Rahul Gandhi: राहुल गांधी की महारैली से कारोबार पर पड़ेगा असर? व्यापारियों ने नेताओं से की तारीख बदलने की अपील
Rahul Gandhi, दिल्ली में दिवाली से पहले होने वाली राजनीतिक गतिविधियों के बीच व्यापारियों ने INDIA गठबंधन की प्रस्तावित महारैली को स्थगित करने की मांग उठाई है।
Rahul Gandhi : दिल्ली के व्यापारियों की INDIA गठबंधन से अपील, दिवाली के बाद कराएं राहुल गांधी की महारैली
सोनिया गांधी को CTI ने लिखा पत्र
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने 30 अक्टूबर को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर प्रस्तावित रैली को स्थगित करने की मांग की। संगठन ने कहा कि दिल्ली के लगभग 20 प्रमुख बाजारों में रैली के कारण कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। CTI के मुताबिक, इससे करीब 10 हजार करोड़ से 12 हजार करोड़ रुपये तक का व्यापार प्रभावित हो सकता है। संगठन ने सोनिया गांधी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और कांग्रेस नेतृत्व तक व्यापारियों की चिंताएं पहुंचाने का अनुरोध किया है।व्यापारी संगठन का कहना है कि दिल्ली में दिवाली का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी, बर्तन, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स और अन्य सामान की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि बाजारों के आसपास यातायात प्रतिबंध लगाए जाते हैं या सड़कों पर भीड़ बढ़ती है, तो ग्राहकों के लिए बाजार पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से भी लगाई गुहार
सोनिया गांधी के अलावा फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन और किराना कमेटी दिल्ली ने भी INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं से संपर्क किया है। इन संगठनों ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन ने अखिलेश यादव से अपील की है कि वे कांग्रेस नेतृत्व के सामने व्यापारियों की परेशानियों को रखें। वहीं, किराना कमेटी दिल्ली ने अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से आग्रह किया है कि वे गठबंधन के नेताओं से बातचीत कर 1 नवंबर के कार्यक्रम को 10 नवंबर के बाद आयोजित कराने का प्रयास करें।व्यापारियों के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार मौजूद हैं। इनमें सदर बाजार, चांदनी चौक, खारी बावली और चावड़ी बाजार जैसे बड़े कारोबारी इलाके शामिल हैं। इन बाजारों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक, दुकानदार और दूसरे शहरों से आने वाले थोक खरीदार पहुंचते हैं।
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25 हजार करोड़ रुपये के कारोबार का दिया हवाला
व्यापारी संगठनों ने अपने पत्रों में दिल्ली के त्योहारी कारोबार का हवाला देते हुए कहा है कि धनतेरस से दिवाली के बीच राजधानी में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली 8 नवंबर को है, जबकि भाई दूज 10 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में 1 नवंबर की रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन का दावा है कि सितंबर और अक्टूबर के दौरान अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों, रैलियों और यातायात प्रतिबंधों के कारण व्यापारियों को लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। संगठन ने आशंका जताई है कि अगर दिवाली की खरीदारी के चरम समय में एक और बड़ी रैली होती है, तो कारोबार को 10 हजार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। हालांकि, ये आंकड़े व्यापारी संगठनों के अनुमान हैं, किसी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नुकसान का आंकड़ा नहीं।
ट्रैफिक और बाजारों तक पहुंच को लेकर चिंता
व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक जाम लग सकता है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग, सड़क डायवर्जन और आवाजाही पर पाबंदियां भी लगाई जा सकती हैं। इसका असर सिर्फ दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि सामान पहुंचाने वाले कर्मचारियों, डिलीवरी कर्मियों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है।संगठनों ने यह भी कहा है कि त्योहारों के दौरान कारोबार में होने वाली बिक्री से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी होती है। ऐसे में कुछ दिनों की बाधा भी व्यापारियों के लिए नुकसान का कारण बन सकती है। उनका तर्क है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख बदली जा सकती है, लेकिन त्योहारों के दौरान छूटे हुए कारोबार की भरपाई करना आसान नहीं है।
कांग्रेस नेतृत्व क्या फैसला लेगा?
इससे पहले CTI ने राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर 1 नवंबर की रैली को टालने की अपील की थी। व्यापारियों ने साफ किया है कि उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किए जाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन त्योहारों के व्यस्त कारोबारी समय में बड़े आयोजन से बचने की जरूरत है।वहीं, INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली का उद्देश्य SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है। ऐसे में गठबंधन के सामने राजनीतिक कार्यक्रम और व्यापारियों की मांग के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।फिलहाल 30 अक्टूबर तक सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, रैली को स्थगित करने का कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं हुआ है। ऐसे में अब सबकी नजर कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेतृत्व पर है कि व्यापारियों की अपील पर क्या निर्णय लिया जाता है और 1 नवंबर को प्रस्तावित महारैली तय कार्यक्रम के अनुसार होगी या इसकी तारीख आगे बढ़ाई जाएगी।
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