Public Television Day 2026: सार्वजनिक प्रसारण दिवस 2026, जनहित में टीवी की भूमिका
Public Television Day 2026 हर वर्ष 7 जनवरी को भारत में सार्वजनिक प्रसारण दिवस (Public Television Day) मनाया जाता है। यह दिन भारतीय टेलीविजन इतिहास की उस ऐतिहासिक शुरुआत की याद दिलाता है,
Public Television Day 2026 : सार्वजनिक प्रसारण दिवस 2026, भारत में टीवी प्रसारण की शुरुआत की कहानी
Public Television Day 2026 हर वर्ष 7 जनवरी को भारत में सार्वजनिक प्रसारण दिवस (Public Television Day) मनाया जाता है। यह दिन भारतीय टेलीविजन इतिहास की उस ऐतिहासिक शुरुआत की याद दिलाता है, जब 1959 में पहली बार सार्वजनिक सेवा के उद्देश्य से टेलीविजन प्रसारण की नींव रखी गई थी। 2026 में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि डिजिटल युग में भी सार्वजनिक प्रसारण की भूमिका समाज, शिक्षा और लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी बनी हुई है।
1959: भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत
भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 7 जनवरी 1959 को दिल्ली से एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में हुई थी। यह सेवा उस समय All India Radio के अंतर्गत संचालित की गई।इस शुरुआती प्रसारण का उद्देश्य मनोरंजन नहीं बल्कि शिक्षा और सामाजिक जागरूकता था। स्कूल शिक्षा, कृषि जानकारी और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे। यही पहल आगे चलकर भारत में सार्वजनिक टेलीविजन प्रणाली की नींव बनी।
दूरदर्शन: सार्वजनिक प्रसारण का विस्तार
1965 में नियमित टेलीविजन सेवा शुरू हुई और 1976 में टेलीविजन को आकाशवाणी से अलग कर स्वतंत्र इकाई बनाया गया। इसके बाद Doordarshan का गठन हुआ, जिसने देशभर में सार्वजनिक प्रसारण का विस्तार किया।दूरदर्शन ने ग्रामीण भारत तक सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। “कृषि दर्शन”, “हम लोग”, “रामायण” और “महाभारत” जैसे कार्यक्रमों ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि सामाजिक चेतना भी बढ़ाई।
सार्वजनिक प्रसारण का मूल उद्देश्य
सार्वजनिक टेलीविजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन देना नहीं बल्कि जनहित में सूचना, शिक्षा और जागरूकता फैलाना होता है। यह व्यावसायिक चैनलों से अलग इसलिए माना जाता है क्योंकि इसका मुख्य लक्ष्य समाज के सभी वर्गों तक निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है।भारत जैसे विविधता वाले देश में सार्वजनिक प्रसारण राष्ट्रीय एकता, भाषा-सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम रहा है।
शिक्षा और विकास में भूमिका
सार्वजनिक प्रसारण ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दूरदर्शन और शैक्षिक चैनलों के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों तक शिक्षा पहुंचाई गई।कृषि, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार और सामाजिक सुधार से जुड़े कार्यक्रमों ने ग्रामीण और पिछड़े वर्गों को जागरूक करने में बड़ी भूमिका निभाई।कोविड-19 महामारी के दौरान भी टीवी आधारित शिक्षा और सरकारी जानकारी पहुंचाने में सार्वजनिक प्रसारण की उपयोगिता फिर से स्पष्ट हुई।
डिजिटल युग में सार्वजनिक टीवी की चुनौती
आज इंटरनेट और निजी चैनलों के दौर में सार्वजनिक टेलीविजन को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दर्शकों की पसंद बदल रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं।इसके बावजूद सार्वजनिक प्रसारण की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। विश्वसनीय समाचार, आपदा के समय आधिकारिक सूचना और सामाजिक अभियानों में इसकी भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।भारत में भी सार्वजनिक प्रसारण सेवाएं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के माध्यम से नए दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
लोकतंत्र में सार्वजनिक प्रसारण का महत्व
लोकतांत्रिक समाज में स्वतंत्र और निष्पक्ष सूचना बेहद आवश्यक होती है। सार्वजनिक प्रसारण का उद्देश्य सरकारी नीतियों, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रीय घटनाओं की संतुलित जानकारी देना होता है।चुनाव, संसद, सरकारी योजनाओं और जनहित संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में सार्वजनिक टीवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।यह मीडिया का वह स्वरूप है जो केवल बाजार आधारित नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी आधारित माना जाता है।
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सांस्कृतिक विरासत और पहचान का संरक्षण
सार्वजनिक प्रसारण ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में भी योगदान दिया है। लोक कला, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, क्षेत्रीय भाषाओं और परंपराओं को टीवी के माध्यम से राष्ट्रीय मंच मिला।दूरदर्शन के क्षेत्रीय चैनलों ने स्थानीय संस्कृति को पहचान दिलाई और भाषाई विविधता को सम्मान दिया।
2026 में सार्वजनिक प्रसारण दिवस का महत्व
2026 में सार्वजनिक प्रसारण दिवस उस समय मनाया जा रहा है जब मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म के बीच विश्वसनीय सूचना की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।यह दिवस हमें याद दिलाता है कि सार्वजनिक प्रसारण केवल एक तकनीकी सेवा नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व है। यह समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनता है और सूचना के लोकतंत्रीकरण का माध्यम है।
भविष्य की दिशा
आने वाले समय में सार्वजनिक प्रसारण को आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवा दर्शकों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक होगा।हाइब्रिड टीवी, ऑन-डिमांड कंटेंट, शैक्षिक डिजिटल चैनल और बहुभाषी प्रसारण जैसी पहलें सार्वजनिक टीवी को भविष्य में भी प्रासंगिक बनाए रख सकती हैं।सार्वजनिक प्रसारण दिवस भारत में टेलीविजन की उस परंपरा को सम्मान देने का अवसर है, जिसने शिक्षा, सूचना और सामाजिक जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाया।
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