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जानें भारतीय महिला हॉकी टीम के खिलाड़ियों के बारे में, साथ ही जाने कैसे शुरुआत की उन्होंने अपने खेल की

जानें भारतीय महिला हॉकी टीम के 5 खिलाड़ियों के बारे में


जैसा की हम सभी लोग जानते है कि अभी हमारे देश में टोक्यो ओलंपिक चल रहा है। और इस टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने देश का नाम गौरवान्वित किया है इस बार भारतीय महिला हॉकी टीम ने सेमीफाइनल में पहुंच कर 4-3 से हार गई। इसके बावजूद हमारी बहादुर बेटियों ने इतिहास रचा दिया है। आपको बता दें कि भारतीय महिला हॉकी टीम ने जिस टीम के इरादों  को पस्त किया है वो पहले तीन बार गोल्ड जीत चुकी है। वैसे भारतीय महिला हॉकी टीम की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ी बहुत मेहनत और बहुत कम सुविधाओं के बावजूद जीत का जज्बा लेकर घर से निकली हैं। इसलिए उनकी यह सफलता हमारे देश में कई लड़कियों को आए बढ़ने के लिए प्रेरणा देगी। तो चलिए विस्तार से जानते है भारतीय महिला हॉकी टीम के खिलाड़ियों के बारे में।

गुरजीत कौर: आपको बता दें कि गुरजीत कौर ही भारतीय महिला हॉकी टीम की वो खिलाड़ी है जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक के दौरान विनिंग गोल किया था। गुरजीत कौर को हॉकी के बारे में तब तक कुछ नहीं पता था जब तक उन्होंने बोर्डिंग स्कूल में कदम नहीं रखा था। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते हुए ही उन्होंने बोर्डिंग स्कूल की हॉकी टीम को खेलते हुए देखना। वहीं से उन्हें हॉकी का खेल पसंद आने लगा था तभी उन्होंने सोचा था कि अब वह इस खेल में महारत हासिल कर के रहेगी।

भारतीय महिला हॉकी टीम

सविता पूनिया: सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर है। सविता पूनिया को लोग द ग्रेट वॉल कहते हैं। आपको बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में सविता पूनिया ने तीन बार वर्ल्ड चैंपियन रही ऑस्ट्रेलिया टीम के 8 पेनाल्टी कॉर्नर बचाकर देश की जीत पक्की कर दी थी। सविता पूनिया हरियाणा के सिरसा स्थित गांव जोधकां की रहने वाली हैं। आपको बता दें कि सविता पूनिया के गांव में भी बेटियों को आसानी से घर से बाहर निकलने या खेलने की आजादी नहीं दी जाती थी।

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दीप ग्रेस एक्का: आपको बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम गौरवान्वित करने वाली दीप ग्रेस एक्का ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के छोटे से गांव लुलकीडीह की रहने वाली हैं। वैसे तो दीप ग्रेस एक्का के घर पर बहुत सारे लोग हॉकी प्लेयर थे, लेकिन जब दीप ग्रेस खुद हॉकी खेलने लगी तो सभी को लगा दीप ग्रेस घर के काम करने की जगह लड़कों वाला खेल क्यों खेलती है। लेकिन दीप ग्रेस ने लोगों की बातों पर ध्यान देने की जगह अपने खेल पर ध्यान दिया।

रानी रामपाल: आपको बता दें कि एक टूटी हुई हॉकी से अपने खेल की शुरुआत करने वाली रानी रामपाल आज टोक्यो ओलंपिक में खेल कर न सिर्फ अपने माता पिता का बल्कि पूरे देश का नाम गौरवान्वित कर रही है आपको बता दें कि रानी रामपाल एक ऐसे परिवार से तालुक रखती है जिसमे उनकी माँ लोगों के घरों में काम करती थी और पिउनके पिता रिक्शा चलाते थे। ऐसे में न तो रानी ने कभी सोचा होगा खेलकूद में भी करियर बन सकती है। लेकिन रानी ने कर के दिखाया।

वंदना कटारिया: आपको बता दें कि वंदना कटारिया के हॉकी खेलने के सपने को उनके पिता के द्वारा ही पुख्ता रूप से सहयोग मिला था। लेकिन क्या आपको पता है इस साल टोक्यो ओलंपिक के शुरू होने के तीन महीने पहले ही वंदना कटारिया ने अपने पिता को खो दिया था। लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि जीवन में इतने बड़े झटके के बाद भी वंदना कटारिया ने अपनी ट्रेनिंग नहीं रोकी। इस मेहनत और बलिदान से ही वंदना कटारिया इस साल टोक्यो ओलंपिक में पहली हॉकी महिला प्लेयर बनी जिसने ऑलंपिक में हैट्रिक बनाई।

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