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World Bipolar Day: विश्व बाइपोलर दिवस 2026, तारीख, इतिहास और महत्व

World Bipolar Day, विश्व बाइपोलर दिवस (World Bipolar Day) मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिन है।

World Bipolar Day : मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता का दिन

World Bipolar Day, विश्व बाइपोलर दिवस (World Bipolar Day) मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन विशेष रूप से बाइपोलर डिसऑर्डर नामक मानसिक रोग के बारे में लोगों को सही जानकारी देने, इससे जुड़े भ्रम को दूर करने और प्रभावित व्यक्तियों को समाज में सम्मान और सहयोग दिलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य आज के समय में उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य, लेकिन फिर भी इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विश्व बाइपोलर दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि मानसिक रोग भी वास्तविक होते हैं और इनका इलाज संभव है।

विश्व बाइपोलर दिवस कब मनाया जाता है

विश्व बाइपोलर दिवस हर वर्ष 30 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन प्रसिद्ध डच चित्रकार विन्सेंट वैन गॉग के जन्मदिन के अवसर पर चुना गया है, क्योंकि माना जाता है कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित थे। इस दिन को मनाने का उद्देश्य यह संदेश देना है कि मानसिक बीमारी के बावजूद व्यक्ति रचनात्मक, प्रतिभाशाली और समाज के लिए उपयोगी हो सकता है। यह दिन दुनिया भर में संगठनों, डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है

बाइपोलर डिसऑर्डर एक प्रकार का मानसिक रोग है, जिसमें व्यक्ति के मूड में अत्यधिक बदलाव आते हैं। कभी व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश, उत्साहित और ऊर्जावान महसूस करता है, जिसे मैनिक अवस्था कहा जाता है, और कभी अत्यधिक उदासी, निराशा और थकान महसूस करता है, जिसे डिप्रेसिव अवस्था कहते हैं। इन दोनों अवस्थाओं के बीच बार-बार बदलाव होने से व्यक्ति के दैनिक जीवन, काम, रिश्तों और आत्मविश्वास पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। मैनिक अवस्था में व्यक्ति बहुत तेजी से बोलता है, नींद कम लेता है, जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करता है और कई बार गलत फैसले भी ले लेता है। वहीं डिप्रेसिव अवस्था में व्यक्ति उदास रहता है, किसी काम में मन नहीं लगता, थकान महसूस करता है और कभी-कभी आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगते हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों को पहचाना जाए, तो सही इलाज से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण

इस रोग के पीछे कई कारण हो सकते हैं। आनुवंशिक कारण, यानी परिवार में किसी को पहले से यह बीमारी होना, इसका एक प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन, अत्यधिक तनाव, नशे की लत, नींद की कमी और भावनात्मक आघात भी बाइपोलर डिसऑर्डर को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में ये सभी कारण मौजूद हों, लेकिन ये जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

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इलाज और प्रबंधन

बाइपोलर डिसऑर्डर का पूरी तरह से स्थायी इलाज संभव नहीं है, लेकिन सही उपचार और नियमित देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली दवाइयाँ, मनोचिकित्सा, काउंसलिंग और स्वस्थ जीवनशैली इसमें मददगार होती हैं। मरीज को नियमित नींद लेना, संतुलित आहार लेना, तनाव से दूर रहना और नशे से बचना चाहिए। परिवार और दोस्तों का सहयोग भी इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

समाज में जागरूकता की आवश्यकता

दुर्भाग्यवश, हमारे समाज में मानसिक रोगों को आज भी गलत नजरिए से देखा जाता है। कई लोग इसे कमजोरी या पागलपन समझ लेते हैं, जिससे पीड़ित व्यक्ति इलाज कराने से कतराता है। विश्व बाइपोलर दिवस का उद्देश्य इसी सोच को बदलना है। यह दिन हमें सिखाता है कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह सामान्य हैं और इनका इलाज सम्मान और समझ के साथ किया जाना चाहिए।

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विश्व बाइपोलर दिवस का महत्व

यह दिवस केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उम्मीद और सहानुभूति का प्रतीक भी है। यह दिन प्रभावित लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि वे अकेले नहीं हैं और समाज उनके साथ खड़ा है। इस दिन सेमिनार, ऑनलाइन अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता और चर्चा सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनसे लोग मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील बनते हैं। अंत में कहा जा सकता है कि विश्व बाइपोलर दिवस मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सोच में बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह दिन हमें सिखाता है कि मानसिक बीमारी कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सा स्थिति है, जिसका इलाज संभव है। सही जानकारी, समय पर उपचार और सामाजिक सहयोग से बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य और खुशहाल जीवन जी सकता है। इसलिए हमें इस दिन के माध्यम से न केवल जागरूक बनना चाहिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील और सहायक समाज बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाने चाहिए।

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