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Netaji Statue: कौन हैं मूर्तिकार अद्वैत गडनायक? नेताजी की मूर्ति बनाने वाले से जुड़ी नहीं जानते होंगे आप यह बाते!

Netaji Statue: ‘दांडी मार्च’ की मूर्ति बनाने वालें अद्वैत गडनायक ने कहा नेताजी को अब मिलेगा उनके हक का सम्मान!  


Highlights:

  • Who is Adwaita Gadanayak The Man Behind Netaji’s Statue? ओड़ीशा के अद्वैत गडनायक के बारे में नहीं जानते होंगे आप यह बातें।
  • ग्रेनाइट को ही क्यों चुना गया मूर्ति बनाने के लिए?
  • कहा विराजमान होगी यह मूर्ति?

Netaji Statue: बीते शुक्रवार यानी 21 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर घोषणा करते हुये लिखा, “ऐसे समय में जब पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इंडिया गेट पर ग्रेनाइट से बनी उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।” पीएम मोदी ने फिर 23 जनवरी को इंडिया गेट पर महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस प्रतिमा को बनाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा के महानिर्देशक अद्वैत गडनायक को सौंपी गयी थीं । ओडिशा में पैदा हुए अद्वैत गडनायक ने प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा को तराशने का अवसर मिलने पर अपार प्रसन्नता व्यक्त की उन्होंने कहा कि “यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि पीएम मोदी ने मुझे मूर्तिकार के रूप में चुना, मुझे बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री ने मुझे यह कार्य सौंपा है। ऐसा लगता है कि नेताजी को लंबे समय के अंतराल के बाद सही सम्मान मिलेगा जिसके वह हकदार हैं। मुझे बहुत गर्व है कि मैं ओडिशा का रहने वाला हूं जहां नेताजी का जन्म हुआ था और उन्होंने अपना बचपन बिताया था।” आगे जानकारी देते हुये उन्होने बताया काली जेट ग्रेनाइट पत्थर से प्रतिमा को उकेरा जाएगा, इस पत्थर को तेलंगाना के खम्मम जिले से लाया जाएगा यह वही जगह है जहां से राष्ट्रीय पुलिस स्मारक के लिए पत्थर लाया गया था और प्रतिमा का डिजाइन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया है।

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रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिमा को एक छत्र के नीचे स्थापित किया जाएगा, जिसमें किंग जॉर्ज पंचम की एक प्रतिमा हुआ करती थी जिसे 1968 में हटा दिया गया था। जब तक प्रतिमा पूरी नहीं हो जाती, तब तक सुभाष चंद्र बोस की एक होलोग्राम प्रतिमा उसी स्थान पर मौजूद रहेगी। होलोग्राम 28 फीट लंबा और छह फीट चौड़ा होगा।

कौन है अद्वैत गडनायक?

प्रसिद्ध ओडिया मूर्तिकार अद्वैत गडनायक वही मूर्तिकार है जिन्होने नई दिल्ली के राजघाट पर स्थापित ‘दांडी मार्च’ की मूर्ति को आकार दिया था। ओडिशा के ढेंकनाल जिले के नेउलोपोई गांव में जन्मे और पले-बढ़े, गडनायक ने भुवनेश्वर में बी के कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स से कला की शिक्षा प्राप्त की और नई दिल्ली में कला कॉलेज से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। वह वर्तमान में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट, नई दिल्ली के निर्देशक हैं।

गडनायक की प्रमुख मूर्तियों में राजघाट पर महात्मा गांधी के दांडी मार्च की एक काले संगमरमर की प्रतिकृति, राष्ट्रपिता की मूर्ति सहित कई अन्य शामिल हैं।

मूर्ति के लिए ग्रेनाइट को ही क्यों चुना गया?

मूर्तिकार अद्वैत गडनायक का मानना है कि, “चूंकि नेताजी एक बहुत मजबूत चरित्र थे, उनकी मूर्ति को बनाने के लिए हमने ग्रेनाइट को एक माध्यम के रूप में सोचा क्योंकि यह एक अत्यंत कठोर पत्थर है उनके चरित्र की तरह। इसके अलावा, हम काले रंग की ऊर्जा को देवी महाकाली और भगवान कृष्ण जैसे देवताओं से जोड़ते हैं, इसलिए, जेट ब्लैक ग्रेनाइट नेताजी की प्रतिमा के लिए एक आदर्श विकल्प था और हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री को यह पसंद आया।“

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विशेष रूप से, ओडिशा के मूर्तिकार कर्नाटक के ग्रेनाइट कारीगरों के साथ सहयोग करेंगे। नई दिल्ली में जल्द ही शुरू होने वाले काम के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा कुल 25 से 30 मूर्तिकारों का चयन किया जाएगा।

Conclusion: इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा की घोषणा नेताजी के चाहने वालों के लिए गर्व और बड़ी ख़ुशी की बात है। यह आने वाली पीढ़ी को भारत के इस वीर सपूत के अमर योगदान को ज़िंदा रखने और कभी नहीं भूलने में मदद करेगा। नेताजी भारत की ताकत और संकल्प के एक सच्चे सार हैं। प्रतिमा को बनाने का काम देश के महान मूर्तिकारों में से एक अद्वैत गडनायक को सौंपा गया है जिन्होने पहले भी अपनी कला से लोगों का दिल कई बार जीता है। नेताजी की निडरता, साहस और राष्ट्र के लिए निस्वार्थ सेवा हम सभी भारतीयों के लिए एक प्रेरणा सोत्र है।

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Himanshu Jain

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