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Rewind 2021- कोरोना की दूसरी लहर से लेकर बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश, ऐसी घटनाये जो रह जाएँगी याद!

Rewind 2021- चारों तरफ ऑक्सीजन के लिए होती तरस रही थी दुनिया, ऐसा मंजर जो न कभी देखा, न सुना


Rewind 2021- साल 2021 लगभग अपने अंतिम पड़ाव  पर पहुंच गया है। जनवरी से लेकर दिसंबर के महीने तक देश में कई ऐसी घटनाएं हुई। जिसने हमारा ध्यान अपनी घोर खींचा है। साल की शुरुआत में होती बारिश और ठंड के बीच दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों की हालात देखकर हर किसी का दिल पसीज गया था। उसके बाद लगातार ठंड के बीच किसान पीछे नहीं हटे। इसके बाद आया हरिद्वार का कुंभ मेला। जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

जिसका नतीजा यह हुआ कि देश में कोरोना बढ़ने की प्रक्रिया शुरु हो गई। इसके बाद मार्च और अप्रैल के महीने में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव हुआ। लेकिन इस साल दो घटनाएं ऐसी हुई है जिसे आप कभी नहीं भूल पाएंगे। तो चलिए जानते हैं उन घटनाओँ की बारे में।

1- कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण मौते

2- बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद मौत

कोरोना की दूसरी लहर

जनवरी से अप्रैल के महीने में हरिद्वार में हुए कुंभ मेले के दौरान लाखों की संख्या में लोग एकत्र हुए थे। जिसके बाद कोरोना द्वारा लाखों की संख्या में लोग संक्रमित हुए थे। डाउथ दू अर्थ की खबर के अनुसार फरवरी के बाद अप्रैल तक लगभग डेढ़ महीने में 100 गुना तक कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ गए थे। खबर के अनुसार चौथे शाही स्नान के दौरान करीब 23 हजार लोग कुंभ स्नान में पहुंचे और अंत में वहीं हुआ जिसका डर था हरिद्वार कोरोना संक्रमण की जबरदस्त चपेट में आ गया था।

यहां से शाही स्नान करने आएं लोग बाद में वापस गांव, कस्बों में गए। जिसके कारण दूसरी लहर की पहुंच गांव कस्बों तक पहुंच गई। इसी दौरान पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा ने भी दूसरी लहर  को और हवा दे दी। जहां देश के बाकी राज्यों में लॉकडाउन लगाया जा रहा था। वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराया जा रहा था।

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पहली लहर के दौरान इसका खतरा सिर्फ शहरों तक ही सीमित रहा था। लेकिन दूसरी लहर के दौरान इसका खतरा गांव, कस्बों तक पहुंच गया था। अप्रैल से जून के महीने तक छोटे शहरो में भी ऑक्सीजन की कमी होनी शुरु हो गई थी। कोरोना संक्रमितों की संख्या करोड़ पार कर चुकी थी।खबरों की मानें तो मई के महीने तक 2 लाख 30 हजार 170 लोग  अपने जान गंवा चुके थे। चारों तरफ हाहाहार मचा था। लोग अपने परिजनों को बचाने के लिए ऑक्सीजन को लेकर ढो रहे थे।

अपने घरवालों को बचाने के लिए बेड की मदद की गुहार लगा रहे थे। हाल यह था कि देश की जानी-मानी पत्रकार बरखा दत्त अपने पिता के लिए एक बेड का इंतजाम नहीं कर पाई थी। जिसके कारण उन्होंने अपने पिता को खो दिया। यह एक ऐसा समय था। जिसे लोग आने वाले समय में कभी भूला सकते हैं। टीवी, सोशल मीडिया पर आती ऐसी भयावह तस्वीरों लोगों को रोने पर मजबूर कर रही थी।

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 सीडीएस विपिन रावत का हैलीकॉप्टर क्रैश

इसी  सप्ताह को बुधवार को एक खबर आई तमिलनाडू के नीलगिरि अंचल में सीडीएस बिपनि रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। जिसमें उनकी पत्नी डॉ. मधुलिका समेत अन्य 13 लोग सवार थे। सभी लोग इस क्रैश में मार गए सिर्फ एक शख्स कैप्टन करण सिंह बचे थे। यह एक ऐसी घटना है। जिसने लोगों के दिल को पूरी तरह तोड़। हर कोई बस यही जानना चाहता था कि आखिर अचानक ऐसा कैसे हो गया। हर कोई जानना चाहता था कि कैसे हुई यह घटना।

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इस हादसे के एकमात्र चश्मदीद कृष्ण स्वामी ने बताया कि उन्होंने हैलिकॉप्टर को नीचे आते देखा। उसके बाद काफी तेज आवाज के साथ हैलिकॉप्टर पेड़ के साथ टकरा गया। पेड़ से टकराने के बाद वह नीचे गिर गया। और आग लगने के बाद चारों तरफ धुंआ-धुंआ हो गया। कृष्ण स्वामी ने गांव के लोगों  को इसकी जानकारी दी और फायर सर्विस और पुलिस को फोन किया गया। वह बताते है कि मेंने देखा हेलिकॉप्टर से जलकर 2-3 लोग नीचे गिरे।

कृष्ण स्वामी ने पूरा हादसा उस वक्त देखा जब वह जंगल की तरफ लकड़ी लेने जा रहे थे। जिस दिन सीडीएस बिपिन रावत को दिल्ली में आखिरी विदाई दी जा रही थी। सड़के उनके चाहने वालों से भरी थी। तिरंगे के साथ लोग नारे लगा रहे था। बिपिन रावत अमर रहे। जब तक सूरज चांद रहेगा बिपिन रावत तेरा नाम रहेगा।

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