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Kerala Governor: लोकभवन में खाने को लेकर नया आदेश, सिर्फ शाकाहारी भोजन बनाने के फैसले पर सवाल

Kerala Governor, केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालते ही लोकभवन की रसोई में खाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। राज्यपाल की ओर से लोकभवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने का निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है। इस फैसले के बाद कांग्रेस और CPI(M)

Kerala Governor : क्या लोकभवन की रसोई में नहीं बनेगा मांसाहारी खाना? राज्यपाल के आदेश पर विवाद

Kerala Governor, केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालते ही लोकभवन की रसोई में खाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। राज्यपाल की ओर से लोकभवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने का निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है। इस फैसले के बाद कांग्रेस और CPI(M) के नेताओं ने सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति की खान-पान संबंधी पसंद उसकी निजी स्वतंत्रता है और इसे दूसरों पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश राज्यपाल और उनके लिए भोजन तैयार करने वाली रसोई से संबंधित है, न कि लोकभवन के सभी कर्मचारियों की खान-पान की पसंद से।

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राज्यपाल के आदेश को लेकर क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओम प्रकाश माथुर ने केरलम के राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के दौरान लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन तैयार नहीं करने का निर्देश दिया। इस निर्देश के तहत रसोई में मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थ नहीं बनाने की बात सामने आई। माथुर ने 23 अक्टूबर 2026 को केरलम के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।माथुर ने राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की जगह राज्यपाल का पद संभाला है। आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नए राज्यपाल के पदभार ग्रहण करने के साथ ही लोकभवन की रसोई में भोजन तैयार करने की व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई।हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि भोजन संबंधी निर्देश का उद्देश्य राज्यपाल की व्यक्तिगत खान-पान की पसंद के अनुरूप भोजन तैयार करना है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस निर्देश की व्यापकता को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। इसलिए इसे लोकभवन में सभी लोगों के लिए मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

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राज्यपाल कार्यालय ने क्या सफाई दी?

विवाद बढ़ने के बाद राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि ओम प्रकाश माथुर शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं। इसी वजह से उनके लिए भोजन तैयार करने वाली रसोई में मांसाहारी खाना नहीं बनाने का निर्देश दिया गया है।सूत्रों के अनुसार, लोकभवन की संबंधित रसोई में तैयार भोजन राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को परोसा जाता है। अन्य कर्मचारी अपने घर से खाना ला सकते हैं या बाहर भोजन कर सकते हैं। उनके खान-पान पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।लोकभवन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि कर्मचारियों के लिए अलग रसोई की व्यवस्था है, जहां वे अपनी पसंद के अनुसार खाना तैयार कर सकते हैं। इस सफाई के बाद विवाद का एक अहम पहलू यह बन गया है कि क्या यह व्यवस्था केवल राज्यपाल के निजी भोजन तक सीमित है या इसका असर आधिकारिक कार्यक्रमों और मेहमानों को परोसे जाने वाले भोजन पर भी पड़ता है।कुछ मीडिया रिपोर्टों में मेहमानों को परोसे जाने वाले भोजन को लेकर भी शाकाहारी व्यवस्था की चर्चा की गई है। हालांकि, निर्देश के दायरे को लेकर सामने आई अलग-अलग जानकारियों के बीच आधिकारिक स्थिति को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है।

कांग्रेस ने उठाए खान-पान की स्वतंत्रता पर सवाल

कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने राज्यपाल के इस कथित निर्देश की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केरलम की संस्कृति में खान-पान की विविधता महत्वपूर्ण है और लोगों को अपनी पसंद का भोजन चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।वेणुगोपाल के मुताबिक, राज्यपाल को शाकाहारी भोजन पसंद है तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। लेकिन उनकी आलोचना इस बात को लेकर है कि यदि इसी पसंद के आधार पर दूसरों के भोजन पर भी पाबंदी लगाई जाती है, तो यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा बन सकता है।उन्होंने इस कदम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े वैचारिक एजेंडे से जोड़ते हुए आरोप लगाए। यह वेणुगोपाल का राजनीतिक आरोप है, न कि इस विवाद से संबंधित कोई स्थापित तथ्य।कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि केरलम जैसे तटीय राज्य में मछली और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थ लोगों के भोजन का हिस्सा हैं। ऐसे में खान-पान की पसंद से जुड़े किसी भी फैसले पर राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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CPI(M) ने भी जताई आपत्ति

इस मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPI(M) के नेताओं ने भी आपत्ति जताई है। पार्टी के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने खान-पान को व्यक्तिगत पसंद का विषय बताया। उनका कहना था कि राज्यपाल अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी भोजन कर सकते हैं, लेकिन यह पसंद दूसरों पर लागू नहीं होनी चाहिए।केरलम के गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार है कि वह क्या खाए और किस तरह का जीवन जिए। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत खान-पान की पसंद का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी की पसंद के आधार पर दूसरे व्यक्ति की पसंद तय नहीं की जानी चाहिए।इस तरह राज्यपाल के निर्देश को लेकर राजनीतिक बहस केवल रसोई की व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, प्रशासनिक अधिकार और राज्य की सांस्कृतिक विविधता जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।

केरलम की खान-पान संस्कृति क्यों बनी विवाद की वजह?

केरलम अपनी विविध खाद्य परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों में शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों तरह के भोजन का प्रचलन है। तटीय क्षेत्र होने के कारण मछली भी यहां के भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।हालांकि, किसी सरकारी आवास में भोजन तैयार करने की व्यवस्था तय करना और राज्य के नागरिकों की खान-पान की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना दो अलग-अलग बातें हैं। मौजूदा विवाद में भी यही अंतर महत्वपूर्ण है। राज्यपाल कार्यालय का कहना है कि निर्देश उनकी निजी भोजन व्यवस्था से जुड़ा है, जबकि आलोचकों को आशंका है कि इस तरह का फैसला व्यापक संदेश दे सकता है।इस मामले में यह देखना भी जरूरी है कि लोकभवन की रसोई में भोजन किन लोगों के लिए तैयार होता है और निर्देश किन परिस्थितियों में लागू किया गया है।

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आगे क्या होगा?

फिलहाल लोकभवन की रसोई में शाकाहारी भोजन तैयार करने के कथित निर्देश को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस और CPI(M) के नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि राज्यपाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने इसे राज्यपाल की व्यक्तिगत खान-पान की पसंद से जुड़ा बताया है।अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात निर्देश के वास्तविक दायरे को लेकर स्पष्टता है। क्या यह केवल राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोई तक सीमित है, या आधिकारिक मेहमानों को परोसे जाने वाले भोजन पर भी लागू होता है? इस सवाल पर स्थिति स्पष्ट होने से विवाद को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि ओम प्रकाश माथुर के शाकाहारी भोजन से जुड़े कथित निर्देश ने केरलम में राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। इस मामले में राज्यपाल कार्यालय की सफाई और विपक्षी नेताओं की आपत्तियां दोनों सामने हैं। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देश के दायरे और उसके क्रियान्वयन को लेकर कितनी स्पष्ट जानकारी सामने आती है।

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