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जानें इंटरनेशनल मैन्स डे का इतिहास, कब से मनाया जा रहा है

भारत में 2007 से मनाया जा रहा है


हम हमेशा सुनते है कि किसी महिला के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा है. तरह-तरह के अत्याचारों की जिक्र किया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं है यह सिर्फ महिलाओं के साथ ही  ऐसा होता है. कई जगहों  में देखा गया है कि पुरुषों को भी कई तरह की उत्पीड़ना का शिकार होना पड़ता है. कई बार तो वह बराबरी की हक से भी महरुम रह जाते हैं. लेकिन मैन्स डे मनाने के पीछे यह कारण नहीं है. ब्लकि इसके पीछे का  मुख्य मकसद पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य, पुरुषत्थ के सकारात्मक गुणों की सराहना, रोल मॉडल्स पुरुषों को मुख्य धारा में लैंगिग समानता आदि है. जिससे पुरुषों को भी पहचान के साथ-साथ सराहना भी मिल सके. मैन्स डे क्यों मनाया जाता है. इसके पीछे क्या कारण है आज आपके बताते हैं.

मैन्स डे का इतिहास

हम सभी जानते है कि 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमेन डे  बड़े धूमधाम से पूरे विश्व में मनाया जाता है. इसी तर्ज पर 1923 में कुछ पुरुषों ने इंटरनेशनल मैन्स डे मनाए जाने की मांग की. जिसके बाद 1968 में अमेरिकन जर्नालिस्ट जॉन पी. हैरिस ने एक आर्टिकल लिखते हुए कहा था कि सोवियत प्रणाली में संतुलन की कमी है. यह प्रणाली महिलाओं के लिए इंटरनेशनल वुमेन डे मनाती है. लेकिन पुरुषों के लिए वो किसी प्रकार का दिन नहीं मानती है. इन सबके बाद 19 नवंबर 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों द्वारा पहली बार इंटरनेशनल मैन्स डे मनाया गया. भारत में यह 2007 के बाद मनाना शुरु किया गया है. लेकिन इस सोशल मीडिया के जमाने में लोग अब बड़े धूमधाम से इसे मनाने लगे हैं. क्या आप जानते हैं डॉ तिलकसिंह ने अपने योगदानों में पुरुषों को मुख्यधारा में लाना का बहुत प्रयत्न किया था. जिसके कारण उनके पिता के जन्मदिन 19 नवंबर को इंटरनेशनल मैन्स डे मनाया जाता है.

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अच्छे खाना खिला सकती है

अगर आप अपने किसी फ्रेंड, कजन, या किसी करीबी पुरुष से नराज है और उन्हें मनाने का प्लान कर रही है. तो आज का दिन बहुत बेस्ट है. लगातार होती नोकझोक के बीच आज आप अपने किसी खास मैन को स्पेशल तोहफा दी सकती है. घर में उसके लिए कुछ अच्छा खाना बना सकती है. अगर पढ़ने के शौकीन है तो पुरुषों के जीवन की कठिनाईयों से संबंधित किसी बुक को दे सकती है. जिससे उन्हें स्पेशल फील हो. जैसे वुमेन डे को इन सारी चीजें से स्पेशल बनाया जाता है. वैसे ही मैन्स डे को ऐसे ही स्पेशल बनाया जाए.

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International Men’s Day: क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल मेंस डे

International Men’s Day: पुरुषों की सेफ्टी को लेकर आकड़ें कर सकते हैं आपको दंग


हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर में इंटरनेशनल मेंस डे मनाया जाता है। अब सवाल तो यहाँ ये भी आता है की पुरुषों के लिए कोई खास दिन क्यों? तो इसका जवाब है की महिलाओं की तरह पुरुष भी असमानता का शिकार होते हैं। अगर हम अपने समाज की बात करें तो वो पुरुष प्रधान है, मलतब ये हुआ की हमारे समाज में पुरुषों का वर्चस्व है। यह सोच सिर्फ भारत जैसे देशों की ही नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में इस तरह की सोच आज भी व्याप्त है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुषों को कोई समस्या नहीं है, हकीकत यह है कि वह भी भेदभाव, शोषण और असमानता का शिकार होते हैं।

क्या कहते है आकड़े:

अगर हम आकड़ों की बात करें तो उसे देख पर आप चौक जायेगे:

76 फीसदी आत्महत्याएं पुरुष की भी होती है, वही 85 फीसदी बेघर लोग पुरुष भी होते है। 70 फीसदी हत्याएं पुरुषों की भी होती हैं, घरेलू हिंसा के शिकारों में भी 40 फीसदी पुरुष होते है। इस बार ‘इंटरनेशनल मेन डे’ की थीम ‘पॉजिटिव मेल रोल’ मॉडल्स पर रखी गई है।

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क्यों मनाते हैं पुरुष दिवस:

अमेरिका के मिसौर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस योस्टर की वजह से पहली बार 7 फरवरी 1992 को अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कुछ देशों ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया था, लेकिन साल 1995 से कई देशों ने फरवरी महीने में पुरुष दिवस मनाना बंद कर दिया था। हालांकि कई देशों में इस दौरान अपने-अपने हिसाब से पुरुष दिवस को मनाया जाता है। 1998 में त्रिनिदाद एंड टोबेगो में पहली बार 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया और इसका सारा श्रेय डॉ. जीरोम तिलकसिंह को जाता है। उन्होंने इसे मनाने की पहल की और इसके लिए 19 नवंबर का दिन चुना। इसी दिन उनके देश ने पहली बार फुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालिफाई करके देश को जोड़ने का काम किया था। उनके इस प्रयास के बाद से ही हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर के 60 देशों में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है, और यूनेस्को भी उनके इस प्रयास की सराहना कर चुकी है।

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Ayushmann Khurrana poetry: आयुष्मान खुर्रान की कविता ‘जेन्टलमैन’ ने जीता सबका दिल

इंटरनेशनल मैन डे पर आयुष्मान का लड़को को तोहफ़ा, कही उनके दिल की बात


Ayushmann Khurrana poetry gentleman: जब भी आयुष्मान का नाम आता है तो सबसे डिसेंट मेन की छवि अपने आप दिमाग में बनने लगती है और साथ ही उनकी हर अनोखी स्क्रिप्‍ट और कहानी याद आ जाती है फिर चाहे वो ‘ड्रीम गर्ल’ हो या ‘बाला’। फिलहाल, आयुष्मान की फिल्म ‘बाला’ रिलीज़ हो चुकी है और उसने सबका दिल भी जीत लिया है। इस फिल्म में आयुष्मान ने अपनी एक्टिंग से सबको चौका दिया है। अब इन सबके बीच आने वाले अंतररार्ष्‍टीय पुरुष दिवस पर आयुष्‍मान ने एक कविता अपने सोशल मीडिया पर शेयर करके अपने फैंस का दिल और जीत लिया है।

क्या है कविता में:

इस कविता को लिखा है ‘गौरव सोलंकी’ ने और अगर कविता में लिखे शब्दों की बात करे तो यह कविता पुरुषों के लिए तय किए गए कई पैमानों को तोड़ते हुए और उनपर तीखी टिप्‍पणी करती है। आयुष्मान ने इस कविता को बड़े मज़ेदार तरीके से पड़ा है। कविता में आयुष्मान कह रहे है की मर्द रोता भी है, बच्चे भी संभालता है, और जब वाइफ थक कर घर आये तो चाय भी बनता है’, मर्द भी एक इंसान है उसपर कुछ थोपे नहीं। बता दें कि गौरव सोलंकी ‘दास देव’, ‘वीरे दी वेडिंग’, जैसी कई फिल्‍मों के गाने लिख चुके हैं। उन्‍होंने इसी साल रिलीज हुई आयुष्‍मान खुराना की फिल्‍म ‘आर्टिकल 15’ की भी कहानी लिखी है।

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कब है इंटरनेशनल मैन डे:

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस 19 नवंबर को है। वर्क फ्रंट की बात करें तो आयुष्‍मान खुराना की हालिया रिलीज फिल्‍म ‘बाला’ आलोचकों की तारीफ तो पा ही रही है, साथ ही इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर भी कमाल कर दिया है। ‘बाला’ ने पहले दिन 10.15 करोड़ की ओपनिंग पाई और पिछते तीन दिनों में यह फिल्‍म 43 करोड़ की कमई कर चुकी है, अकेले रविवार को इस फिल्‍म ने 18.7 करोड़ की कमाई की है। इस फिल्‍म में आयुष्‍मान के साथ भूमि पेडणेकर और यामी गौतम नजर आ रही हैं।

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