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Indian Air Force Day: जाने कौन है भारतीय वायु सेना की पहली महिला फ्लाइट कमांडर, जाने इनके बारे में विस्तार से

Indian Air Force Day: शालिजा धामी बनी भारत की पहली महिला फ्लाइट कमांडर


Indian Air Force Day: 21वीं सदी में होने के बाद आज भी हमारे देश में महिलाओं को कही न कही पुरुषों की तुलना में कम ही आका जाता है। जैसा की हम सभी लोग जानते है कि हमारा देश एक पुरुष प्रधान देश है। हमारे देश में महिलाओं को सिर्फ घर की चार दीवारों  में काम करने और बच्चों को सभालने और उनकी देख भाल के लिए ही समझा जाता है लेकिन आज समय बदल चूका है आज के समय पर महिलाएं पुरुषों से कदम से कदम मिला कर चल रही है। तो चलिए आज हम आपको देश की एक ऐसी बेटी के बारे में बताने जा रहे है जिन्होंने साबित कर दिखाया कि महिलाएं जमीं  से लेकर आसमान तक किसी का भी मुकाबला कर सकती है। जी हां, हम बात कर रहे है देश की पहली महिला वायुसेना अधिकारी शालिजा धामी की। शालिजा धामी को महिलाओं के नाम पर गौरव दिलाने का श्रेय जाता है। शालिजा धामी हमारे देश की पहली फ्लाइट कमांडकर बनी हैं। लेकिन क्या आप शालिजा धामी के बारे में इससे ज्यादा जानते है कि वो कौन है कहां की रहने वाली हैं और कितनी बहादुर हैं?  अगर नहीं तो कोई बात नहीं, आज भारतीय वायु सेना दिवस के मौके पर हम आपको उनके बारे में विस्तार से बताते  है।

शालिजा धामी

जाने कौन है शालिजा धामी?

विंग कमांडर शालिजा धामी भारतीय वायु सेना की पहली महिला अधिकारी है जो की फ्लाइट कमांडकर बनी हैं। आपको बता दें कि विंग कमांडर शालिजा धामी पिछले 17 सालों से भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन कर देश की सेवा कर रही हैं। अब उन्हें  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर चेतक हेलीकॉप्टर यूनिट में फ्लाइट कमांडर का पद संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

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आपको बता दें कि शालिजा धामी अपने 17 साल के करियर में चेतक और चीता हेलीकॉप्टर्स उड़ाती रही हैं। जिसके कारण उनके नाम कई रिकॉर्ड्स दर्ज हैं। इतना ही नहीं शालिजा धामी चेतक और चीता हेलीकॉप्टर्स के लिए भारतीय वायु सेना की पहली महिला योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बनी। साथ ही आपको बता दें शालिजा धामी वायुसेना की पहली महिला अधिकारी है। जिन्हे उनके लंबे कार्यकाल के लिए फ्लाइंग ब्रांच में स्थाई कमीशन दिया जाएगा। आपको बता दें कि शालिजा धामी को 2300 घंटे तक उड़ान भरने का अनुभव है।

Indian Air Force Day

बचपन से ही पायलट बनना चाहती थीं शालिजा धामी

आपको बता दें कि शालिजा धामी पंजाब के लुधियाना की रहने वाली हैं। वही से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। अभी शालिजा धामी का एक बेटा है जिसकी उम्र करीबन 11-12 साल है। शालिजा धामी बताती है कि वह बचपन से ही पायलट बनना चाहती थीं और उन्होंने अपना यह सपना पूरा भी किया।  बता दें कि शालिजा को जिस हेलीकॉप्टर को उड़ाने की जिम्मेदारी दी गई है वह एक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर है। जिसमे 6 पैसेंजर बैठ सकते हैं और इसकी अधिकतम स्पीड 220 किमी प्रति घंटा है।

आपको बता दें कि पहली बार भारतीय वायुसेना में महिलाओं को साल 1994 में शामिल किया गया था। लेकिन उस समय पर महिलाओं को सिर्फ नॉन कॉम्बैट रोल दिया जाता था। लेकिन उसके बाद समय के साथ महिलाओं ने अपने अधिकार के लिए संघर्ष किया और कॉम्बैट रोल हासिल किए।  दिल्ली हाईकोर्ट में चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भारतीय वायु सेना में महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष स्थाई कमीशन पाने का अधिकार मिला है।

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