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Death anniversary- जानें ऋषि कपूर कीआखिरी इच्छा क्या थी

जाने कब आलिया बनेंगी रणबीर की दुल्हनिया


साल 2020 में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हो गया था और आज यानि कि 30 अप्रैल को उनकी पुण्यतिथि है। पिछले साल जब अभिनेता ऋषि कपूर के निधन की खबर मीडिया में आई तो पूरे देश को गहरा सदमा लगा था। कोई भी व्यक्ति यकीन ही नहीं कर पा रहा था कि अब दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने पूरी दुनिया को अलविदा कह दिया है। ऋषि कपूर ने मुंबई के एनएच रिलायंस हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली थी। क्या आपको पता है ऋषि कपूर मरने से पहले बेटे रणबीर कपूर की शादी देखना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य की उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो पाई।

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Image Source- Tosshub

जाने जब एक रिपोर्टर ने ऋषि कपूर से रणबीर और आलिया के बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने क्या जवाब दिया

एक रिपोर्ट के मुताबिक जब एक रिपोर्टर ने ऋषि कपूर से रणबीर और आलिया के बारे में सवाल पूछा तो ऋषि कपूर ने कहा था कि रणबीर और आलिया के बारे में सभी लोग सब कुछ जानते है। इसलिए मुझे कुछ भी कंफर्म करने की जरूरत नहीं है। फिर आगे ऋषि कपूर ने कहा जब मेरी शादी हुई थी तो में 27 साल का था और अभी रणबीर की उम्र 35 साल हो चुकी है ऐसे में अब उन्हें शादी कर लेनी चाहिए।

अपने पोते-पोतियों को खिलाना चाहते थे ऋषि कपूर

ऋषि कपूर ने आगे कहा था रणबीर जिससे चाहें, जब चाहें शादी कर सकते हैं। मुझे इस बात पर कोई ऑब्जेक्शन नहीं होगा। फिर उन्होंने कहा बेटे रणबीर की खुशी में ही मेरी खुशी है। जब भी रणबीर शादी के लिए तैयार हो जाएगा तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी। उसके बाद ऋषि कपूर ने कहा वो इस दुनिया को अलविदा कहने से पहले अपने पोतों-पोतियों के साथ खेलना चाहते हैं।

जानें कब आलिया बनेंगी रणबीर की दुल्हनिया

ये बात तो हम सभी लोग जानते है कि आलिया भट्ट और रणबीर कपूर बॉलीवुड के सबसे क्यूट कप्पल हैं और उनकी शादी को लेकर अफवाहें पिछले काफी समय से फैलती आ रही है। दोनों के फैंस उनकी शादी को लेकर काफी ज्यादा उत्साहित है इन खबरों और अफवाहें के बीच, आलिया भट्ट ने खुद खुलासा किया है कि अभी वह सिर्फ शादी करने की प्लानिंग कर रहीं हैं। लेकिन वह अभी जल्द शादी नहीं करेंगी, क्योंकि वह अभी बहुत छोटी है। आलिया ने पिंकविला के एक इंटरव्यू में कहा “मैं शादी कब करूंगी? हर कोई मुझसे क्यों पूछ रहा है कि मैं कब शादी करने वाली हूं? आप जानते हैं कि मैं केवल 25 साल की हूं, और मुझे लगता है कि अभी शादी करना काफी जल्दी होगा।

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Death anniversary- इरफान की शानदार फिल्में जो देती है सामाजिक संदेश

आज भी लोगों को जहन में बसे है इरफान साहब


फिल्म में रुहेदार का वह शब्द कई सदियों तक लोगों के जहन में बसा रहेगा। इरफान खान बॉलीवुड का वह नयाब सितारा जिसने पिछले साल अपने फैन्स का साथ छोड़ दिया। पिछले साल 29 अप्रैल की वह सुबह 11 बजे टेलीविजन की स्क्रीन पर बनती ब्रेकिंग न्यूज “नहीं रहे एक्टर इरफान खान” ने लोगों को पूरी तरह से सन्न कर दिया था। इरफान साहब के फैन्स इस बात को मानने को तैयार ही नहीं थे कि उनके चाहते उनके बीच नहीं रहे। अब एक्टर को गुजरे हुए पूरा एक साल हो गया है। इस दौरान वह अपने फैन्स के दिलों में आज भी जिंदा है। जिसका नतीजा यह है कि आज भी लोग उनके फिल्मों को चाव से देखते हैं। इतना ही नहीं कई फैन्स उनकी आवाज के भी दीवाने हैं। फिल्म के डायलॉग में उनकी बोलती आंखें आज भी उनके फैन्स का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। मीडिल क्लास फैमिली में जन्म लेने वाले एक्टर इरफान खान ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा था। तो चलिए आज आपको उनकी कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में बताएंगे जो समाज को कुछ संदेश देती हैं।

हिंदी मीडियम

साल 2017 में साकेत चौधरी के निर्देशन में बनी फिल्म हिंदी मीडियम ने समाज के उस पहलू को दिखाने की कोशिश गई है जहां सिर्फ अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को ही अच्छा माना जाता है। अंग्रेजी मीडियम के बच्चों और उनके पैरेंट्स का एक क्लास  होता है। लेकिन इन मुद्दों को नकारते हुए यहां बताया गया है कि ज्ञान के लिए माध्यम की कोई जरुरत नहीं है। माता पिता को अपनी हालात के हिसाब से शिक्षा दें। बच्चों को लिए शिक्षा के जरुर है माध्यम नहीं।

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अंग्रेजी मीडियम

एक्टर के इंतकाल से कुछ समय पहले ही यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। इस फिल्म के रिलीज होने से पहले इरफान खान ने एक भावुक मैसेज दिया था। जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस फिल्म को भले ही कॉमेडी के रुप दिखाया गया है। लेकिन इस कॉमेडी के पीछे एक बहुत बड़ा मैसेज है। जिसे लोगों को समझने की जरुरत है। फिल्म की कहानी एक पिता और बेटी की है। जहां एक कम पढ़ा पिता और विदेश में बेटी को पढ़ाने की जिद्द किसी भी हद तक उसको गुजरने के लिए मजबूर कर देती है। जहां यह बताया जा रहा है कि बेटियों को पढ़ाना बहुत जरुरी है। भले ही आपकी स्थिति कैसी भी हो। लेकिन बच्चों को विदेश में ही पढ़ने की जिद्द नहीं करनी चाहिए।

करीब-करीब सिन्गल

यह फिल्म एक रिश्ते पर आधारित है। जहां यह बताने की कोशिश की गई है कि शादी के लिए जरुरी है कि आप किसी इंसान को अच्छे से जान लें। अगर उसके साथ अपने आपको कम्फर्टेबल महसूस करते हैं तभी अपने रिश्ते को आगे बढ़ाए। घर वालों को मर्जी से जरुर शादी करें लेकिन उससे पहले जिससे आपकी शादी होने वाली है उसे अच्छी तरह से जान लें।

हासिल

साल 2003 में तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म इलाहाबाद युनिर्वसिटी के छाक्षों के जीवन पर आधारित है। यह फिल्म इरफान खान के करियर के शुरुआती दौर में बनाई थी। जहां उन्होंने एक विलैन का रोल प्ले किया है। जिसमें छात्र जीवन के उसे हिस्से को दिखाया गया है जहां किसी की एक गलती उसके पूरे जीवन क बर्बाद कर देती है। इस फिल्म को स्टूडेंट्स को जरुर देखनी चाहिए।

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Death anniversary: लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर जानें कैसे एक गरीब परिवार का बच्चा बना ‘भारत रत्न’

जानें लाल बहादुर शास्त्री के 54वीं पुण्यतिथि पर उनके बारे में कुछ अनसुनी बाते


भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज यानि की 11 जनवरी को 54वीं पुण्यतिथि है. उनका  जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को वाराणसी के शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था.  सादगीपूर्ण अपना जीवन जीने वाले लाल बहादुर शास्त्री एक शांत स्वभाव वाले व्यक्ति थे.  वह अपने घर पर सबसे छोटे थे जिसके कारण उन्हें प्यार से नन्हें बुलाया जाता था. लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी अंतिम सांस 11 जनवरी, 1966 को उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में ली थी. 11 जनवरी, 1966 को ही लाल बहादुर शास्त्री ने ताशकंद घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किया था.  वह भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्हे मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था. तो चलिए आज लाल बहादुर शास्त्री के 54वीं पुण्यतिथि पर उनके बारे में कुछ ऐसी बाते जानते है जो बहुत कम लोग जानते है।

 

1. भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म  2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल टीचर थे. लेकिन क्या आपको पता है लाल बहादुर शास्त्री जब डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था.

 

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2. लाल बहादुर शास्त्री ने अपने जन्म से ही काफी मुश्किलों का सामना किया था. कई जगह इस बात का भी जिक्र किया गया है कि बचपन में पैसे न होने के कारण लाल बहादुर शास्त्री तैरकर नदी पार किया करते थे. लेकिन कुछ पुख्ता तथ्यों में दूसरी  तरह का भी दावा किया गया है.

 

3. बचपन में एक बार लाल बहादुर शास्त्री अपने दोस्तों के साथ गंगा नदी के पार मेला देखने गए थे. लेकिन वापस आते हुए उनके पास नाववाले को देने के लिए पैसे नहीं थे और उन्होंने दोस्तों से पैसे मांगना सही नहीं समझा। इस लिए उन्होंने अपने दोस्तों को नाव से जाने के लिए कह दिया और खुद बाद में नदी तैरकर आये थे.

 

4. लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी शादी में दहेज में एक चरखा और कुछ कपड़े लिए थे।

 

5. लाल बहादुर शास्त्री बचपन से ही जात-पांत का विरोध करते थे.  यहां तक कि लाल बहादुर शास्त्री ने अपने जीवन में कभी अपने नाम के आगे भी अपनी जाति का उल्लेख नहीं किया था. शास्त्री की उपाधि लाल बहादुर शास्त्री को काशी विश्वविद्यालय से मिली थी.

 

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क्रांतिकारी कवि फैज की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी कुछ शायरियां

पाकिस्तान में पैदा हुए थे फैज


फैज अहमद फैज एक ऐसा शायर जिनकी चर्चा भारत और पाकिस्तान दोनों ही जगह है. आज के दौर में भी लोग इनकी लेखनी के दीवाने है. अगर आप शायरी और नज्म के शौकीन हैं तो इनकी नज्म को जरुर पढ़ा या सुना होगा. आज फैज अहमद फैज की पुण्यतिथि है. पाकिस्तान के सियालकोट में पैदा हुए फैज की मृत्यु लाहौर में हुई थी. वह एक इंकलाबी शायर थे. जिन्हें क्रांतिकारी रचनाओं में रसिक भाव के मेल के कारण जाना जाता है. इन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया गया था.

फैज का जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. उनके वालिद बैरिस्टर थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद फैज अमृतसर में लेक्चरर बन गए थे. उसके बाद मार्क्सवादी विचारधाराओं से प्रेरित हो गए. सरकार के खिलाफ मुखर रुप से बोलने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा. ऐसे क्रांतिकारी शायर की पुण्यतिथि पर आज आपको उनकी कुछ शायरियों को बताने जा रहे हैं.

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–  दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

वो जा रहा है कोई शब-ए-गुम गुजार के

–  और भी दुख हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा

राहतें और भी वस्ल की राहत के सिवा

–  तुम्हारी याद के जब जख्म भरने लगते हैं

किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं

–  नहीं निगार में मंजिल तो जुस्तुजू ही सही

नहीं विसाल मयस्सर तो आरजू ही सही

–  गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

–  इक तर्ज-ए-तगाफुल है सो वो उन को मुबारक

इक अर्ज-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे

–  कर रहा था गम-ए-जहां का हिसाब

आज तुम याद बे-हिसाब आए

– और क्या देखने को बाकी है

आप से दिल लगा के देख लिया

–  वो बात सारे फसाने में जिस का जिक्र न था

वो बात उन को बहुत ना-गवार गुजरी है

–  जिदंगी क्या किसी मुफलिस की कबा है जिस में

हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं

–  आए तो यूं कि जैसे हमेशा थे मेहरबान

भूले तो यूं कि गोय कभी आश्ना न थे

–  वो आ रहे  हैं वो आते हैं आ रहे होंगे

शब-ए-फिराक ये कह कर गुजार दी हम ने

–  और क्या देखने को बाकी है

आप से दिल लगा के देख लिया

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22वीं पुण्यतिथि स्पेशल  -कैसे बने गुलशन कुमार ‘कैसेट किंग’? 

गुलशन  कुमार का ज़िन्दगी का सफर नहीं था आसान


12 अगस्त 1997 को दिल्ली की सड़कों पर जूस बेचने वाले शिव भक्त ने अपने जीवन के अंतिम सास भी मंदिर मे ही ली.। हम बात कर रहे है संगीत उद्योग के बादशाह और टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार (gulshan kumar) की जिन्होंने कैसेट बेचकर अपनी जिंदगी में नया मुकाम हासिल किया था। बता दें कि  आज उनकी 22वीं पुण्यतिथि है और आज ही के दिन शिवभक्त गुलशन कुमार की मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) में शिव मंदिर के पास हत्या कर दी गई थी।

‘जीरो से हीरो’ बनने का सफर

5 मई 1956 को एक पंजाबी अरोड़ा परिवार में जन्मे गुलशन कुमार का नाता देश की राजधानी दिल्ली से जन्म से जुड़ा हुआ था। गुलशल कुमार की कहानी भी ‘जीरो से हीरो’ बनने के जैसी है। टी-सीरीज के संस्थापक रहे गुलशन कुमार ने अपना जीवन सडक किनारे जूस और बाद में कैसेट बेचकर शुरू किया था।

टी-सीरीज  की स्थापना के साथ ही उन्होंने इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री में भी नए मुकाम हासिल किये थे। मेहनत और लगन जैसी खूबियों के मालिक ने बॉलीवुड में ऐसी उचाईयां हासिल की थी जो आज के समय में हासिल करना बहुत मुश्किल होता हैं। संगीत का रंग रूप बदलकर संगीत को नयी दिशा देने वाले गुलशन कुमार को आज भी उनके संगीत के लिए याद किया जाता हैं।

कैसे बने ‘कैसेट किंग’ 

‘कैसेट किंग’ के नाम से मशहूर  गुलशन कुमार ने दिल्ली के दरियागंज बाजार में जूस बेचकर अपना सफर शुरू किया था और बाद में उन्होंने कैसेट के बिज़नेस में अपना नाम बनाया। एक कैसेट की दुकान खोलकर बाद में टी-सीरीज की स्थापना करके उसके संस्थापक का दर्जा हासिल किया। एक छोटी सी म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज की स्थापना करके और बहुत ही कम समय में म्यूजिक की दुनिया में नाम कमाकर हमेशा सबका अच्छा सोचने वाले शिवभक्त ने भगवान् के चरणों में शरण ले ली। 12 अगस्त 1997 को गुलशन कुमार की मुंबई के जीतेश्वर मंदिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई जिसमे अब्दुल रउफ नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया तह और उसने हत्या की साजिश की बात भी कबूली ली थी। हालाँकि कुछ और लोग भी शक़ के दायरे में थे लेकिन बात साबित ना होने से सब बच गए।

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#RememberingSwamiVivekanand: स्‍वामी विवेकानंद  के 10 विचार जो आपकी ज़िन्दगी को देंगे सही दिशा

आज है स्‍वामी विवेकानंद की पुण्‍यतिथि : जाने उनसे जुडी कुछ अहम बातें


 स्‍वामी विवेकानंद ने हेमशा से ही शिक्षा और समाज की  भलाई के लिए अपना योगदान दिया है. आज स्‍वामी विवेकानंद की पुण्‍यतिथि  है.4  जुलाई  1902 को स्वामी विवेकानंद ने  बेलूर स्थित रामकृष्‍ण मठ में ध्‍यान मग्‍न अवस्‍था के दौरान ही  महासमाध‍ि धारण कर प्राण त्‍याग द‍िए थे. आज  उनकी पुण्‍यतिथि पर हम  आपको बताने जा रहे है उनके 10 विचार जो दे सकते है आपकी ज़िन्दगी को सही दिशा

यह है स्‍वामी विवेकानंद  के 10 विचार जो हमें  करते है प्रेरित

1.  उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये.

2.  तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता . तुमको सब कुछ खुद  सीखना हैं. आत्मा से             अच्छा कोई शिक्षक नही हैं.

3. खुद को कभी कमजोर  मत समझो

4. ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं.वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि      कितना अंधकार हैं

5. “जब तक जीना, तब तक सीखना” – अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं.

6.  हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं.

7. कभी किसी की निंदा ना करें. अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं.  अगर नहीं बढ़ा सकते,        तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये और उन्हें उनके मार्ग पर  जाने दीजिये.

8. सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है- जो बदले में कभी किसी से कुछ नहीं मांगता.

9. जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो. सोचो, तुम्हारे झूठे अहंकार को बाहर निकालकर वो तुम्हारी             कितनी मदद कर रहे हैं.

10. हम जो बोते हैं वो काटते है.हम स्वयं ही  अपने भाग्य के निर्माता हैं.

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