने किया फैक्ट-चेक
PIB ने सोशल मीडिया पर जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के चेहरे तथा आवाज को कृत्रिम रूप से बदलकर नकली बयान तैयार किए गए हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इन वीडियो का वास्तविक घटनाओं या आधिकारिक बयानों से कोई संबंध नहीं है।सरकार ने लोगों से सलाह दी है कि किसी भी सनसनीखेज वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता आधिकारिक स्रोतों से अवश्य जांच लें।
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पाकिस्तानी हैंडल्स पर साजिश का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआती डिजिटल विश्लेषण में कई ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट सामने आए हैं जो पाकिस्तान से संचालित होने या पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क से जुड़े होने के संदेह में हैं। अधिकारियों का आरोप है कि इन हैंडल्स का उद्देश्य भारत में भ्रम फैलाना, सामाजिक तनाव बढ़ाना और संवेदनशील मुद्दों पर गलत सूचना फैलाना था।दिल्ली पुलिस ने भी हाल ही में जानकारी दी थी कि उसने ऐसे सैकड़ों विदेशी सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की है, जो भ्रामक सामग्री फैलाने में सक्रिय थे।
डीपफेक तकनीक क्यों बन रही है चुनौती?
विशेषज्ञों का कहना है कि AI आधारित डीपफेक तकनीक अब पहले की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हो चुकी है। इसके जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज और चेहरे की हूबहू नकल तैयार की जा सकती है, जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली वीडियो में अंतर करना मुश्किल हो जाता है।यही वजह है कि सरकारें, सोशल मीडिया कंपनियां और साइबर सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के फर्जी कंटेंट पर लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं।
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सोशल मीडिया यूजर्स के लिए सरकार की सलाह
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल वीडियो या संदेश को बिना जांचे-परखे आगे न भेजें। यदि किसी वीडियो की सत्यता पर संदेह हो तो उसे PIB फैक्ट चेक या अन्य आधिकारिक सरकारी माध्यमों से सत्यापित करें। इसके अलावा संदिग्ध पोस्ट की रिपोर्ट संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी की जा सकती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय नेताओं के नाम पर AI से तैयार फर्जी वीडियो वायरल हुए हों। इससे पहले भी कई सार्वजनिक हस्तियों के कथित वीडियो सामने आए थे, जिन्हें बाद में फैक्ट-चेक एजेंसियों ने डीपफेक या एडिटेड कंटेंट बताया था। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव, बड़े आंदोलनों या संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों के दौरान इस तरह के फर्जी कंटेंट का खतरा और बढ़ जाता है।
जांच एजेंसियां कर रही हैं कार्रवाई
अधिकारियों के मुताबिक, वायरल वीडियो के स्रोत, उन्हें तैयार करने वाले नेटवर्क और उन्हें फैलाने वाले अकाउंट्स की पहचान की जा रही है। यदि जांच में किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता सामने आती है, तो सूचना प्रौद्योगिकी कानून और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री से जुड़े वायरल वीडियो को सरकार ने AI से तैयार किया गया फर्जी कंटेंट बताया है। PIB फैक्ट चेक ने इन वीडियो का खंडन करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है। शुरुआती जांच में कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स की भूमिका पर संदेह जताया गया है, हालांकि जांच अभी जारी है। ऐसे समय में डिजिटल साक्षरता और तथ्य-जांच पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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