Voter list: वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का रास्ता रहेगा खुला, SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान
Voter list, देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची को हमेशा के लिए फ्रीज कर दिया जाएगा।
Voter list : मतदाता सूची को लेकर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, SIR खत्म होने का मतलब सब कुछ खत्म नहीं
Voter list, देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता सूची को हमेशा के लिए फ्रीज कर दिया जाएगा। इसका अर्थ यह भी नहीं है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद नए मतदाताओं के नाम जोड़ने या मतदाता सूची में जरूरी बदलाव करने का रास्ता बंद हो जाएगा। चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की भूमिका को देखते हुए अदालत की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि SIR के बाद भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने और अन्य जरूरी संशोधनों के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी यह सफाई?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश, केरल और छत्तीसगढ़ में SIR की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। इस दौरान अदालत के सामने यह सवाल उठा कि अगर SIR की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो क्या इसके बाद मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने की संभावना खत्म हो जाएगी?इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है। SIR पूरा होने के बाद भी पात्र मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए SIR की समयसीमा समाप्त होने को नए मतदाताओं के पंजीकरण पर पूर्ण रोक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
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चुनाव आयोग ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि किसी भी पात्र व्यक्ति के पास मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने का विकल्प रहता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया संभव है।इसका मतलब है कि SIR के तहत तैयार की गई अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी योग्य नागरिकों के लिए नाम जुड़वाने का कानूनी रास्ता बंद नहीं होता। हालांकि, इसके लिए संबंधित चुनावी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।अदालत के सामने यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि कई जगहों पर SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए थे। ऐसे में यह चिंता जताई जा रही थी कि कहीं प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे लोग अपने मताधिकार से वंचित न रह जाएं।
दिल्ली में 43 लाख से ज्यादा मतदाताओं का मामला
SIR को लेकर दिल्ली में भी मामला काफी चर्चा में रहा है। यहां ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 47.6 लाख नाम शामिल नहीं हो पाए थे। इनमें से लगभग 43 लाख मतदाताओं को स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने या अनुपस्थित होने की श्रेणी में रखा गया था।इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर को चुनाव आयोग से सवाल किया था कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में मौजूद थे, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए नए मतदाता वाला फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है?अदालत ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति पहले से मतदाता है और उसका नाम केवल SIR के दौरान गणना फॉर्म जमा नहीं कर पाने के कारण ड्राफ्ट सूची में नहीं आया, तो उसे पहली बार मतदाता बनने की घोषणा करने के लिए क्यों मजबूर किया जाना चाहिए?अदालत ने सुझाव दिया था कि ऐसे लोगों को उनकी स्थिति के अनुसार उचित प्रक्रिया उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही चुनाव आयोग से कहा गया कि वह प्रभावित मतदाताओं तक खुद पहुंचने और उन्हें जरूरी जानकारी देने का तरीका अपनाए।
फॉर्म-6 और फॉर्म-8 को लेकर क्या है विवाद?
इस पूरे मामले में फॉर्म-6 और फॉर्म-8 की भूमिका भी अहम है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मुख्य रूप से नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है। वहीं, फॉर्म-8 का इस्तेमाल पहले से पंजीकृत मतदाताओं के विवरण में बदलाव, पते में परिवर्तन और अन्य निर्धारित संशोधनों के लिए किया जाता है।सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में थे, लेकिन SIR के दौरान किसी वजह से हट गए, उनके लिए दोबारा नाम शामिल कराने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए। खासकर ऐसे लोग जो कुछ समय के लिए अपने पते पर मौजूद नहीं थे या जिन्हें गणना फॉर्म नहीं मिल पाया था।अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की जा सकती है, जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। इससे संबंधित लोग अपने बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO से संपर्क कर सकेंगे और जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन कर पाएंगे।
छह राज्यों में बढ़ाई गई SIR की समयसीमा
इसी बीच चुनाव आयोग ने 29 अक्टूबर को दिल्ली समेत छह राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया। इन राज्यों में दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और नागालैंड शामिल हैं।इस फैसले के तहत दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी गई है। वहीं, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची अब 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।महाराष्ट्र में भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए 13 नवंबर तक का समय दिया गया है। बाकी राज्यों में भी संबंधित प्रक्रियाओं की समयसीमा में बदलाव किया गया है। इस फैसले से उन लोगों को अतिरिक्त समय मिलेगा, जो अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने या किसी विवरण में सुधार कराने के लिए आवेदन करना चाहते हैं।
मतदाताओं के लिए क्या है इसका मतलब?
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि SIR केवल मतदाता सूची की जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसे मतदाता पंजीकरण पर हमेशा के लिए रोक लगाने वाली व्यवस्था नहीं माना जा सकता। अगर कोई नागरिक मतदान के लिए पात्र है और उसका नाम किसी कारण से सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह निर्धारित नियमों के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है।हालांकि, मतदाताओं को यह समझना जरूरी है कि नाम जोड़ने का आवेदन करना और नाम का अंतिम रूप से मतदाता सूची में शामिल होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। आवेदन के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाती है।कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य संदेश यही है कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी मतदाता सूची में बदलाव की गुंजाइश बनी रहती है। किसी पात्र नागरिक को केवल इस आधार पर मताधिकार से वंचित नहीं माना जा सकता कि वह SIR के दौरान अपना नाम सूची में शामिल नहीं करा पाया। अब इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से अपनाए जाने वाले कदम और प्रभावित मतदाताओं के लिए आसान प्रक्रिया तैयार करना महत्वपूर्ण होगा।
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