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जाने क्या होती है हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग और कैसे होती है यह बच्चों के लिए नुकसानदेह

जाने क्या होती है हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग


पैरेंटिंग ये शब्द जितना सुनने में अच्छा लगता है उससे कई गुना ज्यादा इसमें ज़िम्मेदारियां होती है। हर माता पिता चाहते हैं कि वो अपने बच्चे को एक अच्छी परवरिश दे। उससे उंगली पकड़ कर उससे चलना सिखाएं। उसकी हर चीज में उसका साथ दे, उसके साथ खड़े रहे। लेकिन कई बार ये प्यार और केयर एक अलग लेवल पर चली जाती है जिसे हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग है। जब कोई भी माता पिता अपने बच्चे की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल देने लगते हैं अपने बच्चे के साथ हेलिकॉप्टर की तरह हरदम मंडराते रहते है जिसे वो खुद अपने फैसले नहीं ले पाता है। उससे ही हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग कहा जाता है।

 

जाने क्या करें, क्या न करें

जब बच्चा छोटा होता है तो उससे हर पल माता पिता के साथ की ज़रूरत होती है लेकिन जैसे जैसे वो बड़ा होता है। उसकी ये जरूरत कम होने लगती है। हां ये बात सही है कि बच्चे को आपके साथ की ज़रूरत होती है, आपके मोटिवेशन की जरूरत होती है, उससे पढ़ाई में भी आपकी मदद चाहिए होती है। एक माता पिता होने के नाते आपको पता होना चाहिए कि आपके बच्चे के दोस्त कौन कौन है उनके बीच किस तरह की बातें होती है लेकिन दिक्कत तब आने लगती है जब आप हर बात पर उनकी जिंदगी में इंटरफेयर करने लगते है। तो चलिए आज हम आपको बताएंगे बच्चों के साथ कब क्या किया जाना चाहिए जिससे की आपके और आपके बच्चे के बीच प्रॉब्लम न आये।

आज़ादी: आपको अपने बच्चे को थोड़ी आज़ादी देनी चाहिए। माना की आपको अपने बच्चे की चिंता होती है लेकिन आप खुद सोचिये, क्या आप चाहेंगे है कि आपके बच्चे को जिंदगी भर आपकी जरूरत पड़े। वो खुद इंडिपेंडेंट होकर अपनी प्रॉब्लम्स खुद सुलझा न सकें। नहीं न तो इसलिए आपको अपने बच्चे को थोड़ी आज़ादी देनी चाहिए जिसे वो इंडिपेंडेंट होकर अपनी प्रॉब्लम्स खुद सुलझा सकें।

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बच्चे अपना काम खुद करें: आपको अपने बच्चे को बचपन से ही सीखना चाहिए कि उससे अपने काम खुद करने चाहिए। क्योकि ये उसके आने वाले कल के लिए ठीक है। बच्चे को लाड़-प्यार करना चाहिए लेकिन उससे कभी भीं लाड़-प्यार में बिगाड़ना नहीं चाहिए।

लड़ाई: आपको अपने बच्चे को हर सिचुएशन को हैंडल करना सीखना चाहिए। अगर आपके बच्चे की स्कूल में लड़ाई हो जाएं, तो आपको उससे घर पर ही समझाना चाहिए कि उससे सिचुएशन को कैसे हैंडल करना है न की उसके स्कूल खुद चले जाएं टीचर से शिकायत लगाने या दूसरे बच्चों को डांटने।

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