भारत

Hydrogen Train Update: कालका-शिमला से दार्जिलिंग तक दौड़ेंगी हाइड्रोजन ट्रेनें, रेलवे ने बताया पूरा प्लान

Hydrogen Train Update, भारतीय रेलवे हरित (Green) और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है।

Hydrogen Train Update : ग्रीन रेलवे की ओर बड़ा कदम, 35 हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए चुने गए हेरिटेज और हिल रूट्स

Hydrogen Train Update, भारतीय रेलवे हरित (Green) और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। हरियाणा में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब रेलवे ने देशभर के हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को चलाने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य डीजल इंजनों की जगह स्वच्छ ऊर्जा आधारित ट्रेनों को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। हाल ही में रेलवे मंत्रालय ने इस योजना की रूपरेखा साझा की है, जिसमें कई प्रसिद्ध पर्यटन और विरासत रेल मार्ग शामिल हैं।

images?q=tbn:ANd9GcSI9EIxmnvGcAjxgg078vOR TTXRtQDxz iOuEcj0WWNA&s=10

हरियाणा से हुई शुरुआत

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद–सोनीपत रेल मार्ग पर शुरू की जा रही है। यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, जो डीजल के बजाय हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) उत्सर्जित होती है।

अब 35 नए रूट होंगे शामिल

रेलवे की योजना के अनुसार अगले चरण में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें उन मार्गों पर चलाई जाएंगी जहां अभी भी डीजल इंजन का उपयोग होता है और जिनका पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व है।

संभावित प्रमुख रूट इस प्रकार हैं—

  • कालका–शिमला हेरिटेज रेल मार्ग (हिमाचल प्रदेश)
  • दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (पश्चिम बंगाल)
  • नीलगिरि माउंटेन रेलवे (तमिलनाडु)
  • माथेरान हिल रेलवे (महाराष्ट्र)
  • कांगड़ा वैली रेलवे (हिमाचल प्रदेश)
  • अन्य चुनिंदा हेरिटेज और पर्वतीय रेल सेक्शन

रेलवे का लक्ष्य इन रूटों को धीरे-धीरे डीजल मुक्त बनाना है।

क्यों चुने गए हेरिटेज और पर्वतीय रूट?

हेरिटेज और पहाड़ी रेल मार्गों पर ट्रेनों की गति अपेक्षाकृत कम होती है और इन क्षेत्रों में डीजल इंजनों से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण पर अधिक प्रभाव डालता है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेनें इन मार्गों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जा रही हैं।इसके अलावा इन रूटों पर हर साल लाखों पर्यटक यात्रा करते हैं। ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने से पर्यटन को भी नया आकर्षण मिलेगा।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत?

हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है। इसमें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनाई जाती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं—

  • डीजल की आवश्यकता नहीं।
  • कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य।
  • केवल जलवाष्प का उत्सर्जन।
  • कम ध्वनि प्रदूषण।
  • पर्यावरण के अनुकूल संचालन।
  • ईंधन दक्षता में सुधार।

इसी वजह से दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन ट्रेनों का उपयोग बढ़ रहा है और भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रेलवे का ग्रीन मिशन

भारतीय रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपने नेटवर्क को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। रेलवे पहले से ही अधिकांश प्रमुख मार्गों का विद्युतीकरण कर चुका है। अब जिन मार्गों पर विद्युतीकरण व्यावहारिक नहीं है या जहां विशेष परिस्थितियां हैं, वहां हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें एक बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं।

Read More: ICC Rankings: श्रेयस अय्यर की लंबी छलांग, नई T20 बल्लेबाजी रैंकिंग में किसे हुआ फायदा और किसे नुकसान?

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

कालका-शिमला, दार्जिलिंग और नीलगिरि जैसे रेल मार्ग यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।यदि इन रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें शुरू होती हैं तो यात्रियों को आधुनिक, शांत और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का अनुभव मिलेगा। इससे भारत की ग्रीन टूरिज्म छवि को भी मजबूती मिलेगी।

हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम

रेलवे केवल ट्रेनें ही नहीं, बल्कि हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग स्टेशन विकसित करने पर भी काम कर रहा है। हरियाणा के जींद में इसके लिए विशेष हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। भविष्य में अन्य राज्यों में भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।

Read More: India first hydrogen train: पानी से ट्रेन चलाने का सपना हुआ सच! जानिए हाइड्रोजन ट्रेन के पीछे की साइंस

कब शुरू होंगी नई ट्रेनें?

रेलवे के अनुसार पहले चरण में हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट पर संचालन के अनुभव का आकलन किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। सभी 35 ट्रेनों के संचालन की समय-सीमा अलग-अलग परियोजनाओं की प्रगति के अनुसार तय की जाएगी।भारतीय रेलवे का 35 हाइड्रोजन ट्रेनों का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट देश के रेल नेटवर्क को हरित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट से शुरुआत होने के बाद कालका-शिमला, दार्जिलिंग, नीलगिरि और अन्य हेरिटेज तथा पर्वतीय रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की तैयारी है। यदि यह योजना सफल होती है तो भारत स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते  हैं info@oneworldnews.com.

Back to top button