JEE Main Topper 2026: ओडिशा का बेटा बना देश का नंबर 1! चिरंजीब कर को JEE Main 2026 में 100 पर्सेंटाइल
JEE Main Topper 2026, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 16 फरवरी 2026 को जेईई मेन सेशन-1 (BE/BTech) परीक्षा का परिणाम जारी किया।
JEE Main Topper 2026 : कड़ी मेहनत लाई रंग, चिरंजीब कर ने JEE Main 2026 में मारी बाजी
JEE Main Topper 2026, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 16 फरवरी 2026 को जेईई मेन सेशन-1 (BE/BTech) परीक्षा का परिणाम जारी किया। यह परीक्षा 21 जनवरी से 28 जनवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थी। इस वर्ष परीक्षा के लिए कुल 13,55,293 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 13,04,653 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। परिणामों में 12 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल कर देशभर में टॉप रैंक प्राप्त की। इन टॉपर्स में ओडिशा के प्रतिभाशाली छात्र चिरंजीब कर भी शामिल हैं, जिन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासित तैयारी के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। आइए, उनकी प्रेरणादायक यात्रा को विस्तार से जानते हैं।
100 पर्सेंटाइल के साथ देशभर में टॉप
जेईई मेन 2026 सेशन-1 में चिरंजीब कर ने परफेक्ट 100 पर्सेंटाइल स्कोर कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। यह उपलब्धि उनके वर्षों के समर्पण और लगातार अभ्यास का परिणाम है। चिरंजीब पिछले दो वर्षों से राजस्थान के कोटा में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने शानदार परिणाम की जानकारी सबसे पहले उनकी मां ने फोन पर दी, जिसके बाद पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।दिलचस्प बात यह है कि चिरंजीब ने 12वीं बोर्ड परीक्षा और जेईई मेन दोनों की तैयारी एक साथ की। उन्होंने समय प्रबंधन और लक्ष्य पर स्पष्ट फोकस के कारण दोनों परीक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखा और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कौन हैं चिरंजीब कर?
चिरंजीब कर मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले हैं और वर्तमान में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। बेहतर तैयारी के लिए वे अपनी मां और भाई के साथ कोटा में रहते हैं। उनके पिता चित्तरंजन कर टाटा स्टील प्लांट में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां बनकेतकी कर गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाले चिरंजीब ने अपनी मेहनत और अनुशासन से यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधन भी बड़ी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। परिवार का सहयोग और पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण ही उनकी सफलता का मजबूत आधार बना। चिरंजीब ने हमेशा अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी और सोशल मीडिया जैसी चीजों से दूरी बनाकर पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया।
तैयारी की खास रणनीति
चिरंजीब कर की सफलता के पीछे एक सुनियोजित और व्यावहारिक तैयारी रणनीति रही। वे किसी भी टॉपिक को एक बार पढ़कर छोड़ने के बजाय बार-बार अभ्यास करते थे, जिससे कॉन्सेप्ट पूरी तरह स्पष्ट हो जाते थे। कठिन विषयों को समझने के लिए वे अपने शिक्षकों से नियमित चर्चा करते थे।
उनकी तैयारी के तीन मुख्य स्तंभ थे—
- नियमित रिवीजन
- मॉक टेस्ट का विश्लेषण
- कमजोर टॉपिक्स पर विशेष ध्यान
वे प्रत्येक मॉक टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करते और उसी आधार पर अगली तैयारी की रणनीति तय करते थे। इससे उनकी कमजोरियां धीरे-धीरे खत्म होती गईं और प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।
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संतुलित दिनचर्या और तनाव-मुक्त पढ़ाई
चिरंजीब का मानना है कि लंबे समय तक प्रभावी पढ़ाई के लिए मानसिक संतुलन बेहद जरूरी है। वे पढ़ाई को तनाव के रूप में नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया के रूप में लेते थे। पढ़ाई के बीच-बीच में वे लगभग 30 मिनट का ब्रेक लेकर खेलते या हल्की गतिविधि करते थे, जिससे दिमाग तरोताजा रहता था।उनकी यह संतुलित दिनचर्या उन्हें मानसिक रूप से फिट रखने में मदद करती थी और पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर होती थी। यही कारण है कि वे लंबे समय तक फोकस बनाए रख सके।
सोशल मीडिया से दूरी का फायदा
आज के समय में सोशल मीडिया छात्रों के लिए सबसे बड़ा ध्यान भंग करने वाला माध्यम बन गया है। चिरंजीब ने तैयारी के दौरान इससे दूरी बनाए रखी। उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए डिजिटल विचलनों से खुद को दूर रखा। उनका मानना है कि तैयारी के महत्वपूर्ण वर्षों में समय का सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उन्होंने वही समय अभ्यास, रिवीजन और टेस्ट विश्लेषण में लगाया, जिसका सीधा लाभ उनके परिणाम में दिखाई दिया।
भविष्य का सपना: IIT और देश के लिए योगदान
चिरंजीब कर का लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना है। वे तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर भविष्य में देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। हालांकि जेईई मेन में शानदार सफलता मिल चुकी है, लेकिन फिलहाल उनका पूरा ध्यान 12वीं बोर्ड परीक्षा और जेईई एडवांस की तैयारी पर है। उनका मानना है कि अभी असली चुनौती बाकी है और उन्हें अपनी मेहनत जारी रखनी है।
सफलता से मिलती सीख
चिरंजीब कर की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी यात्रा से कुछ महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं—
- स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर मेहनत सफलता दिलाती है
- नियमित अभ्यास और रिवीजन अनिवार्य है
- मॉक टेस्ट का विश्लेषण प्रदर्शन सुधारता है
- मानसिक संतुलन और ब्रेक भी उतने ही जरूरी हैं
- सोशल मीडिया से दूरी फोकस बढ़ाती है
जेईई मेन 2026 में 100 पर्सेंटाइल हासिल कर चिरंजीब कर ने न केवल अपने परिवार और राज्य ओडिशा का नाम रोशन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि दृढ़ निश्चय, अनुशासन और सही रणनीति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता कहानी आने वाले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मार्गदर्शक बनेगी।
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