जानिए मुस्लिम समुदाय क्यों मानते है ईद-ए-मिलाद-नबी’

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ईद-ए-मिलाद-नबी’ क्या होता है ख़ास


मुस्लिम समुदाय ‘ईद-ए-मिलाद-नबी’ त्योहार को पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में मनाते हैं। इस्लाम धर्म में पैगम्बर हजरत मोहम्मद आखिरी नबी हैं। जिनको खुद अल्लाह ने फरिश्ते के जरिए कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था। मुस्लिम समुदाय के लिए यह एक बड़ा त्योहार माना जाता है,इस दिन की समाज में कई मान्यताएं हैं। इस दिन मुस्लिम धर्म के लोग मस्जिदों और घरों में इबादत करते हैं। जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के संदेश को आम लोगों के बीच पहुंचाते हैं। इस दिन अपने लोग घरों में कुरान जरूर पढ़ते हैं। घरों में जगमग रोशनी की की जाती है। सड़कों में जगह-जगह सजावट की हुई होती है

ईद-ए-मिलाद-नबी’ को लेकर क्या है मुसलमानो में इसकी मान्यता

दरअसल मुसलमनो की मान्यता है की पैगम्बर हजरत मोहम्मद को खुदा ने खुद कुरान का संदेश देने के लिए भेजा था और वो अपने कामो से पुरे अरब में शांति फैलाएंगे यही वजह है की अफ्रीका के नीग्रो और अरब के लोग एक थाल में खाना खाते है और एक साथ नमाज़ अदा करते है । महिलाओ के लिए पहले पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने ही सम्पति का अधिकार दिया था। लिहाज़ा मुस्लिम समुदाय पैगम्बर हजरत मोहम्मद हमेशा परम आदर भाव रखते है।

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आज के दिन शान्ति का पैगाम देते हुए आज के दिन मुस्लिम समुदाय के हज़ारो लोगो ने जुलूस निकाला था। ईद-ए-मिलाद-नबी के अवसर पर मस्जिद के ईदगाह तक जुलूस निकाला जाता है, जिसमे हज़ारों मुस्लिम हिस्सा लेते है, बड़े-छोटे सारे लोग इस जुलूस का हिस्सा होते है। सुबह-सुबह मुस्लमान मस्जिद में जाते है, जिसके बाद वो लोग एकत्रित होते है और सारी दुकानों से हो कर गुज़रते है और वहाँ से एक ईदगाह मैदान में पहुंचते है।

जिन बाज़ारो से ये जुलूस निकलता है, उन दुकानों को बेहतर तरीके से सजाया जाता है। ईदगाह मैदान में मौलाना लोगो को संबोधित करते है। इन सबके बाद लोग एक दूसरे को गले लग कर ईद की बधाई देते है। इस दौरान प्रसाशन के तरफ से भी कड़ी सुरक्षा का इंतज़ाम किया जाता है।

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