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Jawaharlal Nehru birth anniversary- भाजपा भले ही 70 सालों मे कुछ नहीं हुआ यह नारा लगाएं, लेकिन नेहरु काल के विकास ने देश को एक गति दी है

Jawaharlal Nehru birth anniversary :-देश के प्रसिद्ध संस्थानो के शिलान्यास से लेकर औद्योगिकरण की शुरुआत जवाहरलाल नेहरु के कार्यकाल के दौरान हुई


Jawaharlal Nehru birth anniversary :-पिछले कुछ दिनों देश की राजनीति में स्वतंत्रता सेननियों के बलिदान को लेकर एक्टर कंगना रन्नौत के विवादित बयान के बाद देश के एक हिस्से में  इसे लेकर गुस्सा है तो वहीं दूसरी ओर एक हिस्सा में इस बयान पर सहमति भी है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है  जब हमारे पूर्वजों को लेकर ऐसी टिप्पणी की गई ह। इसे पहले भी साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक ऐसा माहौल बनाया गया। जिसमें लोगों तक यह बात पहुंचाने की कोशिश की गई कि पिछले 70 सालों में देश में किसी तरह का विकास नहीं हुआ है।

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु और कांग्रेस की सरकार ने किसी तरह का विकास नहीं किया है। पूरा देश में भ्रष्ट्राचार था। जबकि इतिहास को देखा जाए तो कहानी कुछ और ही है।

हमारा देश साल 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ। देश की आजादी के  बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु देश को पहला प्रधानमंत्री और सरदार बल्लभभाई पटेल गृहमंत्री नियुक्त किया गया। आजादी के वक्त देश छोटी-छोटी रियासतों  में बंटा हुआ था। एक कड़ी मेहनत और सुझबुझ से 550 रियासतों को मिलाकर एक भारत बनाया गया। जिसमें कई तरह के बदलाव किए गए और एक सुंदर भारत का निर्माण किया गए। भाजपा भले ही आज यह कहे कि 70 सालों में कुछ नहीं हुआ लेकिन हकीकत इससे इत्तर है।

भारतीय को वोट देने से लेकर कल-कारखानों तक की स्थापना Jawaharlal Nehru के शासनकाल में की गई। पहली पंचवर्षीय योजना के तहत देश में प्रमुख बांधों का निर्माण किया गया ताकि बिजली का निर्माण और सिंचाई की जा सके। दुर्गापुर, राउरकेला, भिलाई में स्टील प्लांट की स्थापना 60 के दशक में की गई ताकि रोजगार के मामले में लोगों सशक्त बनाया जाए।

   जेएनयू के शोधार्थी और नेशनल मूवमेंट फ्रंट स्टूडेंट्स यूनियन राष्ट्रीय संयोजक राजेंद्र यादव का कहना है कि “राष्ट के निर्माण की पहली झलक 14 अगस्त की नेहरू द्वारा  दिये गए भाषण ‘A tryst with destiny’ में ही देखने को मिल जाती है। आजादी प्राप्ति के समय देश की अर्थव्यवस्था बिल्कुल जर्जर अवस्था में थी और धर्म के आधार पर देश का बंटवारा होने के कारण देश में सामाजिक सौहार्द की स्थिति भी अत्यधिक सोचनीय थी साथ ही दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश मे हम ‘लोकतंत्र’ को पहली बार अपना रहे थे, यह बहुत बड़ी चुनौतियां थी।

 वह आगे बताते हैं कि आज भाजपा भले ही उनके विकास कार्यों को नकार रही हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं नेहरु की पुण्यतिथि पर ट्वीट कर लिखा था ‘ आधुनिक भारत के निर्माण के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरु को देश हमेशा याद रखेगा।“  राजेंद्र बताते कि मेरे अनुसार नेहरू ने देश के लोकतंत्र के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया वह था ‘लोकतांत्रिक मूल्यों का संस्थानीकरण’ ! जिसकी नींव पर आज भी हमारे देश का लोकतंत्र कुछ साम्प्रदायिक शक्तियों से चोट खाकर भी वट वृक्ष की तरह मजबूती से खड़ा है। जो  नेहरू की ही देन है।

जबकि हमारे साथ ही आजादी पाए दक्षिण एशिया के देशों में ‘लोकतंत्र’ सत्ताधीशों के सामने हमेशा ही घुटनों के बल बैठा मिलता है। देश आजाद होने के बाद सिर्फ रोजगार पर ही काम नहीं किया गया। ब्लकि शिक्षा के क्षेत्र में देश को विकसित किया गया। देश के अखिल भारतीय संस्थानों की स्थापना जवाहर लाल नेहरु के कार्यकाल में की गई है। आज जैसे में कोरोना से लड़ रहे हैं किसी वक्त हम प्लेग, पोलियो जैसी बीमारियों से लड़ चुके हैं।देश को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए 2 जून 1956 को दिल्ली एम्स का निर्माण किया गया। जो देश का पहला एम्स अस्पताल है। जिसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में एम्स का निर्माण किया गया।

  टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश आगे आए इसके लिए साल 1950 में खड़गपुर आईआईटी का निर्माण किया गया। नेशनल मूवमेंट फ्रंट के मीडिया प्रभारी क्षितिज पांडेय का कहना है कि  भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को लेकर भाजपा या उसके सहयोगी संगठनों का यह रवैय्या नया नहीं है  मौजूदा वक़्त में आप देख सकते हैं कि भारत के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से विभूषित लोग भारतीय स्वाधीनता संघर्ष औऱ उनके नायकों के प्रति उनकी सोच औऱ समझ का स्तर क्या है ।

नेहरू भी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायकों में एक है तथा आधुनिक भारत के प्रमुख शिल्पकार भी है उन्हें महज़ एक परिदृश्य में देखना उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के साथ अन्याय करना होगा। आजादी के बाद देश में कई तरह के विकास हुए हैं जिन्हें नकार नहीं जा सकता है।

क्षितिज आगे बताते हैं कि आजादी के बाद देश ग़रीब राष्ट्रों की श्रेणियों में शामिल किया जाता था। 1900-47 तक भारत की विकास दर लगभग शून्य के इर्दगिर्द ही थी।  प्रथम पंचवर्षीय योजना के क्रियान्वयन के उपरांत भारत की विकास दर तक़रीबन 4% के आसपास हो गई। जहां एक ओर नेहरू भारत में बड़े कारखाने औऱ बांधों का निर्माण कर रहे थे तो दूसरी ओर आईआईटी, एम्स औऱ साहित्य व ललित कला अकादमियों की शिलाएं भी रख रहे थे।

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नेहरू ना सिर्फ़ आधौगिक विकास तक सीमित रहे बल्कि उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक विकास की भी आधारशिला रखी आज हम विश्व मंचों पर से भारत के बहुलतावादी लोकतंत्र का गौरवगान करते है यदि नेहरू ना होते तो शायद यह असंभव था।

यूरोपीय उपनिवेशवाद के पंजों से तक़रीबन सौ देश आज़ाद हुए थे दुनिया दो महाशक्तियों में बंटी हुई थी अमेरिका औऱ रूस दोनों की ही कोशिश इन नवोदित राष्ट्रों को अपने पाले में लाने की थी मगर नेहरू ने गुट-निरपेक्षता के सिद्धान्त को आगे बढ़ाया जबकि दूसरी ओर विस्तारवादी चीन के साथ समझौता कर पंचशील सिद्धांत प्रतिपादित किए जिसमें एक दूसरे की अखंडता के प्रति सम्मान का भाव, समानता औऱ शांति की भावना का विकास करना। नेहरू के लिए नए बने भारतीय राष्ट्र-राज्य में भीतर से चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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