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Pradosh Vrat Date 2026: जनवरी 2026 प्रदोष व्रत, तिथि, समय और पूजा विधि के साथ पूरी जानकारी

Pradosh Vrat Date 2026, हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। यह व्रत हर माह के त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो आमतौर पर पूर्णिमा

Pradosh Vrat Date 2026 : 30 या 31 जनवरी, कब है जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Pradosh Vrat Date 2026, हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। यह व्रत हर माह के त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो आमतौर पर पूर्णिमा और अमावस्या के बीच की रात होती है। जनवरी 2026 में आखिरी प्रदोष व्रत कब होगा 30 या 31 जनवरी? इस लेख में हम आपको तिथि, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व विस्तार से बताएंगे।

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत एक ऐसा व्रत है जो हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य है:

  • भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करना।
  • पापनाश और मोक्ष की प्राप्ति।
  • संपत्ति, सुख-शांति और स्वास्थ्य में वृद्धि।

प्रदोष व्रत विशेष रूप से सोमवार और शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष को अधिक फलदायी माना जाता है। इसे सोमव्रत या शुक्रवार प्रदोष व्रत भी कहा जाता है।

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जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत

जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत 31 जनवरी 2026 को है।

  • तिथि: कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी
  • वार: शनिवार
  • स्थानिक समयानुसार तिथि में थोड़ी भिन्नता हो सकती है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से पुष्टि करना बेहतर है।

यानी, यदि आप जनवरी 2026 में प्रदोष व्रत करना चाहते हैं, तो 31 जनवरी की शाम को व्रत आरंभ करें।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। व्रत का प्रमुख समय शाम के 4:30 बजे से रात 8:30 बजे तक माना जाता है, जिसे प्रदोष काल कहते हैं।

  • प्रदोष आरंभ: 31 जनवरी 2026, शाम 4:30 बजे
  • प्रदोष समाप्ति: रात 8:30 बजे
  • इस समय के दौरान शिव पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त में पूजा करने से व्रती को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी है।

  1. पापनाश और मोक्ष:
    इस दिन किए गए व्रत और शिवपूजा से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  2. संपत्ति और स्वास्थ्य में वृद्धि:
    भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से धन-संपत्ति, सुख-शांति और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
  3. कष्टों से मुक्ति:
    प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति की जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और मनोबल बढ़ता है।
  4. अच्छे परिवार और संबंध:
    व्रत के दौरान पूजा और उपवास करने से परिवार में सुख-शांति और संबंधों में मधुरता आती है।

प्रदोष व्रत कैसे करें?

प्रदोष व्रत का पालन सरल है, लेकिन नियम और विधि का ध्यान रखना आवश्यक है।

  1. उपवास और भोजन:
    • व्रती निराहार या फलाहार कर सकते हैं।
    • दूध, फल, हलवा और पंचामृत का सेवन किया जा सकता है।
  2. पूजा विधि:
    • शिवलिंग का गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद और बेलपत्र से अभिषेक करें।
    • मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
    • माता पार्वती की भी पूजा करें।
  3. दान और सेवा:
    • इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करना अत्यंत पुण्यकारी है।
  4. विशेष मंत्र और आरती:
    • प्रदोष व्रत की आरती और भजन सुनना या गाना व्रत को अधिक फलदायी बनाता है।

प्रदोष व्रत के लाभ

  • शिवजी की कृपा: सभी दुखों और समस्याओं से मुक्ति।
  • धन और समृद्धि: व्रत करने से धन-सम्पत्ति की वृद्धि होती है।
  • स्वास्थ्य लाभ: मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार।
  • आध्यात्मिक लाभ: मन की शांति और ध्यान की वृद्धि।

जनवरी 2026 में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व

जनवरी के महीने का आखिरी प्रदोष व्रत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • यह नए साल के पहले महीने का अंतिम प्रदोष व्रत है।
  • इस दिन व्रत करने से पूरा वर्ष सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य से भरपूर रहता है।
  • शनिवार होने के कारण, शनि दोष और परेशानियों से मुक्ति के लिए भी इसे विशेष शुभ माना गया है।

जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत 31 जनवरी को है। इस दिन शिव और पार्वती की पूजा, मंत्र जाप और दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।

  • तिथि: 31 जनवरी 2026, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
  • शुभ मुहूर्त: शाम 4:30 बजे से रात 8:30 बजे तक
  • महत्व: पापनाश, मोक्ष, धन-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोबल में वृद्धि

इस प्रदोष व्रत को करने वाले व्रती को जीवन में शांति, सौभाग्य और सफलता प्राप्त होती है। इसलिए यदि आप धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक लाभ चाहते हैं, तो 31 जनवरी का प्रदोष व्रत अवश्य करें।

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