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क्यों करती है माँ लक्ष्मी उल्लू की सवारी?

उल्लू के अल्वा और कौन है माँ लक्ष्मी की सवारी


लक्ष्मी माता का वाहन है उल्लू जो पूरी रात जगता और दिन भर सौता है। भारत के कुछ भागो में उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों तरह से देखा जाता है। ऐसा बोला जाता है की उल्लू को पहले ही महसूस हो जाता जब कोई संकट आने वाली होती है, इसलिए उल्लू को अपशगुन भी माना जाता है लेकिन कुछ लोगों ऐसा भी जो मानते है उल्लू के कुछ संकेत अच्छे और शुभ होते है। कहते है अगर कोई व्यक्ति बीमार है और उल्लू उससे छू ले तो व्यक्ति एकदम ठीक हो जाता है। उल्लू की सुबह आवाज़ सुना भी शुभ होता है। मगर क्या आप लोग जानते की लक्ष्मी माता का वाहन उल्लू क्यों है? तो चलिए आपको इसके पीछे की वहज बताते है।

उल्लू-माँ लक्ष्मी की सवारी:

लक्ष्मी माता का वहन उल्लू  ताकत और दुर की नज़र का प्रतीक होता है। दरसअल उल्लू बुरी सोच को हटाकर अच्छी सोच रखने में मदद करता है। वह भीड़ से हटकर विचार करने की शक्ति की तरफ इशारा करता है। इसका मतलब हुआ की उल्लू तब देखने की क्षमता रखता है जब सामान्य जन को नजर नहीं आता। दरअसल उल्लू निडर और शक्ति का प्रतीक माना गया है इसलिए लक्ष्मी का वाहन उल्लू है।

माँ लक्ष्मी के उल्लू के आलावा और  भी है वाहन :

उल्लू के आलावा गज भी माता की सवारी है। गज बुद्धिमत्ता व शक्ति का प्रतीक है। गज एक शक्तिशाली और विनम्र जीव होता है और इसलिए वास्तविक रूप में भी ताकतवर व्यक्ति सदैव विनम्र होता है और उसे अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की ज़रूरत नहीं होती है।

उल्लू और गज के आलावा गरुड़ भी माता की सवारी है। दरअसल गरुड़ लक्ष्मी के पति विष्णु का वाहन होता है और उसी के कारण लक्ष्मी का भी वाहन बन गया। गरुड़ पक्षी अपनी दूरदृष्टि, लक्ष्य, अनुशासन, दृढ़ता और कुशलत का प्रतीक माना जाता है।

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क्यों माना जाता है उल्लू को शुभ:

उल्लू को शुभ और अशुभ दोनों का प्रतिक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की किसी गर्भाती महिला को उल्लू छुले तो पुत्री होने के संकेत होते है और यहाँ तक की पूर्व दिशा से आ रहे उल्लू की आवाज़ सुने से धन का लाभ होता ही है और दुश्मों का भी नाश होता है। यदि आप घूमने जा रहे हो और पीछे से अपने उल्लू की आवाज़ सुनी तो आपकी यात्रा काफी अच्छी जाएगी। इन सबके अल्वा अगर आपको अपने घर के आँगन में मारा हुआ उल्लू मिलता है तो इसका मतलब होता है की परिवार में कोई कलेश होने वाला है।

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धनतेरस के दिन क्यों खरीदे जाते है नये बर्तन

बर्तन खरीदने के आलावा और क्या मान्यता है धनतेरस की


दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज तक रहती है।धनतेरस के दिन लक्ष्मी माता, कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा होती है, जिसे घर में हमेशा सुख और समृद्धि बनी रहती है। ऐसी माना जाता है इस दिन बर्तन, सोना, चांदी और झाड़ू खरीदना शूभ होता है। जिस तरह माता लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थीं उसी तरह भगवान धन्‍वंतरि भी उत्पन्न हुऐ थे। क्या आप जानते है की धनतेरस पर बर्तन खरीदने का रिवाज़ क्यों है?

बर्तन खरीदने की मान्यता:

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। दरअसल इस दिन भगवान धन्‍वंतरि महालक्ष्मी की तरह सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे। ऐसी मान्यता है की जब भगवन धन्‍वंतरि का जन्म हुआ था तो वो एक पात्र में अमृत लिए हुए थे। भगवान धन्‍वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर नये बर्तन खरीदे जाते है

वैसे इसकी एक और मान्यता भी है, धनतेरस के दिन धातु खरीदना भी शुभ माना जाता है लेकिन सिर्फ शुद्ध धातु जैसे की पीतल, तांबा,  चांदी, सोना। ऐसा कहा जाता है की इस दिन ख़रीदे हुए रत्नो में नौ गुने की वृद्धि हो जाती है।

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घर के बहार दिया रखे:

धनतेरस के दिन सिर्फ बर्तन या धातु ही नहीं ख़रीदा जाता बल्कि दिए भी जलाये जाते है, मान्यता है कि अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मैन गेट पर दिया रखने का भी रिवाज़ है। रात में इस दिन लंभी उर्म के लिए भगवान धन्वंतरि तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके लक्ष्मी माता को गुड़ और धान का लावा ज़रूर चढ़ाना चाहिए।

काले रंग के बर्तन ना ख़रीदे:

धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को ना ख़रीदे क्योकी धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है इसलिए धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें को नहीं खरीदा जाता और सिर्फ यही नहीं बल्कि इस दिन आप चाकू, कैंची और दूसरी दारीदार चीज़ भी नहीं खरीदी जाती

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Happy Dussehra : इस दशहरा दें अपने सभी दोस्तों को यह 10 ख़ास सन्देश

इस दशहरा खत्म करे अपने अंदर की सभी बुराईयां


Dussehra wishes: आज पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम से विजयादशमी यानी की दशहरा मनाया जा रहा है। इस दिन पर श्री राम ने रावण को मारकर बुराई पर जीत हासिल की थी। राम ने लंकापति रावण से 9 दिनों तक युद्ध के बाद नवरात्रि के दशवें दिन यानि कि दशहरा के दिन रावण का वध किया था । इस दिन को भगवान राम की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। इसलिए इस दशहरा पर अपने अंदर की सभी बुराईयों को खत्म कर दे और इस पावन पर्व पर अपने करीबियों को यह शुभकामनाएँ दें।

इस दशहरा  दें अपने सभी दोस्तों को यह 10  ख़ास सन्देश :

1. विनाश हो  बुराई का, दशहरा लेकर आया है उम्मीद की आस रावण की तरह आपके दुखों का हो नाश – हैप्पी दशहरा

2. अधर्म पर हो अब धर्म की जीत, अन्याय पर मिले न्याय को जीत बुरे पर अच्छे की हो जय जयकार, यही है दशहरे का त्यौहार – विजयदशमी की शुभकामनाएं

3. दशहरा  बुराई के अंत की याद दिलाता है जो चलता है सच्चाई और अच्छाई की राह पर, वो विजय का प्रतीक बन जाता है – दशहरा की शुभकामनाएं

4. हो आपकी लाइफ में ढेर सारी खुशियाँ, कभी ना आये कोई झमेला सदा सुखी रहे आपका बसेरा-  हैप्पी दशहरा

5. खुशियाँ आपके घर आये, कभी ना हो दुखों से आपका सामना सुख और धन आये आपके आँगन, विजयदशमी की शुभकामनायें

6. जीवन आपका सुनहरा हो जाये, आपके घर में हमेशा रहे सुख का पहरा यह दशहरा शांति लाये अपार, राम की जय खुशी की आयी बहार – हैप्पी दशहरा

7. बुराई पर अच्छाई की जीत, झूठ पर सच्चाई की जीत अहम् ना करो गुणों पर , यही हैं इस दिवस की सीख – हैप्पी दशहरा

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8. बुराईयाँ खत्म हो, अच्छाई की जीत हो दशहरा के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

9. बुराई का होता है विनाश, दशहरा लाता है उम्मीद की आस, रावण की तरह आपके दुखों का भी  हो नाश, हैप्पी  विजयदशमी

10. खुशी आपके कदम चूमे..कभी ना हो दुखों का सामना..धन ही धन आये आपके अंगनां, यही है दशहरे के अवसर पर हमारी मनोकामना।

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Dussehra 2019 : शारदीय नवरात्रि के समय क्यों मनाते है दशहरा?

Dussehra  2019 : जाने क्या है विजयदशमी की पूरी कथा?


हमारे देश में दशहरा का त्योहार बड़ी ही  धूम- धाम से मनाया जाता है क्योंकि इस दिन  बुराई  पर अच्छाई को जीत मिली थी। शारदीय नवरात्रि के समय नौ दिन माँ दुर्गा की उपासना करने के बाद दसवें दिन रावण का पुतला बना कर उसे दहन किया जाता है। इसका कारण त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। त्रेतायुग में जब भगवान विष्णु  ने श्री राम के रूप में धरती पर अवतार लिया था। भगवान श्री राम के पिता दशरथ को दिए गए वचन के अनुसार भगवान श्री राम 14 वर्ष के लिए वनवास गए थे। वन जाते वक़्त उनके भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी उनके साथ गई थी। वन में श्री राम को देख कर लंका नरेश रावण की बहन सूर्पनखा मोहित हो गई थी  और श्री राम को शादी का प्रस्ताव दे दिया था।

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विजयदशमी की कथा:

श्री राम ने सूर्पनखा को आदरपूर्वक बताया की वो शादी नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी सीता को वचन दिया है की वो उनके अलावा किसी से भी शादी नहीं करेंगे। ये कह कर श्री राम ने सूर्पनखा को लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण के पास जाकर सूर्पनखा हट करने लगी, मगर लक्ष्मण ने मना कर दिया। उसके बाद भी जब सूर्पनखा नहीं मानी तो लक्ष्मण ने गुस्से में आकर उनकी नाक काट दी।

रोती हुई सूर्पनखा ने राम और लक्ष्मण  के बारे में अपने भाई रावण को बताया। तब रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया था। फिर राम भक्त हनुमान ने माँ सीता की खोज की। लाख बार समझाने के बाद भी जब रावण नहीं माने तब भगवान श्री राम ने रावण का वध कर  माँ सीता को लंका से वापस ले आये।

श्री राम ने जिस दिन रावण का वध किया था उस दिन शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि थी और इसलिए इस त्योहार को विजयदशमी भी कहते है। रावण के बुरे कर्म पर श्रीराम की अच्छाई की जीत हुई थी, इसलिए इस दिन को अच्छाई की जीत के तौर पर भी मनाया जाता है। विजयदशमी पर रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है।रावण के साथ ही उसके बेटे मेघनाथ और भाई कुंभकरण के पुतले का भी दहन होता है।

विजयदशमी के दिन का शुभ महत्व:

इस दिन अगर आप कोई भी काम शुरू करेंगे तो वो फायदा में रहेंगे। इस दिन कोई भी वाहन, आभूषण खरीदना शुभ रहेगा और यहाँ तक की भगवान शिव की पूजा का कई गुना फल मिलता है।

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Ram Navmi Special 2019 : राम के वो 10 गुण जो सभी को उनसे सीखने चाहिए

इन ख़ास संदेशों से दें अपने दोस्तों को राम नवमी की बधाई


Ram navmi 2019: आज पूरे देश में बड़े ही उत्साह से राम नवमी मनाई जा रही है। श्रीराम का जीवनकाल है वो पराक्रम महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य रामायण के रूप में ज़िक्र किया गया है । जिसमे रामायण में सीता के खोज में श्रीलंका जाने के लिए 25 किलोमीटर पत्थर के सेतु का निर्माण करने के बारे में बताया गया है जिसको रामसेतु कहते हैं। राम एक ऐसे पुरुष थे जो सिर्फ एक अच्छे बेटे या भाई नहीं बल्कि एक अच्छे पति और पिता भी थे। इसलिए आज राम नवमी के ख़ास दिन पर हम आपको बताएँगे श्री राम से जुड़े वो 10 गुण जो आज सभी आदमियों को उनसे सीखने चाहिए राम के वो 10 गुण जो सभी को उनसे सीखने चाहिए :

1. श्री राम ने कभी भी झूठ  नहीं कहा और न ही  किसी के लिए अभद्र  भाषा का इस्तेमाल किया।

2. श्री राम में कभी अहंकार नहीं रहा है यही वजह थी की उन्होंने हर रिश्ते में खुद से पहली की और अपने रिश्ते को मजबूत बनाया।

3. उन्होंने कभी नहीं याद रखा की उन्होंने लोगो को क्या दिया है और न ही उनपर कभी एहसान जताया।

4. श्री राम हमेशा से सभी चीजों को लेकर सकारात्मक रहे है। अगर किसी ने अपने जीवन में कई सारी  गलतियाँ की है और एक अच्छा काम किया है तो श्री राम  ने हमेशा अच्छे काम कि बात की है।

5.  श्री राम ने अपने जीवन में हर रिश्ते को बड़ी सच्चाई से निभाया है तभी उन्होंने पत्नी सीता के अलावा कभी किसी औरत की तरफ बुरी नजर से नहीं देखा।

6. श्री राम सिर्फ लोगों के ही नहीं बल्कि प्रकृति के लिए भी शुभ चिंतक रहे है।

7. महलों में रहने वाले राजा श्री राम ने कभी अमीर और गरीब में फर्क नहीं किया तभी तो उन्होंने सबरी  की कुटिया  में बिना किसी भेदभाव के झूठे  बेर  तक खाये।

8. उन्होंने कभी अपनी संपत्ति  का गलत  इस्तेमाल नहीं किया तभी एक राजा होने के बावजूद उन्होंने आम लोगो की तरह ज़िन्दगी बितायी।

9.  उन्होंने हमेशा से सच्चाई का साथ दिया इसलिए उन्होंने धरती से बुराई खत्म  करने के लिए  लंकापति रावण का वध किया।

10.  राम को आदर्श पुरुष माना जाता है; न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी।

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इन ख़ास संदेशों से दें अपने दोस्तों को राम नवमी की बधाई 

1. सीता माँ का धैर्य, लक्ष्मण जी का तेज और राम जी का त्याग हम सभी को जीवन  की सीख देता  रहें –  राम नवमी  की  शुभकामनाएँ

2. अयोध्या के वासी राम, रघुकुल के कहलाये राम, पुरुषो में हैं उत्तम राम , सदा जपों हरी राम का नाम –  राम नवमी  की  शुभकामनाएँ

3. श्री रामचन्द्र कृपालु , भजमन हरण भवभय दारुणम्। नवकंज लोचन, कंज मुख,कर कंज, पद कंजारुणम्। राम नवमी की हार्दिक बधाई!

4. अयोध्या जिनका धाम है, जिनका नाम राम हैं, उनके चरणों में हमारा प्रणाम है – राम नवमी की हार्दिक बधाई

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Durgapujaspecial2019: सीआर पार्क में मनाई गई “Eco – friendly” दुर्गा पूजा

दुर्गा पूजा में इकोफ्रेंडली  के साथ नो- प्लास्टिक  का भी रखा  गया ख़ास ध्यान 


नवरात्रि के साथ दुर्गा माँ का पर्व भी शुरू हो गया है। ऐसे में दिल्ली के सबसे बड़े पॉश एरिया यानी सी.आर पार्क में हर साल की तरह इस बार भी दुर्गा अष्टमी की तैयारी जोरो शोरो से देखने को मिली। इसके अलावा दुर्गा माँ के कई खूबूसरत पंडाल देखने को भी मिले। साथ ही इस बार सी. आर  पार्क के ज्यादातर पंडाल में दुर्गा माँ की जो मूर्तियां है वो इकोफ्रेंडली देखने को मिली।

“No- plastic’ को ध्यान में रखते हुए मनाई गयी दुर्गा अष्टमी

आपको बता दें  की पीएम मोदी द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है No- plastic कर के जिसमे लोगो से यह अपील कि जा रही है की वो प्लास्टिक  का इस्तेमाल जितना कम करे उतना अच्छा है क्योंकि प्लास्टिक के इस्तेमाल से हमारे वातावरण पर काफी असर पड़ रहा है । जीव- जन्तु  खत्म  होते जा रहे है ।इस लिए इस अभियान को दुर्गा अष्टमी में भी लागू  करते देखा गया. लोगो ने खाने से लेकर सभी चीजों में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया।

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दुर्गा पूजा पर child safety को लेकर प्लान इंडिया संगठन  द्वारा चलाया गया अभियान

वन वर्ल्ड  न्यूज़ की टीम  जब सीआर पार्क दुर्गा अष्टमी कवर करने पहुँची तब एक एनजीओ द्वारा चाइल्ड सेफ्टी को लेकर एक अभियान चलाते  हुए भी देखा गया है जिसमे उनकी पढ़ाई से लेकर स्वास्थ्य  सभी का ख़ास ख्याल रखा  जाता है। साथ ही दुर्गा पूजा का समय है तो ऐसे में यह एनजीओ नारी सशक्तिकारण  को बढ़ावा  देते हुए जो लड़किया है उनकी सेफ्टी को लेकर भी अवेयरनेस फैलाता हुआ नजर आ आया की । प्लान इंडिया एक गैर  सरकारी संगठन है जो साउथ दिल्ली के कैलाश कॉलोनी में स्थित है। आप पूरा इंटरव्यू देखने के लिए नीचे जा कर क्लिक कर सकते है।

अगर आप अभी तक दुर्गा अष्टमी के  खूबसूरत पंडाल देखने नहीं गए है तो आप सीआर पार्क में जाकर माँ दुर्गा के खूबसूरत पंडाल  देख सकते है जो की 8 अक्टूबर तक लगे रहेंगे.जिसमे माँ दुर्गा की  काफी अच्छी मुर्तिया लगी हुई इसके अलावा यहाँ पर आप खाने और शॉपिंग का भी लुप्त उठा सकते है।

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जानिए किन राशियों पर बरसेगी माँ दुर्गा की कृपा,घर में होगा सुख – समृद्धि का वास


माँ दुर्गा करेगी आपकी सभी इच्छाएं पूरी : यहाँ जाने अपनी राशि का हाल


29 सितंबर से नवरात्र  शुरू हो चुकी है। सभी भक्त नौ दिनों का व्रत रख कर माँ दुर्गा से आशीर्वाद पाना चाहते है.ऐसे में आपकी राशि क्या कुछ कहती  वो भी जानना जरुरी है।  इस बार माँ दुर्गा किन राशियों पर है मेहरबान  और किसे होगा कितना लाभ होगा । क्योंकि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार माता का धरती पर  आगमन होने से उसका असर हर राशि पर पड़ता है।तो यहाँ जाने किस राशि के लिए कैसे  रहेंगे नवरात्रों के यह नौ दिन।

 यहाँ जाने नवरात्रि पर अपने राशियों का हाल:

मेष

इस राशि के लिए यह नौ दिन बेहद खास रहने वाले हैं। इस राशि के लोगों को इन नौ दिनों में व्यापार में लाभ मिलेगा ।वही सेहत से जुड़ी समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है जैसे पेट में दर्द ।

वृषभ

इस राशि के व्यक्तियों को करियर में सफलता मिलेगी। लेकिन दुश्मन आपके रास्ते में आने की कोशिश करेंगे। अपने दुश्मनो से निपटने के लिए आपको नवरात्रों में सफेद चंदन की माला से देवी के मंत्रों का जाप करना चाहिए।

मिथुन

इस राशि के लोगों को जल्द मिल सकती है नौकरी। सफलता प्राप्त करने के लिए तुलसी की माला से गायत्री मंत्र का जाप करें।

कर्क

इस राशि के लोगो को थोड़ा सतर्क रहने की जरुरत है। व्यवसाय कर रहे लोगों को अपने पार्टनर से धोखा मिल सकता है। जिसकी वजह से आपको तनाव भी हो सकता है।

सिंह

लंबे समय बाद इस राशि के लोगो  को कोई अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। अपनी किसी लंबी बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।

कन्या

इस राशि के लोगो को सेहत को लेकर थोड़ा सतर्क रहना होगा। इन लोगों को बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए।

तुला

इस राशि के लोगों पर धन लाभ  के संयोग बन रहे हैं।

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वृश्चिक

इस राशि के लोगों  को जल्द ही कोई खुशखबरी सुनने को मिलेगी। आप जल्द ही अपना कोई करोबार शुरु कर सकते हैं। इस राशि के लोगों को नवरात्र में गरीबों की सहायता करने से लाभ होगा।  

धनु

इस राशि के लोग  नया वाहन और घर खरीद सकते हैं। लाभ  पाने के लिए माता को पीली मिठाई का भोग लगाएं।

मकर

इस राशि के लोगों  के खर्च बढ़ सकते  है। आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। परेशानियों से बचने के लिए मां को भोग में हलवे का प्रसाद चढ़ाएं।

कुंभ

इस राशि के लिए यह नौ दिन अच्छे रहने वाले हैं। आर्थिक तरक्की में आने वाली सभी बाधाएं जल्द दूर हो जाएंगी।

मीन

इस राशि के लोगो को व्यापार में तरक्की मिल सकती है , यात्रा करते समय सावधानी बरतें। मां को प्रसन्न् करने के लिए पीली मिठाई और केले का भोग लगाएं।

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कोलकाता का ये पंडाल सजा है नारी सशक्तिकरण थीम पर, माँ का लुक है बेहद ख़ास

त्रिधारा सार्वजनीन दुर्गापूजा कमेटी ने इस साल बनाया है नारी  सशक्तिकरण को पंडाल का थीम


भारत में आदिकाल से ही नारी की पूजा होती आरही है। हमारे देश में हमेशा से ही नारी को देवी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता तो ये भी है की जहां नारी की पूजा होती है वही पर देव-देवताओ का वास होता है और जहां नारी की पूजा नहीं की जाती है वहा हर शुभ काम भी व्यर्थ होता है। इसी बात से प्रेरित होकर उत्तर कोलकाता के प्रमुख दुर्गापूजा आयोजन शुमार नार्थ त्रिधारा सार्वजनीन दुर्गापूजा कमेटी ने इस बार नारी शक्तिकारण को अपना थीम बनाया है। एक नारी कैसे कठिन परिस्थियों में लड़ती है और आगे बढ़ती है।

दरअसल,  इन लोगो ने पहले ही सोच लिया था की इस बार पंडाल का थीम वीमेन एम्पावरमेंट रखेगे। इस दौरान प्रतिमा पोद्दार के जीवन को अपना थीम बनाया। प्रतिमा महानगर की पहेली महिला है जो बस चलाकर अपन परिवार का पालन-पोषण करती है। शक्ति की देवी दुर्गा की ही तरह की प्रतिमा का जीवन है जिन्होंने इस पुरुष प्रधान समाज में अलग पहचान बनाई है। प्रतिमा  का जीवन दर्शाता है की नारी शक्ति असंभव कार्य को भी संभव कर सकती है और इनके जीवन से अच्छा कोई नारी शक्तिकारण को नहीं दर्शा सकता है। इस पंडाल में माँ दुर्गा को ‘प्रमिता’ को चेहरा दिया गया है।

अब जब थीम ही प्रतिमा का  जीवन है तो इस पंडाल में प्रतिमा के जीवन की कहानी भी दिखाई जाएगी। पंडाल को सजाया भी मिनी बस की ही तरह है और इंटीरियर भी बस की ही तरह. पंडाल के एंट्री पर प्रतिमा प्रधान की एक सिलिकॉन से बानी मूर्ति भी लगाई गई है. पूजा के बाद इस मूर्ति को मदर वैक्स म्यूजियम  में रखा जायेगा।

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 महिलाओ को मिलेगी इससे प्रेरणा :

प्रतिमा के इस थीम से प्रतिमा की तरह और भी महिओ को बल मिलेगा जिस वो इस पुरुष प्रधान समाज के बंधनो को तोड़कर आगे बड़ेगे। आपको बता दे की प्रतिमा बेलघरिया-हावड़ा रूट की बस चलाती हैं।

‘पूजोर छंदे, मातो आनंदे’ का हुआ शुभारंभ:

दुर्गा पूजा को लेकर पूरे बंगाल में उत्साह का माहौल  रहता है । इस बीच शुक्रवार को डॉलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से बीते सालों की तरह इस साल भी सालाना आयोजन पुजोर छंदे, मातो आनंदे के 10वें संस्करण का शुभारंभ किया गया। ‘पुजोर छंदे, मातो आनंदे’ के तहत हर साल डॉलर की ओर से कोलकाता के विभिन्न पूजा आयोजकों को विभिन्न श्रेणी में पुरस्कृत किया जायेगा।

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जानिए!! माँ दुर्गा का चंद्रघंटा रूप सबसे लोकप्रिय क्यों है?

नवरात्रि के तीसरे दिन कैसे मिलेगा माँ चंद्रघंटा का आशीर्वाद?


नवरात्रि के नौ दिन तक माँ के अलग- अलग रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। शास्त्रों में माँ के सभी रूपों के बारे का  अलग- अलग महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि  जो भक्त नौ दिनों तक माता की पूजा करते है, उनकी  हर कामना माता पूरा करती है। आज नवरात्रि का तीसरा दिन है जिसमे माता के ‘चंद्रघंटा’ रूप की पूजा की जाती है। माँ चंद्रघंटा के इस रूप को काफी सौम्य  रूप कहा जाता है। माँ चंद्रघंटा शेर पर सवार  होती है और यही रूप माँ का सबसे ज़्यादा लोकप्रिय भी है। आपको बता दे कि  माँ चंद्रघंटा के सिर के ऊपर घंटे के आकर का आधा चाँद है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी दस भुजाएं है और हर भुजायें में अलग- अलग हथियार  होते है। माँ के  हाथो में कमल, धनुष-बाढ़ , कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा रहता है।

कौन हैं मां चंद्रघंटा?

दुर्गा माता का यह तीसरा रूप राक्षसों का वध करने के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं।इसीलिए इनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष होता है। इनकी उत्पत्ति ही धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार मिटाने के लिए हुई थी ।

मां चंद्रघंटा का ध्‍यान मंत्र

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

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पूजा का महत्व:

नवरात्रि में तीसरे दिन इस देवी की पूजा का महत्व है, देवी की कृपा से साधक को अलोकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है।

किस रंग के पहनें कपड़े और क्या चढ़ाएं प्रसाद:

मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ माना जाता  है। इसके अलावा मां सफेद चीज का भोग जैसै दूध या खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है।

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माँ दुर्गा का हर हथियार कुछ कहता : जाने क्या करते है ये signify

माँ दुर्गा के 8 हथियार जो आपको सिखाते है सभी हालातो से लड़ना


29 सितंबर से माँ दुर्गा का महापर्व नवरात्रि शुरू हो चुकी है। इस समय हर घर में माँ दुर्गा की पूजा  की जाती है और नौ दिनों तक व्रत रख कर लोग उनकी उपासना करते है ताकि माँ दुर्गा उनकी मनोकामना पूरी कर सके।  माँ दुर्गा जितनी राक्षसों के लिए क्रूर हैं उतनी ही अपने भक्तों के लिए दयालु भी हैं।जी हाँ, माँ दुर्गा की 8 भुजाएँ इस बात का प्रतीक हैं कि वह अपने भक्तों की रक्षा आठों कोनों से करती है।

माँ दुर्गा के 8 हथियार जो सिखाते है आपकी सभी  हालातो  से लड़ना

1. शंख

शंख ” एयूएम ” नामक ध्वनि का प्रतीक है जिसमें से संपूर्ण सृष्टि का उदय हुआ था। देवी दुर्गा वास्तव में ब्रह्मांड की निर्माता हैं।

2. चक्र

दुर्गा के हाथों पर चक्र की परिक्रमा जिस से यह पता चलता है कि दुर्गा सृष्टि का केंद्र है और सारा ब्रह्मांड उनके  चारों ओर घूमता है। वह बुराई को नष्ट कर धर्म का विकास करेगा।

3. कमल

माता के हाथों में कमल का फूल हमें बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखना जरूरी है  और कर्म करने से सफलता अवश्य मिलती है। जिस प्रकार कमल कीचड़ में रहता है पर फिर भी कीचड़  उसे गन्दा  नहीं कर पाता, उसी प्रकार मनुष्य को भी सांसारिक कीचड़, लालच से दूर होकर सफलता को प्राप्त करना चाहिए।

4.तलवार

मां दुर्गा के हाथ में  तलवार की तेज धार और चमक ज्ञान का प्रतीक है।  इसकी चमक यह बताती है कि ज्ञान के मार्ग पर कोई संदेह नहीं होता है।

5. त्रिशूल

त्रिशूल तीन गुणों का प्रतीक है। संसार में तीन तरह की ट्रेंड्स होती हैं- सत यानी सत्यगुण, रज यानी सांसारिक और तम मतलब तामसी । त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे इन तीनों का  प्रतिनिधित्व करते हैं। इन गुणों पर हमारा पूर्ण नियंत्रण हो। त्रिशूल का यही संदेश है।

6. गदा

गदा मां दुर्गा के प्रति निष्ठा, प्रेम और भक्ति का प्रदर्शन करने के लिए मनुष्यों में शामिल होता है।

7. वज्र

यह  हथियार आत्मा की दृढ़ता का प्रतीक है जो जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद करती है । वह अपने भक्त को आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के साथ सशक्त बनाती है। वज्र को भगवान इंद्र ने उपहार में दिया था।

8. कुल्हाड़ी

माँ दुर्गा ने भगवान विश्वकर्मा से एक कुल्हाड़ी और एक कवच प्राप्त किया था । यह बुराई से लड़ने के दौरान परिणामों से कोई डर नहीं होने का संकेत देता है।

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