Meerut Jail: दिवाली के लिए जेल में तैयार हो रहे हजारों दीये, चर्चित हत्याकांड की दोषी महिलाएं भी जुटीं
Meerut Jail, दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस मौके पर लोग अपने घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। लेकिन इस बार दिवाली की तैयारियां सिर्फ घरों और बाजारों तक सीमित नहीं हैं।
Meerut Jail : जिनके नाम जुड़े दो चर्चित हत्याकांड से, अब जेल में दिवाली के लिए बना रहीं दीये और झालर
Meerut Jail, दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस मौके पर लोग अपने घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। लेकिन इस बार दिवाली की तैयारियां सिर्फ घरों और बाजारों तक सीमित नहीं हैं। उत्तर प्रदेश की मेरठ जिला जेल में भी त्योहार की रौनक देखने को मिल रही है। यहां बंद महिला और पुरुष कैदी अपने हुनर से दीये, मोमबत्तियां, झालर और सजावट का सामान तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन कैदियों में मुस्कान रस्तोगी और रविता भी शामिल हैं, जिन्हें अपने पतियों की हत्या के मामलों में अदालत से मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। ये दोनों मामले देशभर में ‘ब्लू ड्रम मर्डर केस’ और ‘सांप के काटने से हत्या’ के नाम से चर्चा में रहे हैं।

जेल की महिला बैरक बनी वर्कशॉप
दिवाली से पहले मेरठ जिला जेल की महिला बैरक में कैदियों को त्योहार से जुड़ी चीजें बनाने का काम दिया गया है। यहां हजारों मिट्टी के दीये, रंग-बिरंगी मोमबत्तियां, मोमबत्तियों की बत्तियां, सजावटी मालाएं और रंगोली के पोस्टर तैयार किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन कैदियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार काम सौंप रहा है, ताकि वे अपनी कला और हुनर का इस्तेमाल कर सकें।मुस्कान रस्तोगी भी इस काम में हिस्सा ले रही है। वह दीये और सजावटी मालाएं बनाने के साथ सिलाई-कढ़ाई का काम भी कर रही है। वहीं, रविता बैग तैयार करने में लगी हुई है। दूसरी तरफ, उनके साथ मामलों में सजा पाए साहिल शुक्ला और अमरदीप जेल परिसर की सफाई और बागवानी के काम में योगदान दे रहे हैं। जेल प्रशासन के मुताबिक, कैदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को जेल के बिक्री केंद्रों पर रखा जाता है, जहां से लोग इन्हें खरीद सकते हैं। इससे कैदियों को उनके काम के बदले मेहनताना भी मिलता है।

क्या है ब्लू ड्रम मर्डर केस?
मुस्कान रस्तोगी का नाम साल 2025 में मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आया था। सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में काम करते थे और मुस्कान उनके पति थे। इस मामले में मुस्कान पर अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति की हत्या करने का आरोप था।जांच और अदालत में सामने आए विवरणों के मुताबिक, सौरभ की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में सीमेंट भरकर छिपाया गया। इसी वजह से यह मामला ‘ब्लू ड्रम मर्डर केस’ के नाम से चर्चित हुआ। मेरठ की जिला अदालत ने अक्टूबर 2026 में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को इस हत्याकांड में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।
सांप के काटने का दिखावा कर की गई थी हत्या
दूसरा मामला रविता और उसके प्रेमी अमरदीप से जुड़ा है। रविता के पति अमित कश्यप की मौत को शुरुआत में सांप के काटने की घटना जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, जांच में हत्या की साजिश सामने आई। अदालत में पेश किए गए मामले के विवरण के अनुसार, रविता और अमरदीप ने अमित की गला घोंटकर हत्या की और फिर शव के पास सांप रख दिया, ताकि मौत सांप के काटने से हुई लगे।इस मामले में मेरठ की अदालत ने अक्टूबर 2026 में रविता और अमरदीप को भी मौत की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध को गंभीर मानते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखा। इस तरह दोनों मामलों में शामिल चारों आरोपियों को निचली अदालत से मृत्युदंड मिला है। यहां यह समझना जरूरी है कि अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी। भारत में मृत्युदंड के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की अपील और अन्य जरूरी चरण होते हैं। इसलिए इन मामलों में सजा सुनाए जाने और सजा पर अंतिम अमल होने के बीच अंतर है।
जेल में बन रहे उत्पादों से कैदियों को मिल रहा रोजगार
मेरठ जेल में दिवाली की तैयारियां केवल दीये और मोमबत्तियां बनाने तक सीमित नहीं हैं। यहां की बेकरी भी कैदियों के काम और हुनर का एक अहम हिस्सा है। जेल में मेरठ की मशहूर नानखटाई के साथ करीब 30 तरह के बिस्कुट तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को अलग-अलग बिक्री केंद्रों और सरकारी कार्यक्रमों के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।जेल प्रशासन के अनुसार, हाल ही में मेरठ में 18 जिलों के अधिकारियों की एक बैठक के दौरान जेल की बेकरी में तैयार बिस्कुट भी परोसे गए थे। इसके अलावा जेल में फुटबॉल बनाने का काम भी होता है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल कैदियों द्वारा तैयार की गई फुटबॉल ऑस्ट्रेलिया तक भेजी गई थीं।
हुनर और आत्मनिर्भरता के जरिए पुनर्वास की कोशिश
मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, जेल प्रशासन का उद्देश्य कैदियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार काम देना है। इससे उन्हें मेहनताना कमाने का मौका मिलता है और वे नए कौशल भी सीखते हैं। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां कैदियों को उपयोगी काम से जोड़ने और भविष्य में समाज की मुख्यधारा में लौटने की तैयारी में मदद कर सकती हैं।जेल में तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री से कैदियों को अपने श्रम का आर्थिक लाभ मिलता है। साथ ही, उन्हें सिलाई, कढ़ाई, हस्तकला और बेकरी जैसे कामों का अनुभव भी मिलता है। हालांकि, किसी कैदी का पुनर्वास केवल काम देने तक सीमित नहीं होता। इसके लिए शिक्षा, मानसिक सहयोग, प्रशिक्षण और रिहाई के बाद समाज में दोबारा जगह बनाने के अवसर भी महत्वपूर्ण होते हैं।
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