जाने भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर सोनाली बनर्जी की जुनून भरी कहानी

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मरीन इंजीनियर के लिए सोनाली बनर्जी को उनके अंकल से मिली प्रेरणा


हमारा देश एक पुरुष प्रधान देश है यहाँ हमेशा से महिलाओं को पुरुषों से कम आंका जाता था। महिलाओं को सिर्फ घर तक और घर के काम कज तक ही सीमित रखा जाता था। अगर हम आज से 18-20 साल पहले की बात करे तो  महिलाओं को अपने सपनों को पूरा करने की इतनी आजादी नहीं थी जितनी आज है। आज हम बात करने जा रहे है भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर सोनाली बनर्जी की और उनके जुनून की। कैसे बनी वो भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियर?


(Image source: Google)

आज के समय में आपको बहुत सारी महिलाएं मरीन इंजीनियर मिलेगी। लेकिन अगर हम बात करे 20-22 साल पहले की तो मरीन इंजीनियर लाइन में कोई महिला नहीं थी। सोनाली बनर्जी भारत की पहले महिला थी जिन्होंने मरीन इंजीनियर में अपना करियर बनाने की सोची और अपने इस सपने को पूरा भी कर दिखाया। सोनाली बनर्जी ने अपने रास्ते में आने वाली तमाम वर्जनाओं को दरकिनार करते हुए अपने मरीन इंजीनियर के सपने को पूरा किया। अगर हम सोनाली बनर्जी की बात करे तो उन्हें बचपन से ही समंदर और जहाजों से काफी लगाव था, लेकिन उस समय कोई भी महिला समंदर और जहाजों पर काम नहीं करती थी इस लिए सोनाली बनर्जी को भी इसका कोई आईडिया नहीं था उन्हें इस लाइन में करियर बनाने की प्रेरणा और कोर्स की पूरी जानकारी उनके अंकल से मिली। सोनाली बनर्जी के अंकल नौसेना में थे, उन्हें देखकर सोनाली बनर्जी हमेशा जहाजों पर रहकर काम करना चाहती थी। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए सोनाली बनर्जी ने मरीन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।

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सोनाली बनर्जी को कड़ी मेहनत के बाद मिली सफलता

सोनाली बनर्जी ने 1995 में IIT की प्रवेश परीक्षा पास की। जिसके बाद उन्होंने मरीन इंजीनियरिंग कोर्स में दाखिला लिया। सोनाली बनर्जी ने कोलकाता के निकट तरातला में स्थित ‘मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट’ से मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स किया। क्या आपको पता है सोनाली बनर्जी ने पहले भी 1949 में भी एक महिला ने मरीन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था? लेकिन वो महिला अपना कोर्स पूरा न कर पायी और उससे बिच में ही कोर्स छोड़ दिया। उसके बाद सोनाली बनर्जी ने 1995 में मरीन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और भारत की पहली महिला मरीन इंजीनियरिंग बनी। सोनाली बनर्जी जब मरीन इंजीनियरिंग बानी तो उस सयम वो महज 22 साल की थी।

सोनाली बनर्जी का प्री-सी कोर्स के लिए हुआ था चयन

जब सोनाली बनर्जी का मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स पूरा हुआ, तो मोबिल शिपिंग के लिए सोनाली ने 06 महीने के लिए प्री-सी कोर्स के लिए चयन किया गया।  इस कोर्स के दौरान सोनाली को अपने घर और परिवार से मीलों दूर सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, हॉगकॉग और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी ट्रेनिंग लिए जाना पड़ा था ऐसी हजारों दिक्कतों का सामना करने के बाद आखिरकार सोनाली बनर्जी अपने लक्ष्य तक पहुंच ही गईं।

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