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Google Fight Mosquitoes: डेंगू-मलेरिया पर वार! Google की नई तकनीक से भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा

Google Fight Mosquitoes, दुनियाभर में डेंगू, मलेरिया, जीका और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। इन बीमारियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए समाधान तलाश रहे हैं। इसी बीच टेक दिग्गज Google की पैरेंट कंपनी Alphabet की लाइफ साइंस यूनिट Verily के एक प्रोजेक्ट ने दुनिया का ध्यान खींचा है।

Google Fight Mosquitoes : अब मच्छर ही करेंगे मच्छरों का खात्मा! Google की पहल से डेंगू पर लग सकता है ब्रेक

Google Fight Mosquitoes, दुनियाभर में डेंगू, मलेरिया, जीका और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। इन बीमारियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए समाधान तलाश रहे हैं। इसी बीच टेक दिग्गज Google की पैरेंट कंपनी Alphabet की लाइफ साइंस यूनिट Verily के एक प्रोजेक्ट ने दुनिया का ध्यान खींचा है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अमेरिका में लगभग 3.2 करोड़ (32 मिलियन) विशेष बैक्टीरिया-संक्रमित नर मच्छरों को छोड़ने की तैयारी कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करना और डेंगू, जीका, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार को कम करना है।

क्या है Google का ‘Debug Project’?

यह पहल Alphabet की स्वास्थ्य और विज्ञान आधारित इकाई Verily के Debug Project का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की संख्या को कम करना है। इसके लिए वैज्ञानिक ऐसे नर मच्छरों का उपयोग कर रहे हैं जिन्हें Wolbachia नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया से संक्रमित किया गया है। विशेष बात यह है कि छोड़े जाने वाले सभी मच्छर नर होंगे और नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते। इसलिए इनके कारण लोगों में बीमारी फैलने का खतरा नहीं माना जा रहा है।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

Wolbachia एक प्राकृतिक बैक्टीरिया है जो कई कीट प्रजातियों में पाया जाता है। जब Wolbachia-संक्रमित नर मच्छर जंगली मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनसे पैदा होने वाले अंडे नहीं फूटते। इससे धीरे-धीरे मच्छरों की आबादी कम होने लगती है। कुछ कार्यक्रमों में Wolbachia का उपयोग ऐसे मच्छरों को तैयार करने के लिए भी किया जाता है जो डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसे वायरस के प्रसार को कम करने में मदद करते हैं।

कहां छोड़े जाएंगे ये मच्छर?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) से अनुमति मांगी है। प्रस्ताव के तहत अगले दो वर्षों में अमेरिका के कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा राज्यों में करोड़ों मच्छर छोड़े जा सकते हैं। फिलहाल इस योजना की नियामकीय समीक्षा चल रही है।

पहले भी मिल चुके हैं सकारात्मक परिणाम

Verily और अन्य संस्थाओं द्वारा किए गए पहले के परीक्षणों में इस तकनीक के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। कुछ क्षेत्रों में मच्छरों की आबादी में भारी कमी दर्ज की गई थी। इसी वजह से अब इस मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।

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भारत को कैसे हो सकता है फायदा?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू और मलेरिया का बोझ काफी अधिक है। हर साल मानसून के दौरान लाखों लोग मच्छरजनित बीमारियों की चपेट में आते हैं। यदि Google और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों की यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो भविष्य में भारत जैसे देशों को भी इसका लाभ मिल सकता है। इससे—

  • डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की संख्या कम हो सकती है।
  • कीटनाशकों पर निर्भरता घट सकती है।
  • पर्यावरण के अनुकूल नियंत्रण उपाय मिल सकते हैं।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि फिलहाल भारत में इस विशेष Google परियोजना को लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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क्या यह तकनीक सुरक्षित है?

विशेषज्ञों के अनुसार इस कार्यक्रम में छोड़े जाने वाले नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते। साथ ही Wolbachia एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला बैक्टीरिया है, जिसे कई वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान में इस्तेमाल किया जा रहा है। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में मच्छरों को छोड़ने की योजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और दीर्घकालिक परिणामों पर लगातार अध्ययन किए जा रहे हैं। इसी वजह से नियामक एजेंसियां अंतिम मंजूरी देने से पहले विस्तृत समीक्षा कर रही हैं।

भविष्य की दिशा

मच्छरजनित बीमारियों से लड़ने के लिए केवल दवाओं और कीटनाशकों पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं माना जा रहा। ऐसे में AI, रोबोटिक्स और जैविक तकनीकों का उपयोग करके विकसित किए जा रहे समाधान स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उम्मीद जगा रहे हैं। Verily का Debug Project भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Google की पैरेंट कंपनी Alphabet की ओर से 3.2 करोड़ Wolbachia-संक्रमित नर मच्छरों को छोड़ने की प्रस्तावित योजना दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका मकसद मच्छरों की आबादी को नियंत्रित कर डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के खतरे को कम करना है। यदि यह प्रयोग बड़े स्तर पर सफल रहता है, तो भविष्य में भारत जैसे देशों को भी इससे महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक परियोजना और उसके परिणामों पर टिकी हुई हैं।

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