पर्यटन

Darbhanga Maharaj : लंदन की टाइल्स और शिक्षा का संगम, जानिए दरभंगा महाराज की कहानी

दरभंगा महाराज की कहानी एक ऐसे राजा की है जिन्होंने अपनी संपत्ति और शानो-शौकत के साथ-साथ शिक्षा और समाजिक सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी हवेली में लगी लंदन की टाइल्स उनकी समृद्धि का प्रतीक थीं|

Darbhanga Maharaj : शाही हवेली और ज्ञान की ज्योति,जानिए कैसे थे दरभंगा महाराज?


Darbhanga Maharaj की कहानी उस समय की है जब भारत में रजवाड़ों और महाराजाओं का दबदबा था। दरभंगा महाराज ने न केवल अपनी विशाल संपत्ति और शानो-शौकत के लिए नाम कमाया, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी हवेली में लंदन से टाइल्स लगी थीं, जो उस समय की उनकी धरोहर और समृद्धि का प्रतीक थीं। इस कहानी में आप दरभंगा महाराज की शिक्षा के प्रति उनके योगदान और उनकी संपत्ति के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Darbhanga Maharaj
Darbhanga Maharaj

दरभंगा महाराज का परिचय

दरभंगा महाराज का असली नाम महेश्वर सिंह था, जो बिहार के दरभंगा जिले में एक महत्वपूर्ण रजवाड़ा परिवार से थे। उनके पूर्वजों ने 18वीं सदी में दरभंगा राज की स्थापना की थी। महाराज महेश्वर सिंह का जन्म 1860 में हुआ था और वे अपने परिवार के 15वें राजा थे। उनके शासनकाल में दरभंगा राज ने काफी डेवेलपमेंट की और वे सामाजिक और कल्चरल एक्टिविट्स में भी एक्टिव थे।

दरभंगा राज की संपत्ति और शानो-शौकत

दरभंगा महाराज की संपत्ति बहुत बड़ी थी और उनकी हवेली बहुत ही शानो-शौकत से भरी हुई थी। उनकी हवेली में लंदन से इम्पोर्टेड टाइल्स लगी थीं, जो उस समय की आधुनिकतम निर्माण सामग्री मानी जाती थी। यह टाइल्स न केवल खूबसूरती बढ़ाने के लिए, बल्कि उनके अत्यधिक समृद्धि का भी प्रतीक थीं। उनकी हवेली में मार्बल के फर्श, सोने और चांदी के गहनों से सजी दरवाजे और खिड़कियाँ, और यूरोप से मंगवाए गए फर्नीचर थे।

 Darbhanga Maharaj

Read More : Movie Review – फिल्म ‘Deadpool & Wolverine’ में चला शॉन लेवी, रयान रेनॉल्ड्स और ह्यू जैकमैन का जादू

शिक्षा में योगदान

दरभंगा महाराज शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपने राज्य में कई स्कूल और कॉलेज स्थापित किए। उन्होंने दरभंगा में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की, जिसे आज ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। उनकी सोच थी कि शिक्षा के माध्यम से समाज में डेवेलपमेंट किया जा सके। दरभंगा महाराज ने 1960 में दरभंगा यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। इस यूनिवर्सिटी का उद्देश्य उच्च शिक्षा के लिए एक प्रमुख केंद्र बनाना था। उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए जमीन और धन उपलब्ध कराया और उसे एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। इस विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाए जाते थे।

स्कूल और कॉलेज

दरभंगा महाराज ने केवल विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि कई स्कूल और कॉलेज भी स्थापित किए। उन्होंने महिलाओं के शिक्षा को भी बढ़ावा दिया और उनके लिए अलग से स्कूल खोले। उनके द्वारा स्थापित स्कूल और कॉलेज आज भी शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और उनके योगदान को याद किया जाता है। दरभंगा महाराज न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि कल्चरल एक्टिविट्स में भी सक्रिय थे। उन्होंने संगीत, नृत्य और कला के विभिन्न रूपों को प्रोत्साहित किया। उनकी हवेली में संगीत और नृत्य के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते थे। उन्होंने विभिन्न कलाकारों और संगीतकारों को प्रोत्साहित किया और उनके कला को सहेजने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।

Read More : The UP Files: 26 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देगी ‘द यूपी फाइल्स’, प्रदेश के मुख्यमंत्री का किरदार निभा रहें ये अभिनेता

दरभंगा घराना

दरभंगा महाराज के शासनकाल में दरभंगा घराना की स्थापना हुई, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक महत्वपूर्ण घराना है। इस घराने ने कई महान संगीतकारों को जन्म दिया और भारतीय संगीत को समृद्ध किया। दरभंगा घराना की संगीत विशेष रूप से ध्रुपद और ख्याल गायन में प्रमुख है।

समाजिक सेवा

दरभंगा महाराज ने समाजिक सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने राज्य में कई अस्पताल स्थापित किए। उनके शासनकाल में दरभंगा में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ और गरीबों को मुफ्त सेवा उपलब्ध कराई गई। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय भी लोगों की मदद के लिए आगे आए और उन्हें राहत सामग्री उपलब्ध कराई।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

भूकंप राहत

1934 में बिहार में आए भूकंप के दौरान दरभंगा महाराज ने राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने राज्य में भूकंप प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध कराई और उनके रिहैबिलिटेशन के लिए काम किए। उनकी इस सेवा भावना के कारण उन्हें समाज में बहुत सम्मान मिला।

दरभंगा महाराज की कहानी एक ऐसे राजा की है जिन्होंने अपनी संपत्ति और शानो-शौकत के साथ-साथ शिक्षा और समाजिक सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी हवेली में लगी लंदन की टाइल्स उनकी समृद्धि का प्रतीक थीं, लेकिन उनका असली योगदान शिक्षा और समाजिक सेवा के क्षेत्र में था। उनकी विरासत आज भी जीवित है और उनके द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थान और समाजिक सेवा के कार्य आज भी उनके योगदान की गवाही देते हैं। दरभंगा महाराज ने अपनी सोच और कार्यों से एक आदर्श राजा का उदाहरण प्रस्तुत किया और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

 

Back to top button