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Bengaluru/Beer Price Cut: कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, नई टैक्स व्यवस्था से बीयर बाजार में आया बड़ा बदलाव

Bengaluru/Beer Price Cut, कर्नाटक में नई आबकारी (Excise) नीति लागू होने के बाद बीयर बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की नई अल्कोहल-इन-बेवरेज (AIB) आधारित टैक्स व्यवस्था के चलते कई लोकप्रिय बीयर ब्रांडों की कीमतों में भारी कमी आई है।

Bengaluru/Beer Price Cut : ₹60 में बीयर! नई टैक्स व्यवस्था के बाद कर्नाटक में बदल गई शराब की कीमतें

Bengaluru/Beer Price Cut, कर्नाटक में नई आबकारी (Excise) नीति लागू होने के बाद बीयर बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की नई अल्कोहल-इन-बेवरेज (AIB) आधारित टैक्स व्यवस्था के चलते कई लोकप्रिय बीयर ब्रांडों की कीमतों में भारी कमी आई है। कुछ ब्रांड, जो पहले ₹125 तक में बिकते थे, अब लगभग ₹60-₹80 में उपलब्ध हैं। इस बदलाव के बाद बीयर की बिक्री में रिकॉर्ड उछाल दर्ज किया गया है और सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

क्या है नई टैक्स व्यवस्था?

कर्नाटक सरकार ने मई 2026 से शराब पर टैक्स लगाने का तरीका पूरी तरह बदल दिया। पहले टैक्स मुख्य रूप से बोतल के आकार और श्रेणी के आधार पर तय होता था, लेकिन अब शराब में मौजूद वास्तविक अल्कोहल (Alcohol by Volume – ABV) के आधार पर टैक्स लगाया जा रहा है।इसका मतलब है कि जिन पेयों में अल्कोहल की मात्रा कम है, उन पर कम टैक्स लगेगा, जबकि अधिक अल्कोहल वाले पेयों पर ज्यादा टैक्स लगाया जाएगा। इसी वजह से बीयर जैसी कम अल्कोहल वाली ड्रिंक्स सस्ती हो गई हैं, जबकि कुछ स्ट्रॉन्ग शराबों की कीमतें बढ़ी हैं।

₹125 वाली बीयर अब ₹60 के करीब

नई टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद कई बीयर ब्रांडों की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

  • पहले ₹100-₹125 में मिलने वाली कुछ बीयर अब ₹60-₹80 के बीच उपलब्ध हैं।
  • 330 ml की कुछ बीयर की कीमत घटकर ₹45 तक पहुंच गई है।
  • 650 ml, 5% ABV वाली बीयर की कीमत भी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।

बिक्री में आया रिकॉर्ड उछाल

कीमतें कम होने का असर सीधे बाजार पर दिखाई दिया है।कर्नाटक आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नई नीति लागू होने के बाद एक महीने के भीतर बीयर की बिक्री में लगभग 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में जहां लगभग 32.4 लाख कार्टन बीयर की बिक्री हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 51.6 लाख कार्टन से अधिक पहुंच गया।

सरकार की कमाई भी बढ़ी

दिलचस्प बात यह है कि कीमतें घटने के बावजूद सरकार के राजस्व में कमी नहीं आई।आबकारी विभाग के अनुसार, बीयर की बढ़ी हुई बिक्री के कारण राज्य का एक्साइज राजस्व लगभग 16 प्रतिशत बढ़कर ₹3,510 करोड़ तक पहुंच गया। यानी कम कीमत और अधिक बिक्री का मॉडल सरकार के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है।

ग्राहकों को क्यों मिल रहा फायदा?

नई नीति के तहत कम अल्कोहल वाले पेयों पर टैक्स कम होने से कंपनियों ने खुदरा कीमतें घटा दी हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि पहले कर्नाटक में बीयर की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा थीं। नई टैक्स व्यवस्था के बाद राज्य में कीमतें अधिक प्रतिस्पर्धी हो गई हैं, जिससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है।

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दुकानदारों की क्या राय है?

राज्य के कई शराब विक्रेताओं का कहना है कि कम कीमतों की वजह से ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी है।कुछ दुकानदारों के अनुसार, मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि कई लोकप्रिय बीयर ब्रांडों की अस्थायी कमी भी देखने को मिल रही है। निर्माता कंपनियां अब उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

क्या सभी शराब सस्ती हुई है?

नहीं।नई नीति का सबसे बड़ा फायदा कम अल्कोहल वाली बीयर को मिला है। वहीं अधिक अल्कोहल वाली कई शराबों पर टैक्स बढ़ने के कारण उनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य लोगों को कम अल्कोहल वाले पेयों की ओर प्रोत्साहित करना और टैक्स व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक बनाना है।

क्यों खास है कर्नाटक की नई नीति?

कर्नाटक अब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने शराब पर टैक्स को सीधे अल्कोहल की मात्रा से जोड़ दिया है।पहले अलग-अलग श्रेणियों में कुल 16 टैक्स स्लैब थे, जिन्हें घटाकर 8 कर दिया गया है। इससे टैक्स प्रणाली सरल हुई है और कीमतों में पारदर्शिता आई है।

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क्या अन्य राज्यों में भी लागू हो सकती है ऐसी व्यवस्था?

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्नाटक का यह मॉडल लंबे समय तक सफल रहता है, तो अन्य राज्य भी इसी तरह की टैक्स व्यवस्था अपनाने पर विचार कर सकते हैं। खासकर उन राज्यों में जहां शराब की ऊंची कीमतों के कारण बिक्री प्रभावित होती है।हालांकि, हर राज्य की आबकारी नीति अलग होती है, इसलिए इस तरह का बदलाव स्थानीय सरकारों के फैसले पर निर्भर करेगा।कर्नाटक की नई ABV आधारित टैक्स व्यवस्था ने बीयर बाजार की तस्वीर बदल दी है। कई लोकप्रिय बीयर ब्रांड पहले की तुलना में काफी सस्ते हो गए हैं, जिससे ग्राहकों को राहत मिली है और बिक्री में तेज उछाल देखने को मिला है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कीमतें कम होने के बावजूद सरकार का आबकारी राजस्व भी बढ़ा है। फिलहाल यह मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण साबित हो सकता है।

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